Saturday, May 2, 2026
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मौत का सौदागर ‘बाबा श्याम मेडिकोज’: दिल्ली में नकली दवाइयों के बड़े साम्राज्य का भंडाफोड़; 6 गिरफ्तार, मुजफ्फरनगर में मिली अवैध फैक्ट्री

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (साइबर सेल) ने लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने भगीरथ पैलेस में ‘बाबा श्याम मेडिकोज’ नाम से दुकान चलाने वाले मुख्य आरोपी समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और लिवर जैसी गंभीर बीमारियों की नकली दवाइयां बनाकर असली ब्रांड के नाम पर बाजार में खपा रहा था।

शाहदरा में छापेमारी और 1.20 लाख गोलियां बरामद

क्राइम ब्रांच को सूचना मिली थी कि दिल्ली के शाहदरा इलाके में भारी मात्रा में नकली दवाइयां डंप की गई हैं। 11 मार्च 2026 को बिहारी कॉलोनी में छापा मारा गया, जहाँ से निखिल अरोड़ा उर्फ सन्नी को गिरफ्तार किया गया। तलाशी के दौरान पुलिस ने करीब 1.20 लाख नकली गोलियां और कैप्सूल बरामद किए। ये दवाइयां दिखने में हूबहू नामी कंपनियों के उत्पादों जैसी थीं, जिन्हें पहचान पाना आम मरीज के लिए नामुमकिन था।

50 करोड़ के फर्जी बिल और GST का खेल

जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि यह गिरोह केवल दवाइयां ही नकली नहीं बना रहा था, बल्कि टैक्स चोरी और पहचान छिपाने के लिए फर्जी GST कंपनियां भी चला रहा था। आरोपियों ने अब तक करीब 50 करोड़ रुपये के फर्जी बिल तैयार किए थे।

  • गिरफ्तार आरोपी: निखिल अरोड़ा, शिवम त्यागी, मयंक अग्रवाल, मोहित शर्मा, शाहरुख और राहुल।
  • इनमें से दो आरोपी विशेष रूप से फर्जी GST फर्म बनाने और कागजी कार्रवाई को ‘असली’ दिखाने का काम संभालते थे।

मुजफ्फरनगर में ‘मौत की फैक्ट्री’ सील

दिल्ली में हुई पूछताछ के बाद पुलिस की टीम उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर पहुँची, जहाँ एक अवैध दवा फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया गया। वहां से पुलिस ने:

  • 2000 किलो से ज्यादा कच्चा माल।
  • दवा बनाने वाली भारी मशीनें।
  • नामी ब्रांड्स की पैकिंग सामग्री और खाली रैपर बरामद किए।

मरीजों की जान को बड़ा खतरा

डॉक्टरों और विशेषज्ञों के मुताबिक, ब्लड प्रेशर और लिवर जैसी बीमारियों में नकली दवा का सेवन मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। क्राइम ब्रांच के अनुसार, इस गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था और ये दवाइयां छोटे शहरों के मेडिकल स्टोर्स तक सप्लाई की जा रही थीं। पुलिस अब उन मेडिकल स्टोर संचालकों की भी पहचान कर रही है जो जानते हुए भी इनसे माल खरीदते थे।

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‘वॉइस ऑफ दिल्ली’ के ऑडिशन में उमड़ा हुनर का सैलाब, बॉलीवुड संगीत निर्देशक नरेंद्र चावला सहित कई दिग्गजों ने परखा टैलेंट

दिल्ली दर्पण ब्यूरो

अशोक विहार, नई दिल्ली दिल्ली के उभरते हुए गायकों को एक बड़ा और पेशेवर मंच देने के उद्देश्य से ‘अंजनी इवेंट्स एंड एंटरटेनर्स’ द्वारा आयोजित ‘वॉइस ऑफ दिल्ली’ के ऑडिशन का नॉर्थ दिल्ली में शानदार आगाज़ हुआ। अशोक विहार में आयोजित दो दिवसीय ऑडिशन (3 और 4 अप्रैल) में दिल्ली-एनसीआर के कोने-कोने से आए युवाओं और बच्चों ने अपनी गायकी का लोहा मनवाया।

300 से अधिक प्रतिभागियों ने दी प्रस्तुति

इस प्रतियोगिता में करीब 300 युवक-युवतियों ने भाग लिया। ऑडिशन के दौरान माहौल उस समय बेहद रोमांचक हो गया जब छोटे बच्चों ने एक से बढ़कर एक शास्त्रीय और बॉलीवुड गानों की प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में बतौर जज मौजूद संगीत जगत की जानी-मानी हस्तियों ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। जजों ने कहा कि दिल्ली में प्रतिभा की कमी नहीं है और ऐसे ही मंचों से भविष्य के ‘इंडियन आइडल’ निकलकर सामने आते हैं।

लाखों के नकद पुरस्कारों की बौछार

प्रतियोगिता को और भी आकर्षक बनाने के लिए आयोजकों ने भारी-भरकम पुरस्कार राशि की घोषणा की है। इस मेगा इवेंट में:

  • प्रथम विजेता को ₹51,000 की सम्मान राशि दी जाएगी।
  • द्वितीय स्थान पर रहने वाले को ₹31,000 मिलेंगे।
  • तृतीय स्थान के लिए ₹21,000 का नकद पुरस्कार रखा गया है।

कला प्रेमियों का मिला भरपूर सहयोग

इवेंट के आयोजक और आदर्श रामलीला कमेटी (फेज-2, अशोक विहार) के लीला निर्देशक नितिन बत्रा ने बताया कि उनका लक्ष्य इस मंच को राष्ट्रीय स्तर की पहचान दिलाना है। खुद एक कलाकार और कला प्रेमी होने के नाते नितिन बत्रा की इस पहल को पहले ही प्रयास में भारी जनसमर्थन मिल रहा है।

फिनाले की तैयारी पूरी

‘वॉइस ऑफ दिल्ली’ का ग्रैंड फिनाले 12 अप्रैल को अशोक विहार स्थित सत्यवती कॉलेज के सभागार में आयोजित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक शाम को यादगार बनाने के लिए विशेष तैयारियां की गई हैं। इस पूरे कार्यक्रम का लाइव प्रसारण दिल्ली दर्पण टीवी पर भी किया जाएगा, ताकि संगीत प्रेमी घर बैठे भी इस कांटे की टक्कर का आनंद ले सकें।

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दिल्ली में ‘दूध चोर’ गैंग का पर्दाफाश: चोरी के ऑटो में करते थे वारदातों का पीछा; 38 केस वाला शातिर बदमाश ‘पाथा’ गिरफ्तार

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली की पुलिस ने एक ऐसे अनोखे गैंग का भंडाफोड़ किया है जो घरों और दुकानों के बाहर रखे दूध के क्रेट उड़ाने में माहिर था। दिल्ली पुलिस के आउटर जिले की एंटी नारकोटिक्स स्क्वॉड ने उत्तम नगर इलाके में सक्रिय इस दूध चोर गिरोह के दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये शातिर चोर चोरी के ही ऑटो का इस्तेमाल कर दूध सप्लाई वाली गाड़ियों का पीछा करते थे और मौका मिलते ही दूध-दही के क्रेट पार कर देते थे।

CCTV वीडियो ने खोल दी पोल

दरअसल, पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर दूध चोरी का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा था। इस वीडियो में साफ देखा जा सकता था कि कैसे ये आरोपी बड़ी सफाई से दूध के क्रेट चोरी कर रहे थे। वीडियो का संज्ञान लेते हुए पुलिस हरकत में आई और टेक्निकल सर्विलांस की मदद से आरोपियों का पीछा करना शुरू किया।

जाल बिछाकर चर्च के पास से दबोचे गए आरोपी

3 अप्रैल को पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि गिरोह के सदस्य मोहित उर्फ पाथा और आयुष मान पांडे उर्फ पंडित अपने एक साथी से मिलने विकास नगर के पास स्थित चर्च के पास आने वाले हैं। पुलिस ने तुरंत घेराबंदी की और जैसे ही एक थ्री-व्हीलर (ऑटो) वहां पहुंचा, पुलिस ने दोनों को दबोच लिया। तलाशी के दौरान ऑटो से 14 खाली दूध के क्रेट बरामद हुए।

प्रेम नगर से चोरी का था ‘क्राइम ऑटो’

जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जिस ऑटो में सवार होकर ये आरोपी दूध चोरी करते थे, वह भी चोरी का निकला। पुलिस के अनुसार, यह थ्री-व्हीलर प्रेम नगर इलाके से चुराया गया था। आरोपी इसी चोरी के वाहन का इस्तेमाल सप्लायरों की रेकी करने और माल ठिकाने लगाने के लिए करते थे।

डाबड़ी और बिंदापुर में ‘सस्ते’ में बेचते थे माल

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे तड़के सुबह दूध सप्लाई करने वाली गाड़ियों का पीछा करते थे। जैसे ही सप्लायर किसी दुकान या घर के बाहर क्रेट रखकर आगे बढ़ता, ये पलक झपकते ही उसे उठा लेते थे। चोरी किया गया दूध और दही बाद में डाबड़ी और बिंदापुर के स्थानीय सप्लाई पॉइंट्स पर सस्ते दामों में बेच दिया जाता था।

38 मुकदमों वाला ‘पाथा’ फरवरी में ही आया था जेल से बाहर

गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य सरगना मोहित उर्फ पाथा रन्होला का निवासी है और उस पर चोरी, स्नैचिंग और वाहन चोरी के 38 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि वह इसी साल फरवरी 2026 में जेल से बाहर आया था और बाहर आते ही दोबारा अपराध की दुनिया में सक्रिय हो गया। दूसरा आरोपी आयुष मान पांडे उर्फ पंडित भी रन्होला का ही रहने वाला है।

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दिल्ली के सीमापुरी में ‘खूनी खेल’: 15 साल की नाबालिग पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला; इलाज के दौरान मौत, आरोपी की भी जलकर हुई मौत

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के सीमापुरी इलाके से एक ऐसी वारदात सामने आई है जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। एक 24 वर्षीय युवक ने 15 साल की नाबालिग लड़की पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला कर उसे लहूलुहान कर दिया। रविवार (5 अप्रैल 2026) सुबह इलाज के दौरान अस्पताल में मासूम ने दम तोड़ दिया। इस मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ यह है कि वारदात को अंजाम देने के कुछ ही देर बाद आरोपी युवक की भी अपने घर में संदिग्ध परिस्थितियों में जलकर मौत हो गई।

साहस की मिसाल: घायल अवस्था में मां को किया फोन

घटना शनिवार शाम करीब सवा पांच बजे की है। पीड़िता अपने घर से महज 300 मीटर की दूरी पर थी, तभी आरोपी जतिन (24) ने उस पर जानलेवा हमला कर दिया। लहूलुहान होने के बावजूद 15 वर्षीय नाबालिग ने गजब की हिम्मत दिखाई और खुद अपनी मां को फोन कर हमले की जानकारी दी। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रविवार सुबह करीब 5 बजे उसने अंतिम सांस ली।

अभी मनाया था जन्मदिन, दी थी 10वीं की परीक्षा

मृतक नाबालिग ने अभी 28 मार्च को ही अपना 15वां जन्मदिन मनाया था। उसने हाल ही में 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाएं दी थीं और अपने भविष्य को लेकर उत्साहित थी। लेकिन एक सिरफिरे की सनक ने उसकी जिंदगी की शुरुआत को ही आखिरी मोड़ पर पहुँचा दिया।

आरोपी की मौत का रहस्य: सिलेंडर फटा या खुदकुशी?

वारदात के बाद जब पुलिस आरोपी जतिन की तलाश में उसके नई सीमापुरी स्थित घर पहुँची, तो वहां का नजारा देख दंग रह गई। जतिन के घर में सिलेंडर फटने से भीषण आग लगी थी, जिसमें वह बुरी तरह झुलस चुका था और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। जतिन ऑनलाइन डिलीवरी का काम करता था। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह महज एक हादसा था या आरोपी ने अपराध के बाद खुद को खत्म करने के लिए यह कदम उठाया।

जांच के घेरे में ‘तीसरा’ शख्स

चश्मदीदों और शुरुआती जांच के अनुसार, इस वारदात में जतिन के साथ कुछ और युवकों के शामिल होने की भी आशंका जताई जा रही है। पुलिस इलाके के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाल रही है ताकि हमले की असली वजह और अन्य संदिग्धों का पता लगाया जा सके।

कानून-व्यवस्था पर सवाल

सीमापुरी की इस घटना ने एक बार फिर दिल्ली में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरेराह एक नाबालिग पर हमला और फिर आरोपी की संदिग्ध मौत ने इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की गहराई से तफ्तीश जारी है।

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खाकी पर दाग: दिल्ली पुलिस में बढ़ता भ्रष्टाचार बना बड़ी चुनौती, दो अलग मामलों ने खोली सिस्टम की पोल

दिल्ली दर्पण ब्यूरो

नई दिल्ली: “शांति, सेवा, न्याय” का नारा देने वाली दिल्ली पुलिस के कुछ अधिकारी ही अब सिस्टम को ठेंगा दिखा रहे हैं। हाल ही में सामने आए दो अलग-अलग मामलों—एक में जालसाजी और दूसरे में रंगे हाथों रिश्वतखोरी—ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ये घटनाएं दर्शाती हैं कि राजधानी की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली पुलिस के भीतर भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं।

केस 1: कोर्ट में फर्जीवाड़ा और अधिकारियों के नकली साइन

द्वारका कोर्ट ने हाल ही में महिला सब-इंस्पेक्टर (SI) कविता माथुर को धोखाधड़ी और जालसाजी का दोषी करार दिया है। मामला हैरान करने वाला है क्योंकि SI ने अपने ही विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों (ACP और SHO) के फर्जी हस्ताक्षर कर चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी थी। इतना ही नहीं, मामला खुलने पर उन्होंने जांच अधिकारी को खुदकुशी की धमकी देकर डराने की भी कोशिश की। यह मामला लोक दस्तावेजों के साथ खिलवाड़ और न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने का एक खतरनाक उदाहरण है।

केस 2: थाने के भीतर से CBI की रेड और गिरफ्तारी

भ्रष्टाचार का दूसरा ताजा मामला पश्चिम विहार वेस्ट थाने से सामने आया है, जहाँ शुक्रवार शाम करीब 7 बजे CBI ने 2010 बैच के सब-इंस्पेक्टर मनोज कुमार को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए थाने के अंदर से ही गिरफ्तार किया। आरोप है कि धारा 308 (गैर इरादतन हत्या का प्रयास) के एक मामले में जमानत दिलाने और मदद करने के नाम पर उसने 5 लाख रुपये मांगे थे, जिसका सौदा 3 लाख में तय हुआ। थाने के भीतर हुई इस छापेमारी ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है।

चिंताजनक आंकड़े: रंगे हाथों पकड़े जा रहे ‘रक्षक’

दिल्ली पुलिस में भ्रष्टाचार की स्थिति को लेकर हालिया आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं:

  • CBI की सक्रियता: आधिकारिक रिपोर्ट्स और हालिया कार्रवाई के अनुसार, इस साल अब तक 20 से अधिक दिल्ली पुलिस कर्मियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया जा चुका है।
  • बड़े पैमाने पर गिरफ्तारी: पिछले साल के अंत तक (दिसंबर 2024 तक) के आंकड़ों को देखें तो केवल एक साल में लगभग 36 पुलिस अधिकारियों को CBI ने विभिन्न भ्रष्टाचार के मामलों में गिरफ्तार किया था।
  • थाना स्तर पर भ्रष्टाचार: गिरफ्तार होने वालों में सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इनमें अधिकतर मामले अवैध निर्माण, सट्टेबाजी को संरक्षण देने या आपराधिक केसों में धाराएं कम करने के बदले पैसे मांगने से जुड़े हैं।

विशेषज्ञों की राय: आखिर कहाँ है कमी?

जानकारों का मानना है कि विभागीय निगरानी (Vigilance) की कमजोरी और भ्रष्टाचार के खिलाफ त्वरित कड़ी कार्रवाई न होना ऐसे अधिकारियों का हौसला बढ़ाता है। हालांकि, ताजा मामलों में पुलिस विभाग ने तत्काल निलंबन की कार्रवाई की है, लेकिन कानून के जानकारों का कहना है कि जब तक ऐसे मामलों में सजा की दर (Conviction Rate) नहीं बढ़ेगी, तब तक खाकी पर लगने वाले इन दागों को धोना मुश्किल होगा।

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