Wednesday, May 6, 2026
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एलएनजेपी अस्पताल ने लगाई सेंचुरी

शिवानी मोरवाल, संवाददाता

नई दिल्ली।। सरकारी अस्पतालों में वैक्सीनेशन की पहली सेंचुरी पूरा करने में एलएनजेपी अस्पताल ने कामयाबी हासिल की है। एलएनजेपी में 22 जनवरी को 100 हेल्थकेयर वर्करों को वैक्सीन दी गई। अभी लगभग 35 सरकारी अस्पतालों में वैक्सीनेशन प्रोग्राम चलाया जा रहा है। आपको बता दें कि 16 जनवरी से देश में वैक्सीनेशन का कार्यक्रम शुरु किया जा चुका है, जिसके तहत पहले चरण में हेल्थकेयर वर्करों ने वैक्सीन दी जा रही है।

 
आपको बता दें कि एक सर्वे के मुताबिक अभी भी  53 लोगों के अंदर वैक्सीन को लेकर हिचकिचाहट है। और 44 प्रतिशल लोग वैक्सीनेशन के लिए बहुत उत्साह में है। कई लोगों का कहना है कि हम वैक्सीनेशन के लिए पूरी तरह से तैयार हैं, क्योंकि पूरे देश को इसका इंतजार था। अब जब वो समय आ गया है तो उससे डरना क्यों लोगों का उत्साह देखकर तो ऐसा ही लगा की लोगों के अंदर वैक्सीन को लेकर कोई संकोच और संदेह नहीं है। उनमें वैक्सीन को लेकर उत्साह है और वे अपनी बारी आने के इंतजार में हैं।

हालंकि कई लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें वैक्सीन पर पूरी तरह से विश्वास नहीं है, कारण अभी इसके भी साइड इफेक्ट सामने आ रहे हैं। किसी को बीपी की प्रोब्लम हो, तो किसी की तबीयत बिगड़ जाती है, इसलिए वे चिंता में पड़ जाते हैं कि वैक्सीन लगवाएं या नहीं।

सुभाष चंद्र बोस: भारत से जापान तक

 नेहा राठौर, संवाददाता

‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ का नारा देने वाले सुभाष चंद्र बोस पूरी दुनिया में एक भारतीय क्रांतिकारी के रूप में प्रख्यात हैं। भारत को आजादी दिलाने में उनका बड़ा योगदान माना जाता है। उनका जन्म आज ही के दिन यानी 23 जनवरी 1887 को उड़ीसा के कटक में पिता जानकी नाथ बोस और माता प्रभा देवी के घर में हुआ था। अपने 14 भाई-बहनों में 9वें स्थान पर थे। उनका पालन-पोषण जन्म से ही राजनीतिक परिवेश में हुआ। बचपन से उनपर धर्मिक आध्यात्मिक वातावरण का गहन प्रभाव रहा इसलिए छोटी सी उम्र से ही उनके कोमल हृदय में शोषितों और ग़रीबों के लिए अपार श्रद्धा समाई हुई थी। बोस स्वामी विवेकानंद की आदर्शवादिता और कर्मठता से प्रेरित थे। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के साहित्य को पढ़ा, जिसके बाद उनकी धार्मिक जिज्ञासा और भी मजबूत हो गई। उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई कटक के मिशनरी स्कूल और आर. कालेजियट स्कूल से की, उसके बाद प्रेसीडेंसी कॉलेज में एडमिशन लिया और दर्शन शास्त्र को अपना प्रिय विषय बना लिया।

क्रांति की पहली लौ

एक बार 1916 में अंग्रेज प्रोफेसर ओटन ने भारतीयों के लिए अपशब्द का इस्तेमाल किया जो सुभाष से सहन नहीं हुआ और उन्होंने गुस्से में अपने प्रोफेसर की पिटाई कर दी। इसके बाद होना क्या था, वहीं जो हर बच्चे के साथ होता है, उन्हें भी कॉलेज से निकाल दिया गया। बाद में में श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पिता आशुतोष मुखर्जी की मदद से उनका निष्कासन रद्द कर दिया गया। वह पहली बार था जब सुभाष को अपने अंदर क्रांति की आग का एहसास हुआ था। सुभाष के पिता का सपना था कि वे अपने बेटे को सिविल सेवा के पदाधिकारी के रूप में देखे। सुभाष ने दूसरे देश में जा कर सिर्फ उनका सपना ही पूरा नहीं किया बल्कि सिविल सेवा की परीक्षा में चौथे स्थान हासिल किया। सुभाष ने अपने पिता के कहने पर परीक्षा तो दी लेकिन उस वक्त उनके मन में कुछ और ही चल रहा था। 1921 में देश में बढ़ती राजनीतिक गतिविधियों के समाचार मिल रहे थे। ऐसे में ब्रिटिश हुक़ूमत के अधिन अंग्रेजों की जी-हूजूरी करने की बजाय उन्होंने महर्षि अरविंद घोष की तरह अंग्रेजों की सिविल सेवा की नौकरी को ठोकर मारकर भारत मां की सेवा करने की ठानी और भारत लौट आये।

गांधी और सुभाष के नरम-गरम विचार

भारत लौटने वह सबसे पहले महात्मा गांधी से मिलने निकल पड़े। अहिंसा को मानने वाले महात्मा गांधी सुभाष के हिंसावादी विचारधारा से असहमत थे। महात्मा गांधी और सुभाष की सोच में ज़मीन आसमान का फर्क था, लेकिन दोनों का मकसद एक था ‘भारत की आजादी’। जहां गांधी नरम मिज़ाज के थे, वहीं सुभाष जोशीले गरम मिज़ाज के व्यक्ति थे। यह कम ही लोग जानते होंगे कि गांधी को सबसे पहले नेताजी ने ही राष्ट्रपिता नाम से संबोधित किया था।

दूसरा विश्व युद्ध की शुरुआत

जब 1939 में अमेरीका ने जापान के नागासाकी और हिरोशिमा शहर पर परमाणु बम फेंका। इसी के साथ दूसरे विश्व युद्ध की शुरूआत हुई, तब सुभाष चंद्र बोस ने तय किया कि वो एक जन आंदोलन शुरू करेंगे और सभी भारतीयों को इस आंदोलन के लिए प्रोत्साहित करेंगे। इसके बाद ब्रिटिश सरकार ने नेताजी को आंदोलन का नेतृत्वकर्ता के तौर पर दो हफ्तों के लिए जेल में डाल दिया। लेकिन जब भूख से उनका स्वास्थ्य खराब होने लगा तो ब्रिटिश सरकार ने जनाक्रोश को देखते हुए उन्हें उन्हीं के घर में नजरबंद कर दिया। उसके बाद नेताजी वहां से भागकर जापान चले गए। जापान पहुंच कर उन्होंने सबसे पहले दक्षिणी-पूर्वी एशिया से जापान द्वारा पकड़े गए करीब चालीस हजार भारतीय स्त्री-पुरुषों की प्रशिक्षित सेना बनानी शुरू कर दिया। उन्होंने भारत को आजादी दिलाने के मकसद से 21 अक्टूबर,1943 को ‘आजाद हिंद फौज’ का गठन किया। 1943 से 1945 तक यह फौज अंग्रेजों से युद्ध करती रही। सुभाष चंद्र बोस ही थे, जिनकी मदद से भारतीय महिलाओं को भी आजादी की लड़ाई में शामिल किया। उन्होंने महिलाओं के लिए रानी झांसी रेजिमेंट बनाई, जिसमें सभी महिलाओं को लड़ाई के लिए प्रशिक्षित किया जाता था।

मौत या गुमशुदा: एक रहस्य

उन्होंने अंग्रेजों को यह एहसास दिलाया की अब उन्हें भारत छोड़कर जाना ही पड़ेगा। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने रंगून के जुबली हॉल में अपने ऐतिहासिक भाषण में संबोधन करते हुए ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा’ और  ‘दिल्ली चलो’ का नारा दिया था। बोस की मृत्यु को लेकर कई मतभेद है कुछ लोगों का मानना है कि दूसरे विश्व युद्ध में जापान के आत्मसमर्पण के कुछ दिन बाद दक्षिण-पूर्वी एशिया से भागते समय हवाई दुर्घटना में 18 अगस्त 1945 को उनकी मौत हो गई थी। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि 1945 में उनकी मौत नहीं हुई थी, उस समय रूस में नजरबंद थे। लेकिन बोस की बेटी अनिता का इस बारे में कहना है कि उनके पिता की मौत विमान हादसे में हुई थी। कमोबेश उनकी मौत विमान हादसे की वजह से मानी जाती है।

चलते-चलते, तेरे लिए तेरे वतन की खाक बेकरार है, हिमालय की चोटियों को तेरा इंतजार है, वतन से दूर है मगर, वतन के गीत गाये जा, कदम-कदम बढ़ाए जा खुशी के गीत गाये जा, ये जिन्दगी है कौम की, तू कौम पे लुटाये जा।

फरीदाबाद में लोगों ने पकड़ा चेन स्नैचर

जय प्रकाश भाटी, संवाददाता

दिल्ली एनसीआर।। फरीदाबाद के 1-2 नंबर चौक पर महिला की चेन खींच कर भागने वाले स्नैचर को लोगों ने पीछा करके दबोच लिया और साथ ही उसकी जमकर पिटाई की। जिसके बाद पुलिस के हवाले कर दिया गया। फरीदाबाद में ऐसा पहली बार हुआ है जब कोई चेन स्नैचर पब्लिक द्वारा रंगे हाथों पकड़ा गया ।

दरअसल पूरा मामला कल दोपहर करीब 2:00 बजे फरीदाबाद के व्यस्त 1-2 नंबर चौक पर जब एक महिला अपने रिश्तेदार महिला के साथ शॉपिंग के लिए आई थी। तभी अचानक चैन स्नैचर ने उनके गले से चेन खींच ली और भागने लगा इसी दौरान कुछ साहसी लोगों ने करीब 500 मीटर तक पीछा करते हुए उसे पीर मोती नाथ मार्केट के पास डी ब्लॉक के बाजार में धर दबोचा और एक दुकान में उसकी तलाशी लेकर चेन बरामद कर ली गई ।

इस मौके पर जहां महिलाओं ने चप्पलों से उसकी पिटाई की वही पीड़ित महिला के बेटे ने वहां पहुंचकर डंडों से  स्नैचर को पीटा । बाद में उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया ।

गौरतलब है कि फरीदाबाद में आए दिन चैन स्नैचिंग की वारदातें होना आम बात है और यह शायद पहली बार ऐसा हुआ है जब कोई स्नैचर पब्लिके द्वारा पकड़ा गया हो। यदि पब्लिक भी इसी तरह  साहस दिखाएगी तो आने वाले समय में ऐसी वारदातों पर पूरी तरह से अंकुश लग पाएगा ।

जनता को है वैक्सीन पर विश्वास

शिवानी मोरवाल, संवाददाता

नई दिल्ली। देश में जहां एक तरफ कोरोना वायरस की वैक्सीन आने से लोगों ने राहत की सांस ली है, तो दूसरी ओर यह सवाल भी खड़ा हो गया है कि जब वैक्सीन सुरक्षित है तो स्वास्थ्य कर्मी ही वैक्सीनेशन को लेकर पीछे क्यों हट रहे हैं? आपको बता दें कि 16 जनवरी से भारत में कोरोना के खिलाफ सबसे बड़े टीकाकरण की शुरुआत हो चुकी है। जिसमें दिल्ली कहीं न कहीं पिछड़ गया है। दिल्ली में पहले दिन तो टीका लगावानें वालें की संख्या अच्छी रही पर जैसे ही दूसरे चरण में वैक्सीनेशन की शुरुआत हुई तो संख्या घटती दिखी। हालोंकि लोगों में इसे लेकर काफी उत्साह और संतोष है।

जब हमने दिल्ली के लोगों से पूछा कि उनको अपने देश में बनी कोरोना वैक्सीन पर कितना विश्वास है, तो उन्होंने इसका जवाब काफी शालीनता से दिया। उनका कहना था कि जब लोगों को अपने देश पर विश्वास है, तो देश में बनी वैक्सीन पर क्यों नहीं होगा। जब सरकार ने वैक्सीन तैयार की है, तो हम सभी जनता के लिए ऐसे में हम वैक्सीन पर विश्वास नहीं करते हैं, तो ये हमारे लिए बहुत शर्मसार करने जैसी बात होगी।

ऐसे में हमें कुछ लोग ऐसे भी मिले जो वैक्सीन पर विश्वास तो करते हैं, पर उनका कहना है कि जब तक हमें लग नहीं जाती हम पूरी तरह से विश्वास नहीं कर सकते। उनका कहना है कि सभी लोगों को भ्रमित होने की कोई जरुरत नहीं है। जब देश के सबसे बड़े अस्पताल एम्स के डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने बोला है कि वैक्सीन सुरक्षित है तो लोगों को विश्वास करना चाहिए। फिर जब तक लग नहीं जाती तब तक पूरा विश्वास हम नहीं कर सकते।

ऐसे में हमने लोगों से ये भी पूछा कि अगर उनका नंबर आता है, तो क्या वे तैयार हैं?  इस पर उनका कहना था कि हम तो बेसब्री से इंतजार कर रहे है कि हमें वैक्सिन कब लगेगी।  साथ ही देश में बनी वैक्सीन पर हमें पूरा विश्वास है।

दिल्ली में झुग्गीवासियों के लिए 9315 फ्लैट बनकर तैयार

काव्या बजाज, संवाददाता

नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सरकार द्वाारा झुग्गी में रह रहे लोगों के लिए फ्लैट तैयार करवाए गए हैं। यह काम सरकार ने दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड के तहत करवाए हैं, जिसमें 9315 फ्लैटस बनकर तैयार है। मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत अरविंद केजरीवाल सरकार ने लोगों के पुनर्वास के लिए यह कदम उठाया है।


फ्लैटस के आवंटन की प्रक्रिया के आदेश देने के बाद उन्होंने कहा कि अभी 28910 फ्लैटस बनने बाकी हैं, जो लोगों की सहायता करने में काफी मदद करेंगे। इसके साथ – साथ मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों को सभी जरूरी काम, अड़चनें और जरूरी काम को निपटाने को भी कहा है।

जानकारी के अनुसार तैयार किए गए फ्लैटस में सबसे पहले 14 झुग्गी में रहने वाले परिवारों को शिफ्ट किया जाएगा। सभी परिवारों को शिफ्ट करने का काम तीन चरणों में किया जाएगा। पहले दो चरण में कुल 59400 फ्लैट्स का निर्माण कराकर झुग्गियों में रह रहे परिवारों को इनमें शिफ्ट कराने की योजना है।

दो चरण में झुग्गी बस्तियों से परिवारों के बहुमंजिला फ्लैट्स में शिफ्ट होने के बाद जो जमीन खाली होगी, उसमें तीसरे चरण के तहत 30000 फ्लैट बनवाए जाएंगे। जानकारी के मुताबिक सभी फ्लैटस का कार्य 2025 तक पूरा कर लिया जाएगा।