Sunday, May 3, 2026
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वजीरपुर जेजे कॉलोनी: बारात को रास्ता मांगने की कीमत ‘मौत’, क्या यहाँ भी पहुँचेंगे बड़े नेता?

– दिल्ली दर्पण ब्यूरो 

नई दिल्ली: दिल्ली के वजीरपुर जेजे कॉलोनी में एक बार फिर कानून का खौफ खत्म होता नजर आया। यहाँ महज एक छोटी सी गुजारिश—”बारात के लिए रास्ता दे दो”—के बदले में एक मासूम परिवार को उम्र भर का गम मिल गया। नशे में धुत करीब 20 अपराधी किस्म के लोगों ने लाठी-डंडों, बेल्ट और पत्थरों से दो भाइयों पर ऐसा कहर बरपाया कि 46 वर्षीय मोहन की जान चली गई और दुसरा  भाई बुरी तरह घायल है। यह भरी फरीदाबाद से शादी में शामिल होने आया था। 

खुशियों वाले घर में मातम का तांडव

मृतक मोहन एक मॉल में इलेक्ट्रीशियन थे और उनके घर में बेटी की शादी की तैयारियाँ चल रही थीं। उनका कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने झगड़ रहे कुछ असामाजिक तत्वों से रास्ते से हटने को कहा था। उन ‘नशेड़ियों’ ने अपनी आपसी लड़ाई छोड़ दी और इन दोनों भाइयों पर टूट पड़े। इस हमले ने तीन छोटी बेटियों के सिर से पिता का साया छीन लिया। आज पूरा इलाका दहशत में है और सवाल पूछ रहा है कि क्या ‘शरीफ’ होना इस शहर में गुनाह है?

सियासत और मीडिया के चश्मे पर सवाल

अभी हाल ही में उत्तम नगर की एक घटना पर मुख्यमंत्री मृतक के घर सांत्वना देने और मुआवजा देने पहुँचे थे। लेकिन वज़ीरपुर की इस जेजे कॉलोनी की गलियों में फैले खून पर क्या सत्ता का कैमरा चमकेगा?

बड़ा सवाल यह है कि:

  1. क्या मुख्यमंत्री या कोई बड़ा नेता मोहन के अनाथ बच्चों का हाथ थामने वज़ीरपुर आएगा?
  2. क्या मीडिया को इस खबर में दिलचस्पी होगी, या यहाँ ‘हिंदू-मुस्लिम’ एंगल न होने के कारण इसे ‘मामूली आपसी झगड़ा’ बताकर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
  3. जेजे कॉलोनियों में पनप रहे नशे के कारोबार और गुंडागर्दी पर पुलिस कब तक मौन साधे रहेगी?

स्थानीय लोगों का कहना है कि यहाँ गुंडागर्दी आम बात हो गई है। मृतक स्थानीय निगम पार्षद का रिश्तेदार था, इसके बावजूद अपराधियों के हौसले इतने बुलंद थे। यदि रसूखदार परिवारों के साथ ऐसा हो सकता है, तो आम नागरिक की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा ?

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दिल्ली में अवैध शराब पर बड़ा एक्शन, डेढ़ साल में 1.5 लाख बोतलें जब्त, 816 FIR दर्ज

दिल्ली में अवैध शराब के खिलाफ बड़ा अभियान, डेढ़ साल में 1.5 लाख बोतलें जब्त

राजधानी दिल्ली में अवैध शराब के कारोबार पर रोक लगाने के लिए पुलिस और आबकारी विभाग ने व्यापक अभियान चलाया है। इस कार्रवाई के तहत 1 जनवरी 2025 से 3 मार्च 2026 के बीच करीब 1.5 लाख अवैध शराब की बोतलें जब्त की गई हैं। इस दौरान तस्करों के खिलाफ 816 एफआईआर दर्ज की गईं, जो राजधानी में चल रहे अवैध शराब नेटवर्क पर कड़ी कार्रवाई का संकेत है।

अधिकारियों के मुताबिक, यह अभियान अवैध शराब की तस्करी और बिक्री को रोकने के लिए शुरू किया गया है, ताकि राजधानी में कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके।

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद तेज हुई कार्रवाई

सरकार की ओर से अवैध शराब के कारोबार पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाने के बाद पुलिस और आबकारी विभाग ने संयुक्त रूप से अभियान तेज कर दिया। इसके तहत कई इलाकों में लगातार छापेमारी की जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार, खास तौर पर सीमावर्ती इलाकों और उन क्षेत्रों पर निगरानी बढ़ाई गई है, जहां से अवैध शराब की तस्करी होने की संभावना रहती है। पुलिस की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं और संदिग्ध वाहनों की जांच की जा रही है।

कई मामलों में पकड़ी गई शराब की बड़ी खेप

अभियान के दौरान कई जगहों पर अवैध शराब की बड़ी खेप बरामद की गई। जांच में सामने आया कि कुछ मामलों में शराब को दूसरे राज्यों से लाकर दिल्ली में अवैध रूप से बेचा जा रहा था

पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है और तस्करी के नेटवर्क को खत्म करने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं।

कई तस्कर गिरफ्तार, नेटवर्क की जांच जारी

कार्रवाई के दौरान कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पकड़े गए तस्करों से पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है।

पुलिस का लक्ष्य सिर्फ छोटे स्तर के तस्करों को पकड़ना ही नहीं, बल्कि इस अवैध कारोबार को संचालित करने वाले बड़े गिरोहों तक पहुंचना भी है।

लोगों की सुरक्षा से भी जुड़ा है मामला

अधिकारियों का कहना है कि अवैध शराब का कारोबार केवल सरकारी राजस्व को नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि कई बार यह लोगों की जान के लिए भी खतरा बन जाता है। जहरीली या मिलावटी शराब से कई बार गंभीर घटनाएं भी सामने आती रही हैं।

इसी वजह से प्रशासन इस कारोबार को खत्म करने के लिए सख्त कदम उठा रहा है।

आगे भी जारी रहेगा अभियान

प्रशासन के अनुसार, इस बार की कार्रवाई पिछले साल की तुलना में अधिक सख्त और प्रभावी रही है। जब्त की गई शराब की बड़ी मात्रा और दर्ज एफआईआर की संख्या इस बात का संकेत देती है कि अवैध शराब के कारोबार पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा है।

आबकारी विभाग ने साफ किया है कि आने वाले समय में भी पुलिस और विभाग की संयुक्त टीमें राजधानी के विभिन्न इलाकों में निगरानी और कार्रवाई जारी रखेंगी, ताकि दिल्ली में अवैध शराब के कारोबार को पूरी तरह खत्म किया जा सके।

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दिल्ली में बांग्लादेशी नागरिकों पर बड़ी कार्रवाई, 10 लोग गिरफ्तार

राजधानी दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ अभियान के तहत दिल्ली पुलिस की फॉरेनर सेल ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 10 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक ये सभी लोग भारत में अवैध रूप से रह रहे थे और मेडिकल वीजा के जरिए बुल्गारिया जाने की कोशिश कर रहे थे। फिलहाल सभी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है और डिपोर्टेशन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है

क्या है पूरा मामला?

पुलिस को जांच के दौरान सूचना मिली थी कि कुछ संदिग्ध विदेशी नागरिक, जिनके बांग्लादेशी होने की आशंका है, वीजा की अवधि खत्म होने के बावजूद दिल्ली में रह रहे हैं। साथ ही ये लोग बुल्गारिया जाने के लिए मेडिकल वीजा प्राप्त करने की कोशिश कर रहे थे।

सूचना के आधार पर 6 मार्च को पुलिस को पता चला कि ये संदिग्ध लोग पीरागढ़ी चौक के पास स्थित डीडीए पार्क के आसपास मौजूद हैं। इसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और इलाके में निगरानी शुरू कर दी।

पुलिस को देखते ही भागने लगे संदिग्ध

पुलिस टीम को देखते ही संदिग्ध लोग वहां से भागने की कोशिश करने लगे, लेकिन पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी को पकड़ लिया। पूछताछ के दौरान कोई भी व्यक्ति वैध पहचान पत्र या यात्रा से जुड़े दस्तावेज नहीं दिखा सका।

जांच में क्या सामने आया?

पुलिस जांच में सामने आया कि गिरफ्तार किए गए लोगों के पासपोर्ट और वीजा की अवधि समाप्त हो चुकी थी। इस वजह से उनका भारत में रहना अवैध पाया गया। पुलिस ने सभी दसों लोगों को हिरासत में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी।

पुलिस के अनुसार, ये सभी लोग बुल्गारिया के लिए मेडिकल वीजा हासिल करने के उद्देश्य से भारत आए थे और यहां से आगे जाने की तैयारी में थे।

बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ क्यों चल रहा अभियान?

देश में पिछले कुछ समय से अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ अभियान तेज किया गया है। सरकार का मानना है कि अवैध घुसपैठ और बिना वैध दस्तावेज के रहने वाले विदेशी नागरिक आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं

इसी वजह से पकड़े गए बांग्लादेशी नागरिकों को उनके देश वापस भेजने के लिए डिपोर्टेशन या पुशबैक जैसी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। खासकर सीमावर्ती राज्यों जैसे असम, पश्चिम बंगाल और बिहार में इस तरह की कार्रवाई ज्यादा देखने को मिल रही है।

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मिडल ईस्ट में मिसाइलें, दिल्ली की रसोई में धमाका: सिलेंडर के लिए त्राहि-त्राहि, ‘अमेरिका की गुलामी’ के आरोपों के बीच सड़कों पर उतरी कांग्रेस!

 दिल्ली दर्पण ब्यूरो:

नई दिल्ली | मिडिल ईस्ट में गिरती मिसाइलों की गूँज अब दिल्ली की रसोई तक पहुँच गई है। वजीरपुर विधानसभा क्षेत्र में गैस सिलेंडर की किल्लत और बढ़ती महंगाई को लेकर कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि केंद्र की गलत विदेश नीति और स्थानीय प्रशासन (MCD) की अनदेखी ने आम आदमी का जीना मुहाल कर दिया है।

सिलेंडर के लिए ‘संग्राम’: 6 दिन की बुकिंग, फिर भी खाली हाथ

प्रदर्शन के दौरान स्थानीय महिलाओं और निवासियों का दर्द छलक पड़ा। लोगों का कहना है कि सिलेंडर बुक कराए हफ़्तों बीत चुके हैं, लेकिन चूल्हा जलने की नौबत नहीं आ रही। हालत यह है कि गैस एजेंसियों पर लंबी लाइनें लग रही हैं और आपस में मारपीट की नौबत आ गई है। स्थानीय निवासियों ने एमसीडी और सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा कि यदि उनके पास पर्याप्त भंडारण है, तो जमीन पर त्राहि-त्राहि क्यों मची है?

विदेशी नीति या गुलामी? कांग्रेस का तीखा हमला

पूर्व विधायक और कांग्रेस प्रवक्ता हरिशंकर गुप्ता ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा सरकार अमेरिका की ‘गुलामी’ कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि रूस से सस्ता तेल और गैस उपलब्ध होने के बावजूद सरकार दबाव में आकर जनता को महंगी महंगाई की आग में झोंक रही है। गुप्ता ने कहा, “ईरान हमारा पुराना मित्र था, लेकिन आज सरकार ने उसे दरकिनार कर दिया है, जिसका खामियाजा दिल्ली की जनता भुगत रही है।”

MCD और स्थानीय प्रशासन पर सवाल

प्रदर्शनकारियों ने एमसीडी को घेरते हुए कहा कि गलियों में कालाबाजारी चरम पर है। ₹1000 का सिलेंडर ब्लैक में बिक रहा है और प्रशासन चैन की नींद सो रहा है। निगम पार्षदों के क्षेत्रों में लोग गैस के लिए भटक रहे हैं, लेकिन जन प्रतिनिधियों के पास जनता के सवालों का कोई जवाब नहीं है।

मुख्य बिंदु:

  • कालाबाजारी: दिल्ली में गैस सिलेंडर की भारी किल्लत और ₹1000 से ऊपर की ब्लैक मार्केटिंग।
  • विदेशी नीति: अमेरिका के दबाव में रूस से सस्ता तेल न खरीदने का आरोप।
  • जनता का डर: मध्यमवर्गीय परिवारों में ‘रोटी बनेगी या नहीं’ को लेकर दहशत का माहौल।

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MCD की ‘वसूली’ का अड्डा बना अशोक विहार: ₹800 रोज की रिश्वत और अवैध खोखों का राज!!

 दिल्ली दर्पण ब्यूरो:

नई दिल्ली: उत्तर दिल्ली की सबसे प्रतिष्ठित और बड़ी मार्केटों में शुमार ‘अशोक विहार सेंट्रल मार्केट’ आज अपनी पहचान खो चुकी है। जो फुटपाथ पैदल चलने वालों के लिए थे, उन पर अब अवैध खोखों और रेहड़ी-पटरी माफिया का राज है। स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि यहाँ दुकानों के बाहर अवैध कब्जे करवाकर रोजाना ₹700 से ₹800 की वसूली की जा रही है, और यह सब कुछ एमसीडी अधिकारियों की नाक के नीचे हो रहा है।

साहब के आने पर ‘कॉस्मेटिक’ सफाई, आम दिनों में बदहाली

मार्केट एसोसिएशन के नवनिर्वाचित प्रधान और व्यापारियों ने निगम की कार्यशैली की बखिया उधेड़ते हुए बताया कि सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है। रविवार को जब सबसे ज्यादा भीड़ होती है, तब कोई सफाई कर्मचारी नजर नहीं आता। सोमवार को आधी मार्केट खुली होने के बावजूद कूड़े के अंबार लगे रहते हैं।

निगम की पोल खोलते कड़वे सच:

  • फर्जी कागजों का खेल: व्यापारियों का सीधा आरोप है कि मार्केट में कई खोखे फर्जी दस्तावेज बनाकर लगा लिए गए हैं। जिन्हें एक बार तोड़ा जाता है, वे अगले ही दिन फिर खड़े हो जाते हैं। बिना ‘ऊपर की सेटिंग’ के यह कैसे मुमकिन है?
  • पार्क बने कूड़ेदान: मार्केट के साथ लगते पार्कों की हालत बदतर है। अवैध कब्जा करने वाले अपना सारा कचरा पार्कों और नालों में फेंक देते हैं, जिससे पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों खतरे में हैं।
  • लाइसेंसिंग इंस्पेक्टर पर सवाल: क्या एलआई (LI) को सड़कों पर फैला यह अतिक्रमण नहीं दिखता? व्यापारियों का कहना है कि यह पूरा खेल मिलीभगत का है।

पार्षद की बेबसी या अधिकारियों की मनमानी?

मौके पर पहुँचीं क्षेत्रीय निगम पार्षद मीनाक्षी विजय जी ने खुद स्वीकार किया कि पूरे वार्ड में अतिक्रमण की समस्या गंभीर है। हालांकि, वह खुद को ‘नई’ बताकर अभी समाधान की तलाश में हैं, लेकिन सवाल यह है कि आखिर कब तक? जनता ने समाधान के लिए वोट दिया है, ‘कोशिश’ के वादों के लिए नहीं।

जब डीसी (DC) साहब के आने की खबर मिली, तब आनन-फानन में निगम का अमला हरकत में आया और कुछ रेहड़ियों को उठाना शुरू किया। व्यापारियों ने इसे ‘खानापूर्ति’ करार दिया। उनका कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ साहब को दिखाने के लिए है, कल फिर वही ढांचा खड़ा मिलेगा।

तीखा सवाल: अगर अशोक विहार जैसी पॉश मार्केट का यह हाल है, जहाँ अक्सर सांसद, विधायक और पार्षद दौरा करते हैं, तो दिल्ली के बाकी हिस्सों की क्या दुर्गति होगी? क्या एमसीडी के अधिकारी सिर्फ वसूली और ‘औचक निरीक्षण’ के ड्रामे के लिए तैनात हैं?

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