Sunday, May 3, 2026
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MCD की ‘कमीशनखोरी’ या लाचारी? जिस अवैध कंटेनर को दुकानदारों ने चंदा देकर हटवाया, वो रातों-रात फिर कैसे जम गया?

 दिल्ली दर्पण ब्यूरो:

नई दिल्ली: दिल्ली के बाजारों में अतिक्रमण हटाने के दावे तो बहुत किए जाते हैं, लेकिन हकीकत दावों से कोसों दूर है। ताजा मामला दिल्ली के एक प्रमुख बाजार का है, जहां एक विशालकाय (भीमकाय) लोहे का कंटेनर रहस्यमयी तरीके से रातों-रात फिर से स्थापित कर दिया गया है। हैरानी की बात यह है कि इस कंटेनर को कुछ समय पहले स्थानीय दुकानदारों ने अपनी जेब से 15,000 रुपये क्रेन का किराया देकर हटवाया था, क्योंकि एमसीडी (MCD) के पास इसे हटाने के संसाधन नहीं थे।

भ्रष्टाचार या लापरवाही? सवालों के घेरे में निगम

बाजार के प्रधान मनोज और स्थानीय एसोसिएशन का कहना है कि यह अवैध कंटेनर पूरी तरह से एक दुकान चलाने की योजना है। इसमें बकायदा पंखे, बिजली के बोर्ड और आधुनिक फिटिंग की गई है। हालांकि, इसे ‘चार्जिंग स्टेशन’ का नाम देकर बचाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन मौके पर मौजूद बिजली के पॉइंट्स और सेटअप कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।

मुख्य बिंदु जो एमसीडी को कटघरे में खड़ा करते हैं:

  • अंधेर नगरी चौपट राजा: जब निगम ने इसे एक बार अवैध मानकर हटवा दिया था, तो वही ढांचा दोबारा उसी जगह कैसे लग गया?
  • जनता का पैसा, निगम की सुस्ती: स्थानीय लोगों को अपनी जेब से क्रेन बुलानी पड़ी। क्या अब दिल्ली की सड़कों से अतिक्रमण हटाने का ठेका भी जनता को ही लेना पड़ेगा?
  • अधिकारियों की चुप्पी: इलाके के एलआई (LI) और संबंधित अधिकारियों का कहना है कि उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं है। दो-तीन महीने से रखे इस विशाल कंटेनर का अधिकारियों को न दिखना, मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

नेताओं के दावे बनाम धरातल की सच्चाई

स्थानीय भाजपा नेता और निगम पार्षद के प्रतिनिधि क्षेत्र में ‘जीरो टॉलरेंस’ का दम भर रहे हैं। सतीश गर्ग जैसे नेताओं का कहना है कि भाजपा किसी भी कीमत पर अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं करेगी, लेकिन जब उनसे वजीरपुर की 1200 गज की अवैध बिल्डिंग और सड़कों पर बढ़ते अतिक्रमण पर सवाल पूछा गया, तो जवाब सिर्फ “कार्यवाही होगी” तक ही सीमित रहा।

सांसद महोदय हर महीने ‘जनसुनवाई’ करते हैं और प्राथमिकता ‘अतिक्रमण’ को दी जाती है, लेकिन हकीकत में शिकायतें कम होने के बजाय बढ़ती जा रही हैं। क्या ये जनसुनवाई महज एक औपचारिकता है?

बड़ा सवाल: अगर डीसी (DC) साहब के दौरे के वक्त भी अवैध निर्माण और ऐसे ‘भीमकाय कंटेनर’ सीना ताने खड़े हैं, तो क्या यह माना जाए कि एमसीडी का अमला पूरी तरह से पंगु हो चुका है या फिर ‘ऊपर तक’ हिस्सा पहुंच रहा है?

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सब-इंस्पेक्टर बनने से किया इनकार, दिल्ली पुलिस अधिकारी ने कहा– कांस्टेबल ही ठीक हूं

राजधानी दिल्ली के पुलिस विभाग में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने अधिकारियों से लेकर आम लोगों तक को हैरान कर दिया है। दिल्ली पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर (SI) ने अपने प्रमोशन को वापस लेने और दोबारा कांस्टेबल बनाए जाने की मांग की है। इस संबंध में लिखे गए उनके पत्र की चर्चा अब पूरे पुलिस महकमे में हो रही है।

दरअसल, संबंधित सब-इंस्पेक्टर ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर कहा है कि उन्हें सब-इंस्पेक्टर नहीं बनना और उन्हें फिर से कांस्टेबल बना दिया जाए। अधिकारी की इस असामान्य मांग ने पुलिस विभाग को भी असमंजस में डाल दिया है।

क्या है पूरा मामला?

सूत्रों के मुताबिक, यह मामला दिल्ली के उत्तर-पूर्वी जिले के एक पुलिस स्टेशन से जुड़ा है। यहां तैनात एक सब-इंस्पेक्टर ने हाल ही में अपने वरिष्ठ अधिकारियों के सामने एक अजीबोगरीब अनुरोध रखा। उन्होंने लिखित रूप में अपील की कि उनकी पदोन्नति को वापस लेकर उन्हें फिर से कांस्टेबल के पद पर भेज दिया जाए।

इस तरह की मांग पुलिस विभाग में बेहद दुर्लभ मानी जाती है। आमतौर पर कर्मचारी प्रमोशन पाने के लिए प्रयास करते हैं, लेकिन यहां मामला बिल्कुल उल्टा है।

कांस्टेबल के तौर पर हुई थी भर्ती

जानकारी के अनुसार, यह पुलिसकर्मी पहले कांस्टेबल के पद पर भर्ती हुआ था। बाद में विभागीय प्रक्रिया के तहत उसे पदोन्नत कर सब-इंस्पेक्टर बना दिया गया। लेकिन अब वह खुद अपनी पदोन्नति को वापस करवाना चाहता है और पहले वाले पद पर लौटने की इच्छा जता रहा है।

इस संबंध में पुलिस मुख्यालय की पेंशन सेल की ओर से सभी संबंधित इकाइयों को एक पत्र भेजा गया है, जिसमें इस मामले की जानकारी मांगी गई है।

पुलिस मुख्यालय ने मांगी रिपोर्ट

पुलिस मुख्यालय ने आगे की कार्रवाई से पहले सभी जिलों और इकाइयों से रिपोर्ट मांगी है। पत्र में यह भी पूछा गया है कि संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ कोई विभागीय जांच, आपराधिक मामला, विजिलेंस जांच, निलंबन, शिकायत, ओवरपेमेंट, मेडिकल या अनुपस्थिति से जुड़ा मामला तो लंबित नहीं है।

साथ ही सभी इकाइयों को तीन दिनों के भीतर नो डिमांड सर्टिफिकेट (NDC) उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। यदि तय समय में कोई जानकारी नहीं दी जाती है तो उसे निल रिपोर्ट माना जाएगा और उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल यह मामला पुलिस विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि किसी अधिकारी का खुद प्रमोशन वापस लेने की मांग करना बेहद दुर्लभ और असामान्य घटना मानी जा रही है।

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वज़ीरपुर में आस्था पर MCD का प्रहार या सियासी इंतकाम? सुबह 5 बजे हवनकुंड पर चला हथौड़ा, सुलग उठा तमिल समाज

 दिल्ली दर्पण ब्यूरो

नई दिल्ली | सावन पार्क वार्ड (वज़ीरपुर): राजधानी के वज़ीरपुर जेजे कॉलोनी (जी-ब्लॉक) में उस वक्त भारी तनाव फैल गया जब नगर निगम (MCD) के दस्ते ने तमिल समाज द्वारा धार्मिक आयोजन के लिए बनाए गए हवनकुंड को ज़मींदोज़ कर दिया। यह कार्रवाई सुबह 5 बजे की गई, जिससे स्थानीय लोगों में भारी रोष है। मामला केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब इसमें तीखी सियासत भी जुड़ गई है।

सत्ता की हनक या ‘न्योता’ न मिलने का गुस्सा?
क्षेत्र में चर्चा है कि इस धार्मिक आयोजन में भारतीय जनता पार्टी की विधायक पूनम भारद्वाज को तो आमंत्रित किया गया था, लेकिन आम आदमी पार्टी की स्थानीय निगम पार्षद चित्रा विद्यार्थी को बुलावा नहीं मिला। आरोप लग रहे हैं कि इसी ‘अनदेखी’ का बदला लेने के लिए एमसीडी के जरिए यह कार्रवाई करवाई गई। हालांकि, पार्षद चित्रा विद्यार्थी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने केवल पार्कों की बदहाली की जांच के निर्देश दिए थे, हवनकुंड तोड़ने का कोई आदेश नहीं दिया।

वज़ीरपुर में आस्था पर MCD का प्रहार या सियासी इंतकाम? सुबह 5 बजे हवनकुंड पर चला हथौड़ा, सुलग उठा तमिल समाज

सवालों के घेरे में MCD: ‘ऊपर’ का आदेश किसका था?
मौके पर मौजूद एमसीडी अधिकारियों की स्थिति बेहद हास्यास्पद और संदिग्ध नज़र आई। जब विधायक और जनता ने उनसे पूछा कि यह कार्रवाई किसके लिखित या मौखिक आदेश पर हुई, तो अधिकारी बगलें झांकने लगे। अधिकारियों का तर्क था कि पार्क में बिना अनुमति आयोजन ‘अवैध’ है, लेकिन उनके पास इस सवाल का जवाब नहीं था कि:

  • अगर यह अवैध है, तो पूरी जेजे कॉलोनी में होने वाले अन्य आयोजनों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती?
  • पार्कों की बदहाली, वहां होने वाले जुए और शराबियों के जमावड़े पर प्रशासन की आंखें क्यों बंद हैं?
  • आखिर ऐसी क्या इमरजेंसी थी कि सुबह 5 बजे ही बुलडोजर चलाना पड़ा?

बीजेपी ने घेरा, पार्षद की सफाई बेअसर
बीजेपी नेता अशोक भारद्वाज ने निगम प्रशासन और पार्षद को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि क्षेत्र के पार्कों में न पौधे लगते हैं, न सफाई होती है, बस वहां असामाजिक तत्वों का डेरा रहता है। उन्होंने सीधा सवाल किया कि क्या एमसीडी अब केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करने का जरिया बन गई है?

दूसरी ओर, पार्षद चित्रा विद्यार्थी लाख सफाई देती रहीं कि यह आदेश उनका नहीं है, लेकिन तमिल समाज के लोग यह मानने को तैयार नहीं हैं। उनका तर्क है कि जब एमसीडी पार्षद के अधीन आती है, तो बिना उनकी जानकारी के अधिकारी इतनी बड़ी हिम्मत कैसे कर सकते हैं?

धार्मिक भावनाओं और राजनीति का संगम
इस हंगामे ने वज़ीरपुर की फिजां में तनाव घोल दिया है। एक तरफ जहां भारी नारेबाजी हो रही है, वहीं दूसरी तरफ एमसीडी अधिकारी केवल इतना कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि “मैं क्या कहूं?” यह “मौन” खुद में कई राज़ छुपाए हुए है।

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उत्तम नगर में भीषण आग का तांडव, 300-400 झुग्गियां जलकर खाक, तबाही का वीडियो वायरल

दिल्ली के उत्तम नगर में भीषण आग, 300–400 झुग्गियां जलकर खाक

राजधानी दिल्ली के उत्तम नगर इलाके से बुधवार रात एक बड़ी आगजनी की घटना सामने आई है। मटियाला गांव स्थित झुग्गी बस्ती में लगी इस भीषण आग ने कुछ ही देर में विकराल रूप ले लिया और करीब 300 से 400 झुग्गियां जलकर पूरी तरह खाक हो गईं। आग लगने के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोगों ने किसी तरह अपनी जान बचाकर बाहर निकलने की कोशिश की।

राहत की बात यह है कि अब तक इस हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं मिली है। हालांकि आग से झुग्गियों में रहने वाले कई परिवारों का सामान और रोजमर्रा की जरूरत की चीजें जलकर नष्ट हो गईं।

रात करीब 11:50 बजे मिली सूचना

दिल्ली फायर सर्विस के मुताबिक, बुधवार रात करीब 11:50 बजे उत्तम नगर के मटियाला गांव स्थित झुग्गी इलाके में आग लगने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही दमकल विभाग तुरंत हरकत में आया और 23 दमकल गाड़ियों को मौके पर भेजा गया

दमकलकर्मियों ने घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि आसपास के इलाके में दहशत का माहौल बन गया था।

मछली मार्केट इलाके में लगी थी आग

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, आग मटियाला गांव के मछली मार्केट के पास स्थित झुग्गी बस्ती में लगी थी। देखते ही देखते आग ने कई झुग्गियों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे भारी नुकसान हुआ।

घटनास्थल से सामने आए तबाही के दृश्य

गुरुवार सुबह घटनास्थल से सामने आए वीडियो और तस्वीरों में आग की भयावहता साफ दिखाई दे रही है। पूरे इलाके में जली हुई झुग्गियों का मलबा और राख फैली हुई नजर आ रही है। कई परिवारों का घर और सामान इस आग में पूरी तरह नष्ट हो गया।

दिल्ली अग्निशमन सेवा के अधिकारियों के मुताबिक, आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है और नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है।

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DC संदीप गहलोत का वार्ड 65 में तूफानी दौरा , अतिक्रमण और बदहाली पर दी सख्त चेतावनी

अशोक विहार: दिल्ली दर्पण टीवी 

दिल्ली नगर निगम (MCD) के केशव पुरम जोन के डीसी संदीप गहलोत ने बुधवार को क्षेत्रीय निगम पार्षद वीना असीजा के साथ वार्ड संख्या 65 का सघन दौरा किया। दोपहर 12 बजे अशोक विहार सेंट्रल मार्केट से शुरू हुए इस ‘तूफानी दौरे’ ने इलाके के अतिक्रमणकारियों और लापरवाह अधिकारियों में हड़कंप मचा दिया। डीसी के आने की सूचना मिलते ही निगम का अमला एक्शन में दिखा; आनन-फानन में सफाई की गई और चूना बिछाकर व्यवस्था सुधारने की कोशिश हुई।

बाजार की बदहाली और अवैध कब्जों पर बरसे DC

निरीक्षण के दौरान डीसी संदीप गहलोत को बाजार में बड़े पैमाने पर अवैध खोखे और अतिक्रमण नजर आया। उन्होंने खुद मौके पर मौजूद अवैध कब्जाधारियों को कड़ी चेतावनी दी। बाजार में साफ-सफाई की व्यवस्था संतोषजनक नहीं मिली; कई जगहों पर नाले टूटे हुए और कूड़े से भरे पाए गए। इस दौरान पार्षद वीना असीजा के साथ मार्केट प्रधान, स्थानीय दुकानदार, आरडब्ल्यूए (RWA) प्रतिनिधि और भारी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।

कम्युनिटी सेंटर की दुर्दशा पर नाराजगी

दौरे के अगले चरण में डीसी वज़ीरपुर गांव के कम्युनिटी सेंटर और सभा स्थल पहुंचे। स्थानीय निवासियों ने शिकायत की कि यह स्थान पहले कीर्तन और छोटे आयोजनों के काम आता था, लेकिन अब रखरखाव के अभाव में पूरी तरह बदहाल हो चुका है। डीसी ने इसका गहन निरीक्षण किया और जल्द सुधार के निर्देश दिए।

कार डीलरों और रेस्टोरेंट्स की मनमानी

क्षेत्र की आरडब्ल्यूए और स्थानीय लोगों ने सबसे बड़ी समस्या कार डीलरों द्वारा सड़कों और फुटपाथों पर किए गए अवैध कब्जों को बताया। केडी ब्लॉक आरडब्ल्यूए ने लिखित शिकायत देते हुए बताया कि कार डीलरों ने अपनी गाड़ियां बिक्री के लिए सड़क पर खड़ी कर दी हैं, जिससे पैदल चलना भी दूभर है। इसके अलावा “मिस्टर क्रश” बेकरी और रेस्टोरेंट पर आने वाली गाड़ियों के कारण लगने वाले जाम और फ्लैट्स में किए गए अतिक्रमण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा।

“हमने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं। सड़कों और फुटपाथों पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आगामी 10 दिनों के भीतर पूरी सफाई और कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।” > — संदीप गहलोत, डीसी (रोहिणी/केशव पुरम जोन)

क्षेत्रीय पार्षद वीना असीजा और बीजेपी नेता सतीश गर्ग ने भी इस दौरे के बाद उम्मीद जताई कि डीसी के कड़े रुख के बाद अब जनता को जाम और अतिक्रमण से मुक्ति मिलेगी। गौरतलब है कि दिल्ली दर्पण टीवी इस भ्रष्टाचार और पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत से चल रहे अतिक्रमण के खिलाफ लगातार आवाज उठाता रहा है। अब देखना यह होगा कि डीसी के इस 10 दिन के अल्टीमेटम का जमीन पर कितना असर होता है।

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