Wednesday, June 3, 2026
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“दिल्ली के रेस्टोरेंट में छात्र को गोली मारने का मामला, क्राइम ब्रांच करेगी जांच”

नई दिल्ली: दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के अमर कॉलोनी इलाके में हुई सनसनीखेज शूटिंग मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। 17 वर्षीय छात्र साहिल को गोली मारने के मामले की जांच अब दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। पुलिस का मानना है कि इस मामले में कई अहम कड़ियां सामने आ सकती हैं, इसलिए जांच को अब स्पेशल टीम के हवाले किया गया है।

दिल्ली पुलिस के अनुसार, क्राइम ब्रांच ने इस मामले में एक नाबालिग आरोपी को हिरासत में लिया है। हालांकि शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि पकड़ा गया किशोर मुख्य शूटर नहीं है। पुलिस अब उस आरोपी की तलाश में जुटी है जिसने साहिल पर गोली चलाई थी।

रेस्टोरेंट में हुआ था विवाद

जानकारी के मुताबिक, यह पूरी घटना मंगलवार शाम करीब 7:54 बजे की है। अमर कॉलोनी थाने में फायरिंग को लेकर पीसीआर कॉल मिली थी। पुलिस मौके पर पहुंची तो पता चला कि 17 वर्षीय छात्र साहिल को गोली लगी है।

बताया जा रहा है कि साहिल अपने दोस्तों के साथ एक रेस्टोरेंट में खाना खाने गया था। इसी दौरान कुछ युवक उनकी टेबल के पास से गुजर रहे थे। आरोप है कि उनमें से एक युवक का शरीर साहिल की कुर्सी से टकरा गया। इस पर साहिल ने आपत्ति जताते हुए युवकों से ठीक से चलने को कहा।

देखते ही देखते मामूली कहासुनी बढ़ गई और विवाद हिंसक हो गया। आरोप है कि इसी दौरान एक युवक ने गोली चला दी, जो सीधे साहिल को जा लगी। गोली लगते ही रेस्टोरेंट में अफरा-तफरी मच गई।

गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती

गोली लगने के बाद साहिल को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और फरार आरोपियों की पहचान करने की कोशिश कर रही है।

क्राइम ब्रांच करेगी मामले की गहराई से जांच

दिल्ली पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दी गई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना अचानक हुए विवाद का नतीजा थी या इसके पीछे कोई पुरानी रंजिश भी थी।

फिलहाल पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है और मामले की जांच जारी है।

दिल्ली के न्यू राजेंद्र नगर इलाके में दो बुजुर्ग महिलाओं के शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। दोनों महिलाएं रिश्ते में ननद और भाभी बताई जा रही हैं।

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के न्यू राजेंद्र नगर इलाके से एक दर्दनाक और रहस्यमयी मामला सामने आया है। यहां एक घर के अंदर दो बुजुर्ग महिलाओं के शव मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। मृतकों की पहचान चंद्रकांता और सरोज के रूप में हुई है। दोनों महिलाएं रिश्ते में ननद और भाभी थीं और लंबे समय से घर में अकेले रह रही थीं।

पुलिस के मुताबिक, दोनों महिलाओं की उम्र 60 साल से अधिक थी। उम्र बढ़ने के कारण उन्हें चलने-फिरने में काफी दिक्कत होती थी। बताया जा रहा है कि इसी वजह से वे अक्सर घर का मुख्य दरवाजा खुला रखती थीं।

घरेलू सहायिका ने दी पुलिस को सूचना

जानकारी के अनुसार, पिछले दो दिनों से घर में काम करने वाली घरेलू सहायिका नहीं आई थी। बुधवार सुबह जब वह घर पहुंची, तो उसे घर से बदबू आने लगी। शक होने पर उसने तुरंत पुलिस को सूचना दी।

मौके पर पहुंची पुलिस ने देखा कि घर का दरवाजा अंदर से बंद था। इसके बाद पुलिस ने दरवाजा तोड़कर घर के अंदर प्रवेश किया। अंदर दोनों महिलाओं के शव अलग-अलग जगहों पर पड़े मिले।

शरीर पर नहीं मिले चोट के निशान

दिल्ली पुलिस का कहना है कि दोनों महिलाओं के शरीर पर किसी तरह के चोट के निशान नहीं पाए गए हैं। घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट भी बरामद नहीं हुआ है। फिलहाल फोरेंसिक टीम ने मौके से सबूत जुटाए हैं और मौत की असली वजह जानने के लिए जांच जारी है।

पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा।

“मोदी सरकार की नीतियों से घट रहा भरोसा? पूर्व आर्थिक सलाहकारों की बड़ी चेतावनी”

कभी मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों के सबसे मुखर समर्थकों में गिने जाने वाले अर्थशास्त्री अब उसी सरकार की आलोचना करते दिखाई दे रहे हैं। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य सुरजीत भल्ला और पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने हाल के लेखों में भारतीय अर्थव्यवस्था की दिशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

सुरजीत भल्ला, जो सितंबर 2017 से दिसंबर 2018 तक प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद में रहे, कभी मोदी सरकार की आर्थिक उपलब्धियों के प्रबल पक्षधर माने जाते थे। 2018 में उन्होंने मोदी सरकार के शुरुआती चार वर्षों को भारतीय अर्थव्यवस्था के “सबसे अच्छे वर्ष” बताया था। लेकिन अब उनका रुख बदला हुआ दिखाई दे रहा है।

21 मई को इंडियन एक्सप्रेस में लिखे अपने लेख “बीजेपी चुनाव जीत रही है लेकिन अर्थव्यवस्था हार रही है” में भल्ला ने सरकार की आर्थिक नीतियों की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी की राजनीतिक सफलता ऐतिहासिक है, लेकिन दूसरी तरफ अर्थव्यवस्था लगातार दबाव में है।

भल्ला के अनुसार आर्थिक अव्यवस्था के लिए चार बड़े कारण ज़िम्मेदार हैं—सरकार, बड़े उद्योग समूह, कमजोर विपक्ष और तथाकथित “डीप स्टेट”। उनका कहना है कि सरकार समस्याओं को पहचानती तो है, लेकिन उनकी ज़िम्मेदारी स्वीकार करने से बचती है।

उन्होंने भारत की विकास दर को लेकर भी सवाल उठाए। भल्ला के मुताबिक, सरकार भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बताती है, लेकिन 2014 के बाद जीडीपी वृद्धि के आधार पर भारत दुनिया में नौवें स्थान पर रहा। प्रति व्यक्ति आय वृद्धि के मामले में भी भारत कई देशों से पीछे है।

भल्ला ने बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिकी डॉलर के आधार पर प्रति व्यक्ति आय वृद्धि में बांग्लादेश पहले स्थान पर रहा, जबकि भारत 16वें नंबर पर है। उनका कहना है कि अब भारत को “दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था” कहना बंद कर देना चाहिए।

उन्होंने रुपये की गिरावट पर भी चिंता जताई। पिछले एक वर्ष में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग 12 प्रतिशत कमजोर हुआ है और लगातार सातवें वर्ष गिरावट दर्ज की गई है। भल्ला ने इसे अर्थव्यवस्था के भीतर मौजूद विरोधाभासों का संकेत बताया।

इस लेख पर प्रतिक्रिया देते हुए भूटान के वरिष्ठ पत्रकार तेनज़िंग लामसांग ने कहा कि अगर सुरजीत भल्ला जैसे लंबे समय तक सरकार का बचाव करने वाले अर्थशास्त्री अब हालात को गंभीर बता रहे हैं, तो इसका मतलब है कि स्थिति वास्तव में चिंताजनक हो सकती है।

सिर्फ सुरजीत भल्ला ही नहीं, बल्कि मोदी सरकार में 2014 से 2018 तक मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे अरविंद सुब्रमण्यम ने भी सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए हैं।

26 मई को इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित अपने लेख में सुब्रमण्यम ने लिखा कि रुपया लगातार कमजोर हो रहा है और देश गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि संकट की जिम्मेदारी किसके हाथ में है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में देश को ऐसे विश्वसनीय नेतृत्व की जरूरत है जो बाजार और जनता में भरोसा पैदा कर सके।

सुब्रमण्यम के अनुसार, रुपये का संकट केवल वैश्विक परिस्थितियों या ऊर्जा आयात पर निर्भरता का नतीजा नहीं है, बल्कि यह भारत की मध्यम अवधि की आर्थिक संभावनाओं को लेकर बढ़ते अविश्वास का संकेत भी है। उन्होंने दावा किया कि 2022 से फरवरी 2026 के बीच रुपया 20 प्रतिशत से अधिक कमजोर हुआ, जबकि आरबीआई के भारी हस्तक्षेप के बावजूद स्थिति नहीं सुधरी।

उन्होंने निजी निवेश में गिरावट को भारतीय अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी समस्या बताया। उनके मुताबिक, 2000 के शुरुआती वर्षों में निजी कॉर्पोरेट निवेश जीडीपी के लगभग 17 प्रतिशत तक पहुंच गया था, लेकिन अब यह लगभग आधा रह गया है।

सुब्रमण्यम ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों का लाभ कुछ बड़े कॉर्पोरेट घरानों तक सीमित रहा, जबकि अन्य घरेलू और विदेशी निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ।

उधर, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू ने भी सरकार की आर्थिक दिशा पर चिंता जताई है।

24 मई को न्यू इंडियन एक्सप्रेस में लिखे अपने लेख में बारू ने कहा कि आज निवेशकों के बीच भरोसे की कमी दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया अच्छी खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है, जबकि नकारात्मक संकेतों को दबाया जा रहा है।

बारू ने याद दिलाया कि 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2020 तक भारत को पाँच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा था, जिसे बाद में आगे बढ़ाया गया और फिर चर्चा से ही गायब हो गया।

उनके मुताबिक, 2026 में भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार अभी चार ट्रिलियन डॉलर से थोड़ा अधिक है। उन्होंने सवाल उठाया कि 1990 से 2010 के बीच जो तेज़ विकास दर दिखाई दी, वह पिछले एक दशक में क्यों कायम नहीं रह सकी।

इन लगातार आलोचनाओं ने यह बहस तेज़ कर दी है कि क्या भारत की आर्थिक चुनौतियाँ केवल वैश्विक परिस्थितियों का परिणाम हैं या फिर घरेलू नीतियों और निर्णयों की भी बड़ी भूमिका है।

“चीन को लेकर क्वॉड की बड़ी तैयारी! एस जयशंकर बोले- हिंद-प्रशांत पर रहेगा पूरा फोकस”

नई दिल्ली:
दिल्ली में हुई क्वॉड विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत ने साफ संकेत दे दिए हैं कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग अब सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।

बैठक की शुरुआत में विदेश मंत्री S. Jaishankar ने कहा कि क्वॉड देशों का पूरा ध्यान हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर रहेगा और समुद्री सुरक्षा से लेकर सप्लाई चेन तक हर चुनौती से मिलकर निपटा जाएगा।

इस हाई-लेवल मीटिंग में अमेरिका के Marco Rubio, ऑस्ट्रेलिया की Penny Wong और जापान के Toshimitsu Motegi भी शामिल हुए।

माना जा रहा है कि चीन के बढ़ते दबदबे और मिडिल ईस्ट संकट के बीच क्वॉड देशों ने रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

बैठक में समुद्री सुरक्षा, टेक्नोलॉजी, महत्वपूर्ण खनिज, आर्थिक सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र को ‘फ्री एंड ओपन’ बनाए रखने जैसे मुद्दों पर खास चर्चा हुई।

“बुरहानपुर में चाय-पान और ड्रायफ्रूट्स खाने वाले बकरे बने आकर्षण, 786 से जुड़ी कीमत ने खींचा ध्यान”

बुरहानपुर:
बकरीद का त्योहार नजदीक आते ही मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले का प्रसिद्ध पाला बाजार गुलजार हो गया है। यहां 20 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक के बकरे बिक रहे हैं, लेकिन इस बार कुछ खास बकरे अपनी अनोखी आदतों की वजह से चर्चा में बने हुए हैं।

बुरहानपुर के अलावा महाराष्ट्र और गुजरात से भी व्यापारी बाजार में पहुंच रहे हैं। अच्छी नस्ल और खास पहचान वाले बकरों की मांग सबसे ज्यादा देखी जा रही है।

इस बार बाजार में ऐसे बकरे लोगों का ध्यान खींच रहे हैं, जो सामान्य चारे की बजाय काजू-बादाम जैसे ड्रायफ्रूट्स खाते हैं और मीठा पान पसंद करते हैं। इन बकरों को देखने और उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है।

वहीं एक बकरा अपनी चाय पीने की आदत को लेकर खास चर्चा में है। उसका मालिक रोज उसे शहर के इकबाल चौक पर चाय पिलाने लेकर आता है। मालिक के मुताबिक, बिना चाय पिए बकरा सुस्त हो जाता है।

बाजार में बिके एक खास बकरे की कीमत में 786 का खास कनेक्शन भी चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसे लोग शुभ मानकर देख रहे हैं।