Monday, May 4, 2026
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ब्याज के विवाद में अधेड़ की निर्मम हत्या, दो सगे भाइयों ने शव को बोरे में भरकर नाले में फेंका; गिरफ्तार

नई दिल्ली: दिल्ली के रोहिणी जिला अंतर्गत अमन विहार इलाके में सूद के पैसों के लेन-देन को लेकर एक 50 वर्षीय व्यक्ति की सनसनीखेज हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस ने एक ‘ब्लाइंड मर्डर’ की गुत्थी को सुलझाते हुए दो सगे भाइयों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने हत्या के बाद सबूत मिटाने के इरादे से शव को बोरे में बंद कर नाले में फेंक दिया था। मृतक की पहचान अजय झा के रूप में हुई है, जो इलाके में ब्याज पर पैसे देने का काम करते थे। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर चंदर विहार नाले से शव बरामद कर लिया है।

रोहिणी जिले के एडिशनल CP राजीव रंजन से मिली जानकारी के अनुसार, मृतक अजय झा ने प्रेम नगर निवासी सोनू और महबूब अली को करीब चार लाख रुपये ब्याज पर दिए थे। दोनों भाई इलाके में ‘रजा’ नाम का एक होटल चलाते थे। लंबे समय से ब्याज नहीं चुका पाने के कारण दोनों पक्षों के बीच विवाद काफी बढ़ गया था। इसी रंजिश में आरोपियों ने अजय झा की हत्या कर दी और शव को ठिकाने लगा दिया। घटना के बाद जब अजय घर नहीं पहुंचे, तो परिजनों ने थाने में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

पुलिस ने मामले की संजीदगी को देखते हुए टेक्निकल सर्विलांस और लोकल इनपुट की मदद से जांच शुरू की। शक के आधार पर पुलिस ने सोनू और महबूब अली को हिरासत में लिया। कड़ी पूछताछ में दोनों भाइयों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया और बताया कि उन्होंने कानून से बचने की हर मुमकिन कोशिश की थी, लेकिन पुलिस की टीम ने उन्हें धर दबोचा। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और दोनों आरोपी फिलहाल पुलिस की गिरफ्त में हैं।

अजय झा की मौत के बाद उनके परिवार में मातम पसरा हुआ है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। मृतक अपने पीछे पत्नी, तीन बेटियां और एक बेटा छोड़ गए हैं। इस खौफनाक वारदात ने एक बार फिर दिल्ली को दहला दिया है, जहाँ चंद रुपयों के लालच और खराब नियत ने एक हंसते-खेलते परिवार के मुखिया की जान ले ली।

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दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर सवाल: कोर्ट ने गैर-कानूनी गिरफ्तारी पर लगाई फटकार

दिल्ली दर्पण ब्यूरो

नई दिल्ली। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने यूथ कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब की गिरफ्तारी के मामले में दिल्ली पुलिस की सख्त खिंचाई की है। कोर्ट ने पुलिस के उस तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया जिसमें FIR की कॉपी देने से मना किया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को उसके अपराध की जानकारी दिए बिना हिरासत में रखना संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 का सीधा उल्लंघन है। पुलिस की इस कार्यप्रणाली से एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या लोकतांत्रिक प्रदर्शन को दबाने के लिए कानूनी प्रक्रियाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने दिल्ली पुलिस की उस कोशिश को नाकाम कर दिया जिसमें एक सामान्य प्रदर्शन को “आतंकवाद या उग्रवाद” जैसा गंभीर बताकर पेश किया जा रहा था। कोर्ट ने दो-टूक शब्दों में कहा कि यह महज एक ‘प्रतीकात्मक विरोध’ (Symbolic Protest) था और इससे जांच को कोई खतरा नहीं है। अदालत की इस टिप्पणी ने पुलिस द्वारा पैदा किए गए उस भ्रम को तोड़ दिया है जिसके तहत इसे एक बड़ी साजिश के रूप में दिखाने की कोशिश की जा रही थी। बिना FIR के गिरफ्तारी ने पुलिस की नियत पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस पूरे प्रकरण से यह साफ संदेश गया है कि सरकार और पुलिस मिलकर विरोध की आवाज को डराने की कोशिश कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ समय में दिल्ली पुलिस का रवैया एक ‘पुलिस स्टेट’ की तरह होता जा रहा है, जहाँ कानूनी मर्यादाओं को ताक पर रखकर कार्रवाई की जाती है ताकि आंदोलनकारियों को सबक सिखाया जा सके। हालांकि, कोर्ट के इस कड़े रुख ने यह साफ कर दिया है कि लोकतांत्रिक देश में नागरिकों के अधिकारों को मनमाने तरीके से नहीं छीना जा सकता।

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‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ वार : राहुल गांधी के आरोपों पर भाजपा का पलटवार, गांधी परिवार को बताया

कॉम्प्रोमाइज्ड फैमिली’
-दिल्ली दर्पण ब्यूरो

नई दिल्ली: कांग्रेस और भाजपा के बीच ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ शब्द को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा बार-बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “कॉम्प्रोमाइज्ड” (दबाव में काम करने वाला) बताने के आरोपों पर अब भारतीय जनता पार्टी ने तीखा पलटवार किया है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीधे गांधी परिवार पर हमला बोला और पूरी कांग्रेस को ही एक “कॉम्प्रोमाइज्ड फैमिली” और “कॉम्प्रोमाइज्ड पार्टी” करार दे दिया।

पीयूष गोयल ने कहा कि राहुल गांधी नकारात्मक राजनीति के पोस्टर बॉय बन गए हैं और उनका परिवार पूरी तरह एक “कॉम्प्रोमाइज्ड” राजनीतिक परिवार है, जो विदेशी ताकतों के इशारे पर देश की अर्थव्यवस्था और जन-हित के खिलाफ काम कर रहा है। गोयल ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपनी 247 विदेश यात्राओं के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल और ‘येलो बुक’ का उल्लंघन करते हैं और बाहर जाकर भारत विरोधी ताकतों के साथ मिलकर देश को आर्थिक रूप से अस्थिर करने की साजिश रचते हैं। उन्होंने राहुल गांधी को “विदेशी शक्तियों की कठपुतली” बताते हुए कहा कि वे जॉर्ज सोरोस और इल्हान उमर जैसी विवादित हस्तियों के साथ मिलकर भारत के वर्चस्व को नुकसान पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं।

इतना ही नहीं, गोयल ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए नेहरू-गांधी परिवार के पिछले निर्णयों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि अक्साई चिन को चीन को सौंपना, शिमला समझौते में बिना पीओके (POK) लिए 93,000 पाकिस्तानी कैदियों को छोड़ना और विदेशी एजेंसियों से चुनाव के लिए फंड लेना इस परिवार की “कॉम्प्रोमाइज्ड” मानसिकता के प्रमाण हैं। उन्होंने साफ किया कि प्रधानमंत्री मोदी की बढ़ती लोकप्रियता से बौखलाकर कांग्रेस अब झूठ और फरेब का सहारा ले रही है, लेकिन देश की समझदार जनता इस “कॉम्प्रोमाइज्ड” राजनीति का मुंहतोड़ जवाब देगी।

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जेफ्री एपस्टीन फाइल्स को लेकर कांग्रेस का केंद्र पर बड़ा हमला, विदेश नीति को ‘रिमोट कंट्रोल’ से संचालित होने का लगाया आरोप

नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान “जेफ्री ने बना दी जोड़ी” का पोस्टर जारी करते हुए केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखे प्रहार किए हैं। खेड़ा ने दावा किया कि भारत की विदेश और रक्षा नीति अब राष्ट्रीय हितों के बजाय यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन और इजरायली लॉबी के इशारों पर चल रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री को एक “रोबोट” और “कठपुतली” करार देते हुए आरोप लगाया कि सरकार की पूरी कार्यप्रणाली विदेशी ताकतों के हाथों में गिरवी है, जिसका खुलासा एपस्टीन की फाइलों से हो रहा है।

खेड़ा ने 2017 की ई-मेल्स का हवाला देते हुए एक ‘क्रोनोलॉजी’ पेश की, जिसमें उन्होंने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, उद्योगपति अनिल अंबानी और इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री एहुद बराक के बीच एक संदिग्ध त्रिकोण होने का दावा किया। कांग्रेस प्रवक्ता के अनुसार, हरदीप पुरी ने न्यूयॉर्क में एपस्टीन से मुलाकात की थी, जिसके बाद एपस्टीन ने अनिल अंबानी का परिचय इजरायली एजेंसी मोसाद के करीबी माने जाने वाले एहुद बराक से कराया। आरोप है कि अनिल अंबानी ने भारत के रक्षा सहयोग और व्हाइट हाउस के साथ संबंधों को लेकर एपस्टीन से ‘मार्गदर्शन’ मांगा था, जिसके बाद ही पेगासस और मिसाइल सिस्टम जैसे बड़े रक्षा सौदे भारत आए।

पवन खेड़ा ने आगे कहा कि एपस्टीन की फाइलों में दबे राज इतने संवेदनशील हैं कि प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट विदेशी दबाव में काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी ‘ब्लैकमेलिंग’ की वजह से भारत ने अपनी दशकों पुरानी स्वतंत्र विदेश नीति को बदलकर फिलिस्तीन के मुद्दे पर चुप्पी साध ली है। खेड़ा ने सवाल उठाया कि क्या देश की रक्षा नीति और जनता के टैक्स का पैसा कहाँ खर्च होगा, यह विशेषज्ञों के बजाय एपस्टीन जैसे लोग तय कर रहे हैं? कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार इन ईमेल और फाइलों में लगे आरोपों पर अपनी चुप्पी तोड़े और स्थिति स्पष्ट करे।

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बांसी बेरदाह में गूँजी जल-जंगल-ज़मीन की लड़ाई: आदिवासियों ने माँगा 1 करोड़ प्रति एकड़ मुआवज़ा या ज़मीन के बदले ज़मीन

दिल्ली दर्पण ब्यूरो 

सिंगरौली अडानी समूह द्वारा धिरौली ब्लॉक के आठ गाँवों में किए जा रहे भूमि अधिग्रहण के विरोध में किसान संघर्ष समिति ने बांसी बेरदाह ग्राम में पाँचवीं ‘किसान पंचायत’ का आयोजन किया। कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह की अध्यक्षता में हुई इस पंचायत में आदिवासियों और किसानों ने एक स्वर में सरकार और अडानी समूह के खिलाफ हुंकार भरी। पंचायत में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि लगभग 6,600 एकड़ भूमि के अधिग्रहण और 1,400 हेक्टेयर क्षेत्र में करीब 6 लाख पेड़ों की कटाई अवैध है और इसे तत्काल रद्द किया जाना चाहिए।

किसान पंचायत को संबोधित करते हुए समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुनीलम ने एकजुटता पर ज़ोर देते हुए कहा कि कंपनियाँ डरा-धमकाकर या लालच देकर आंदोलनों को कुचलने का प्रयास करती हैं, लेकिन किसानों का संकल्प टूटने वाला नहीं है। वहीं, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए एलान किया कि मार्च के अंतिम सप्ताह में एक बार फिर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि ग्रामीण जागरूक न होते, तो 6 लाख पेड़ों की गुपचुप तरीके से कटाई कर ली गई होती।

महिला जिला अध्यक्ष सोनमती ने आदिवासियों की पीड़ा साझा करते हुए कहा कि हम अपने पुरखों की ज़मीन किसी भी कीमत पर अडानी को नहीं देना चाहते, लेकिन यदि सरकार ने बिना सहमति हमारी ज़मीन सौंपी है, तो हमें ज़मीन के बदले ज़मीन दी जाए या फिर 1 करोड़ रुपये प्रति एकड़ का मुआवज़ा मिले। इसके साथ ही प्रत्येक विस्थापित परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी देने की माँग भी उठाई गई। सोनमती ने यह भी बताया कि क्षेत्र के लोगों को राहुल गांधी के आने का इंतज़ार है, जिन्होंने मुलाकात के दौरान बांसी बेरदाह आने का आश्वासन दिया था।

पंचायत के दौरान अखिलेश शाह ने भी अपने विचार रखे और कहा कि फर्जी मुकदमों और जिला बदर जैसी कार्रवाइयों से आदिवासी समाज डरने वाला नहीं है, क्योंकि वे भगवान बिरसा मुंडा और टंट्या भील के वंशज हैं। प्रदेश सचिव निसार आलम अंसारी ने कहा कि समिति सड़क से लेकर न्यायालय तक इस अवैध अधिग्रहण के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगी। इस अवसर पर राजपाल सिंह, सोमारू सिंह मरकाम, अर्जुन सिंह मरकाम सहित कई वक्ताओं ने जल-जंगल-ज़मीन के संरक्षण का संकल्प लिया।

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