बैंक कर्मचारियों को धरने के लिए वैकल्पिक जगह दे दिल्ली पुलिस: हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया है कि वह बैंक कर्मचारी यूनियन के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए सोमवार तक किसी अन्य स्थान का आवंटन करे।

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि वह अगले सप्ताह शांतिपूर्ण धरने के लिए यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस दिल्ली स्टेट को कोई वैकल्पिक जगह आवंटित करे। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे यूनियन के अनुरोध पर विचार करें और आगामी सोमवार तक अपना फैसला याचिकाकर्ता को सूचित करें।
जस्टिस अमित महाजन की पीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अधिकारियों की ओर से पेश वकील प्रीतिश सभरवाल ने कहा कि जंतर-मंतर पर इस विरोध प्रदर्शन की अनुमति देने से कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है।
इस पर अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रशासन को प्रदर्शनकारियों को कोई स्थान उपलब्ध कराना चाहिए। पीठ ने कहा कि यदि वे किसी अन्य स्थान की मांग कर रहे हैं, तो उन्हें इसके लिए बार-बार अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए विवश नहीं किया जाना चाहिए। इसके बाद अदालत ने अधिकारियों को वैकल्पिक जगह के आग्रह पर विचार करने का औपचारिक आदेश दिया।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस दिल्ली स्टेट ने अपनी याचिका में केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से 28 से 30 सितंबर तक जंतर-मंतर या राजधानी के किसी अन्य स्थान पर शांतिपूर्ण धरना आयोजित करने की अनुमति मांगी थी। संगठन का कहना है कि वह बैंकिंग उद्योग में कार्यरत अधिकांश कर्मचारियों और अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करने वाला शीर्ष मंच है।
याचिका में आरोप लगाया गया कि अधिकारियों ने इससे पहले 11 और 18 सितंबर को होने वाले धरने की अनुमति भी ऐन वक्त पर मनमाने ढंग से खारिज कर दी थी। यूनियन का दावा था कि इस कार्यक्रम को विफल करने के लिए ऐसा किया गया और इसके बाद दिए गए नए प्रतिवेदन पर भी कोई जवाब नहीं दिया जा रहा था।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने 28 से 30 सितंबर के दौरान राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल की भी घोषणा की है। संगठन अपनी कई लंबित मांगों को लेकर आंदोलन कर रहा है, जिनमें बैंकों में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करना प्रमुख है।
इसके अलावा यूनियन पेंशन को अपडेट और बेहतर बनाने, सभी पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते का एक समान फॉर्मूला लागू करने और राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के तहत आने वाले कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना में लौटने का विकल्प देने की मांग कर रही है।
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