Saturday, May 2, 2026
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पश्चिम एशिया संकट: व्यापार और MSME पर मंडराया खतरा, कैट ने वित्त मंत्री से की ‘टास्क फोर्स’ के गठन की मांग

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों ने भारतीय व्यापार जगत की चिंता बढ़ा दी है। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने इस संकट से घरेलू व्यापार और विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को लेकर केंद्र सरकार को आगाह किया है। कैट के राष्ट्रीय महामंत्री और सांसद श्री प्रवीन खंडेलवाल ने केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर तत्काल राहत उपायों और एक विशेष ‘टास्क फोर्स’ बनाने का आग्रह किया है।

प्रधानमंत्री के प्रयासों की सराहना, लेकिन भविष्य की चिंता
श्री खंडेलवाल ने पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि सरकार की सक्रियता के कारण अब तक वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की आपूर्ति श्रृंखला स्थिर बनी हुई है। हालांकि, पश्चिम एशिया के ताजा तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने की आशंका है। इसका सीधा असर पेट्रोकेमिकल्स, फार्मा, प्लास्टिक, टेक्सटाइल, फर्टिलाइजर और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर पड़ेगा।

निर्यातकों और MSME के सामने दोहरी चुनौती
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी.सी. भरतिया ने बताया कि शिपमेंट में देरी, रूट परिवर्तन और बीमा प्रीमियम में बढ़ोतरी से निर्यातकों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि बढ़ती लागत और कार्यशील पूंजी (Working Capital) पर बढ़ते दबाव के कारण MSME क्षेत्र के मुनाफे में कमी और ऋण भार बढ़ने की गंभीर चिंता है।

राहत उपायों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
व्यापारी नेताओं ने सरकार से निम्नलिखित राहत कदमों की मांग की है:

कर्ज राहत: MSME को ऋण चुकाने के लिए अतिरिक्त समय और विशेष क्रेडिट गारंटी योजना।

ब्याज सब्सिडी: युद्ध से बुरी तरह प्रभावित उद्योगों को ब्याज में छूट।

निर्यात सहायता: निर्यातकों के लिए फ्रेट (माल ढुलाई) और बीमा में वित्तीय सहायता एवं त्वरित रिफंड।

मूल्य नियंत्रण: ईंधन और कच्चे माल की कीमतों की निरंतर निगरानी और स्थिरीकरण।

‘ इम्पैक्ट असेसमेंट टास्क फोर्स’ का प्रस्ताव
कैट ने सुझाव दिया है कि एक “वेस्ट एशिया इम्पैक्ट असेसमेंट एवं रिस्पॉन्स टास्क फोर्स” का गठन किया जाए। इसमें संबंधित मंत्रालयों, आरबीआई और व्यापार संगठनों के विशेषज्ञों को शामिल किया जाए, जो स्थिति का वास्तविक समय पर आकलन कर तुरंत नीतिगत निर्णय ले सकें। श्री खंडेलवाल ने विश्वास जताया कि समय पर उठाए गए कदम ही आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करेंगे।

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शराब घोटाला मामला: पत्नी सुनीता केजरीवाल के साथ दिल्ली हाई कोर्ट पहुँचे अरविंद केजरीवाल; जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच के सामने खुद रखेंगे अपना पक्ष

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल सोमवार (6 अप्रैल 2026) को अपनी पत्नी सुनीता केजरीवाल के साथ दिल्ली उच्च न्यायालय पहुँचे। केजरीवाल कथित शराब घोटाले से जुड़े सीबीआई (CBI) के मामले में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच के समक्ष पेश हुए हैं। इस दौरान कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम देखे गए और बड़ी संख्या में समर्थक भी मौजूद रहे।

खुद करेंगे अपनी पैरवी (In-Person Argument)

सूत्रों के मुताबिक, इस सुनवाई की सबसे बड़ी बात यह है कि अरविंद केजरीवाल इस मामले में किसी वकील के बजाय स्वयं (In-Person) अपनी दलीलें पेश कर सकते हैं। हाल ही में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी एक मामले में खुद कोर्ट में पक्ष रखा था, और अब केजरीवाल भी उसी राह पर चलते नजर आ रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

यह सुनवाई सीबीआई (CBI) की उस याचिका पर हो रही है, जिसमें जांच एजेंसी ने निचली अदालत (राउज एवेन्यू कोर्ट) के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों को दोषमुक्त (Discharge) कर दिया गया था।

  • 27 फरवरी 2026 को ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल और अन्य को क्लीन चिट देते हुए कहा था कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं हैं।
  • सीबीआई ने इस फैसले को ‘त्रुटिपूर्ण’ बताते हुए हाई कोर्ट में चुनौती दी है।

बेंच बदलने की मांग कर सकते हैं केजरीवाल

चर्चा यह भी है कि अरविंद केजरीवाल जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच से इस मामले को किसी अन्य बेंच में ट्रांसफर करने की गुजारिश कर सकते हैं। केजरीवाल और आम आदमी पार्टी पहले भी जस्टिस शर्मा की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए ‘रिक्यूजल’ (Recusal) की अर्जी दे चुके हैं। इससे पहले उन्होंने मुख्य न्यायाधीश से भी यह मांग की थी, जिसे तब खारिज कर दिया गया था।

पत्नी सुनीता केजरीवाल का साथ

सुनवाई के दौरान सुनीता केजरीवाल का साथ रहना राजनीतिक गलियारों में एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में जब भी केजरीवाल कानूनी संकट में रहे हैं, सुनीता केजरीवाल ने पार्टी और परिवार के मोर्चे पर सक्रिय भूमिका निभाई है।

अदालत में फिलहाल दलीलें जारी हैं और सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या हाई कोर्ट निचली अदालत के बरी करने के फैसले को बरकरार रखता है या मामले में नया मोड़ आता है।

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इटावा: ट्रेन की चेन खींचकर भाग रहा था GRP का ‘दबंग’ सिपाही, RPF ने घेराबंदी कर दबोचा; अनुशासनहीनता पर हुआ सस्पेंड

इटावा: रेलवे की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाने वाले खाकीधारी ही जब नियमों की धज्जियां उड़ाने लगें, तो सवाल उठना लाजमी है। उत्तर प्रदेश के इटावा रेलवे स्टेशन पर एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहाँ राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) के एक सिपाही ने बिना किसी आपातकालीन स्थिति के सुपरफास्ट स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एक्सप्रेस की वैक्यूम (चेन पुलिंग) कर दी। इतना ही नहीं, घटना के बाद भाग रहे सिपाही को रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवानों ने दौड़कर पकड़ लिया।

सुपरफास्ट ट्रेन को बीच रास्ते रोका

जानकारी के मुताबिक, यह घटना उस समय हुई जब स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एक्सप्रेस इटावा से गुजर रही थी। इस ट्रेन का यहाँ स्टॉपेज (ठहराव) नहीं था, लेकिन सिपाही को शायद यहीं उतरना था। अपने रसूख और पद का गलत इस्तेमाल करते हुए सिपाही ने चेन खींचकर ट्रेन को रोक दिया। अचानक ट्रेन रुकने से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई और रेलवे के परिचालन तंत्र में भी हड़कंप मच गया।

RPF और GRP के बीच ‘लुका-छिपी’ का खेल

जैसे ही ट्रेन रुकी, ड्यूटी पर तैनात RPF के जवान हरकत में आ गए। उन्होंने देखा कि एक व्यक्ति ट्रेन से उतरकर तेजी से भागने की कोशिश कर रहा है। RPF की टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए घेराबंदी की और भाग रहे शख्स को धर दबोचा। पकड़े जाने पर पता चला कि वह कोई आम यात्री नहीं, बल्कि GRP का ही एक सिपाही है।

अनुशासन का डंडा: सिपाही सस्पेंड

एक पुलिसकर्मी द्वारा सरेआम कानून तोड़ने की इस घटना को रेल प्रशासन और पुलिस विभाग ने बेहद गंभीरता से लिया है। उच्च अधिकारियों के संज्ञान में मामला आने के बाद आरोपी GRP जवान को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया है। विभागीय जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं कि आखिर सिपाही ने किस वजह से और किस अधिकार से ट्रेन की चेन पुलिंग की।

यात्रियों की सुरक्षा और नियमों का उल्लंघन

रेलवे नियमों के मुताबिक, बिना किसी ठोस कारण के चेन पुलिंग करना एक दंडनीय अपराध है। इस मामले ने एक बार फिर वर्दीधारियों के व्यवहार और रेलवे में समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए हैं। RPF की इस कार्रवाई की सराहना हो रही है, क्योंकि उन्होंने बिना किसी दबाव के नियम तोड़ने वाले पुलिसकर्मी पर सख्त एक्शन लिया।

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उत्तम नगर में सनसनी: बंद कमरे में मिले दो किराएदारों के शव; शरीर पर चोट का एक भी निशान नहीं, मौत की गुत्थी सुलझाने में जुटी FSL

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली के उत्तम नगर (मोहन गार्डन) इलाके में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक ही कमरे के अंदर से दो किराएदारों के संदिग्ध हालात में शव बरामद हुए। मेट्रो पिलर नंबर 743 के पास स्थित एक मकान में हुई इस घटना ने इलाके में दहशत पैदा कर दी है। पुलिस को शुरुआती जांच में मृतकों के शरीर पर संघर्ष या चोट का कोई बाहरी निशान नहीं मिला है, जिससे यह मामला एक अनसुलझी पहेली बन गया है।

शाम 6:55 बजे मिली सूचना, मौके पर पहुँची क्राइम ब्रांच

डीसीपी (DCP) कौशल पाल के अनुसार, रविवार शाम करीब 6:55 बजे पुलिस कंट्रोल रूम (PCR) को एक कॉल मिली थी, जिसमें मकान के अंदर दो शव पड़े होने की जानकारी दी गई। सूचना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस के साथ-साथ क्राइम ब्रांच और फॉरेंसिक (FSL) की विशेषज्ञों की टीम भी तुरंत मौके पर पहुँच गई। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से फिंगरप्रिंट्स और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए हैं।

कौन थे मृतक?

पुलिस ने मृतकों की पहचान 50 वर्षीय देवेंद्र और 48 वर्षीय अमित कुमार के रूप में की है। ये दोनों पिछले काफी समय से मोहन गार्डन निवासी 65 वर्षीय नरेश के मकान में किराए पर रह रहे थे। पड़ोसियों के अनुसार, दोनों का स्वभाव काफी मिलनसार था और उनका किसी के साथ कोई विवाद नहीं था।

रहस्यमयी मौत: न चोट, न शोर

इस दोहरी मौत ने पुलिस को भी उलझा दिया है। घटनास्थल का निरीक्षण करने पर पुलिस को न तो कमरे का सामान बिखरा मिला और न ही मृतकों के शरीर पर किसी धारदार हथियार या हाथापाई के निशान मिले। बाहरी चोट न होने के कारण पुलिस कई पहलुओं पर जांच कर रही है, जिसमें ज़हर (Poisoning), साइलेंट हार्ट अटैक या दम घुटने (Suffocation) जैसे कयास लगाए जा रहे हैं।

BNSS की धारा 194 के तहत मामला दर्ज

पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सुरक्षित मोर्चरी में रखवा दिया है। डीसीपी ने बताया कि पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 194 के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस अब मकान मालिक और पड़ोसियों से पूछताछ कर रही है, साथ ही इलाके के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि घटना से पहले कमरे में कोई बाहरी व्यक्ति तो नहीं आया था।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी नज़रें

अब सबकी निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो मौत के असली कारणों का खुलासा करेगी। क्या यह प्राकृतिक मौत है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश, यह रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा।

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जनकपुरी DJB हादसा: कोर्ट में दिल्ली पुलिस और सरकार बेनकाब? सौरभ भारद्वाज का बड़ा आरोप— “सबूत मिटाने के लिए CCTV को बताया खराब”

नई दिल्ली: दिल्ली के जनकपुरी में दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के खुले गड्ढे में गिरकर हुई युवक की मौत के मामले में सियासत और कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और मंत्री सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली पुलिस और भाजपा नेताओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि इस पूरे मामले में दोषियों को बचाने के लिए बड़े स्तर पर ‘कवर-अप’ (साजिश) की जा रही है। उन्होंने कोर्ट की कार्यवाही का हवाला देते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

CCTV फुटेज पर पुलिस का जवाब: “कैमरे काम नहीं कर रहे थे”

सौरभ भारद्वाज के अनुसार, जब कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस (DCP) से घटनास्थल और संबंधित थाने की सीसीटीवी फुटेज जमा करने को कहा, तो पुलिस ने बेहद चौंकाने वाला जवाब दिया। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि उस समय CCTV कैमरे काम नहीं कर रहे थे (CCTV was not functional)। सौरभ भारद्वाज ने इसे झूठ करार देते हुए कहा कि यह जानबूझकर महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश है ताकि असली सच्चाई सामने न आ सके।

ठेकेदार की गिरफ्तारी का ‘फर्जी’ सर्च ऑपरेशन?

वीडियो में एक और बड़ा खुलासा करते हुए सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि जिस ठेकेदार पर इस मौत की जिम्मेदारी है, वह 6 तारीख से ही पुलिस स्टेशन में मौजूद था। लेकिन पुलिस ने अपनी छवि चमकाने और मामले को घुमाने के लिए कागजों में यह दिखाया कि उन्होंने एक बड़ा ‘सर्च ऑपरेशन’ चलाया और कड़ी मशक्कत के बाद 7 तारीख को उसे गिरफ्तार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने ठेकेदार को कागजी कानूनी दांव-पेच तैयार करने के लिए एक दिन का अतिरिक्त समय दिया।

भाजपा नेताओं पर ‘क्लीन चिट’ देने का आरोप

सौरभ भारद्वाज ने सीधे तौर पर भाजपा नेता आशीष सूद और प्रवेश वर्मा पर निशाना साधते हुए कहा कि ये नेता घटना के पहले दिन से ही सरकारी विभागों और ठेकेदार का बचाव कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया, “जब एक मासूम की जान गई है, तो भाजपा नेता उस लापरवाह ठेकेदार को क्लीन चिट क्यों दे रहे हैं? क्या भाजपा दोषियों के साथ खड़ी है?”

पुलिस और LG पर सीधा हमला

मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली पुलिस सीधे केंद्र सरकार और उपराज्यपाल (LG) के अधीन है, इसलिए वह भाजपा नेताओं के दबाव में काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की इस ढिलाई और लापरवाही के कारण ही दिल्ली की सड़कों पर ऐसे खूनी गड्ढे बने हुए हैं। उन्होंने मांग की है कि इस मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो और दोषी पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाए।

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