दरियागंज से महिला हाट पहुंचा संडे बुक बाजार, दुर्लभ और अनोखी किताबों की जगह ले रहे बेस्टसेलर
दरियागंज की पटरियों से महिला हाट स्थानांतरित हुए ऐतिहासिक संडे बुक बाजार में अब पुराने और दुर्लभ संग्रह की जगह आम किताबों की भरमार दिखने लगी है।

देश की राजधानी दिल्ली का प्रसिद्ध संडे बुक बाजार अपनी दुर्लभ और अनोखी किताबों के लिए लंबे समय से पाठकों का पसंदीदा ठिकाना रहा है। वर्ष 2019 में दरियागंज की पटरियों से पास के महिला हाट मैदान में स्थानांतरित होने के बाद से इस ऐतिहासिक बाजार के स्वरूप में धीरे-धीरे बदलाव आ रहा है। अब यहां पहले की तुलना में भीड़ अधिक बढ़ रही है और किताबों के साथ-साथ खाने-पीने व बैग की दुकानें भी लगने लगी हैं।
बाजार के परंपरागत विक्रेता पहले मोहल्लों के कबाड़ियों से छांटकर ऐसी पुस्तकें लाते थे जो आम दुकानों पर नहीं मिलती थीं। हालांकि, अब इस बाजार में अनोखी और दुर्लभ किताबें तलाशना पहले से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। महिला हाट के इस परिसर में अब सस्ते दामों में छपे बेस्टसेलर, अकादमिक पुस्तकें और स्टेशनरी की सामग्री अधिक मात्रा में बिक रही है।
इसके बावजूद, पुराने साहित्य और असामान्य विषयों में रुचि रखने वाले पुस्तक प्रेमियों के लिए यह बाजार अब भी पूरी तरह खाली हाथ नहीं लौटाता। पुरानी किताबों के ढेरों में आज भी कई विचित्र शीर्षक नजर आ जाते हैं। इनमें 'पिटी द पुअर रिच', '211 थिंग्स ए ब्राइट बॉय कैन डू', 'हाउ टू लुक गुड नेकेड' और दांपत्य जीवन पर आधारित '40 फाइट्स बिटवीन हस्बैंड्स एंड वाइव्स' जैसी दुर्लभ पुस्तकें शामिल हैं।
इतिहास और अंतरराष्ट्रीय साहित्य के पारखियों को यहां कई बार ऐसे देशों के दस्तावेज मिलते हैं जिनका नक्शा ही बदल चुका है। बाजार में पूर्व सोवियत संघ के दौर की 'लेनिन इन सोवियत पोएट्री', मास्को के रादुगा पब्लिशर्स द्वारा प्रकाशित रियर-एडमिरल आई. कोलिशकिन की 'सबमरीन्स इन आर्कटिक वॉटर्स' और 'पेंटिंग ऑफ सोवियत तुर्कमेनिया' जैसी कृतियां देखी गई हैं। इसके अलावा यूगोस्लाविया की कहानियों का संकलन और फ्रेंच भाषा में इराक की आधुनिक कला पर आधारित पुस्तकें भी पन्नों में दबी मिल जाती हैं।
बाजार में 'चर्चिज ऑफ पाकिस्तान' और 'एन एंथोलॉजी ऑफ ब्राजीलियन प्रोज' जैसी पुस्तकें भी उन पाठकों को चौंका देती हैं जो सामान्य खोज में लगे रहते हैं। पक्षियों पर आधारित 'इनसाइक्लोपीडिया ऑफ केज एंड एवियरी बर्ड्स' जैसी विशिष्ट सामग्री भी कभी-कभार यहां दिखाई देती है।
इस ऐतिहासिक पुस्तक बाजार के इतिहास और दिल्ली की पठन संस्कृति पर इस वर्ष एक नई किताब 'द संडे बुक बाजार: दरियागंज एंड द मेकिंग ऑफ ए रीडिंग पब्लिक इन दिल्ली' भी सामने आई है। पुस्तक प्रेमियों का मानना है कि भले ही बाजार में व्यावसायिकता और आम किताबों का चलन बढ़ा हो, लेकिन पन्नों की गहरी पड़ताल करने वालों के लिए यह बाजार आज भी खजाने की तरह है।
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