Saturday, May 2, 2026
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जिम ट्रेनर का ‘लग्जरी’ शौक और चोरी का खेल: क्लाइंट्स पर रौब जमाने के लिए चुराता था कारें; दिल्ली पुलिस ने जयपुर से किया गिरफ्तार

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे शातिर कार चोर को गिरफ्तार किया है, जिसकी जीवनशैली और वारदात का तरीका जानकर पुलिस भी हैरान रह गई। पकड़ा गया आरोपी मोहम्मद अशरफ खान पेशे से एक ग्रेजुएट जिम ट्रेनर है, जो अपने क्लाइंट्स के बीच रसूख दिखाने और उनकी डिमांड पूरी करने के लिए लग्जरी कारों की चोरी करता था। क्राइम ब्रांच की एआरएससी (ARSC) टीम ने एक गुप्त सूचना के आधार पर उसे जयपुर से दबोचा है।

रौब जमाने के लिए चोरी की लग्जरी कारों का इस्तेमाल

पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि आरोपी अशरफ खान को लग्जरी कारों का बेहद शौक था। वह जिम में आने वाले अपने रईस क्लाइंट्स के सामने खुद को बड़ा आदमी दिखाने के लिए चोरी की हुई नई लग्जरी कारों का इस्तेमाल करता था। इतना ही नहीं, अगर कोई क्लाइंट किसी खास लग्जरी कार की डिमांड करता, तो वह उसे चोरी की कार सप्लाई भी कर देता था। उसके पास से पुलिस ने चोरी की कई नई लग्जरी कारें बरामद की हैं।

सीक्रेट इनपुट पर जयपुर में छापेमारी

क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि दिल्ली से चोरी हुई लग्जरी कारों का एक सिंडिकेट जयपुर से ऑपरेट हो रहा है। इसके बाद दिल्ली पुलिस की एआरएससी टीम ने जाल बिछाया और आरोपी मोहम्मद अशरफ खान को उसके ठिकाने से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी मूल रूप से जयपुर का ही रहने वाला है और अपनी शैक्षणिक योग्यता (ग्रेजुएशन) का इस्तेमाल तकनीकी रूप से कारों के लॉक तोड़ने और पहचान छिपाने में करता था।

नेटवर्क की तलाश जारी

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अशरफ ने अब तक दिल्ली-एनसीआर से कितनी कारें चोरी की हैं और इस धंधे में उसके साथ और कौन-कौन शामिल है। पुलिस को शक है कि वह एक बड़े अंतर्राज्यीय वाहन चोर गिरोह का हिस्सा हो सकता है, जो दिल्ली से गाड़ियां चुराकर राजस्थान और अन्य राज्यों में खपाता था।

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दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच का बड़ा एक्शन: ऑनलाइन निवेश के नाम पर 47.20 लाख की ठगी करने वाले 3 शातिर गिरफ्तार; कमीशन पर ‘बैंक खाते’ देने वाले गैंग का पर्दाफाश

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने फर्जी ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को ठगने वाले एक अंतर्राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस गिरोह ने शेयर मार्केट और आईपीओ (IPO) में भारी मुनाफे का लालच देकर एक व्यक्ति से करीब 47.20 लाख रुपये की धोखाधड़ी की थी। पुलिस ने इस मामले में हरियाणा, जयपुर और दिल्ली से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

शेयर बाजार और IPO के नाम पर देते थे झांसा

पुलिस के मुताबिक, ठगों का यह गिरोह लोगों को शेयर मार्केट, इक्विटी और आईपीओ में निवेश के जरिए रातों-रात अमीर बनने का सपना दिखाता था। इसके लिए वे फर्जी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और ऐप्स का इस्तेमाल करते थे। एक पीड़ित इनके झांसे में आकर धीरे-धीरे अपनी जमा पूंजी निवेश करता गया, लेकिन जब उसे ठगी का अहसास हुआ, तब तक वह लाखों रुपये गंवा चुका था।

कमीशन पर लिए जाते थे बैंक खाते और सिम कार्ड

जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि ठगी की रकम को ‘ऑरेंज हर्ब्स प्राइवेट लिमिटेड’ नाम के एक बैंक खाते में ट्रांसफर किया गया था। यह खाता पहले से ही 12 अलग-अलग साइबर ठगी के मामलों में शामिल पाया गया। यह गिरोह पुलिस की नजर से बचने के लिए आम लोगों और कंपनियों के बैंक खाते 25% से 40% कमीशन पर लेते थे, ताकि पैसे को कई लेयर्स में घुमाया जा सके।

गिरफ्तार आरोपियों का प्रोफाइल और भूमिका:

क्राइम ब्रांच ने कड़ी मशक्कत के बाद इन तीन आरोपियों को दबोचा:

  • विशाल चौहान (जींद, हरियाणा): इसने अपना बैंक खाता, सिम कार्ड और दस्तावेज महज 50 हजार रुपये के लालच में गिरोह को दिए थे।
  • ऋत्विक यादव (जयपुर, राजस्थान): यह गिरोह में ‘मिडलमैन’ (बिचौलिया) की भूमिका निभाता था, जो बैंक किट और सिम कार्ड इकट्ठा कर मुख्य आरोपियों तक पहुँचाता था।
  • प्रियाल प्रताप यादव (मैनपुरी, यूपी): इसे दिल्ली के किंग्सवे कैंप इलाके से गिरफ्तार किया गया। इसके पास से ठगी में इस्तेमाल मोबाइल फोन बरामद हुआ है।

बड़े नेटवर्क की तलाश जारी

पूछताछ में खुलासा हुआ है कि ये तीनों एक बड़े संगठित साइबर सिंडिकेट का हिस्सा हैं। पुलिस अब इस गैंग के मुख्य सरगनाओं और अन्य सदस्यों की तलाश में हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ सहित कई राज्यों में छापेमारी कर रही है। फिलहाल दो आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और तीसरे से पूछताछ जारी है।

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वजीरपुर में मातम: जर्जर मकान का छज्जा गिरने से 5 साल के मासूम की मौत, 10 वर्षीय बच्ची अस्पताल में लड़ रही जिंदगी की जंग

नई दिल्ली (दिल्ली दर्पण टीवी): उत्तरी दिल्ली के वजीरपुर जेजे कॉलोनी में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहां एक जर्जर मकान का छज्जा गिरने से 5 साल के एक मासूम बच्चे की जान चली गई। इस हादसे ने न केवल एक मां की गोद उजाड़ दी, बल्कि इलाके में प्रशासन और मकान मालिकों की लापरवाही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

खेलते समय सिर पर गिरा मौत का मलबा

हादसा वजीरपुर जेजे कॉलोनी के जी-ब्लॉक में मद्रासी मंदिर के सामने हुआ। जानकारी के मुताबिक, दो मंजिला पुराना मकान काफी समय से जर्जर हालत में था। शनिवार को जब बच्चे घर के पास खेल रहे थे, तभी अचानक मकान का छज्जा भरभरा कर गिर पड़ा। मलबे की चपेट में आने से 5 साल का मासूम बुरी तरह दब गया। स्थानीय लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद बच्चों को मलबे से बाहर निकाला, लेकिन तब तक मासूम को गंभीर चोटें आ चुकी थीं।

मां की चीखों से दहला इलाका

हादसे के बाद इलाके में चीख-पुकार मच गई। अपने लाल को मलबे के नीचे तड़पता देख मां का बुरा हाल था। चश्मदीदों ने बताया कि मलबा गिरने के कुछ ही सेकंड के भीतर खुशियां मातम में बदल गईं। घायल बच्चों को तुरंत दीप चंद बंधु अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने 5 साल के बच्चे को मृत घोषित कर दिया। वहीं, 10 साल की एक अन्य बच्ची गंभीर रूप से घायल है और फिलहाल अस्पताल में अपनी जिंदगी के लिए संघर्ष कर रही है।

प्रशासन और मकान मालिक की लापरवाही पर उठे सवाल

हादसे की सूचना मिलते ही पूर्व निगम पार्षद चित्रा विद्यार्थी और भारत नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इलाके में कई मकान जर्जर हालत में हैं, लेकिन न तो मकान मालिक उनकी मरम्मत कराते हैं और न ही प्रशासन इन खतरनाक ढांचों पर कोई कार्रवाई करता है। गरीबी के कारण कई परिवार अपनी जान जोखिम में डालकर इन ‘मौत के घरों’ में रहने को मजबूर हैं

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35 साल बाद इंसाफ: दिल्ली पुलिस ने सुलझाया 1991 का सनसनीखेज मर्डर केस; लुधियाना से दबोचा गया ‘भगोड़ा’ किराएदार

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने साढ़े तीन दशक पुराने एक खौफनाक कत्ल की गुत्थी को सुलझाते हुए बड़ी कामयाबी हासिल की है। इंटर स्टेट सेल (ISC) की टीम ने 35 साल से फरार चल रहे हत्यारोपी को पंजाब के लुधियाना से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी साल 1991 में वारदात को अंजाम देने के बाद से ही अपनी पहचान छिपाकर देश के अलग-अलग शहरों में भटक रहा था।

क्या थी 1991 की वो खौफनाक वारदात?

यह मामला 2 अगस्त 1991 का है। पूर्वी दिल्ली के त्रिलोकपुरी (वेस्ट विनोद नगर) इलाके में एक घर के अंदर 55 वर्षीय महिला और उनके 20 वर्षीय बेटे पर जानलेवा हमला हुआ था। आरोपी ने धारदार हथियार (चॉपर) से महिला की गर्दन पर ताबड़तोड़ वार कर उसे मौत के घाट उतार दिया था, जबकि बेटा इस हमले में गंभीर रूप से घायल हो गया था। जांच में पता चला कि यह हत्या घर के ही किराएदार छवि लाल वर्मा ने की थी।

लूट के इरादे से किया था कत्ल

डीसीपी क्राइम ब्रांच के मुताबिक, पूछताछ में आरोपी छवि लाल ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उसने बताया कि मकान मालकिन का पति विदेश में रहता था, इसलिए उसे लगा कि घर में काफी नकदी और जेवरात होंगे। लूटपाट के इरादे से उसने हमला किया, लेकिन जब मां-बेटे ने विरोध किया, तो उसने बेरहमी से महिला की हत्या कर दी। 1996 में कोर्ट ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था।

6 महीने की मेहनत और 4 राज्यों में तलाश

क्राइम ब्रांच की टीम पिछले छह महीनों से इस ठंडे पड़े (Cold Case) मामले पर काम कर रही थी। पुलिस ने आरोपी के पैतृक गांव सुल्तानपुर (यूपी) और उसके रिश्तेदारों के यहाँ कई बार छानबीन की। आखिरकार 10 अप्रैल 2026 को पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस के जरिए उसे लुधियाना में ट्रेस किया और गिरफ्तार कर लिया।

बच्चों की शादियों में भी नहीं गया आरोपी

फरारी के 35 सालों के दौरान छवि लाल पकड़े जाने के डर से कभी अपने गांव नहीं लौटा। वह कोलकाता, मुंबई, नागपुर और गोवा जैसे शहरों में पहचान छिपाकर मजदूरी करता रहा। उसने खुद को अपने परिवार से इतना दूर कर लिया था कि वह अपने बच्चों की शादियों तक में शामिल नहीं हुआ। फिलहाल पुलिस आरोपी को दिल्ली ले आई है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

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“एक थी रेखा गुप्ता…” – शालीमार बाग के कायाकल्प की वह कहानी, जिसे आने वाली पीढ़ियां गर्व से सुनाएंगी

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता दिल्ली की राजनीति में विकास और मानवता के समन्वय की एक ऐसी मिसाल कायम हो रही है जिसे इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज किया जाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की विधानसभा ‘शालीमार बाग’ आज केवल एक रिहायशी इलाका नहीं, बल्कि 10 हज़ार करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं के साथ दिल्ली के भविष्य का सबसे आधुनिक चेहरा बनने जा रहा है। जिस तेजी और संकल्प के साथ यहाँ बुनियादी ढांचे का कायाकल्प हो रहा है, उसे देखकर यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि भविष्य में लोग इसे एक ‘लेजेंड’ की तरह याद करेंगे और कहेंगे— “एक थी रेखा गुप्ता”, जिन्होंने शालीमार बाग को फर्श से अर्श तक पहुंचा दिया।

संवेदना की मिसाल: विकास के लिए नहीं उजड़े 500 आशियाने
इस विकास गाथा का सबसे बड़ा सस्पेंस और समाधान ‘मानवतावादी निर्णय’ में छिपा है। सड़क चौड़ीकरण के पुराने प्रोजेक्ट में करीब 25 मीटर का कब्जा हटाया जाना था, जिसकी जद में 500 से ज्यादा घर आ रहे थे। लेकिन मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के व्यक्तिगत हस्तक्षेप के बाद राजस्व विभाग ने रणनीति बदली। अब इस कब्जे को घटाकर मात्र 10.10 मीटर कर दिया गया है, जिससे 30 मीटर चौड़ी सड़क का रास्ता भी साफ हो गया और सैकड़ों परिवारों की छत भी सुरक्षित रही।

मुनक नहर: 5000 करोड़ का एलिवेटेड रोड और भव्य छठ घाट
शालीमार बाग की कनेक्टिविटी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने के लिए मुनक नहर पर करीब 5000 करोड़ रुपये की लागत से एक एलिवेटेड रोड का निर्माण हो रहा है।

नया रूट: यह रोड इंद्रलोक से होते हुए अर्बन एक्सटेंशन रोड-II (UER-II) को जोड़ेगा।

सांस्कृतिक वैभव: वर्षों से उपेक्षित मुनक नहर के किनारों पर स्थायी पक्के छठ घाट और आधुनिक पार्क बनाए जा रहे हैं।

एनएसपी और नेहरू प्लेस से भी भव्य बनेगा नया हब
शालीमार बाग को दिल्ली का अगला बड़ा कमर्शियल और डेटा सेंटर हब बनाने की तैयारी है:

FRA में 5 गुना वृद्धि: यहाँ का FRA (Floor Area Ratio) 100 से बढ़ाकर 500 कर दिया गया है, जिससे गगनचुंबी व्यापारिक इमारतें बन सकेंगी।

ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर: मैक्स हॉस्पिटल के बगल में नया सरकारी अस्पताल, अत्याधुनिक स्कूल, डेटा मैनेजमेंट सेंटर और विश्व स्तरीय होटल इस इलाके की ‘प्रोफ़ाइल’ बदल देंगे।

भारत मंडपम की तर्ज पर कन्वेंशन सेंटर: द्वारका के यशोभूमि की तरह यहाँ एक विशाल कन्वेंशन सेंटर और पासपोर्ट ऑफिस बनेगा।

भविष्य का ‘क्राउन ज्वेल’
आउटर रिंग रोड से सीधा जुड़ाव और मुनक नहर का सौंदर्यीकरण शालीमार बाग को यूरोप के किसी आधुनिक शहर जैसा लुक देगा। यह केवल ईंट-पत्थर का विकास नहीं है, बल्कि एक नेता के अपने क्षेत्र के प्रति समर्पण की पराकाष्ठा है। जब ये सभी प्रोजेक्ट्स पूर्ण होंगे, तब दुनिया देखेगी कि कैसे एक विजनरी नेतृत्व ने एक साधारण इलाके को दिल्ली का “क्राउन ज्वेल” (ताज का रत्न) बना दिया।

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