Friday, May 1, 2026
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आबकारी केस: Arvind Kejriwal हाईकोर्ट में पेशी से रहेंगे गैरहाज़िर, जस्टिस स्वर्णकांता को लिखी चिट्ठी

दिल्ली की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक बेहद चौंकाने वाला ऐलान किया। केजरीवाल ने स्पष्ट शब्दों में घोषणा की कि अब उन्हें जस्टिस स्वर्णकान्ता शर्मा की अदालत से न्याय की कोई उम्मीद नहीं बची है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “जस्टिस स्वर्णकान्ता शर्मा जी से न्याय मिलने की मेरी उम्मीद टूट चुकी है।” इस घोषणा के साथ ही उन्होंने कानूनी प्रक्रिया के प्रति अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है और अदालती लड़ाई के तरीके में एक बड़ा बदलाव करने का संकेत दिया है, जिसने सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।

केजरीवाल ने अपने इस कदम को ‘अंतरात्मा की आवाज़’ करार देते हुए इसे महात्मा गांधी के सिद्धांतों और सत्याग्रह की भावना से जोड़ा है। उन्होंने साफ कर दिया है कि अब वह इस मामले में न तो अदालत के सामने पेश होंगे और न ही अपना कोई पक्ष या दलील रखेंगे। उनका यह निर्णय कानूनी हलकों में काफी चर्चा का विषय है, क्योंकि किसी भी गंभीर मामले में बचाव पक्ष द्वारा दलीलें न रखने का फैसला एक असाधारण और चुनौतीपूर्ण कदम माना जाता है। इस फैसले के जरिए केजरीवाल ने एक तरह से न्याय प्रणाली के वर्तमान स्वरूप के प्रति अपने असंतोष को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केजरीवाल का यह रुख उनके खिलाफ चल रहे कानूनी मामलों में एक नया मोड़ ला सकता है। एक पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा इस तरह से अदालती कार्यवाही से खुद को दूर करने का फैसला आम आदमी पार्टी की भविष्य की रणनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। हालांकि, जहां एक ओर केजरीवाल इसे ‘सत्याग्रह’ की राह बता रहे हैं, वहीं इस पर विभिन्न राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। फिलहाल, हर किसी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उनके इस फैसले का अदालत की कार्यवाही और भविष्य के कानूनी परिणामों पर क्या असर पड़ेगा।

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प्रेस कॉन्फ्रेंस में संजय सिंह का बड़ा ऐलान: ‘आप’ छोड़कर BJP में गए 7 सांसदों की रद्द होगी सदस्यता, उपराष्ट्रपति को भेजी याचिका

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने आज एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में शामिल होने के मामले पर बड़ा खुलासा किया। संजय सिंह ने साफ तौर पर कहा कि उन्होंने राज्यसभा के सभापति (उपराष्ट्रपति) को एक याचिका भेजी है, जिसमें संविधान की दसवीं अनुसूची (Anti-Defection Law) का हवाला देते हुए इन सातों सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की गई है।

सांसदों की सदस्यता होगी रद्द

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए संजय सिंह ने कहा कि संविधान विशेषज्ञों, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और पीडीटी आचारी जैसे कानूनी जानकारों से परामर्श लेने के बाद यह स्पष्ट है कि जिन सात लोगों ने पार्टी तोड़कर बीजेपी में विलय करने का फैसला लिया है, उनकी सदस्यता कानूनी रूप से टिक नहीं सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी जांच एजेंसियों (ED-CBI) का दुरुपयोग कर विधायकों और सांसदों को तोड़ने में माहिर है, लेकिन भारत का संविधान इस तरह की तोड़फोड़ की इजाजत नहीं देता।

पंजाब में ‘टूट’ की खबरों को बताया अफवाह

जब मीडिया ने उनसे पूछा कि क्या पंजाब के विधायक राघव चड्ढा के संपर्क में हैं और पार्टी छोड़ने की योजना बना रहे हैं, तो संजय सिंह ने इसे पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “यह बीजेपी द्वारा फैलाया गया एक झूठा प्रचार और भ्रम है। पंजाब की जनता उनके खिलाफ है, तो कौन सा एमएलए अपनी सदस्यता खत्म कराकर इनके साथ जाएगा? यह पूरी तरह से बेबुनियाद खबरें हैं।”

‘शीशमहल’ पर बोले संजय सिंह

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास (शीशमहल) को लेकर बीजेपी नेता प्रवेश वर्मा द्वारा जारी की गई तस्वीरों को संजय सिंह ने एक बार फिर ‘फर्जी और बेबुनियाद’ करार दिया। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा, “मैं एलजी साहब, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और प्रवेश वर्मा को चुनौती देता हूं कि वे अपना घर जनता के लिए खोल दें, अरविंद केजरीवाल भी अपना घर खोल देंगे। दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।” उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी झूठी तस्वीरें और प्रचार करने वालों के खिलाफ मानहानि (Defamation) का केस दर्ज किया जाएगा।

विदेश नीति पर सरकार को घेरा

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संजय सिंह ने मोदी सरकार की विदेश नीति पर भी निशाना साधा। उन्होंने अमेरिका, ईरान और फलस्तीन के मुद्दों पर सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए इसे ‘गुलाम सरकार’ की मानसिकता बताया। उन्होंने कहा कि भारत जैसे महान लोकतंत्र को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपमानित किया जा रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी खामोश है।

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दिल्ली क्राइम ब्रांच का बड़ा प्रहार: 5 करोड़ की कोकीन के साथ अंतरराज्यीय ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़, 2 तस्कर गिरफ्तार

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की इंटर-स्टेट सेल (ISC) ने नशा तस्करों के एक बड़े नेटवर्क पर करारी चोट की है। पुलिस ने एक अंतरराज्यीय ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए करीब 456 ग्राम उच्च गुणवत्ता वाली कोकीन (क्रैंक) बरामद की है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 5 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह सफल ऑपरेशन एसीपी रमेश लांबा की निगरानी में इंस्पेक्टर सतेंद्र खारी के नेतृत्व वाली टीम ने अंजाम दिया है।

ऑपरेशन की पूरी कहानी

इस ड्रग सिंडिकेट के खिलाफ कार्रवाई 10 अप्रैल 2026 को शुरू हुई, जब टीम को एक गुप्त सूचना मिली। इस इनपुट के आधार पर क्राइम ब्रांच ने दिल्ली के गाजीपुर गोलचक्कर के पास जाल बिछाया और जावेद हुसैन (29) नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। उसकी तलाशी लेने पर उसके पास से 456 ग्राम हाई-ग्रेड कोकीन बरामद हुई।

जावेद से पूछताछ में पुलिस को इस सिंडिकेट के मुख्य सप्लायर तक पहुँचने का सुराग मिला। उसने बताया कि यह खेप बरेली निवासी सोइब खान (25) से प्राप्त की गई थी। इसके बाद पुलिस टीम ने रिमांड के दौरान जावेद से मिली जानकारी के आधार पर 22 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के बरेली में छापेमारी की और मुख्य सप्लायर सोइब खान को उसके घर से धर दबोचा।

फिलहाल क्या है स्थिति?

पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी अशिक्षित हैं और अब तक की जांच में उनका कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया है। फिलहाल, मुख्य सप्लायर सोइब खान पुलिस रिमांड पर है। क्राइम ब्रांच की टीमें इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य नेटवर्क और सदस्यों की तलाश में जुटी हैं, जिसके चलते दिल्ली और आसपास के इलाकों में लगातार छापेमारी की जा रही है। एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर पुलिस इस मामले की जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

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दिल्ली: इंद्रलोक मेट्रो स्टेशन के लेडीज टॉयलेट में फंदे से लटका मिला 40 वर्षीय शख्स का शव, इलाके में मचा हड़कंप

नई दिल्ली: दिल्ली के इंद्रलोक मेट्रो स्टेशन पर शनिवार शाम एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे स्टेशन परिसर में हड़कंप मचा दिया है। स्टेशन के लेडीज वॉशरूम के अंदर एक 40 वर्षीय पुरुष का शव फंदे से लटका हुआ मिला। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव को बाहर निकाला। शुरुआती जांच में मृतक के उसी शौचालय परिसर का केयरटेकर होने की आशंका जताई जा रही है। घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय पुलिस और क्राइम टीम ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए।

पुलिस के अनुसार, शनिवार शाम करीब 5:33 बजे थाना एनएसपी (NSP) मेट्रो को पीसीआर कॉल के जरिए सूचना मिली थी कि सुलभ शौचालय परिसर के लेडीज टॉयलेट का दरवाजा अंदर से बंद है और भीतर से तेज बदबू आ रही है। सूचना मिलते ही पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने दरवाजा तोड़ा और अंदर का नजारा देखकर दंग रह गई। वहां करीब 40 साल के एक व्यक्ति का शव फंदे से लटका हुआ था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मृतक पिछले दो दिनों से दिखाई नहीं दे रहा था, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि यह घटना कम से कम 48 घंटे पुरानी हो सकती है।

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल प्रभाव से क्राइम टीम को मौके पर बुलाया, जिसने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और जरूरी साक्ष्य एकत्र किए। फिलहाल, पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पहचान के लिए बीएसए अस्पताल की मोर्चरी में 72 घंटे के लिए सुरक्षित रखवाया है। मामले में धारा 194 बीएनएसएस के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। मेट्रो अधिकारियों और पुलिस की टीमें मृतक की पहचान करने और मौत के सही कारणों का पता लगाने में जुटी हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी कि यह आत्महत्या है या इसके पीछे कोई अन्य रहस्य छिपा है।

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NSP का काला सच: हाईकोर्ट के आदेश की आड़ में ‘गरीब-मुक्त’ दिल्ली का खेल, 40 साल से जमी रोजी-रोटी पर 3 दिन का ‘मौत का फरमान’!

  • दिल्ली दर्पण ब्यूरो

नई दिल्ली: दिल्ली में कैसे सिस्टम केवल गरीबों पर प्रहार करता है इसकी बानगी दिल्ली के सबसे पॉश कमर्शियल हब, नेताजी सुभाष प्लेस (NSP) में फिर देखने को मिली है। यहाँ के 28 दुकानदार गए तो थे कोर्ट से न्याय मांगने , लेकिन उलटे उनकी जान पर बन गयी है। इन दुकानदारों के दिल में दहशत ही नहीं है बल्कि एक गहरी साजिश की आहट इन्हे महसूस हो रही है। भष्टाचार के लिए बदनाम दिल्ली नगर निगम का केशव पुरम जोन ने दिल्ली हाईकोर्ट के 30 मार्च 2026 के एक आदेश को ढाल बनाकर, MCD ने उन 28 परिवारों की रोजी-रोटी पर ताला जड़ने की तैयारी कर ली है, जो पिछले 25 से 40 सालों से अपनी मेहनत की कमाई से घर चला रहे थे। लेकिन यह ‘सफाई अभियान’ नहीं, बल्कि उन गरीबों को कुचलने का एक क्रूर तरीका है जिन्होंने सिस्टम के भ्रष्ट दलालों को ‘हफ्ता’ देने से इनकार किया था।

3 दिन का अल्टीमेटम: पुनर्वास या बेदखली का जाल? MCD के केशव पुरम ज़ोन द्वारा जारी नोटिस ने साबित कर दिया है कि प्रशासन को मानवीय संवेदनाओं से कोई लेना-देना नहीं है। हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देकर, इन बुजुर्ग दुकानदारों को ‘ए-ब्लॉक, लॉरेंस रोड’ में शिफ्ट होने के लिए केवल तीन दिनों का मोहलत दी गई है। एक ऐसा इलाका जहाँ न ग्राहक है, न कारोबार, वहां इन दुकानदारों को धकेलना उन्हें भूखों मारने के समान है। यह नोटिस नहीं, बल्कि एक सोची-समझी बेदखली है ताकि इन जमीनों को बाद में ‘मोटी रकम’ लेकर किसी और को अलॉट किया जा सके।

भ्रष्टाचार का नंगा नाच: लाइसेंस आपका, मरजी MCD की! सबसे बड़ा सवाल उस MCD पर उठता है, जिसने खुद इन दुकानदारों को ‘वेंडिंग लाइसेंस’ (CoVs) बांटे थे। जब लाइसेंस दिया गया, तब क्या ये जगह ‘नॉन-वेंडिंग ज़ोन’ नहीं थी? आज अचानक कानून कैसे बदल गया? असलियत यह है कि जब तक इन दुकानदारों ने MCD के भ्रष्ट अधिकारियों की जेबें भरीं, तब तक वे ‘वैध’ थे। जैसे ही ‘वसूली’ का खेल रुका, वैसे ही प्रशासन को अतिक्रमण की याद आ गई। NSP का सच यह है कि यहाँ गरीब हटाए जा रहे हैं ताकि उन रसूखदारों को जगह दी जा सके जो MCD के गलियारों में मोटी रिश्वत का खेल खेलने में माहिर हैं।

सिस्टम के मुंह पर तमाचा: बुजुर्गों की ‘मोबाइल’ दुकान का मजाक प्रशासन का यह कहना कि ‘आप कहीं और जाकर रेहड़ी लगा लीजिए’, उन बुजुर्गों का अपमान है जिन्होंने आधी उम्र इसी फुटपाथ पर बिता दी। जो इंसान 40 साल से एक जगह बैठकर ग्राहक पहचानता है, क्या वो इस उम्र में रेहड़ी धकेलकर ‘मोबाइल वेंडर’ बनेगा? यह प्रशासनिक संवेदनहीनता नहीं, बल्कि गरीबों को ‘मिटाने’ की एक कोशिश है। जिन लोगों के पास MCD का लाइसेंस है, उन्हें कानूनी सुरक्षा देने के बजाय, प्रशासन उन्हें सड़कों पर धक्के खाने के लिए मजबूर कर रहा है।

साहब की मेहरबानी और गरीब की बर्बादी दिल्ली दर्पण टीवी पूछना चाहता है—कब तक दिल्ली का ‘मिशन क्लीन’ सिर्फ गरीबों की झोपड़ियाँ और दुकानें उजाड़ेगा? क्या इस शहर में सिर्फ रिश्वतखोरों और साहूकारों के लिए जगह बची है? हाईकोर्ट के आदेश का पालन करना प्रशासन का काम है, लेकिन उस आदेश की आड़ में अपनी तिजोरियां भरने का लाइसेंस लेना ‘भ्रष्टाचार’ है। NSP के इन 28 परिवारों का दर्द सिस्टम के उन ‘साहबों’ को कभी नहीं दिखेगा, जिनकी पूरी राजनीति और कमाई ही गरीबों के आंसुओं पर टिकी है। अब वक्त आ गया है कि जनता यह पूछे कि असल में अतिक्रमण सड़कों पर है, या MCD के भ्रष्ट गलियारों में?

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