Monday, May 4, 2026
spot_img
Home Blog Page 1108

अन्नदाताओं के समर्थन में कल दिल्ली प्रदेश कांग्रेस राजनिवास का घेराव करेगी।

संवाददाता, दिल्ली दर्पण टीवी

नई दिल्ली।। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी के आह्वान पर कल दिल्ली प्रदेश कांग्रेस चौधरी अनिल कुमार के नेतृत्व में किसान आंदोलन के समर्थन में कल 15 जनवरी को किसान अधिकार दिवस मनाया जाएगा और किसान आंदोलन को समर्थन देने के लिए राजनिवास का घेराव किया जाएगा।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य और मुंडका विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी डा. नरेश ने बताया कि कल 15 जनवरी को सुबह 11 बजे दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चौधरी अनिल कुमार के नेतृत्व में कांगेसी कार्यकर्ता चंदगीराम अखाड़े से हजारों की संख्या में एकत्रित होकर राजनिवास की ओर कूच करेंगे।

डा. नरेश ने देश के अन्नदाताओं की आवाज को बुलंद करने के लिए ज्यादा से ज्यादा कार्यकताओं से एकजुट होने की अपील की है।मुंडका विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी नरेश लाकड़ा, जसबीर कराला, अनूप शौकीन, संजय चैधरी, राष्ट्र मजदूर कांग्रेस के सतबीर सिंह, ब्लाक अध्यक्ष डा. कुलदीप राणा, चांद मलिक, राजेश दूबे द्वारा राजनिवास का घेराव करने का आह्वान किया गया है।

16 जनवरी को मनाया जाएगा वैक्सीन क्रांति का नया त्योहार

शिवानी मोरवाल, संवाददाता

दिल्ली।। भारत एक उत्सव प्रधान देश माना जाता है। यहां वर्ष भर उत्सव चलते ही रहते हैं और हर देशवासी भारत में हर एक त्यौहार को धूम-धाम से मनाता है। इसी को लेकर जहां पूरे देश में आज मक्रर संक्रांति का त्यौहार मनाया जा रहा है तो वही ठीक दो दिन बाद यानी 16 जनवरी को देश में वैक्सिन क्रांति का त्यौहार मानाया जायेगा। 

आपको बता दें कि पिछले साल मार्च की शुरुआत में ही कोरोना का कहर देश के अंदर दिखने लग गया था। जिसके कारण मार्च में लॉकडाउन लागू कर दिया गया था। इससे लोगों को परेशानी तो हुई पर उम्मीद भी थी। एक दिन वैक्सिन आने के बाद सब ठीक हो जायेगा। वही अब दिन भी करीब आ चुका है जब भारत सबसे बड़े टीकाकरण के कार्यक्रम में शामिल होने वाला है। इसके लिए भारत ने अपनी पूरी तैयारी कर ली है।

देश में वैक्सिन बनने से लोगों मे काफी खुशी और उत्साह है। एक ऐसा ही उत्साह कर्नाटक के बेलगावी में देखने को मिला, जहां वैक्सिन वाली वैन को टीका लगाकर, नारियाल फोड़ और बैंड बाजा बजाकर स्वागत किया गया। जिसे देखकर ऐसा लग रहा था कि 16 जनवरी को भी एक त्यौहार के रुप में ही मनाया जायेगा।

अगर बात करे राजनीति की तो वैक्सिन की आवाज राजनीतिक गलियारों में गूंजनी शुरु हो गई है। इसके बाद कल ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि अगर केंद्र सरकार दिल्ली वालों को फ्री में वैक्सिन नहीं देती है तो दिल्ली सरकार सभी दिल्ली वालों को फ्री में वैक्सिन उपलब्ध करायेगी।

पंजाब और गुजरात के बाद दिल्ली में भी खुले स्कूल

शिवानी मोरवाल, संवाददाता

दिल्ली।। दिल्ली सरकार ने 10वीं और 12वीं कक्षाओं के लिए स्कूल खोलने आदेश दिए है। स्कूल 18 जनवरी से खोलें जायेंगे। बोर्ड परीक्षाओं की तैयारीयों को लेकर ये फैसला लिया गया है। इसका एलान बुधवार 13 जनवरी को किया गया। अगर बात करे पिछले साल की तो कोरोना को देखते हुए मार्च में सभी स्कूलों को बंद कर दिया गया था।

जिसके बाद से ही सभी बच्चे घर पर ही ऑनलाइन शिक्षा के माध्यम से पढ़ाई कर रहे थे। लेकिन साल 2021 ने दस्तक दी तो देश वासियों को कोरोना वैंक्सिन की खुशी मिली जिसके बाद से ही देश के सभी राज्यों ने स्कूलों को खोलने की अनुमति दी जाने लगी। सबसे पहले पंजाब फिर गुजरात और अब दिल्ली सरकार ने भी दसवीं और वाहरवी के बॉर्ड परीक्षाओं के लिए स्कूलों को खोलने की अनुमति दे दी है। हलांकि आपको बता दे की इससे पहले दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने बोला था। हमारी सरकार बोर्ड परीक्षाओं को देखते हुए विचार विमर्श कर ही रही है।

उस समय जब दिल्ली के शिक्षा मंत्री से सवाल किया गया की क्या दिल्ली में भी स्कूल खोले जायेंगा ? इस सवाल का जवाब देते हुए सिसोदिया ने बोला था की जब तक कोरोना वैंक्सिन नहीं आ जाती जब तक स्कूलों के हित में कोई फैसला नहीं लिया जायेगा। लेकिन इस फैसले पर छात्रों के अभिभावक और खुद छात्रों से उनकी राय पूछी गई तो अभिभावकों उनका साफ तौर पर यही कहना था की पूरे साल हमने अपने बच्चों को कोरोना से बचाकर घर में रखा है। अब हम स्कूल भेजकर अपने बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ नही कर सकते। अभिभावकों से जानकर तो यही लगा की अभी कोई भी माता-पिता अपने बच्चों के स्कूल भेजने के हित में नहीं है। लेकिन कुछ अभिभावक हमें ऐसे भी मिले जो सरकार के इस फैसले के समर्थंन में थे।  उनका कहना था की बच्चे घर पर पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पा रहे है । अगर  ऐसे में स्कूल को पढ़ाई के लिये खोला जाता है तो हम भेजने के लिए तैयार है।

इसी कड़ी में जब अभिभावकों के बाद दसवीं और बाहरवीं कक्षा के छात्रों से पूछा गया की स्कूल खुलने के बाद बॉर्ड परीक्षाओं की तैयारी के लिए क्या वे स्कूल जाना पंसद करेगें तो उनका यही कहना था की बॉर्ड परीक्षाएं तो हर साल होती पर अगर कोई बच्चा संक्रमित होता है। और उसी बच्चे की वजह से अगर किसी को भी कोई परेशानी होती है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? और साथ अगर सरकार को शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों के लिए कुछ करना है तो परीक्षाएं ऑनलाइन मॉड पर कराए । अभिभावक और बच्चों के विचार जानकर तो ऐसा ही लगा की इस कोरोना काल में कोई भी अपने बच्चों को स्कूल भेजने के ख्याल में नही है और ना ही बच्चे स्कूल जाने को तैयार है।

ठण्ड और कोहरे का लाभ उठाकर ज्वेलरी शो रूम में करोड़ों की लूट

संवाददाता, दिल्ली दर्पण टीवी

दिल्ली।। दिल्ली में प्रचंड ठण्ड और घने कोहरे का लाभ लुटेरें भी उठा रहें है। आज नार्थवेस्ट दिल्ली के पीतम पूरा मैन रोड पर रिलायंस ज्वेलर्स पर बदमाशों ने धावा बोला घटना करीब सुबह चार बजे की है एक ग्रे कलर की गाडी में करीब सात से आठ बदमाश आये और फ़िल्मी अंदाज में इस शोरूम के गार्ड को बंधक बनकर करोड़ों रुपये की ज्वेलरी लूटकर फरार हो गए।

आस पास के दुकानदारों में इसे लेकर बेहद चिंता और डर है । आस पास लगे सीसीटीवी कैमरों में बदमाशों की तसवीरें कैद है।

इस दूकान में यह कोइ पहली वारदात नहीं है। कुछ समय पहले ही इसी शोरूम में गार्ड को बंधक बनकर लूट की वारदात को अंजाम दिया जा चुका है। आज फिर हुयी लूट की वारदात ने सभी को चौंका दिया है।

लूट कितने की है और पर शोरूम मालिक बात करने से बच रहे है। मीडिया को भी नजदीक नहीं आने दिया जा रहा है। मामला नार्थवेस्ट जिला के थाना मौर्यएन्क्लेव पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और हर पहलू से मामले की जाँच कर रही है।

राजधानी दिल्ली तेरे और कितने नाम!

शिवानी मोरवाल, संवाददाता

नई दिल्ली।। वैसे तो दिल्ली के ऐतिहासिक नामों में इंद्रप्रस्थ आज भी सबसे लोकप्रिय नाम है, किंतु लोगों द्वारा इसे कई नामों से पुकारा जाता रहा है। उदाहरण के लिए दिल्ली में जब कोरोना का कहर बढ़ा तो दिल्ली को कोरोना वाली दिल्ली कहां गया।  इसी तरह से जब दिल्ली में प्रदूषण बढ़ा तब लोगों ने प्रदूषण वाली दिल्ली के नाम से भी पुकारा गया। अब जब दिल्ली की सफाई की बात आई तो दिलवालों की दिल्ली अब दिल्ली को कूड़े वाले दिल्ली के नाम से जाना जा रहा है। इसका कारण भी है, क्योंकि कूड़े वाले दिल्ली बनाने में गलती लोगों की नहीं बल्कि एमसीडी की है। वजह 7 महींनो से लगातार एमसीड़ी विभाग के कर्मचारी अपनी तंख्वाह नहीं मिलने से परेशान है।

इसे लेकर वे समय-समय हड़ताल करते रहे हैं, जिससे कूड़े उठाने से लेकर उसके निपटारे के काम में बाधा पहुंचती रही है। अब हालात इतने खराब हो चुकें है कि शायद ही कोई गली-सड़क का नुक्कड़ या मकानों के बीच का कोना नहीं बचा हो जहां कूड़ा नहीं पड़ा हो। पिछले  7 जनवरी से एमसीड़ी के कर्मचारियों ने अनिश्चिकालीन हड़ताल कर दी है। इनकी मांग सिर्फ और सिर्फ बकाये तन्ख्वाह के भुगतान को लेकर है।


जब इस संवाददाता ने हड़ताली सफाई कर्मचारियों से पूछा तब उन्होंने बताया कि पिछले 6 से 7 महींने से उनकी तन्ख्वाह नहीं आई है। उनकी शिकायत है कि सरकार कुछ भी सुनने को तैयार नहीं है। उन्होंने बताया कि हम एमसीडी के मेयरो से अपनी सैलरी मांगते है, तो वे कहते दिल्ली सरकार की तरफ से अभी नहीं आई है। हम कैसे दे दें। जब हम दिल्ली सरकार से गुहार लगाते है, तो वे भाजपा पर घोटाले का इल्जाम लगाकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।

जिससे अब एमसीडी के सभी कर्मचारी उनके बीच पिस रहे है। सब अपनी राजनीति रोटियां सेंक रहे है, किसी को यह नहीं पता कि एक कर्मचारी अपने घर को कैसे चला रहा है। अब दिल्ली कूड़े वाली दिल्ली बने या गंदगी की। हम तबतक अपने काम पर वापस नही लौटेंगे जबतक कि हमारा वेतन हमें नहीं मिल जाता।