Wednesday, May 6, 2026
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और उग्र हो गया निगमकर्मियों का विरोध-प्रदर्शन, ढाई किलोमीटर तक किया पैदल मार्च

शिवानी मोरवाल, संवाददाता

नई दिल्ली।। वेतन और पेंशन की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल के साथ-साथ सभी एमसीडी विभाग के कर्मचारी लगातार प्रदर्शन कर रहे है। दिन प्रतिदिन उनका प्रदर्शन उग्र होता जा रहा है। रोहिणी में 22 जनवरी को उनके प्रदर्शनों का नजारा गजब का आक्रामकता लिए हुए था। हजारों की संख्या में सभी कर्मचारियों ने एकसाथ मिलकर पैदल मार्च कर प्रशासन को जगाने की कोशिश की। आपकों बता दें कि यह प्रदर्शन रोहिणी से लेकर करीब ढाई किलोमीटर पीतमपुरा तक का था, जिसमें अलग-अलग विभाग के हजारों कर्मचारी शामिल हुए थे। सभी की मांग अपने रुके हुए वेतन और पेंशन को लेकर थी।

सभी कर्मचारियों ने इस बार भाजपा के साथ-साथ अंरविद केजरीवाल मुर्दाबाद के नारे भी लागाए। उनका कहना था कि हमें 5 से भी ज्यादा महीनों से वेतन नहीं मिला है। सरकार बस अपने बारे में सोंचती है। अगर अंरविद केजरीवाल को सच में दिल्ली की जनता की फ्रिक होती तो हमारे साथ ऐसा नहीं करती।

इस पैदल मार्च में कुछ ऐसे भी लोग थे, जिनके अंदर सरकार के खिलाफ काफी आक्रोश था। उन सभी ने भाजपा और आप के खिलाफ नारे तो लगाएं ही पर सड़क पर लेटकर विरोध जताया। जब हमने उन लोगों से पूछा कि इस तरह से प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं, तो उन्होंने बताया कि सरकार ने हमें भिखारी बना दिया है। हम सरकार को बता देंगे कि हम भीख नहीं अपना हक मांग रहे हैं, क्योंकि 6 महीने से हमारा वेतन नहीं आया है। ऐसे में अब हमें अपनी सोयी हुई सरकार को इसी तरह से जगाना होगा।

आपको बता दें कि लगातार एमसीडी कर्मचारी अपने वेतन को लेकर महीनों से जगह-जगह प्रदर्शन करते रहे हैं। जिसके बाद सभी कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरु कर दी। जिसका सबसे ज्यादा असर उत्तरी नगर निगम में देखने को मिला। सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से पूरी दिल्ली में कूडे का अंबार लगा हुआ है। जिसकी वजह से जगह-जगह कूड़ा होने से लोगों को भी परेशानी हो रही है। और उनका जीना मुहाल हो चुका है।

जब इस विषय में पैदल मार्च में मौजूद सफाई कर्मचारियों से पूछा गया कि एक तरफ सभी कर्मचारी हड़ताल पर हैं, वहीं दूसरी ओर दिल्ली कूड़े वाली दिल्ली बनती जा रही है। वे किसको दोषी मानते हैं? इसपर सभी कर्मचारियों ने एक सुर में भाजपा और दिल्ली सरकार का नाम लिया।

कर्मचारियों का कहना था कि जब दिल्ली सरकार पैसा देगी तो एमसीडी तो हमें खुद दे देगी। पर जब दिल्ली सरकार ही एमसीडी को पैसा नहीं दे रही है, तो कर्मचारियों को कहां से मिलेगा। इन सभी की परेशानी देखकर तो ऐसा ही लगा कि सभी कर्मचारी दो गुटो में बंटे हुए हैं। कोई भाजपा को दोषी मान रहा हैं, तो कोई आम आदमी पार्टी को।

कमला मार्केट हुई कूड़ा-कूड़ा

शिवानी मोरवाल, संवाददाता

नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगमों के कर्मचारियों ने 7 जनवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल  की वजह से  दिल्ली का बड़ा हिस्सा कूड़े-कचरे से भर गया है। कई बाजारों की सड़कें, फूटपाथ और गलियों में कूड़े की वजह से चलना दूभर हो गया है। कमला मार्केट में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। बाजार में हर गालियों में कूड़े का अंबार हफ्तों से लगे हैं।  यही कारण अब कमला मार्केट कूड़े वाली मार्केट बन चुकी है।


इसे लेकर दुकानदारों में काफी आक्रोश है। कूड़े की वजह से उनकी दुकानदारी पर काफी असर पड़ा है। एक दुकानदार ने उनकी समस्या के बारे में पूछने पर बताया कि हम तो पहले से ही कोरोना जैसी महामारी से परेशान थे। पर जब कोरोना वैक्सीन आई तो एक नई उम्मीद जगी की अब सब पहले से जैसा हो जायेगा। किंतु कर्मचारियों की हड़ताल से दूसरी परेशानी आ गई है। ग्राहक कूड़े की वजह से दुकान में आना पंसद नहीं कर रहे हैं। ग्राहकों के लगता है इससे कोरोना का खतरा बढ़ जाएगा, या फिर दूसरी बीमारियों की चपेट में आ जाएंगे।  इसी के साथ सभी दुकानदारों ने सरकार से भी गुहार लगाई।


खाने—पीने की रेहड़ी लगाने वाले भी कूड़े की गंदगी और दुर्गंध से काफी परेशान हो चुके हैं। उनकी बिक्री कम हो गई है।

इधर-उधर पॉलिथीन के कूड़ा पड़े रहने के कारण बाईक और स्कूटी वाले दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं। कई लोगों के सामान, खासकर सब्जियां, दूध आदि उनमें गिरकर खराब हो जाते हैं। दुकानदार इसक शिकायत करे तो किससे? सफाईवाले आ नहीं रहे हैं। जब कभी दिखते हैं तो कहते हैं कि वे हड़ताल पर हैं। उन्हें वेतन नहीं मिला है। जब वेतन मिलेगा तब काम करेंगे। 

नहीं रहे भजन गायक नरेंद्र चंचल

काव्या बजाज, संवाददाता

नई दिल्ली। गायकी से देश ही नहीं दुनिया भर में पहचान बनाने वाले नरेंद्र चंचल का आज यानी 22 जनवरी को निधन हो गया। वे चार महीने से  बीमार चल रहे थे। काफी समय से अस्वस्थ रहने के बाद उन्हें दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। जिसके बाद आज दोपहर 12:15 पर उन्होंने अंतिम सांसे ली।


नरेंद्र चंचल का जन्म 16 अक्टूबर 1940 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था। उनके माता पिता माँ दुर्गा को भक्त थे। जिसकी वजह से उनकी रुची भी धार्मिक भजनों में ज्यादा थी। उन्होंने काफी छोटी उम्र से ही भजन गाना आरंभ कर दिया था। हालांकि उन्हें फिल्मों में पहला मौका बॉबी फिल्म में मिला था। राजकपूर निर्मित फिल्म उनका एकमात्र गाना ‘बेशक मंदिर – मस्जिद तोड़ो’ ने उन्हें लोकप्रिय गायकों की श्रेणी में लाकर रख दिया। उसके बाद उन्होंने कई हिंदी फिल्मों में गाने गए, लेकिन अवतार फिल्म में उनका गया भजन चलो बुलावा आया है के बाद उनकी पहचान भजन गायकों में होने लगी और वे दिल्ली में होने वाले जागरण में शामिल होने लगे।


भजन गायक नरेंद्र चंचल शुरुआत से ही काफी शरारती रहे है। जिसकी वजह से उनके स्कूल में उन्हें चंचल का नाम दिया गया था। जिसका अर्थ शरारती होता है। गायकी की दुनिया में आने के बाद उन्होंने अपने मौलिक नाम के साथ – साथ अपने इस नाम को भी जोड़ा जिसकी वजह से पूरे देश में उन्हें नरेंद्र चंचल के नाम से जाना जाता है।


नवरात्र हो या नया साल भजन चलते ही हर तरफ सिर्फ एक ही प्रसिद्ध आवाज़ गूंजती है और एक ही नाम नरेंद्र चंचल की चर्चा होती है। नरेंद्र चंचल के भजन ‘चलो बुलावा आया है’ ने रातों रात उन्हें देश में प्रसिद्ध कर दिया था। जिसके बाद उन्होंने ‘मिडनाइट सिंगर’ नाम की एक पुस्तक का विमोचन भी किया था। नरेंद्र चंचल आज जागरण गायकों के स्कूल बन चुके हैं। लोग उनकी आवाज और गाने की शैली को अपनाते हुए गर्व महसूस करते हैं। उनके गाने में जय माता दी की जयकारा जागरण में उपस्थित लोगों को वैष्णो देवी के दरवार में शामिल होने जैसा ऐहसास देता है।

 
देश में ऐसा शायद ही कभी हुआ होगा कि एक भजन गायक को सुनने के लिए देश भर से लोग आते थे। और उनकी एक झलक पाने के लिए लंबी कतारे लगी रहती थी। उनकी लोकप्रियता विदेशों में भी खूब है।   

फरीदाबाद में कर्मचारियों का कंपनी के खिलाफ “हल्ला बोल”

मनोज सूर्यवंशी, संवाददाता

दिल्ली एनसीआर।। कोरोना वैश्विक महामारी के चलते पूरे देश भर में लॉकडाउन की स्थिति बन गई। उसके बाद फरीदाबाद पलवल से बहुत सारी तस्वीरें ऐसी निकल कर सामने आई जहां पर कंपनियों ने बगैर नोटिस के हजारों वर्करों को कंपनी से बाहर कर दिया हालांकि हरियाणा सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ तौर पर कंपनी प्रबंधकों से आव्हान किया था कि कंपनी वर्करों को कंपनी से ना निकाले बावजूद इसके लगातार ऐसी तस्वीरें फरीदाबाद और पलवल से सामने आते रही।

ऐसा ही एक मामला आज फिर से पलवल के गांव धतीर से सामने आया है। जहां पर बगैर किसी नोटिस के सैकड़ों कर्मचारियों को कंपनी के बाहर कर दिया इतना ही नहीं सैकड़ों वर्करों की लगभग 2 महीने की तनख्वाह भी कंपनी ने नहीं दी।

इसी को लेकर कर्मचारियों ने कंपनी के गेट पर खड़े होकर जोरदार प्रदर्शन किया कर्मचारियों का आरोप है कि कंपनी मालिक ने उन्हें 2 महीने की तनख्वाह नहीं दी है। और उनका कंपनी गेट भी बंद कर दिया ऐसे में वह कहां जाएं 2 महीने से तनख्वाह नहीं मिली है, मकान मालिक कराया मांगता है दूध वाला पैसा मांगता है सब्जी वाला पैसा मांगता है।

इसके चलते उन्होंने कई बार मिलने की कोशिश की परंतु उन्हें कंपनी मालिक से मिलने नहीं दिया इसके चलते उन्होंने गांव के सरपंच से गुहार लगाई गांव के सरपंच ने पुलिस द्वारा कार्रवाई कराने को लेकर पुलिस कंप्लेंट तो करा दी है परंतु अभी तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई कंपनी में काम करने वाले कर्मचारी चाहते हैं कि उनकी तनख्वा उन्हें मिल जानी चाहिए।।

आखिर क्या है टीकाकरण की अहमियत ?

खुशबू काबरा, संवाददाता

दिल्ली।। राजधानी दिल्ली में टीकाकरण अभियान की शुरुआत हो गई है। जिसके चलते लोगों के मनों में कई सवाल पैदा हो रहे है और डर की आशंका लोगों के अंदर बन रही है। सोमवार तक 7000 हजार से भी अधिक लोग टीका लगवा चुके है। ऐसे में डॉक्टरों का कहना है कि टीका लगने के 45 दिन बाद संक्रमण के खिलाफ एंटीबॉडी बनेगी। इस टीके का असर एक दम से नहीं होता है। इसमें कई सप्ताह का समय लगता है। डीपार्टमेंट ऑफ कम्यूनिटी मेडिसिन सफदरजंग अस्पताल के अध्यक्ष डॉक्टर जुगल किशोर बताते हैं कि वैक्सीन तुरंत लगते ही शरीर में एंटीबॉडी नहीं बनती है। आपको बता दे कि वैक्सीन लगने वाले सभी लोगों को इस दौरान अपना खास ख्याल रखना होगा।

जिन कर्मचारियों को पहली डोज लग चुकी है उनको दुसरी डोज 28 दिन के बाद लगेगी और 15 दिन के बाद शरीर में एंटीबॉडी बनेगी, 45 दिन तक लोगों को अपना ध्यान रखना होगा, डॉक्टरों का कहना है कि इस दौरान किसी संक्रमित के संपर्क में आने पर वायरस फैल सकता है जानकारी के अनुसार ट्रायल के दौरान देखा जाएगा कि कितनी एंटीबॉडी बन रही है। इसलिए लोगों को अपना रोग प्रतिरोधक का पता लगाने के लिए एंटीबॉडी टेस्ट करवाने की कोई जरुरत नहीं है।

जैसे की हम सभी को पता है कि टीकाकरण इस बिमारी का अहम हिस्सा है लेकिन टीके के कुछ दुष्प्रभाव भी है जिनको लोगों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, टीका सबको लगवाना अनिवार्य है ऐसे में उन्होंने कहा है कि अगर टीका लगवाने के बाद किसी भी प्रकार कि बुखार, एलर्जी हुई है तो इसमें घबराने की कोई बात नहीं है, जानकारी के अनुसार टीके को लेकर कई अफवाह फैसाई जा रही है जिसको चलते टीकाकरण भी कम हो रहा है ऐसे में सरकार ने सभी से यही अपील की है कि ऐसी अफवाहों पर भरोसा ना करें।

आपको बता दे कि पहली डोज के बाद दूसरी डोज लेना अनिवार्य है पहली डोज इंसान के शरीर में  एंटीबॉडी के उत्पादन को उत्तेजित करेगी तो वही दूसरी डोज शरीर में एंटीबॉडी के स्तर को बनाएगी। बेहतर सुरक्षा के लिए दोनो खुराक लेना जरुरी है।