Friday, May 1, 2026
spot_img
Home Blog Page 3

दिल्ली बीजेपी में ‘कलश’ पर ‘क्लेश’: अशोक विहार में पार्षद बनाम विधायक पति, थाने पहुंची राम कथा की राजनीति

  • दिल्ली दर्पण ब्यूरो

नई दिल्ली: अशोक विहार में धार्मिक आस्था और सद्भाव के लिए आयोजित ‘कलश यात्रा’ ने अचानक राजनीति का हिंसक मोड़ ले लिया है। वार्ड की निगम पार्षद वीना असीजा और विधायक की करीबी व बीजेपी की मंडल महामंत्री गीता चौहान के बीच एक ऐसा विवाद हुआ की मामला थाने तक जा पहुंचा है। निगम पार्षद वीना असीजा द्वारा धार्मिक आयोजन के दौरान शुरू हुआ यह विवाद अब विधायक पूनम भारद्वाज के पति अशोक भारद्वाज की सीधी एंट्री के बाद एक ‘सियासी महाभारत’ में बदल गया है।

मामले की शुरुआत सोमवार को हुई, जब पार्षद वीना असीजा ने अपने वार्ड में राम कथा के उपलक्ष्य में कलश यात्रा निकाली थी। पार्षद का आरोप है कि उन्हें यात्रा के दौरान हंगामा होने की खुफिया जानकारी थी, लेकिन पुलिस की मौजूदगी के कारण विरोधी पक्ष सफल नहीं हो सका। इसके बाद, गीता चौहान का पार्षद के घर जाना और फिर वहां से हंगामे के साथ बाहर निकलना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है।

आरोप-प्रत्यारोप: एक-दूसरे को घेरे में लिया
इस विवाद में तीनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें दे रहे हैं:

वीना असीजा (निगम पार्षद): पार्षद का आरोप है कि गीता चौहान ने मिलने के बहाने उनके घर पहुंचकर ‘स्टिंग ऑपरेशन’ करने की कोशिश की। वीना असीजा के मुताबिक, जब उन्होंने फोन की जांच करनी चाही, तो गीता चौहान ने हंगामा शुरू कर दिया। पार्षद ने विधायक पति अशोक भारद्वाज पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “अशोक भारद्वाज ने पुलिस के सामने को जान से मारने और हाथ-पैर तोड़ने की धमकी दी है।”

गीता चौहान (मंडल महामंत्री): दूसरी ओर, गीता चौहान का कहना है कि वे पार्षद के बुलाने पर वहां गई थीं, जहां उनके साथ बदसलूकी की गई। गीता का आरोप है कि पार्षद वीना असीजा, उनके बेटे पुनीत असीजा और एक सहेली ने मिलकर उन्हें पीटा और गला दबाकर जान से मारने की कोशिश की।

अशोक भारद्वाज (विधायक पति): इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अशोक भारद्वाज ने इसे पार्टी का आंतरिक मामला बताया है। उन्होंने कहा, “मंडल महामंत्री के साथ हुई मारपीट अस्वीकार्य है। पार्षद की मानसिकता क्या है, ये वही जानें। इस मामले को पार्टी के मंच पर रखा जाएगा।”

बीजेपी के लिए सिरदर्द बना ‘आंतरिक कलश’
इस घटना ने दिल्ली बीजेपी के भीतर चल रही गुटबाजी को जगजाहिर कर दिया है। एक समय था जब विधायक परिवार और पार्षद के बीच काफी तालमेल था और खुद रेखा गुप्ता ने पार्षद की जीत के लिए मेहनत की थी। लेकिन अब पार्षद और विधायक परिवार के बीच की यह तल्खी पार्टी संगठन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।

अशोक विहार थाना पुलिस ने फिलहाल दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर लिए हैं। पुलिस इस मामले की बारीकी से जांच कर रही है कि आखिर धार्मिक आयोजन के पीछे कौन सी राजनीतिक साजिश छिपी थी। क्या यह सिर्फ व्यक्तिगत विवाद है या फिर इसके पीछे कोई गहरी राजनीतिक रंजिश? इन सवालों के जवाब अब पुलिस की जांच और पार्टी के आलाकमान की कार्रवाई पर टिके हैं।

यह भी पढ़ें: https://delhidarpantv.com/atishi-sanjeev-jha-press-conference-rs-2500-modi-guarantee-mps-defection/

प्रेस कॉन्फ्रेंस में Atishi और Sanjeev Jha का BJP पर कड़ा प्रहार: “दिल्ली की महिलाओं के ₹2500 कब आएंगे, मोदी जी?”

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) की वरिष्ठ नेता आतिशी और संजीव झा ने आज एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर कड़ा हमला बोला। आतिशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दिल्ली की महिलाओं से किए गए ₹2500 प्रतिमाह के वादे को लेकर सीधा सवाल किया। उन्होंने याद दिलाया कि दिल्ली चुनाव से पहले जनवरी 2025 में पीएम मोदी ने ‘मोदी की गारंटी’ देते हुए वादा किया था कि 8 मार्च 2025 से हर महिला के खाते में ₹2500 आएंगे। आतिशी ने तल्ख लहजे में कहा कि न केवल 2025, बल्कि 2026 की 8 मार्च भी बीत चुकी है, लेकिन दिल्ली की महिलाओं के खाते में एक पैसा भी नहीं पहुंचा है।

इस मुद्दे पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को घेरते हुए आतिशी ने कहा कि वे पश्चिम बंगाल में जाकर चुनाव प्रचार कर रही हैं और वहां की महिलाओं को पैसे देने के वादे कर रही हैं, जबकि दिल्ली की महिलाओं को उन्होंने पूरी तरह से नजरअंदाज किया है। उन्होंने इसे दिल्ली की महिलाओं के साथ सरासर धोखा बताया। वहीं, संजीव झा ने कहा कि बीजेपी दिल्ली विधानसभा का उपयोग केवल अपनी छोटी और तुच्छ राजनीति के लिए कर रही है, जबकि उनका ध्यान जनता के वास्तविक मुद्दों पर होना चाहिए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में शामिल होने के मामले पर भी आतिशी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने इस विलय को पूरी तरह से असंवैधानिक करार दिया और कहा कि दल-बदल कानून (Anti-Defection Law) के तहत दो-तिहाई सांसदों के किसी दूसरी पार्टी में मर्जर का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वे ‘साम, दाम, दंड और भेद’ का इस्तेमाल करके न केवल विपक्ष को खत्म करना चाहते हैं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान की नींव को भी कमजोर कर रहे हैं।

अंत में, संजीव झा ने बीजेपी की कार्यशैली पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पिछले 15 वर्षों में बीजेपी ने कई बार आम आदमी पार्टी के खत्म होने का ऐलान किया है, लेकिन आज ‘आप’ देश की सबसे तेजी से बढ़ती नेशनल पार्टी बनकर उभरी है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि दुनिया का इतिहास गवाह है कि अत्याचार का अंत निश्चित होता है और बीजेपी की राजनीति का भी अंत का समय आ गया है। उन्होंने दोहराया कि पार्टी पूरी तरह से एकजुट है और इन हथकंडों से डरने वाली नहीं है।

यह भी पढ़ें: https://delhidarpantv.com/after-the-kajrwal-incident-now-the-human-beings-have-to-write-to-the-justice-department-and-make-a-statement/

आबकारी नीति मामला: केजरीवाल के बाद अब मनीष सिसोदिया ने भी जस्टिस स्वर्णकांता को लिखी चिट्ठी, पेश होने से किया इनकार

नई दिल्ली: दिल्ली आबकारी नीति मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं की कानूनी लड़ाई एक नया मोड़ लेती दिख रही है। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बाद अब मनीष सिसोदिया ने भी दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को पत्र लिखकर सूचित किया है कि वह आबकारी नीति मामले में उनकी अदालत में पेश नहीं होंगे।

हाई कोर्ट के फैसले के बाद आया निर्णय

यह घटनाक्रम तब हुआ है जब दिल्ली हाई कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और मामले के अन्य सह-आरोपियों द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने आबकारी नीति मामले की सुनवाई से जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को अलग करने (recusal) की मांग की थी। हाई कोर्ट के इस फैसले के तुरंत बाद दोनों नेताओं ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए अदालत को पत्र लिखा है।

क्या है ‘हितों के टकराव’ का तर्क?

अपनी याचिका में अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि ‘हितों का टकराव’ (Conflict of Interest) की स्थिति पैदा हो रही है। केजरीवाल ने अपने हलफनामे में तर्क दिया था कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जो इस मामले में सीबीआई का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, उनके अधीन जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के बच्चे कार्य करते हैं।

केजरीवाल का दावा था कि जज के दोनों बच्चे केंद्र सरकार के पैनल काउंसिल के रूप में कार्यरत हैं और उन्हें मामलों का आवंटन तुषार मेहता के माध्यम से होता है। इसी आधार पर उन्होंने निष्पक्ष सुनवाई पर सवाल खड़े करते हुए जज को बदलने की मांग की थी।

‘सत्याग्रह’ की राह पर AAP

मनीष सिसोदिया से पहले अरविंद केजरीवाल ने भी जस्टिस स्वर्णकांता को पत्र लिखा था। केजरीवाल ने अपने पत्र में उल्लेख किया था कि उन्हें अब इस अदालत से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं बची है, जिसके चलते उन्होंने महात्मा गांधी की तरह ‘सत्याग्रह’ का रास्ता अपनाने का फैसला किया है। अब सिसोदिया भी इसी राह पर चलते हुए अदालत में व्यक्तिगत या वकील के माध्यम से पेश होने से इनकार कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले को सीबीआई ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। इसके जवाब में, अरविंद केजरीवाल ने हाई कोर्ट की सुनवाई से एक दिन पहले 15 मार्च को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था और जज बदलने की मांग की थी। वहीं, मनीष सिसोदिया ने भी हाई कोर्ट द्वारा जारी समन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। अब देखना यह होगा कि अदालत इस पत्र और इस नए घटनाक्रम पर क्या रुख अपनाती है।

यह भी पढ़ें: https://delhidarpantv.com/advocates-councils-unique-initiative-to-introduce-justice-to-the-pleadings-and-embarrassing-class/

दिल्ली: वंचित और श्रमिक वर्गों तक न्याय पहुँचाने के लिए अधिवक्ता परिषद की अनूठी पहल

दिल्ली दर्पण ब्यूरो

नई दिल्ली: दिल्ली के करोल बाग स्थित अंबेडकर बस्ती में समाज के अंतिम पायदान पर खड़े वंचित, श्रमिक और कमजोर वर्गों तक न्याय की सहज पहुँच सुनिश्चित करने और उन्हें उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एक ‘मेगा न्याय परामर्श केंद्र’ का आयोजन किया गया. 27 अप्रैल 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम में अधिवक्ता परिषद, दिल्ली (तीस हजारी इकाई) और सेवा भारती के संयुक्त तत्वावधान में कानून विशेषज्ञों ने स्थानीय नागरिकों के साथ संवाद किया. 

इन आयोजनों की अहमियत क्यों है?
समाज में ऐसे आयोजनों का विशेष महत्व है, क्योंकि ये केवल परामर्श केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव के माध्यम हैं। इन आयोजनों की प्रासंगिकता निम्नलिखित कारणों से है:

  • न्याय की सुलभता: यह आयोजन उन लोगों तक पहुँच सुनिश्चित करता है जिन्हें अक्सर कानूनी पेचीदगियों और संसाधनों की कमी के कारण न्याय पाने में कठिनाई होती है. 
  • संवैधानिक जागरूकता: यह कार्यक्रम लोगों को उनके मौलिक अधिकारों, विधिक उपायों और संवैधानिक संरक्षण के प्रति सचेत करता है, जिससे वे अपने हक के लिए आवाज उठाने में सक्षम बनते हैं. 
  • सामाजिक लोकतंत्र का आधार: बंधुता, स्वतंत्रता और समानता के मूल्यों को धरातल पर उतारकर यह आयोजन सामाजिक एकता और राष्ट्र की अखंडता को मजबूत करता है. 
  • भाईचारे का संदेश: स्वामी विवेकानंद और डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों के माध्यम से यह कार्यक्रम समाज में समरसता और सहयोग की भावना को बढ़ावा देता है, जो एक सशक्त राष्ट्र निर्माण के लिए अनिवार्य है. 

कार्यक्रम की मुख्य झलकियाँ
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ बाबासाहेब डॉ. अंबेडकर के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ. इसके पश्चात, उपस्थित सभी लोगों ने संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन किया, जिसमें ‘बंधुता’ शब्द पर विशेष जोर दिया गया. 
इस अवसर पर अधिवक्ता परिषद की ओर से अध्यक्ष अंजु शर्मा, सचिव आशीष कुमार शर्मा, श्रीमती अनु सिंह, श्री रुपिंदर पाल सिंह और सेवा भारती से श्री हिमांशु उपस्थित रहे. विशेषज्ञों की टीम ने उपस्थित लोगों को उनकी कानूनी समस्याओं के समाधान के लिए निःशुल्क परामर्श प्रदान किया, जिससे समाज में कानून के प्रति विश्वास और उत्साह का संचार हुआ. कार्यक्रम के समापन पर आयोजकों ने आश्वासन दिया कि समाज के हर व्यक्ति को न्याय दिलाने के लिए ऐसे प्रकल्पों का विस्तार भविष्य में भी जारी रहेगा. 

यह भी पढ़ें: https://delhidarpantv.com/saurabh-bhardwaj-counters-raghav-chadha-job-switch-comment-conspiracy/

राघव चड्ढा के ‘जॉब स्विच’ बयान पर सौरभ भारद्वाज का पलटवार, बोले—“नौकरी बदलने वाले भी साजिश नहीं करते”

नई दिल्ली:
आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्ढा के हालिया वीडियो बयान पर तीखा जवाब दिया है। राघव चड्ढा ने पार्टी बदलने की तुलना एक कंपनी से दूसरी कंपनी में नौकरी बदलने से की थी, जिस पर अब सौरभ भारद्वाज ने सवाल खड़े किए हैं।

सौरभ भारद्वाज ने X (पूर्व ट्विटर) पर जारी अपने वीडियो संदेश में कहा कि राजनीतिक दल बदलना और नौकरी बदलना एक जैसा नहीं होता। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति नौकरी बदलता भी है, तो वह अपनी पुरानी कंपनी के खिलाफ साजिश नहीं करता।

उन्होंने आरोप लगाया कि राघव चड्ढा पिछले एक साल से भाजपा की केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे थे। भारद्वाज के मुताबिक, राघव ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत खुद को एक ऐसे युवा नेता के रूप में पेश करने की कोशिश की, जो मध्यम वर्ग के मुद्दों को उठाता है, ताकि उनकी एक “न्यूट्रल इमेज” बन सके।

AAP नेता ने यह भी संकेत दिया कि राघव चड्ढा का पार्टी छोड़ना अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि इसके पीछे लंबे समय से चल रही राजनीतिक रणनीति थी।

इस बयान के बाद दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। राघव चड्ढा के बयान और सौरभ भारद्वाज के पलटवार को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर जारी है।

यह भी पढ़ें: https://delhidarpantv.com/arvind-kejriwal-has-written-a-letter-to-the-justice-department-regarding-the-matter/