Sunday, May 3, 2026
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दल्लूपुरा में मौत का ‘लाइव’ तमाशा: लाइसेंसी पिस्टल से युवक ने खुद को उड़ाया, रील के चक्कर में गई जान या सिस्टम की नाकामी?

नई दिल्ली | राजधानी दिल्ली का दल्लूपुरा इलाका उस वक्त दहल गया जब एक युवक ने खुद को सीने में गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। रूह कंपा देने वाली इस घटना का सबसे खौफनाक पहलू यह है कि जब युवक पिस्टल लोड कर अपनी जान ले रहा था, उसका दोस्त बचाने के बजाय वीडियो रिकॉर्ड कर रहा था। न्यू अशोक नगर थाना क्षेत्र की यह वारदात न केवल मानवीय संवेदनाओं के खत्म होने का प्रमाण है, बल्कि स्थानीय प्रशासन और MCD के उन दावों पर भी तमाचा है जो सुरक्षित दिल्ली की बात करते हैं।

वीडियो में ‘गाइड’ करता रहा दोस्त, सेकंडों में खत्म हुई जिंदगी

मृतक की पहचान पवन के रूप में हुई है। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि पवन पिस्टल में मैगजीन लोड कर रहा है। हैरानी की बात यह है कि पीछे से वीडियो बना रहा दोस्त उसे रोकने के बजाय पिस्टल चलाने के तरीके बता रहा है। जैसे ही गोली चली, पवन लहूलुहान होकर गिर पड़ा और अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया। सवाल यह है कि एक रिहायशी इलाके में सरेआम लाइसेंसी हथियारों का इस तरह प्रदर्शन और दुरुपयोग कैसे संभव है?

MCD और स्थानीय प्रशासन पर तीखा हमला

इस घटना ने दल्लूपुरा जैसे घने बसे इलाकों में प्रशासनिक नियंत्रण की पोल खोल दी है:

  • सुरक्षा ऑडिट कहाँ है?: रिहायशी इलाकों में अवैध गतिविधियों और सुरक्षा मानकों की निगरानी करने में MCD और स्थानीय निकाय पूरी तरह विफल रहे हैं। क्या निगम पार्षदों और अधिकारियों की जिम्मेदारी सिर्फ कागजों तक सीमित है?
  • हथियारों का तमाशा: रिहायशी कॉलोनियों में लाइसेंसी हथियारों के साथ रील बनाना और जानलेवा स्टंट करना आम हो गया है। प्रशासन ने इन इलाकों में गश्त और सुरक्षा नियमों को ताक पर रख दिया है।
  • बढ़ता अपराध और सुसाइड: स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इलाके में बढ़ते तनाव और प्रशासनिक उपेक्षा के कारण युवाओं में इस तरह की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिसे रोकने के लिए न तो निगम और न ही पुलिस कोई जागरूकता अभियान चला रही है।

दोस्त की पिस्टल, पवन की जान और पुलिस की तफ्तीश

शुरुआती जांच में सामने आया है कि पिस्टल पवन के उसी दोस्त की थी जो वीडियो बना रहा था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि लाइसेंसी हथियार किसी दूसरे व्यक्ति के हाथ में कैसे पहुँचा? क्या यह सिर्फ एक सुसाइड है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश है?

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गाजीपुर में ‘सरकारी लापरवाही’ की भेंट चढ़ी मासूम: आशीर्वाद अपार्टमेंट में गैस लीक से ढाई साल की बच्ची की मौत, कहाँ सोया है प्रशासन?

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के पूर्वी इलाके गाजीपुर स्थित आशीर्वाद अपार्टमेंट से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी दिल्ली को झकझोर कर रख दिया है। एक तरफ देश में एलपीजी का संकट गहराया हुआ है, तो दूसरी तरफ लापरवाही की वजह से एक ढाई साल की मासूम बच्ची को अपनी जान गंवानी पड़ी। गैस रिसाव (LPG Leakage) की इस घटना ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि स्थानीय प्रशासन और MCD (नगर निगम) की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

खेलते-खेलते मौत की आगोश में समा गई मासूम

घटना रविवार दोपहर की है, जब गाजीपुर के आशीर्वाद अपार्टमेंट में दो बहनें एक साथ खेल रही थीं। अचानक गैस पाइपलाइन या रेगुलेटर से हुए रिसाव ने पूरे घर को जहरीली गैस से भर दिया। देखते ही देखते ढाई साल की बच्ची और उसकी सात साल की बड़ी बहन बेहोश हो गई। पिता राहिद, जो पेशे से दर्जी हैं, जब तक घर पहुँचते तब तक बहुत देर हो चुकी थी। छोटी बच्ची ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया, जबकि बड़ी बहन की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।

MCD और सुरक्षा ऑडिट पर बड़ा सवाल

यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता सबूत है। आशीर्वाद अपार्टमेंट जैसे रिहायशी इलाकों में MCD और संबंधित विभाग नियमित ‘सेफ्टी ऑडिट’ करने में पूरी तरह विफल रहे हैं।

  • क्या एमसीडी ने इन पुराने और भीड़भाड़ वाले अपार्टमेंट्स में गैस पाइपलाइन और फायर सेफ्टी मानकों की जांच की थी?
  • क्या किराए के इन फ्लैटों में सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है?
  • स्थानीय निगम पार्षद और अधिकारी केवल टैक्स वसूली तक सीमित हैं, जनता की सुरक्षा उनके एजेंडे में कहीं नजर नहीं आती।

संकट के दौर में लापरवाही का ‘डबल अटैक’

एक तरफ मिडिल ईस्ट में तनाव के चलते दिल्ली की जनता गैस सिलेंडर की किल्लत और कालाबाजारी से जूझ रही है, वहीं दूसरी तरफ जो गैस उपलब्ध है, वह जानलेवा साबित हो रही है। एफएसएल (FSL) की टीम ने पुष्टि की है कि मौत का कारण गैस रिसाव ही था। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और इलाके के लोगों में भारी रोष है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते प्रशासन ने बिल्डिंग्स की सुरक्षा और गैस एजेंसियों की मनमानी पर लगाम कसी होती, तो आज एक चिराग नहीं बुझता।

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दिल्ली HC का आदेश: केजरीवाल, सिसोदिया समेत आरोपियों को जवाब दाखिल करने का समय, 6 अप्रैल को अगली सुनवाई

नई दिल्ली: दिल्ली की कथित आबकारी (शराब) नीति मामले में सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 5 अप्रैल तक का समय दिया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को की जाएगी और तब तक अदालत का पिछला अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा।

यह सुनवाई CBI की याचिका पर हुई, जिसमें निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी गई है। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी नोट किया कि अरविंद केजरीवाल ने इसी मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल की है

CBI ने उठाए निचली अदालत के फैसले पर सवाल

सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील देते हुए कहा कि इस मामले में न्याय नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष सुनवाई के लिए सभी रिकॉर्ड अदालत के सामने रखे जाने चाहिए।
तुषार मेहता ने यह भी कहा कि निचली अदालत का आदेश न्यायपूर्ण नहीं था और इस मामले की पूरी तरह से समीक्षा की जानी चाहिए।

केजरीवाल की ओर से याचिका का विरोध

वहीं अरविंद केजरीवाल की ओर से पेश वकील ने CBI की याचिका का विरोध किया। सुनवाई के दौरान सीबीआई की तरफ से यह भी आरोप लगाया गया कि केजरीवाल न्यायिक प्रक्रिया और जांच एजेंसी के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं।

फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए समय देते हुए अगली सुनवाई 6 अप्रैल को निर्धारित कर दी है। अब इस मामले में अगली तारीख पर अदालत में आगे की दलीलें सुनी जाएंगी।

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दिल्ली में LPG संकट! अटल कैंटीन और रैन बसेरों में खाने पर खतरा, कांग्रेस ने सरकार को घेरा

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कथित कमी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने आरोप लगाया है कि गैस सिलेंडर की कमी के कारण गरीबों के लिए चलाई जा रही कई सरकारी योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। उनका कहना है कि दिल्ली की अटल कैंटीन और रैन बसेरों में रहने वाले जरूरतमंद लोगों को पर्याप्त भोजन नहीं मिल पा रहा है, जबकि सरकार हालात सामान्य होने का दावा कर रही है।

सरकार के दावों पर कांग्रेस का सवाल

देवेंद्र यादव ने कहा कि एलपीजी सिलेंडर की कमी का असर अब सीधे गरीबों तक पहुंचने वाली योजनाओं पर दिखाई देने लगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अटल कैंटीन और रैन बसेरों में रहने वाले लोगों को नियमित रूप से भोजन नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर निशाना साधते हुए कहा कि दोनों नेता यह कह रहे हैं कि पेट्रोलियम पदार्थों की कोई कमी नहीं है, लेकिन जमीनी स्थिति इससे अलग दिखाई दे रही है।

अटल कैंटीन में बढ़ी भीड़, लेकिन भोजन कम

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के मुताबिक, दिल्ली में पांच रुपये में मिलने वाली थाली के लिए लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है। उन्होंने दावा किया कि अटल कैंटीन में खाने के लिए आने वालों की संख्या चार गुना तक बढ़ चुकी है, लेकिन गैस सिलेंडर की कमी के कारण पर्याप्त भोजन तैयार नहीं हो पा रहा।
दिल्ली में संचालित लगभग 71 अटल कैंटीन अब एक दिन में सुबह और शाम मिलाकर करीब 1000 लोगों को भोजन उपलब्ध कराने में भी मुश्किल का सामना कर रही हैं।

रैन बसेरों में भी गहराया संकट

देवेंद्र यादव ने कहा कि यही स्थिति दिल्ली के रैन बसेरों में भी देखने को मिल रही है। गैस सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण यहां रहने वाले कई लोगों को पर्याप्त भोजन नहीं मिल पा रहा है।
उनका दावा है कि राजधानी के कई रैन बसेरों में पिछले करीब दो सप्ताह से केवल 40 प्रतिशत लोगों को ही भोजन मिल पा रहा है, जबकि बाकी लोगों को कई बार भूखे ही रात बितानी पड़ रही है।

कई इलाकों की अटल कैंटीन प्रभावित

कांग्रेस नेता के अनुसार नरेला, मंगोलपुरी, हैदरपुर, बुध विहार, इंद्रपुरी, गीता कॉलोनी, झिलमिल और आर.के. पुरम जैसे कई इलाकों की अटल कैंटीन गैस सिलेंडर की कमी के कारण प्रभावित हो रही हैं।
अटल कैंटीन संचालकों का कहना है कि उन्हें समय पर सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं, जिसके कारण वे जरूरतमंदों के लिए पर्याप्त भोजन तैयार नहीं कर पा रहे हैं। कई जगहों पर लोग खाना पाने के लिए तीन से चार घंटे पहले ही टोकन लेने के लिए लाइन में लग रहे हैं।

ढाबों और छोटे रेस्टोरेंट पर भी असर

देवेंद्र यादव ने यह भी दावा किया कि गैस सिलेंडर की कमी का असर अब छोटे ढाबों, स्ट्रीट फूड विक्रेताओं और छोटे रेस्टोरेंट पर भी दिखने लगा है। कई जगहों पर कारोबार ठप होने की स्थिति बन गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की नीतियों के कारण न तो महंगाई पर नियंत्रण हो पा रहा है और न ही रोजगार की स्थिति सुधर रही है।

सरकार की नीति पर उठे सवाल

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, जैसे ईरान-इजरायल तनाव, के कुछ ही दिनों में देश में रसोई गैस की कमी दिखाई देने लगे तो यह सरकार की भंडारण और आपूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
उन्होंने कहा कि इतने बड़े देश में कम से कम छह महीने के पेट्रोलियम उत्पादों का भंडारण होना चाहिए था, ताकि ऐसी परिस्थितियों में आम लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

देवेंद्र यादव ने केंद्र और दिल्ली सरकार से मांग की है कि गैस सिलेंडर की आपूर्ति जल्द से जल्द सामान्य की जाए, ताकि गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन की किल्लत का सामना न करना पड़े।

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वज़ीरपुर जेजे कॉलोनी: विधायक की ‘मिडनाइट रेड’ से मचा हड़कंप, बदहाल पार्कों में दिखा ‘नशे का साम्राज्य’

-K और L ब्लॉक समेत कई पार्कों में गंदगी और अंधेरे का अंबार; छापेमारी से पहले ही नशेड़ियों के फरार होने पर पुलिस की भूमिका संदिग्ध

नई दिल्ली | दिल्ली दर्पण टीवी ब्यूरो,

वज़ीरपुर जेजे कॉलोनी में मर्डर के बाद भड़के राजनीतिक विवाद के बीच कल देर रात स्थानीय विधायक पूनम भारद्वाज ने भारी पुलिस बल के साथ इलाके के दर्जनों पार्कों और संदिग्ध ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। दिल्ली दर्पण टीवी के कैमरों में कैद हुई यह ‘लाइव रेड’ जेजे कॉलोनी के सेंट्रल पार्क से शुरू होकर K और L ब्लॉक समेत कई अन्य ब्लॉकों के पार्कों तक पहुँची।

नशेड़ियों के लिए ‘सेफ हेवन’ बने पार्क विधायक की छापेमारी के दौरान इलाके के पार्कों की जो सूरत दिखी, उसने व्यवस्था की धज्जियाँ उड़ा दीं। सेंट्रल पार्क का मुख्य गेट जंजीरों से बंद था और अंदर केवल एक व्यक्ति के घुसने की जगह छोड़ी गई थी। विधायक ने पाया कि किसी भी पार्क में न तो घास थी, न पेड़-पौधे और न ही रोशनी का कोई इंतजाम। हर तरफ अंधेरा और कूड़े के ढेर लगे थे, जो नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों के लिए एक आदर्श माहौल तैयार कर रहे थे।

छापेमारी की सूचना लीक होने का शक हैरानी की बात यह रही कि विधायक और पुलिस की इतनी बड़ी टीम के पहुंचने से पहले ही पार्कों से असामाजिक तत्व गायब हो चुके थे। विधायक पूनम भारद्वाज ने इस पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। ऐसा प्रतीत होता है कि इस ‘औचक रेड’ की सूचना अपराधियों को पहले ही मिल चुकी थी, जिससे वे समय रहते फरार होने में कामयाब रहे।

जनता का फूटा दर्द: “रहना हुआ मुहाल” भले ही रेड के दौरान अपराधी हाथ नहीं आए, लेकिन स्थानीय निवासियों ने बेबाकी से अपनी आपबीती सुनाई। लोगों ने कैमरे पर खुलकर कहा कि जेजे कॉलोनी में अब अपराधियों और नशेड़ियों के कारण रहना मुश्किल हो गया है। असामाजिक तत्वों का जमावड़ा केवल पार्कों तक सीमित नहीं है, बल्कि इलाके के मुख्य चौकों पर भी इनका कब्जा रहता है।

जवाबदेही किसकी? पार्कों में सफाई, लाइट और सुरक्षा की इस घोर अनदेखी ने निगम पार्षद चित्रा विद्यार्थी और स्थानीय पुलिस प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। ‘K’ और ‘L’ ब्लॉक के पार्कों की बदहाली यह बताने के लिए काफी है कि स्थानीय जनप्रतिनिधि और विभाग अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ चुके हैं।

पूनम भारद्वाज ने अंत में पुलिस के बीट ऑफिसर्स को अंतिम चेतावनी दी कि यदि अब सड़कों या पार्कों में कोई भी आवारा तत्व नज़र आया, तो वे मामले को डीसीपी और दिल्ली पुलिस कमिश्नर से होते हुए सीधे गृह मंत्रालय तक ले जाएंगी।

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