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अशोक विहार : थप्पड़ खाने के बाद भी नहीं सुधरे अनिल गुप्ता 'घी वाले' ! अब ब्लैकमेलिंग पर उतरे ; क्या नए प्रधान पवन अग्रवाल भी आ गए दबाव में ?

-अशोक विहार रामलीला के मंच पर " पप्पी और झप्पी 'पप्पी' से हुआ चर्चाओं का बाजार गर्म -अपनी गड़बड़ियां छुपाने के लिए थाने तक पहुंचे मामला, पुलिस की एंट्री से हड़कंप

Rajender Swami
Rajender SwamiDelhi Darpan
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24 सितंबर 2026 · 7:56 am160 व्यूज़अपडेटेड 7:58 amwazirpur,Delhi
अशोक विहार : थप्पड़ खाने के बाद भी नहीं सुधरे अनिल गुप्ता 'घी वाले'! अब ब्लैकमेलिंग पर उतरे; क्या नए प्रधान पवन अग्रवाल भी आ गए दबाव में ?
अशोक विहार : थप्पड़ खाने के बाद भी नहीं सुधरे अनिल गुप्ता 'घी वाले'! अब ब्लैकमेलिंग पर उतरे; क्या नए प्रधान पवन अग्रवाल भी आ गए दबाव में ?Delhi darpan

-राजेंद्र स्वामी , दिल्ली दर्पण ब्यूरो

अशोक विहार, दिल्ली: अग्रवाल वेलफेयर सोसाइटी के हालिया चुनावों में समाज ने वोट की चोट से पूर्व प्रधान अनिल गुप्ता (घी वाले) की जालसाजी, अहंकार और तानाशाही पर जोरदार तमाचा जड़कर उन्हें सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया था। उम्मीद थी कि इस करारी हार के बाद अनिल गुप्ता को अपनी गलतियों का अहसास होगा और वे आत्ममंथन करेंगे। लेकिन इसके विपरीत, हार से बौखलाए अनिल गुप्ता सुधरने के बजाय अब खुलकर ब्लैकमेलिंग और साजिशों पर उतर आए हैं। समाज में अब यह सवाल तेजी से गूंज रहा है—क्या अनिल गुप्ता सोसाइटी के नए प्रधान पवन अग्रवाल को भी अपनी ब्लैकमेलिंग का शिकार बना रहे हैं?

रामलीला के मंच पर " पप्पी और झप्पी 'पप्पी' से हुआ चर्चाओं का बाजार गर्म हाल ही में अशोक विहार रामलीला के भूमि पूजन के दौरान मंच पर एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने सभी को हैरान कर दिया। नव-निर्वाचित प्रधान पवन अग्रवाल ने सार्वजनिक रूप से अनिल गुप्ता के गाल पर 'पप्पी' (किस) ले ली। जिस गाल पर समाज ने थप्पड़ मारा था, उसी गाल पर नए प्रधान का यह दुलार चर्चा और आशंकाओं का विषय बन गया।

लोग सवाल उठा रहे हैं कि पवन अग्रवाल आखिर अनिल गुप्ता को पटाने की इतनी मिन्नतें क्यों कर रहे हैं? अनिल गुप्ता ने सार्वजनिक मंचों से समाज के उन सम्मानित पंचों और प्रमुख हस्तियों का यह कहकर अपमान किया था कि "सोसाइटी में इनका दो पैसे का भी योगदान नहीं है।" इन्हीं पंचों और समाज के प्रबुद्ध लोगों की बदौलत पवन अग्रवाल और उनकी टीम को बंपर जीत हासिल हुई थी। लेकिन आज वही पवन अग्रवाल अपनों के अपमान को भूलकर अनिल गुप्ता पर प्यार लुटाते नजर आ रहे हैं।

Ashok vihar ramleela phase -1
Ashok vihar ramleela phase -1Delhi darpan tv

हालांकि, रामलीला के मंच पर पवन अग्रवाल के इस रुख के बावजूद अनिल गुप्ता ने उन्हें कोई खास भाव नहीं दिया। अनिल गुप्ता का रवैया कुछ ऐसा था मानो वे चेतावनी दे रहे हों—"सोसाइटी में हुए घपलों को उजागर करने की सोचना भी मत, क्योंकि उस समय तुम भी कार्यकारिणी में थे और स्कूल के प्रभारी भी!"

AWS प्रधान पवन अग्रवाल ने अनिल गुप्ता को मख्खन लगाया फिर भी लेकिन काम नहीं आया
AWS प्रधान पवन अग्रवाल ने अनिल गुप्ता को मख्खन लगाया फिर भी लेकिन काम नहीं आयाDelhi darpan tv

अपनी गड़बड़ियां छुपाने के लिए थाने तक पहुंचे मामला, पुलिस की एंट्री से हड़कंप : सूत्रों के मुताबिक, अग्रवाल वेलफेयर सोसाइटी का चुनाव अनिल गुप्ता के अड़ियल और तानाशाही रवैये की वजह से ही उनका पूरा पैनल हारा था। अब जब नई मैनेजमेंट ने कार्यभार संभाला, तो पुरानी कार्यकारिणी के दौर की वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ियां एक-एक कर सामने आने लगी हैं।

इन घपलों और घोटालों के उजागर होने के डर से अनिल गुप्ता इतने बौखला गए हैं कि उन्होंने ना केवल पवन अग्रवाल को दबाव में लेने की कोशिश की, बल्कि महाराजा अग्रसेन स्कूल में बने कथित अवैध स्टेडियम की शिकायत भी दर्ज करा दी। खबर है कि इस शिकायत के बाद भारत नगर थाना पुलिस जांच के लिए स्कूल परिसर पहुंची, जिससे नई मैनेजमेंट में हड़कंप मच गया। समाज हैरान है कि कोई व्यक्ति अपने अहंकार को बचाने के लिए उस संस्था को भी नुकसान पहुंचाने पर उतारू हो गया है जिससे उसका नाम जुड़ा था।

अनिल गुप्ता के धुर विरोधियों को मंच पर पूरा सम्मान दिया,
अनिल गुप्ता के धुर विरोधियों को मंच पर पूरा सम्मान दिया,Delhi Darpan tv

रामलीला कमेटी में भी 'कठपुतली' बनाने का खेल, अपनों को ही किया किनारे : सोसाइटी में मिली हार के बाद अब अनिल गुप्ता अशोक विहार रामलीला कमेटी में अपनी तानाशाही चलाने की फिराक में हैं। वे वहां के प्रधान ललित गर्ग को भी अपनी 'पपेट' (कठपुतली) बनाकर रखना चाहते हैं। हालांकि, ललित गर्ग ने समझदारी दिखाते हुए अनिल गुप्ता के धुर विरोधियों को न केवल मंच पर पूरा सम्मान दिया, बल्कि उन्हें रामलीला से पूरी तरह जुड़ने का न्योता भी दिया—ठीक वैसे ही जैसे राजेंद्र गर्ग वर्षों तक जुड़े रहे थे।

विरोधियों को मंच पर सम्मान मिलता देख अनिल गुप्ता के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं। उसी दौरान जब पवन अग्रवाल ने उनके गाल पर किस किया, तो शुरुआत में लगा कि वे अनिल गुप्ता का मखौल उड़ा रहे हैं। लेकिन अब जब पुलिस जांच के लिए स्कूल पहुंचने लगी है, तब जाकर यह साफ हो रहा है कि पवन अग्रवाल असल में अनिल गुप्ता की ब्लैकमेलिंग के जाल में फंस चुके हैं।

अपने स्वार्थ और गिरती साख को बचाने के लिए अनिल गुप्ता की पैंतरेबाजी यहीं खत्म नहीं होती। सोसाइटी में उन्होंने जिस दीपक जिंदल को 'मोटा भाई' बनाकर सर्वेसर्वा बना रखा था और जिनकी वजह से समाज की नजरों में घृणा फैली थी, अब अनिल गुप्ता ने अपने उसी चहेते से दूरियां बना ली हैं।

क्या संविधान बदलने और कोर्ट में झूठ बोलने वाले अनिल गुप्ता पर कोई लगाम लगेगी ? अनिल गुप्ता षड्यंत्र और मनमानी के पुराने माहिर रहे हैं। लगातार तीन बार प्रधान बनने के लिए उन्होंने सोसाइटी का संविधान तक बदल डाला था। यहां तक कि अदालत के सामने झूठे बयान दिए, जिस पर उन्हें सजा तक हो सकती है।

समाज आज स्तब्ध है कि इतनी बड़ी शख्सियत होने के बाद भी कोई व्यक्ति इतनी ओछी और नीची हरकतों पर कैसे उतर सकता है? लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब नव-निर्वाचित प्रधान पवन अग्रवाल पर खड़ा हो रहा है—क्या उनके अपने दामन पर भी कोई दाग है जिसके डर से वे अनिल गुप्ता के आगे नतमस्तक हैं? क्या पवन अग्रवाल समाज के विश्वास पर खरे उतरेंगे या अनिल गुप्ता की ब्लैकमेलिंग के आगे घुटने टेक देंगे?

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