दिल्ली विश्वविद्यालय: 1937 में बना ग्वायर हॉल आज भी ऐतिहासिक, हॉस्टल की कमी के बीच सुकून का ठिकाना
साल 1937 में स्थापित दिल्ली विश्वविद्यालय का सबसे पुराना पुरुष छात्रावास ग्वायर हॉल अपनी अनूठी वास्तुकला और शांत माहौल के लिए पहचाना जाता है।

साल 1937 में स्थापित 'ग्वायर हॉल' दिल्ली विश्वविद्यालय का सबसे पुराना पुरुष छात्रावास है। लाल ईंटों के मुख्य प्रवेश द्वार और खंभों की कतारों से सुसज्जित यह विशाल परिसर अपनी ऐतिहासिक बनावट के लिए जाना जाता है। इस छात्रावास के कमरों के भीतर फायरप्लेस बने हैं और बालकनियों के बाहर ताड़ के ऊंचे पेड़ों से घिरे हरे-भरे लॉन मौजूद हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रावास के कमरों की उपलब्धता सीमित है, जिस कारण अधिकांश छात्र कैंपस के बाहर तंग इलाकों में रहने के लिए बाध्य होते हैं। बीते सितंबर माह में साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में छात्रों के आवास वाली एक निजी इमारत के ढहने से सात युवाओं की मौत हो गई थी। इस दुखद हादसे ने विश्वविद्यालय में आवासीय सुविधाओं की भारी कमी की ओर एक बार फिर ध्यान खींचा था।
ग्वायर हॉल के भीतर का परिवेश बाहरी भीड़भाड़ वाले इलाकों से काफी अलग और शांत रहता है। शाम के समय यहां शोध कार्य कर रहे छात्र रास्तों पर टहलते दिखते हैं, जिनमें से कई पास की 'पंडित जी कैंटीन' में चाय और मीठे समोसे के लिए जाते हैं। लंबे मेहराबदार गलियारों के एक छोर पर सुरक्षा गार्ड रजिस्टर के साथ तैनात रहता है, जबकि छात्रावास के रास्तों पर कभी-कभार बिल्ली भी दिख जाती है, जो कि इसके प्रतीक चिह्न (एम्बलम) पर भी मौजूद है।
हॉस्टल के प्रवेश कक्ष में 'ग्वायर हॉल रेजिडेंट्स' नाम से एक बड़ा बोर्ड लगा है, जिस पर कमरे के नंबर और मेटल फ्रेम में रहने वालों के नाम दर्ज हैं। इन पर्चियों पर छात्रों के नाम के साथ 'मिस्टर' और उनके अध्ययन विषय जैसे नृविज्ञान या ईस्ट एशियन स्टडीज में पीएचडी का उल्लेख रहता है। इसी मुख्य हॉल में कांच के एक आले में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की आवक्ष प्रतिमा भी रखी गई है।
छात्रावास के डाइनिंग हॉल में ऊंची छतों के नीचे लंबी लकड़ी की मेजें और बेंच कतारों में लगी हैं। यहां दिल्ली विश्वविद्यालय के एकमात्र ब्रिटिश कुलपति रहे मौरिस ग्वायर का एक फ्रेम किया हुआ चित्र लगा है, जिन्होंने मिरांडा हाउस की स्थापना में भी योगदान दिया था और उसका नाम अपनी बेटी के नाम पर रखा था। इसी भोजन कक्ष की एक दीवार पर 'मार्टियर्स ऑफ पुलवामा' शीर्षक से 40 तस्वीरों वाला एक स्मृति पटल भी प्रदर्शित है।
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