Tuesday, March 3, 2026
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दिल्ली फ्रॉड केस: 20 कंपनियों का जाल, 180 करोड़ का लेन-देन और रहस्यमयी मौत

नई दिल्ली:
दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने ऑपरेशन ‘साइ-हॉक’ के तहत एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह शेल कंपनियों और म्यूल बैंक अकाउंट्स के जरिए देशभर में साइबर ठगी से जुटाए गए पैसों को इधर-उधर कर रहा था। जांच में सामने आया है कि रकम को घुमाने और उसका स्रोत छुपाने के लिए 20 फर्जी कंपनियां बनाई गई थीं, जिनके खातों से करीब 180 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ।

एक बैंक खाते से खुला पूरा राज

NCRP पोर्टल पर दर्ज साइबर ठगी की शिकायतों की पड़ताल के दौरान पुलिस की नजर एक निजी बैंक के खाते पर पड़ी, जिसमें लगातार ठगी का पैसा जमा हो रहा था। यह खाता कुड्रेमुख ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर खोला गया था। शुरुआती जांच में ही साफ हो गया कि यह एक म्यूल अकाउंट है। इसके बाद साइबर पुलिस स्टेशन, नई दिल्ली जिले में एफआईआर दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की गई।

कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी बना ‘मोहरा’

जांच में पता चला कि कंपनी का डायरेक्टर राजेश खन्ना था, जो एक कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाला कर्मचारी था। पूछताछ में उसने बताया कि सुशील चावला और राजेश कुमार के कहने पर उसके नाम पर कंपनी और बैंक खाते खोले गए। वास्तविक रूप से पैसों का पूरा नियंत्रण इन्हीं दोनों के हाथ में था। इसी तरह उसके और अन्य नामों पर कुल 20 शेल कंपनियां बनाकर ठगी की रकम को कई स्तरों में ट्रांसफर किया जा रहा था।

176 शिकायतें, 180 करोड़ का लेन-देन

इन कंपनियों से जुड़े बैंक खातों की जांच करने पर देश के अलग-अलग हिस्सों से जुड़ी 176 साइबर फ्रॉड शिकायतें सामने आईं। प्रारंभिक आकलन के मुताबिक, इन खातों के जरिए लगभग 180 करोड़ रुपये का लेन-देन किया गया। रकम को कई लेयर में घुमाकर असली स्रोत छुपाने की कोशिश की जा रही थी।

FIR के बाद होटल में मिली ‘मोहरे’ की मौत

मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ, जब सामने आया कि जिन राजेश खन्ना के नाम पर कंपनियां खोली गई थीं, उनकी एफआईआर दर्ज होने के बाद नोएडा के एक होटल में मौत हो गई। जांच से स्पष्ट है कि राजेश खन्ना को सिर्फ एक मोहरे की तरह इस्तेमाल किया गया था, जबकि पूरे नेटवर्क को सुशील चावला और राजेश कुमार संचालित कर रहे थे।

गिरफ्तारी, डिजिटल सबूतों से खुला नेटवर्क

शुरुआत में दोनों आरोपी जांच में सहयोग करते दिखे, लेकिन बाद में सवालों से बचने लगे और नोटिस का जवाब देना बंद कर दिया। मोबाइल चैट्स और अन्य डिजिटल सबूतों से पूरे नेटवर्क की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने सुशील चावला और राजेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में यह भी संकेत मिले हैं कि इनका संबंध पश्चिम बंगाल में सक्रिय एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क से हो सकता है।

मोबाइल-लैपटॉप जब्त, जांच जारी

पुलिस ने आरोपियों के पास से दो मोबाइल फोन और एक लैपटॉप जब्त किए हैं। सभी डिजिटल डिवाइस और बैंक खातों की जानकारी I4C को भेजी जा रही है, ताकि देशभर में दर्ज अन्य मामलों से इनके लिंक जोड़े जा सकें। फिलहाल पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े बाकी लोगों की तलाश में जुटी है और जांच लगातार जारी है।

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