– दिल्ली दर्पण ब्यूरो
नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली के नॉर्थ वेस्ट जिले में कानून व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अशोक विहार के वजीरपुर इंडस्ट्रियल एरिया में सरेआम गुंडागर्दी का नंगा नाच देखने को मिला, जहाँ महज बीच-बचाव करने और पुलिस को फोन करने की कोशिश करने पर एक 20 वर्षीय युवक, दीपक, की चाकू मारकर हत्या कर दी गई।
क्या है पूरा मामला?
घटना मंगलवार देर रात करीब 3 बजे की है। जानकारी के मुताबिक, दीपक अपने दोस्तों के साथ वजीरपुर स्थित एक दुकान पर बैठा था। उसी दौरान स्कूटी पर सवार होकर 4-5 लड़के वहाँ पहुँचे। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हमलावर लवण्य पैलेस के एक ठेकेदार (राजेंद्र) को धमका रहे थे और उससे पैसे छीनने की कोशिश कर रहे थे।
जब दीपक ने बीच-बचाव किया और पुलिस को सूचना देने के लिए फोन निकाला, तो हमलावरों ने उसे पकड़ लिया। हमलावर उसे खींचकर पास खड़े एक ट्रक के पीछे ले गए और उस पर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर दिए। लहूलुहान हालत में दोस्त उसे लेकर पहले पुलिस चौकी और फिर दीपचंद बंधु अस्पताल पहुँचे, जहाँ उसने दम तोड़ दिया।
परिजनों ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
दीपक की मौत के बाद से इलाके के लोगों और परिजनों में भारी आक्रोश है। परिजनों का आरोप है कि:
- पुलिस मामले को दबाने की कोशिश कर रही है और आरोपियों को संरक्षण दे रही है।
- मृतक के भाई का कहना है कि पुलिस वाले जाँच के नाम पर हँस रहे हैं और पैसे लेकर कातिलों को छोड़ रहे हैं।
- परिजनों ने पुलिस के उस दावे पर भी सवाल उठाए हैं जिसमें कथित तौर पर एनकाउंटर और आरोपियों के पैर में गोली मारने की बात कही गई है। परिजनों का कहना है कि अगर ऐसा हुआ है तो पुलिस उन्हें सबूत क्यों नहीं दिखा रही।
पुलिस की चुप्पी और बढ़ती चुनौतियाँ
इस मामले में पुलिस का पक्ष जानने के लिए जब मीडिया ने डीसीपी साहिबा से संपर्क करने की कोशिश की, तो हमेशा की तरह कोई जवाब नहीं मिला। नॉर्थ वेस्ट जिले में लगातार हो रही चाकूबाजी की वारदातों और उनमें नाबालिगों की संलिप्तता ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन पुनर्वास कॉलोनियों और स्लम बस्तियों में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और आम आदमी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।

