– दिल्ली दर्पण ब्यूरो
नई दिल्ली: साकेत में स्थानीय लोगों की चेतावनियों को ठेंगा दिखाकर नेताओं की मिलीभगत से बनाई गई अवैध इमारत गिरने से 6 मासूम छात्रों की मौत हो गई। इस रूह कंपा देने वाले हादसे के बाद भी दिल्ली नगर निगम (MCD) और सरकार की नींद नहीं टूटी है। सवाल उठता है कि क्या वज़ीरपुर में भी प्रशासन को साकेत जैसी ही किसी खूनी त्रासदी और लाशों के ढेर का इंतज़ार है? आखिर नगर निगम इस कदर बेशर्म और भ्रष्ट क्यों हो चुका है कि लाखों लिखित और ऑनलाइन शिकायतों के बावजूद इलाके में धड़ल्ले से चल रहे अवैध निर्माणों से न केवल आँखें बंद किए बैठा है, बल्कि लगातार हो रही शिकायतों के बाद भी इन बिना नक्शे की इमारतों पर कोई सख्त कानूनी कार्रवाई करने को तैयार नहीं है।
सीना ताने खड़ी मौत की इमारतें: A-91 और B-30/1

भ्रष्टाचार और प्रशासनिक ढिठाई का सबसे जीता-जागता उदाहरण केशवपुरम ज़ोन के वज़ीरपुर इंडस्ट्रियल एरिया में देखने को मिल रहा है। यहाँ बिल्डिंग संख्या A-91 और B-30/1 जैसी इमारतें निगम के गाल पर तमाचा मार रही हैं। क्षेत्र के कुख्यात बिल्डर सचिन जैन द्वारा नियमों को ताक पर रखकर बनाई गई और लगातार बनाई जा रही ये इमारतें दर्जनों शिकायतों और पुख्ता सूचनाओं के बावजूद आज भी धड़ल्ले से सीना ताने खड़ी हैं।
‘बुकिंग’ का खेल और अफसरों-नेताओं की सरपरस्ती
आखिर क्या वजह है कि जब भी जनता का दबाव बढ़ता है, तो केशवपुरम ज़ोन के भ्रष्ट जेई (JE) और ईई (EE) मौके पर जाकर केवल बिल्डिंग को ‘बुक’ करने की कागजी खानापूर्ति करते हैं और निर्माण कार्य रात-दिन जारी रहता है? वज़ीरपुर इंडस्ट्रियल एरिया की बिल्डिंग A-91 में दो साल पहले भीषण आग भी लग थी जिसके बाद यह बिल्डिंग पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गयी। लेकिन उसे तोड़कर दोबारा बिना नक्शे के चार मंजिला खड़ा कर दिया गया। इलाके में खुलेआम चर्चा है कि इस अवैध ‘महल’ को संरक्षण देने के लिए अफसरों और सफेदपोशों की तिजोरियों तक 1 करोड़ रुपये का ‘नज़राना’ पहुँचाया जा चुका है, जिसके दम पर बिल्डर सचिन जैन बेखौफ होकर ताबड़तोड़ कई और अवैध इमारतें तान रहा है।
पार्षद की लिखित शिकायत भी बेअसर, रडार पर ज़ोन
इस अवैध साम्राज्य को लेकर स्थानीय विधायक परिवार और नव-निर्वाचित पार्षद वीना असीजा के बीच जंग छिड़ गई है। खुद पार्षद वीना असीजा ने जब डीसी से लेकर तमाम अधिकारियों को लिखित में इन अवैध प्रॉपर्टियों की शिकायतें दीं, तब भी भ्रष्ट तंत्र टस से मस नहीं हुआ। पूर्व ज़ोन चेयरमैन योगेश वर्मा का ‘जीरो टॉलरेंस’ का नारा यहाँ एक मज़ाक बन चुका है। साफ़ है कि केशवपुरम ज़ोन इस वक्त सीबीआई (CBI) और जांच एजेंसियों के सीधे रडार पर है, क्योंकि यहाँ कोर्ट और विजिलेंस को झूठे हलफनामा देकर गुमराह करने वाले और पूर्व में जेल जा चुके दागी कर्मचारी आज भी मलाईदार सीटों पर जमे हुए हैं।
दिल्ली दर्पण का सीधा सवाल
साकेत में मासूम बच्चों की मौत के बाद क्या केशवपुरम ज़ोन के अधिकारी जागेंगे? दिल्ली दर्पण टीवी सीधे तौर पर दिल्ली के उपराज्यपाल (LG), मुख्यमंत्री और एमसीडी कमिश्नर से पूछता है कि वज़ीरपुर की घनी आबादी और फैक्ट्रियों के बीच टिक-टिक कर रहे इन ‘टाइम बमों’ पर बुल्डोजर कब चलेगा? यदि तुरंत कार्रवाई नहीं हुई, तो वज़ीरपुर में होने वाले अगले किसी भी बड़े हादसे के जिम्मेदार सीधे केशवपुरम ज़ोन के डीसी और उनके इंजीनियर होंगे।

