Wednesday, May 6, 2026
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अमित शाह ने दिल्ली पुलिस की हौसला अफजाई की

शिवानी मोरवाल, संवाददाता

नई दिल्ली। राजधानी में हर साल गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी को शांतिपूर्ण संपन्न करवाने का पूरा दारोमदार दिल्ली पुलिस पर होता है। दिल्ली पुलिस के इंतजाम की जितनी भी तारीफ की जाए वह कम होती है। वह किसी तरह की अराजक स्थतियों से लेकर आतंकवादी हरकतों से टकराने के लिए चौकन्ना रहती है।

इस बार के गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली पुलिस के लिए किसान आंदोलनकारियों द्वारा ट्रेक्टर रैली की घोषणा एक चुनौती के समान है। इसे लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 19 जनवरी को पुलिस मुख्यालय पर दिल्ली पुलिस के साथ खास बैठक की। बैठक में उन्होंने दिल्ली  पुलिस की खूब तारीफ की। उनकी हौसला अफजाई की। बैठक में सभी छोटे—बड़े अधिकारियों सहित दिल्ली पुलिस के सिपाही भी शामिल थे।

बता दें कि इस बार गणंतत्र दिवस की परेड में किसानों ने अपने हजारों  ट्रैक्ट्ररों के साथ दिल्ली में परेड निकालने की घोषणा की है। जिसको लेकर दिल्ली पुलिस ने सबसे पहले सुप्रिम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। बाद में दिल्ली में किसान को आने की अनुमति दी जाए या नहीं तो सुप्रिम कोर्ट ने इस पर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं दिया था। हालांकि उसने कहा था कि दिल्ली में किसको आना चाहिए ओर किस पर रोक लगानी चाहिए ये सब दिल्ली पुलिस के फैसले पर निर्भर है। 26 जनवरी को किसान आने चाहिए या नहीं ये केंद्र सरकार यानी दिल्ली पुलिस तय करेगी न कि सुप्रिम कोर्ट।

सुप्रिम कोर्ट की इस सफाई के बाद दिल्ली के नए पुलिस मुख्यालय में अमित शाह और सभी पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की गई, जिसमें दिल्ली की व्यवस्था कानून के ऊपर मंथन किया गया।

जानकारी के अनुसार इस बार 26 जनवरी और किसानों के ट्रैक्टर रैली की आड़ में आंतकवादी हमला होने की आंशका है। जिसको लेकर दिल्ली पुलिस ने दिल्ली के कई जगहों पर फरार आंतवादियों के नाम के पोस्टर लगा भी दिये है। साथ ही दिल्ली पुलिस ने “रोहिंग्या घुसपैठ” के नाम से एक नए ऑपरेशन की शुरुआत की है। जिसके चलते 2 एफआईआर के साथ 8 रोहिंग्या पकड़े गए है। जिसके बाद पुलिस और मुसतैद हो गई है।

टीकाकरणः संजीवनी के साइड इफेक्ट को लेकर संशय क्यों?

राजेंद्र स्वामी, संवाददाता

नई दिल्ली।। भारत में दुनिया के सबसे बड़े कोरोन वैक्सीनेशन अभियान की एक ओर चौतरफा तारीफ मिल रही है, वहीं दूसरी ओर टीके की संजीवनी पर कई तरह के संदेह भी पैदा हो रहे हैं। कारण है इसके प्रतिकूल प्रभाव, यानी एडवर्स इफेक्ट के नतीजे। इसे साइड इफेक्ट के नजरिये से भी देखा जा रहा है। क्योंकि टीकेकरण की तीन दिनों के भीतर 580 लोगों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। कथित तौर पर एक व्यक्ति के मौत हो जाने की भी खबर भी चर्चा में आ गई। हालांकि इसे वैक्सीन के प्रभाव को लेकर शंका की निगाह से नहीं देखा जाना चाहिए।


राजधानी दिल्ली की सर्वश्रेष्ठ सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में शुमार दिल्ली एम्स में भी वैक्सीन लगे कुछ लोगों को भर्ती करवाया गया। उनमें कुछ को थोड़े समय के बाद ही छुट्टी दे दी गई, जबकि कुछ को दो-तीन दिनों बाद। यही बात एक तरह से लोगों के मन में वैक्सीन को लेकर डर पैदा कर रहा है, तो उनमें कई तरह की भ्रंतियाों के माकूल जवाब जानना चाहते हैं।

भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक तीन दिनों में 3 लाख 81 हजार से ज्यादा लोगों को कोरोना का टीका लग चुका है। टीका लगे लोगों के प्रतिकूल प्रभाव वालों की संख्या उनके मुकाबले काफी कम है। यह कुल लोगों को लगे टीके का मात्र 0.2 फीसदी ही है।


कोरोना से निपटने के लिए जारी वैक्सीनेशन पर कोई असर नहीं पड़ा है। इस सिलसिले में आने वाले साइड इफेक्ट को देखते हुए नए सिरे से भारत बायोटेक ने फैक्टशीट जारी कर बताया है कि किस बीमारी या अस्वस्थ लोगों को कोरोना  वैक्सीन नहीं लगानी चाहिए। भारत बायोटेक के मुताबिक यदि किसी बीमारी की वजह से इम्यूनिटी कमजोर है या कोई ऐसी दवाएं ले रहे हैं, जिनसे इम्यूनिटी प्रभावित होने वाली है तो उन्हें कोवैक्सीन नहीं लगवानी चाहिए।

हालांकि इससे पहल केंद्र सरकार ने कहा था कि यदि आप इम्यूनोडेफिशियेंसी से ग्रस्त हैं या इम्यून सप्रेशन पर हैं यानी किसी ट्रीटमेंट को लेकर इम्यून कम कर रहे हैं तब भी कोरोन वैक्सीन ले सकते हैं।


बहरहाल, जहां तक वैक्सीन के एडवर्स इफेक्ट का प्रश्न है तो उसे डॉक्टर तात्कालिक प्रभाव वाला बताते हैं। भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार टीका लगने के बाद उस इंसान में किसी भी तरह के अनपेक्षित मेडिकल परेशानियों को एडवर्स इफेक्ट फाॅलोइंग इम्यूनाइजेशन कहा जाता है। ये परेशानी वैक्सीन की वजह से भी हो सकती है, वैक्सीनेशन प्रक्रिया की वजह से भी हो सकती है या फिर किसी दूसरे कारण से भी हो सकती है। ये अमूमन तीन प्रकार के होते हैं- मामूली, गंभीर और बहुत गंभीर। ऐसे में जरूरी है कि स्थितियों का पता करने के बाद ही वैक्सीन के प्रभाव-दुष्प्रभाव के किसी नतीजे पर पहुंचना चाहिए।

दिल्ली – कार के पीछे बैठने वालों को भी लगानी होगी सीटबेल्ट

काव्या बजाज, संवाददाता

नई दिल्ली। कार की अगली सीट पर बैठने वालों के लिए सीट बेल्ट अनिवार्य है। ऐसा नहीं करने वालों को जुर्माना भरना पड़ता है। ऐसा ही कदम पीछे बैठने वालों के लिए भी उठाया गया है।   पश्चिमी दिल्ली के डीसीपी (ट्रैफिक) प्रशांत गौतम के द्वारा उठाए गए कदम के अनुसार कार में ड्राइविंग सीट पर बैठे व्यक्ति के साथ – साथ मौजूद सभी लोगों को भी सीट बैल्ट लगाना अनिवार्य होगा।

आदेश के मुताबिक दो पहिया वाहनों में साइड मिरर नहीं होने पर वाहन चालकों पर सख्त कदम भी उठाया जाएगा।


इस फैसले पर लोगों ने अपनी सहमति जताते हुए बताया कि यह हमारी सुरक्षा के तहत उठाया गया एक अच्छा कदम है। क्योंकि इस कदम से कई लोगों की जान बच सकती है। यह कदम लोगों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। तो वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग इसपर असमंजस में दिखे। उन्होंने कहा कि वह अभी कुछ कह नहीं सकते कि यह कदम लोगों कि सुरक्षा को देखते हुए बनाया गया है या उन्हें ठगने के लिए।

13 जनवरी को नियम के ऐलान के बाद उन्होंने कहा कि लोगों की सुरक्षा को देखते हुए यह कदम आवश्यक था। अगर कोई भी व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है तो उसके विरूद्ध कार्रवाई के साथ – साथ चलान का प्रावधान भी इसमें शामिल है।

वाहन चालकों की गलतियों की वजह से लोग कई बार सड़क दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। जिसमें कई लोगों को अपनी जान से हाथ भी धोना पड़ता हैं। जिसको देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के डीसीपी प्रशांत गौतम ने एक सख्त कदम उठाया है।

नोएडा – फीस माफ नहीं हुई तो निकालेंगे पैदल मार्च


काव्या बजाज, संवाददाता
नई दिल्ली। नोएडा के पेरैंटस एकता मंच ने सभी स्कूलों से कंपोजिट फीस माफ करने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि कोरोना महामारी की वजह से कई लोगों की नौकरियां भी चली गई हैं। जिससे उनकी आर्थिक स्थिति काफी खराब हो चुकी है।  आर्थिक तंगी की वजह से उन्होंने मांग की है कि स्कूल सिर्फ टयूशन फीस लेकर उनके बच्चों की कंपोजिट फीस को माफ कर दे।

कोरोना काल में सभी लोग ऑनलाइन प्लेटफोर्म पर निर्भर हो गए हैं। चाहे वह नौकरी हो या कोई सभा। यहां तक की बच्चों की पढ़ाई भी इसी के जरीए करवाई जा रही है। प्राइवेट स्कूल में बच्चों को पढ़ा रहे लोगों ने कहा कि संक्रमण के मुश्किल दौर में भी स्कूल उनसे फीस वसूल रहे हैं। जबकी सभी परिक्षाएं बच्चों ने घर पर ही बैठ कर दी है।

स्कूल और प्रशासन से आग्रह करते हुए पेरैंटस ने कहा कि फीस ना देने पर टीचर्स बच्चों को डरा – धमका कर उनसे फीस की मांग कर रहे हैं। जिससे उनकी मानसिक स्थिति पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। उनकी दशा और पढ़ाई पर कोई प्रभाव नहीं पड़े इसके लिए उन्होंने बच्चों को इसके बीच में नहीं लाने का आग्रह किया है। जिसके साथ—साथ उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं की जाती है, तो वे शांतिपूर्वक तरीके से 31 जनवरी 2021 को पैदल मार्च निकालेंगे और डीएम को अपना ज्ञापन सौपेंगे।

फरीदाबाद के सेक्टर 12 में हुई बैठक, केंद्रीय मंत्री हुए शामिल

जय प्रकाश भाटी, संवाददाता

दिल्ली एनसीआर। फरीदाबाद के विकास को लेकर आज केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर की अगुवाई में सैक्टर 12 के कन्वेंशन हाल में एक बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें फरीदाबाद के सभी विभागों के अधिकारियों के साथ सभी विधानसभाओं के विधायक और मंत्री शामिल रहे।

इस मौके पर केंद्रीय राज्य मंत्री ने बताया की इस बैठक में रूटीन के कार्यों के बारे में चर्चा हुई तो वही रोड सेफ्टी के बारे में भी चर्चा की गई। स्मार्ट सिटी फरीदाबाद में शामिल है इसलिए इस बैठक में स्मार्ट सिटी के बारे में भी चर्चा की गई है। बैठक की अगुवाई कर रहे केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने बताया कि फरीदाबाद स्मार्ट सिटी की दौड़ में शामिल है। इसलिए फरीदाबाद में चल रहे कार्यों के बारे में समीक्षा की गई है कि फरीदाबाद में चल रहे कार्य में कितनी तेजी आ रही है और किस गति से चल रहे हैं। इनकी समीक्षा की गई है और यदि उनमें कोई दिक्कत आ रही है तो उनको दूर करना इसके बारे में इस बैठक बात की गई।

उन्होंने कहा कि कोरोना के समय में सिविल वर्क की गति में थोड़ा सा ढीलापन जरूर आ गया था। लेकिन अब कोरोना जैसे धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है। उसी प्रकार से काम करने की गति बढ़ रही है। इस बैठक में निर्देश दिए गए हैं की काम की गति को तेज किया जाए। वही 26 जनवरी पर तमाम बॉर्डर पर किसानों के ट्रेक्टर मार्च को लेकर केंद्रीय मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में मामला विचाराधीन है और सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को सबको मानना चाहिए सभी को सम्मान करना चाहिए।