Sunday, May 3, 2026
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डीडीए की नई हाउसिंग स्कीम लांच

संवाददाता, दिल्ली दर्पण टीवी

नई दिल्ली।। दिल्ली विकास प्राधिकरण नए साल पर पफ्लैटों का तोहफा लेकर आया है। डीडीए अपनी नई हाउसिंग स्कीम लॉन्च कर रहा है। करीब 1350 फ्लैट्स की इस स्कीम के लिए ऑनलाइन आवेदन डीडीए की वेबसाइट पर किए जा सकते हैं।

फ्लैट्स के लिए 2 जनवरी से 16 फरवरी तक आवेदन किया जा सकता है।फ्लैट्स की कीमत 27.5 लाख से 2.14 करोड़ रुपये तक है। स्कीम में आवेदन करने के लिए ईडब्ल्यूएस के लिए 25 हजार, एलआईजी के लिए एक लाख और एमआईजी और एचआईजी के लिए 2 लाख रुपये आवेदन शुल्क देना होगा। यह राशि रिफंडेबल होगी। स्कीम पूरी तरह ऑनलाइन होगी। इसके लिए डीडीए के नए सॉफ्टवेयर आवास  को विकसित किया गया है।

इस सॉफ्टवेयर की मदद से लोगों को आवेदन, पेमेंट और पजेशन तक ऑनलाइन मिलेगा। इस स्कीम में एचआईसी, एमआईजी और ईब्ल्यूएस कैटेगरी के हैं। ज्यादातर फ्लैट्स द्वारका, जसोला, मंगलापुरी, वसंत कुंज, रोहिणी आदि साइटों पर विभिन्न कैटेगरी के फ्लैट्स उतारे गए हैं। पहले से ही डवलप साइटों पर हैं इसलिए उम्मीद की जा रही है कि पिछली 3 स्कीमों से इन्हें बेहतर रिस्पांस मिलेगा। ज्यादातर फ्लैट्स एचआईसी, एमआईजी और ईब्ल्यूएस कैटेगरी के हैं।

इसके अलावा पिछली स्कीम के बचे हुए एलआईजी सेग्मेंट के कुछ फ्लैट्स भी स्कीम में शामिल किए गए हैं। फ्लैट के लिए अप्लाई करने से पहले लोग साइट पर जाकर सैंपल फ्लैट देख सकते हैं ताकि आवेदन से पहले वह लोकेशन और फ्लैट साइज, सुविधाओं को देख सकें। फ्लैट अलॉट हो जाने के बाद सरेंडर से बचने के लिए डीडीए ने यह सुविधा कुछ साल पहले शुरू की है। इस बार स्कीम में ज्यादातर फ्लैट्स नए हैं। मंगलापुरी, द्वारका और जसोला तीनों साइट पर ट्रांसपोर्ट काफी अच्छा है। मेट्रो स्टेशनों के पास ही यह साइटें हैं।

रैन बसेरा बना लोगों की आशा की किरण

काव्या बजाज, संवाददाता

नई दिल्ली।। दिल्ली में जिन लोगों के पास कोई घर नहीं है उनके लिए रैन बसेरे आशा की किरण बन कर आए है। इन जगहों पर बेसहारा लोगों को रहने के लिए जगह और खाना दिया जाता है। जैसा कि हम जानते है कि पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी होने की वजह से सर्दी का कहर दिल्ली में भी देखने को मिल रहा है। दिल्ली में चल रही शीत लहर ने सभी लोगों को ठिठुरने पर विवश कर दिया है। ऐसे में उन लोगों के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है जिनका रहने का कोई ठिकाना नहीं है।

शालीमार बाग के रैन बसेरे का जायज़ा लेने के बाद यह देखने को मिला कोरोना संक्रमण को देखते हुए वहां पर 20 लोगों के रहने की जगह थी लेकिन मौके पर वहां पर सिर्फ चार लोग ही मौजूद थे। महामारी से बचने के लिए लोगों को इमयूनिटी बढ़ाने की जरूरत है इसलिए उन्हें चाय में तरह – तरह की चीजे डाल कर दी जा रही है। साफ तौर पर वहां देखा जा सकता था कि किस तरह लोगों को ठंड से बचाने की सुविधाएं दी जा रही है।

संस्था के प्रमुख फैजान अहमद ने बातचीत के दौरान बताया कि उनकी टीम रात के समय लोगों को रेसक्यू करती है। इसके आगे उन्होंने बताया कि रेसक्यू के लिए क्लस्टर 9 और 5 के नाम से उनकी दो गाड़ियां इलाके का दौरा करती है और जरूरत मंद लोगों को यहां पर लाया जाता है। और उनके लिए रैन बसेरों में गद्दे, कंबल,  रौशनी, पानी, शौचालय, प्राथमिक चिकित्सा किट का इंतजाम भी किया हैं। इसके साथ – साथ लोगों के लिए वहां पर कुछ किताबें भी मौजूद है जिसे पढ़ कर लोग समय भी बिता सकते है। और इसका पूरा खर्च उनकी संस्था उठाती है।

जब हमने वहां पर मौजूद लोगों से बात करने की कोशिश की तो वहां पर रह रहे प्रियम कुमार का कहना था कि सर्दी में उन्हें दुविधाओं का सामना करना पड़ रहा था लेकिन रैन बसेरे में उन्हें उनकी जरूरत की सभी सुविधाएं दी जा रही है। जिसमें कंबल, गद्दे, से ले कर दो वक्त का रोटी की सहूलियत भी मौजूद है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि इन रैन बसेरों ने ठंड से उनकी जान बचाई है। और यह किसी उम्मीद की किरण से कम नहीं हैं।

हाई-फाई आंदोलन को वाई-फाई, विज्ञान भवन में किसान संगठनों और सरकार के बीच बैठकों की तारीख पर तारीख

संवाददाता, दिल्ली दर्पण टीवी

नई दिल्ली।। जैसे-जैसे किसान आंदोलनकारियों की केंद्र सरकार पर पकड़ मजबूत होती जा रही है, वैसे-वैसे पूरा आंदोलन एक मजमे में भी तब्दील होता दिख रहा है। सरकार के साथ छठी बार पांच घंटे की बैठक में महज दो बातों पर ही सहमति बन पाई। चार जनवरी को फिर से सरकार और किसान संगठनों के बीच मुख्य मांगों पर चर्चा होगी। यानि कि अगली तारीख के फैसले तक हजारों आंदोलनकारी किसान दिल्ली के सिंघु और टिकरी बाॅर्डर पर डटे रहेंगे।


हरियाणा एवं पंजाब के किसानों, जिसमें कुछ उत्तर प्रदेश के किसान भी हैं, इस शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन से भले ही 2011 के भ्रष्टाचार विरोधी अन्ना आंदोलन की याद ताजा हो गई हो, लेकिन यह तमाशा भी बन गया है। दिल्ली से बाहर के लोगों के मन में कुलबुलाने वाला सवाल है कि आखिर वे महीने भर बाद भी सर्दी के 1 से 4 डिग्री सेंटीग्रेड में मोर्चे पर कैसे डटे हुए हैं? इसके जवाब कई रूप में दिए जा रहे हैं।


आंदोलनकारी किसानों में 18 साल के जवान से लेकर 80 साल तक के बुजुर्गोंं की बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं। वे अनिश्चितकालीन धरने पर जमे हुए हैं। उनकी मांग नए किसान कानून को हटाने की है। एनडीए सरकार जबतक उसे हटा नहीं लेती तबतक वे डटे रहेंगे। हजारों की संख्या में आंदोलनकारी किसानों ने पूरी तैयारी के साथ हाइवे के किनारे डेढ-दो़ किलोमीटर तक लगी ट्रैक्टरों की ट्रालियों में बने अस्थाई टेंट को ही आशियाना बना लिया है।

   
   
वहां काफी चहल-पहल रहती है। जगह-जगह लंगर लगे हैं। खाने-नाश्ते का पूरा इंतजाम है। रोशनी है, रौनक है। पंजाब के विभिन्न इलाके से आए महिलाएँ और पुरुष सेवादार की भूमिका निभा रहे शुरुआत में आग को घेरकर खाना बनाने की कोशिश की गई। बाद में उन्होंने रोटियां सेंकने, खिचड़ी पकाने, काॅफी बनाने, गन्ने का रस निकालने आदि की मशीनें लगा ली हैं। सरसो की साग और मक्के की रोटियों,आलू पराठें के अलावा पिज्जा-बर्गर भी है। गांव से लाए गए वाटर टैंक हैं, तो तूंबा बजाकर ऊधम सिंह के बहादुरी के कारनामों के गाने गाए जा रहे हैं।

 
दूसरी तरफ प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए कँटीले तार बिछा दिए गए हैं। बालू से भरे ट्रक खड़े हैं और हाथों में बंदूक उठाए वर्दी पहने सैनिक गश्त लगा रहे हैं। उनके हाथ में आँसू गैस के गोले हैं। लेकिन, टिकरी और सिंघु बाॅर्डर पर दूसरी ओर किसान भी झंडे लहरा रहे हैं। आंदोलन स्थल पर सैलून, वाशिंग मशीन में कपड़े धोने और पानी गर्म करने के इंतजाम से लेकर अस्थाई स्टोर, कम्यूनिटी सेंटर, जिम और सैलून खोले गए हैं। एक तरह से किसान आंदोलन लोकतंत्र एक नए रंग में रंगा हुआ दिख रहा है, जिसमें उत्सव जैसा माहौल है।

एक नए रंग का ‘विरोध उत्सव’ बन गया है, जहां किसानों के समर्थन में उमड़ने वालों में अंदोलन के बदले स्वरूप को नजदीक से देखने और अनुभव करने वाले भी हैं। परिवार समेत बच्चे घूमने आ रहे हैं। आंदोलन स्थलों पर कहीं कोई तनाव नहीं, कोई हिंसा की बात नहीं है। सत्ता के विरोध का यह गांधीवादी तरीका सभी को लुभा रहा है। विरोध का एक शालीन तरीका नजर आ रहा है। महिला आंदोलनकारियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी लाठी लिए युवाओं पर है। अब यहाँ प्रतिरोध के पिन्ड यानी गाँव बन गए हैं।


स्कूल, कालेज, विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राओं, लेखक, कवि, सिंगर का लगातार आना-जाना बना हुआ है। देश की मशहूर शख्सियतों का भी आना जारी है। उनमें मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तक शामिल हैं। पुस्तकों की स्टाल सजी हैं। वहां सांस्ड्डतिक एकता की झांकी देखी जा सकती है। जाति, धर्म भूलकर कानून विरोधी नारे लगा रहे हैं। इन सब को कवरेज करने वालों में संस्थानिक मीडिया, सोशल मीडिया, यूट्यूबर से लेकर फिल्मकारों का भी जमावड़ा लगा हुआ है। हालांकि आंदोलनकारियों ने सेटेलाइट मीडिया के अधिकतर चैनलों को गोदी मीडिया का नाम देकर उसका बहिष्कार कर दिया है। उनकी पसंद सोशल मीडिया बन गए हैं और ट्राॅली टाइम्स नाम का अपना ही अखबार निकाल लिया है। प्रतिरोध से पैदा इस अखबार में यहाँ आए लोगों की कहानियाँ हैं। विरोध प्रदर्शन की जानकारियाँ हैं। किसानों या कैंपेन करने आए छात्र-छात्राओं के बनाए चित्र और उनकी लिखी कविताएँ हैं। समर्थकों और सहयोगियों की लिखी स्टोरी हैं। जो भी कुछ लिखना चाहता है, उसे इसमें जगह मिल रही है।


18 दिसंबर के पहले अंक में जसविंदर की लिखी स्टोरी ‘स्वेटर’ छपी थी। इसमें बीबी कही जानी वाली एक महिला की कहानी थी, जो हर दिन इस उम्मीद में स्वेटर बुन रही थी कि एक दिन में इसे पूरा कर लेंगी और फिर दूसरा शुरू कर देंगी। लेकिन, गाँव में सूचना का ऐलान करने वाले शख्स ने आवाज लगाई कि अगर उनके गाँव की कोई महिला विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेना चाहती हैं तो पहले गुरुद्वारे में हाजिरी लगाएं। बीबी ने स्वेटर बुनना छोड़ दिया और गुरुद्वारे की ओर चल पड़ीं। लोग उन्हें मनाते रहे कि आपको अस्थमा है। बहुत ज्यादा ठंड भी है। लेकिन वह नहीं मानीं। सीधे गुरुद्वारे की ओर से चल दीं।


उनकी बहू ने मजाक किया। बीबी आपका स्वेटर अब अधूरा रह जाएगा। सास ने पलट कर जवाब दिया, ‘अगर विरोध जताने नहीं गई तो अब तक जो बुना था, उसका बहुत कुछ उधड़ जाएगा- इसमें मेरे बेटे का सपना और तुम्हारे पिता की जोड़ी गई जमीन भी शामिल है।’  एक डेंटिस्ट, एक फिजियोथेरेपिस्ट, एक फिल्म राइटर, एक वीडियो डायरेक्टर, दो डाॅक्यूमेंट्री फोटो आर्टिस्ट और एक किसान ने मिलकर ट्राॅली टाइम्स निकालने के आइडिया पर काम करना शुरू किया था। अब इसके मास्टहेड के नीचे भगत सिंह का एक कोट लिखा है, ‘इंकलाब की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है।


अपने प्रदर्शन के शुरुआती दिनों में किसान मेनस्ट्रीम मीडिया में इसकी इकतरफा कवरेज से परेशान थे। उन्होंने कवरेज के लिए आए मेनस्ट्रीम मीडिया संस्थानों के कुछ पत्रकारों का विरोध शुरू किया। वे तख्ती लेकर उनके खिलाफ नारे लगाते दिखे। इन तख्तियों पर लिखा था- ‘गोदी मीडिया वापस जाओ।’  जब यह आंदोलन शुरू हुआ था तो सिंघु बाॅर्डर और टिकरी में शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं थी। किसानों को खुले में जाना पड़ रहा था। यह देख कर स्थानीय लोगों ने अपने घरों के शौचालय उनके लिए खोल दिए। लेकिन, कुछ ही दिनों में वहाँ मोबाइल शौचालय पहुँच गए। हरियाणा नगर निगम ने वहाँ ये टाॅयलेट लगाने शुरू किए। इसके अलावा कई एनजीओ ने वहाँ पोर्टेबल शौचालय और पीने के पानी की व्यवस्था शुरू की। किसानों के लिए टेंट भी लगाए गए।


सिंघु बाॅर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों को दिल्ली सरकार फ्री वाई-फाई की सुविधा प्रदान करने की घोषणा करने के बाद उनका आंदोलन और भी हाई-फाई बन गया है।  केजरीवाल सरकार ने सिंघु बाॅर्डर पर किसानों को नेटवर्क की समस्या का सामना करना की समस्या को देखते हुए किया है।   प्रदर्शनकारी किसानों में महिलाएं भी शामिल हैं। इसके अलावा दिन में कई व्यक्ति पूरे परिवार के साथ किसानों से मिलने आते हैं। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बाॅर्डर पर सुरक्षाकर्मियों की एक कंपनी महिला पुलिसकर्मियों की भी तैनात है। पुलिस के लिए महिलाओं की तैनाती यहां जरूरी है।

आप के दुर्गेश पाठक ने लगाया भाजपा पर भ्रष्टाचार का आरोप

काव्या बजाज, संवाददाता

नई दिल्ली।। आम आदमी पार्टी के नेता दुर्गेश पाठक ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी भ्रष्टाचार की आदी हो गई है। उनका कहना है कि एमसीडी ने कूड़े के पहाड़ों को हटाने के लिए मशीनें किराये पर ली थीं। जिस पर एक महीने का खर्च 6 लाख रुपए था। इसी हिसाब से भाजपा शासित एमसीडी अब तक 180 करोड़ रुपए किराया दे चुकी है। जिन मशीनों की बात की जा रही हैं उन सभी मशीनों का लागत मात्र 8.5 करोड़ रुपए है।

आरोपों के इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए अब भाजपा के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने आप पर पलट वार किया है और कहा है कि यह बहुत दुख की बात है कि आप ने नए साल की शुरुआत इस झूठ के साथ की है। उनका मानना है कि ये आरोप बेबुनियाद है क्योंकि एक मशीन की कीमत करीब 52 लाख रुपए की है।

आपको बता दें कि काफी समय से आप और भाजपा में आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला चल रहा है। आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर ये आरोप लगाया था कि उन्होंने 2500 करोड़ को घोटाला किया है जो कि दिल्ली के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला है। जिसके बाद भाजपा ने आप पर आरोप लगाते हुए कहा कि केजरीवाल ने एमसीडी के 13000 करोड़ का फंड रोक रखा है तो भाजपा 2500 करोड़ का घोटाला कैसे कर सकती हैं। भाजपा और आप में तकरार अभी भी जारी है। जिसमें फिलहाल आम जनता पिसने पर मजबूर है।

भारत नगर -वायरल वीडियो के आधार पर पुलिस ने चंद घंटों में दबोचे दरिंदे। सड़क पर सो रही बेटी के सामने ही माँ के साथ दरिंदगी ,अविवाहित बेटी भी गर्भवती

डिम्पल भारद्वाज, संवाददाता

 
नई दिल्ली।। दिल्ली में एक बार फिर दरिन्दगी का खेल देखा गया। रात के दो बजे एक महिला के साथ बलात्कार की घटना को अंजाम दिया गया। नार्थ वेस्ट दिल्ली के भारत नगर थाना इलाके में एक वीडियो वायरल हुआ जिसने पुलिस के होश उड़ा दिए। वीडियो में सड़क पर लेटी महिला और उसकी बेटी को जान से मारने की धमकी देकर बलात्कार करते दिखाया गया है। पुलिस ने उस व्यक्ति को खोज लिया जिसने वीडियो बनाया और अब उन दरिंदों की तलाश कर रही है।

देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर दरिन्दगी का खेल देखा गया। रात के दो बजे एक महिला के साथ बलात्कार की घटना को अंजाम दिया गया। नार्थ वेस्ट दिल्ली के भारत नगर थाना इलाके में एक वीडियो वायरल हुआ जिसने पुलिस के होश उड़ा दिए। वीडियो में सड़क पर लेटी महिला और उसकी बेटी को भारी पत्थर उठाकर जान से मारने की धमकी देकर बलात्कार करते दिखाया गया है। पुलिस ने महज चंद घंटों में न केवल लोकेशन की पहचान की और पीड़ित महिला को पहचान लिया बल्कि उस व्यक्ति को खोज लिया जिसने वीडियो बनाया। उनसे पूछताछ के बाद पुलिस ने उन दोनों सोनू और अमित दरिंदों को भी गिरफ्तार कर लिया है। इनमें एक जहांगीर पूरी का और दूसरा वज़ीर पुर जे जे कॉलोनी का ही रहने वाला है।

दिल्ली में रात को दरिंदे कैसे दरिंदगी पर उतारू हो जाते है वायरल वीडियो उसकी की बानगी है। न रिश्तों का लिहाज़ा, न उम्र का। वायरल वीडियो में टोपी पहने एक लड़का महिला को धमका रहा है। उस लड़के के हाथ में बड़ा पत्थर है जिससे वह महिला को मारने की धमकी दे रहा है। उसके बाद उससे जो किया वह बेहद शर्मनाम और डरावना है। यह वीडियो जब सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो पुलिस के होश उड़ गए। भारत नगर थाना पुलिस ने तुरंत इसकी जांच के लिए दर्जन भर से ज्यादा पुलिस कर्मी लगा दिए। करीब 40 लोगों से पूछताछ की तो पुलिस को वह शख्स मिल गया जिसने वीडियो बनाई थी। पुलिस उसे लेकर इलाके में घूमी तो वह महिला और उसकी बेटी भी मिल गयी। दरअसल इस 45 साल की महिला का अपने पति से झगड़ा चल रहा था। पति उसे छोड़कर गांव चला गया । लेकिन महिला और उसकी 20 वर्षीय बेटी नहीं गयी। वह किराये के मकान से सड़क पर आ गयी। वह सड़क पर सोती थी और कूड़ा बीनकर अपना और अपनी बेटी का पेट पाल रही थी।बीती रात करीब दो बजे इन पर इलाके के आवारा और नशेड़ी युवकों की नजर पडी और उसके बाद जो हुआ वीडियो में कैद है। पत्थर उठाकर मारने की धमकी से महिला को डरा धमका कर दरिंदों ने बेटी के सामने मां का बालात्कार कियाजो वीडियो में कैद है।

सड़क के सामने रह रहे एक युवक ने अपनी खिड़की से डरते-डरते इनका वीडियो बना लिया और एक सोशल वर्कर को दे दिया। प्रदीप नाम के इस युवक ने इसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इस वीडियो के सामने आते ही भारत नगर थाना पुलिस तुरंत हरकत में आई और महज चाँद घंटों में पीड़ित महिला की शिनाख्त कर आरोपियों को भी गिरफ्तार लिया। जिस युवक ने यह वीडियो बनाया वह यदि शोर मचाता तो शायद बलात्कार की घटना को रोका जा सकता था। लेकिन वह बहुत डरा हुआ है। डर अब उसके पूरे परिवार को भी है। की दरिंदगी करने वाले दोनों शख्स की तरफ से उसके बेटे के पर कोई हमला ना हो जाए। भारत थाना पुलिस ने मामला दर्ज़ कर लिया है। इस घटना की दुखद और चिंताजनक पहलु यह है की माँ के साथ दरिंदगी बेटी के समाने ही हो रही थी।

और मेडिकल जाँच में सामने आया है की उसकी 20 वर्षीय बेटी भी गर्भवती है। जबकि वह अविवाहित और मानसिक रुपए से बीमार भी है। बेटी के साथ कब बलात्कार हुआ या उसके पेट में बच्चा किसका है यह अभी जाँच का विषय है। लेकिन जिस देश की राजधानी दिल्ली में बेटी बचाओ -बेटी पढ़ाओं के नारे जोर शोर से लगते है , महिलाओं की सुरक्षा का दावा दिल्ली में होता है उस दिल्ली में माँ बेटी लावारिश जैसे जिंदगी गुजार रही है। इस कड़कड़ाती ठंड सोने पर मजबूर है ऊपर से इस तरह की दरिंदगी और हैवानियत इनके साथ होती है तो यह सरकार और समाज के लिए शर्मनाक है।