Sunday, May 3, 2026
spot_img
Home Blog Page 39

आंखों देखी: दिल्ली अग्निकांड में सीढ़ी होती तो बच जाती 4 जिंदगियां, बच्चे को 3 मंजिल से फेंककर बचाया

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के पालम इलाके के साध नगर बाजार में मंगलवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां एक रिहायशी मकान में लगी भीषण आग ने एक ही परिवार के 9 लोगों की जान ले ली, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि अगर फायर ब्रिगेड की हाइड्रोलिक सीढ़ी समय पर काम कर जाती, तो कम से कम 3 से 4 लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

धुएं में फंसा पूरा परिवार, मदद का इंतजार करता रहा

घटना के वक्त मकान मालिक राजेंद्र कश्यप घर पर मौजूद नहीं थे, वे किसी काम से गोवा गए हुए थे। आग लगने के बाद पूरा परिवार तीसरी मंजिल पर फंस गया था और नीचे घना काला धुआं भर चुका था। साध नगर मार्केट एसोसिएशन के महासचिव मुकेश वर्मा के मुताबिक, फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर तो पहुंची, लेकिन हाइड्रोलिक सीढ़ी समय पर नहीं खुल पाई, जिससे राहत कार्य में देरी हो गई।

बचने की कोशिश में कूदे लोग, बच्चे को नीचे फेंका गया

हालात इतने भयावह थे कि परिवार के लोग अपनी जान बचाने के लिए तीसरी मंजिल से कूदने को मजबूर हो गए। एक बच्चा हाथ से फिसलकर नीचे गिर गया, जिससे उसका हाथ फ्रैक्चर हो गया, वहीं एक अन्य युवक ने कूदकर जान बचाने की कोशिश की और घायल हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक बच्चे को नीचे खड़े लोगों की ओर फेंका गया, जिसे बचाने की कोशिश में नीचे मौजूद लोग भी घायल हो गए।

‘सीढ़ी छोटी थी, बिल्डिंग ऊंची’ – प्रत्यक्षदर्शी

एक अन्य चश्मदीद शशांक ने बताया कि फायर ब्रिगेड की सीढ़ी बिल्डिंग की ऊंचाई के मुकाबले छोटी थी। करीब 30 मिनट तक परिवार मदद के लिए पुकारता रहा, लेकिन उचित संसाधनों की कमी के कारण उन्हें समय पर बचाया नहीं जा सका।

बेसमेंट से शुरू हुई आग, मिनटों में फैली

स्थानीय लोगों के अनुसार, आग की शुरुआत बेसमेंट से हुई, जहां भारी मात्रा में सामान रखा हुआ था। देखते ही देखते आग ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। शाम करीब साढ़े छह बजे फायर ब्रिगेड को कॉल किया गया, लेकिन तब तक आग ऊपरी मंजिलों तक पहुंच चुकी थी।

कौन थे राजेंद्र कश्यप?

राजेंद्र कश्यप साध नगर राम चौक मार्केट एसोसिएशन के प्रधान थे और हाल ही में दूसरी बार इस पद पर चुने गए थे। उनका परिवार बड़ा था—पांच बेटे और एक बेटी। घटना के समय परिवार के कुछ सदस्य शिमला में भी थे। उनकी पत्नी की बहन बाला ने बताया कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि परिवार के कौन-कौन सदस्य बचे हैं।

बाजार की संरचना और सुरक्षा पर सवाल

यह हादसा एक बार फिर दिल्ली के घनी आबादी वाले बाजारों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। साध नगर बाजार संकरी गलियों में बसा है, जहां हाई वोल्टेज तारों का जाल फैला हुआ है। ग्राउंड फ्लोर पर दुकान, उसके नीचे बेसमेंट, ऊपर गोदाम और फिर रिहायशी मंजिलें—ऐसी संरचना ने आग को तेजी से फैलने में मदद की।

जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग

घटना के बाद स्थानीय लोगों और व्यापारियों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर समय पर सही उपकरण और व्यवस्था होती, तो इतनी बड़ी जान-माल की हानि टाली जा सकती थी। अब सवाल उठ रहा है कि इस लापरवाही का जिम्मेदार कौन है और क्या भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

यह भी पढ़ें:- https://delhidarpantv.com/the-publics-protest-got-buried-in-the-mcds-file-after-the-construction-of-the-palm-springs-mission-building-in-6-acres/

अदिति महाविद्यालय में ‘विकसित भारत 2047’ पर युवा कनेक्ट सेमिनार संपन्न

– दिल्ली दर्पण ब्यूरो 

दिल्ली के बवाना स्थित अदिति महाविद्यालय (दिल्ली विश्वविद्यालय) में “विकसित भारत युवा कनेक्ट” कार्यक्रम के अंतर्गत एक प्रेरणादायक सेमिनार का आयोजन किया गया । इस सेमिनार का मुख्य विषय “वंदे मातरम्: विकसित भारत 2047 के लिए सभ्यता मंत्र” रखा गया था, जिसका मूल उद्देश्य युवाओं को भारत की समृद्ध सभ्यता, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति जागरूक करना था । कार्यक्रम का कुशल मार्गदर्शन महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. नीलम राठी द्वारा किया गया, जबकि नोडल अधिकारी डॉ. मंजू रानी और छात्र समन्वयक वंशिका गुप्ता ने आयोजन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

सेमिनार की मुख्य अतिथि दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा कुमारी दिशा गोयल रहीं । उन्होंने अपने संबोधन में “वंदे मातरम्” की उत्पत्ति और इसके ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसकी रचना महान साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी । उन्होंने जोर देकर कहा कि “वंदे मातरम्” केवल एक नारा नहीं, बल्कि हमारी राष्ट्रीय चेतना का सशक्त प्रतीक है जिसने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भारतीयों में आत्मसम्मान की भावना जागृत की थी । उन्होंने उपस्थित युवाओं को “अमृत काल” के इस दौर में शिक्षा, नवाचार और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने हेतु प्रेरित किया

इस आयोजन के दौरान भारत की सांस्कृतिक पहचान और आधुनिक विकास पर भी विस्तार से चर्चा की गई । वक्ता ने स्पष्ट किया कि भारत मात्र एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि एक महान सभ्यता का प्रतीक है । सेमिनार में महाविद्यालय के अनेक छात्र-छात्राओं ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया और अंत में सभी प्रतिभागियों ने देश की प्रगति में अपना पूर्ण योगदान देने का संकल्प लिया । यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक सिद्ध हुआ

पालम में ‘मौत का तांडव’: रिहायशी इमारत बनी श्मशान, 6 लोग जिंदा जले; MCD की फाइलों में दब गई जनता की सुरक्षा!

नई दिल्ली | राजधानी दिल्ली के पालम इलाके में बुधवार की सुबह उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब एक चार मंजिला इमारत आग के गोले में तब्दील हो गई। इस दिल दहला देने वाले हादसे में 6 मासूम जिंदगियां जिंदा जलकर राख हो गईं। पालम मेट्रो स्टेशन के पास गली नंबर 2 में स्थित इस इमारत में सुबह 7 बजे आग लगी, जिसने देखते ही देखते 18 लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल दिया। दमकल की 30 गाड़ियों ने मौके पर पहुँचकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

ग्राउंड फ्लोर पर दुकान, ऊपर मौत का जाल

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, आग ग्राउंड फ्लोर पर स्थित एक कॉस्मेटिक की दुकान में लगी और पलक झपकते ही ऊपर की मंजिलों तक जा पहुँची। इमारत से बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता आग की चपेट में होने के कारण लोग अंदर ही फंस गए। अपनी जान बचाने के लिए कुछ लोग ऊपर से कूद गए, लेकिन 6 बदनसीब लोग धुएं और लपटों के बीच घुटकर रह गए।

MCD और फायर विभाग पर ‘तीखा’ वार

यह हादसा प्राकृतिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक हत्या है। यहाँ सीधे तौर पर नगर निगम (MCD) को कटघरे में खड़ा किया जाना चाहिए:

  • अवैध कमर्शियल एक्टिविटी: रिहायशी इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर कॉस्मेटिक जैसी ज्वलनशील सामग्री की दुकान को मंजूरी किसने दी? क्या एमसीडी के अधिकारी इन तंग गलियों में चल रहे ‘मौत के अड्डों’ से अनजान हैं?
  • बिल्डिंग बायलॉज की धज्जियां: चार मंजिला इमारत में न तो फायर एग्जिट (निकास द्वार) था और न ही आग बुझाने के कोई उपकरण। एमसीडी का विजिलेंस विभाग क्या सिर्फ उगाही के लिए बना है?
  • तंग गलियां और अतिक्रमण: दमकल की 30 गाड़ियां मौके पर तो पहुँचीं, लेकिन अतिक्रमण और संकरी गलियों के कारण उन्हें घंटों मशक्कत करनी पड़ी। एमसीडी ने इन गलियों से अतिक्रमण हटाने के नाम पर केवल खानापूर्ति की है।

जिम्मेदार कौन?

स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन की मिलीभगत से ऐसी इमारतों में खुलेआम कमर्शियल काम हो रहे हैं। आज 6 घरों के चिराग बुझ गए, लेकिन क्या किसी अधिकारी पर गाज गिरेगी? या फिर हर बार की तरह जांच के नाम पर मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा?

यह भी पढ़ें:- https://delhidarpantv.com/aaps-maha-dharan-sarbh-bhardwaj-in-vajra-murder-case-against-cm-keeping-secrets-and-1-crore-rupees/

वज़ीरपुर हत्याकांड: थाने में AAP का ‘महा-धरना’, सौरभ भारद्वाज ने माँगा CM रेखा गुप्ता का इस्तीफा और 1 करोड़ मुआवज़ा

नई दिल्ली | दिल्ली दर्पण ब्यूरो

दिल्ली के वज़ीरपुर जेजे कॉलोनी में मोहन की निर्मम हत्या का मामला अब एक बड़े राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के इस्तीफे की मांग की है। साथ ही, उन्होंने मृतक की तीन अनाथ बेटियों के भविष्य के लिए 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग रखी है।

भारत नगर थाने के अंदर AAP का ‘हल्ला बोल’

पीड़ित परिवार और कोली समाज के नेताओं के साथ सौरभ भारद्वाज पैदल मार्च करते हुए सीधे भारत नगर थाने पहुँचे। यहाँ भारी संख्या में पूर्व विधायक, पार्षद और स्थानीय लोग थाने के अंदर ही धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली में बढ़ते नशे के कारोबार और गुंडागर्दी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

सौरभ भारद्वाज ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “क्या अब न्याय भी धर्म और जाति देखकर होगा? उत्तम नगर जाने वाली मुख्यमंत्री वज़ीरपुर की इन अनाथ बेटियों का दर्द क्यों नहीं देख पा रही हैं? साफ है कि अपराधियों को सरकार का संरक्षण प्राप्त है।”

ACP आकाश रावत का आश्वासन: “कोई भी अपराधी बचेगा नहीं”

थाने के अंदर बढ़ते तनाव को देखते हुए ACP आकाश रावत मौके पर पहुँचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों और पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया कि:

  • पुलिस निष्पक्ष जांच कर रही है और हर एक दोषी को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
  • पीड़ित परिवार और गवाहों को पूरी पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी।
  • स्थानीय लोगों को डरने या किसी भी संदेह में रहने की जरूरत नहीं है।

इससे पहले, मामले में विवादित टिप्पणी करने वाले इंस्पेक्टर राजीव को लाइन हाजिर कर दिया गया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि विभाग किसी भी राजनीतिक दबाव में काम नहीं कर रहा है।

निष्कर्ष: अनाथ बेटियों का क्या होगा?

46 वर्षीय मोहन एक मॉल में इलेक्ट्रीशियन थे और उनके घर में बेटी की शादी की तैयारियाँ चल रही थीं। आज उनकी तीन छोटी बेटियों के सिर से पिता का साया उठ चुका है। अब सबकी नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार 1 करोड़ के मुआवजे की मांग स्वीकार करेगी और क्या वज़ीरपुर की गलियों से गुंडागर्दी खत्म होगी?

यह भी पढ़ें:- https://delhidarpantv.com/delhi-bridge-collapse-rekha-gupta-govt-negligence/

खूनी लापरवाही: रेखा गुप्ता सरकार की बेरुखी ने ली दो मासूम जान, धराशायी हुआ राजपुरा-रूपनगर पुल

नई दिल्ली | दिल्ली दर्पण ब्यूरो

राजधानी दिल्ली में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं, इसका खौफनाक मंजर आज राजपुरा गाँव और रूपनगर को जोड़ने वाले पुल पर देखने को मिला। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग (दिल्ली सरकार) के अंतर्गत आने वाला यह महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इस दर्दनाक हादसे में दो महिलाओं की मौत की खबर है, जिसने पूरी दिल्ली को झकझोर कर रख दिया है।

सवालों के घेरे में ‘रेखा सरकार’ आखिर इन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा? मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार में दिल्ली की जनता कब तक अपनी जान की कीमत चुकाती रहेगी? कभी सड़कों के गहरे गड्ढे लोगों को निगल रहे हैं, तो कभी जर्जर हो चुके सरकारी निर्माण मौत का फंदा बन रहे हैं। राजपुरा गाँव और रूपनगर के बीच का यह पुल लंबे समय से बदहाली का शिकार था, लेकिन सरकार ने समय रहते इसकी सुध लेना उचित नहीं समझा।

एमसीडी और विभाग की मिलीभगत या नाकामी? एक ओर दिल्ली सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी ढांचे का इस तरह गिरना भ्रष्टाचार की ओर साफ इशारा करता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुल की मरम्मत के लिए कई बार शिकायतें की गई थीं, लेकिन फाइलों के बोझ तले दबी शासन-प्रशासन की संवेदनहीनता ने आज दो घरों के चिराग बुझा दिए।

जनता का आक्रोश: और कितनी बलि चाहिए? हादसे के बाद इलाके में भारी तनाव है। लोगों का सीधा सवाल मुख्यमंत्री से है— “रेखा जी, क्या दिल्ली की जनता का जीवन इतना सस्ता है? आखिर और कितनी लापरवाही बर्दाश्त की जाएगी?” क्या हर बार की तरह इस बार भी केवल जांच कमेटी बिठाकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा, या फिर उन अधिकारियों और जिम्मेदारों पर गाज गिरेगी जिनकी अनदेखी ने यह खूनी खेल खेला है?

यह भी पढ़ें:- https://delhidarpantv.com/the-young-man-who-was-fooled-by-the-brokers-live-action-license-plate-did-not-get-himself-confused-with-the-flying-train-and-got-hit-by-the-system/