Monday, May 4, 2026
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एपीएमसी (एमएनआई) के निर्वाचित सदस्यों की गजट अधिसूचना में देरी का मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुँचा

– दिल्ली दर्पण ब्यूरो 

नई दिल्ली। कृषि उपज मंडी समिति (APMC–MNI) के निर्वाचित सदस्यों की औपचारिक गजट अधिसूचना में हो रही देरी का मामला अब दिल्ली उच्च न्यायालय की चौखट तक पहुँच गया है। इस संबंध में एक रिट याचिका दायर कर प्रशासन को वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश देने की मांग की गई है।

गौरतलब है कि एपीएमसी (एमएनआई) के चुनाव 6 दिसंबर 2022 को संपन्न हुए थे। इन चुनावों में प्रवीण कोहली उर्फ राजू कोहली समिति के सदस्य के रूप में निर्वाचित हुए थे। 8 दिसंबर 2022 को कृषि विपणन निदेशक द्वारा निर्वाचित सदस्यों के नामों की अधिसूचना जारी कर दी गई थी।

हालांकि, नियमानुसार निर्वाचित सदस्यों के नामों को उपराज्यपाल द्वारा आधिकारिक राजपत्र (गजट) में प्रकाशित किया जाना आवश्यक है। काफी समय बीत जाने और प्रवीण कोहली द्वारा कई बार प्रतिनिधित्व एवं स्मरण पत्र दिए जाने के बावजूद उपराज्यपाल की ओर से गजट अधिसूचना जारी नहीं की गई।

लगातार हो रही देरी के चलते प्रवीण कोहली ने अक्टूबर 2025 में अपने अधिवक्ताओं ऋषभ कपूर, विशाल छाबड़ा और जितेंद्र कोहली के माध्यम से भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दिल्ली उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की। याचिका में मांग की गई है कि उपराज्यपाल को एपीएमसी (एमएनआई) के विधिवत निर्वाचित सदस्यों के नाम राजपत्र में प्रकाशित करने के निर्देश दिए जाएं, ताकि समिति विधि के अनुसार कार्य कर सके।

मामला पहली बार 29 अक्टूबर 2025 को न्यायालय की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध हुआ, जहां उपराज्यपाल को नोटिस जारी किया गया। इसके बाद 18 दिसंबर 2025 की तारीख निर्धारित की गई, लेकिन भारी मामलों की सूची के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी 2026 को निर्धारित की गई है।

इस बीच, विपणन ढांचे में कुछ प्रशासनिक बदलाव भी हुए हैं। जानकारी के अनुसार एक मार्केटिंग बोर्ड की नियुक्ति की गई है, जिसे प्रवीण कोहली द्वारा उठाए गए कानूनी कदम का परिणाम माना जा रहा है।

व्यापारियों और कृषि समुदाय के बीच अब 24 फरवरी 2026 की सुनवाई को लेकर विशेष उत्सुकता है। बाजार से जुड़े लोगों का मानना है कि समिति की औपचारिक अधिसूचना जारी होने से लंबित कार्यों को गति मिलेगी और मंडी संचालन में पारदर्शिता एवं सुचारु व्यवस्था सुनिश्चित हो सकेगी।

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सपनों के सौदागर या दिल्ली के ‘योगी’ बनने की चाह ? मंदिर प्रकोष्ठ के करनैल सिंह के ‘आडम्बर’ की इनसाइड स्टोरी

– दिल्ली दर्पण ब्यूरो

नई दिल्ली: किसी भी सरकार के कार्यकाल का एक साल चर्चा में रहता है, चाहे वह मुख्यमंत्री-मंत्री हो या विधायक, उसके कार्यों की समीक्षा होती है। लेकिन दिल्ली के शकूरपुर से बीजेपी विधायक करनैल सिंह को लेकर चर्चा बीजेपी और उसके मंदिर प्रकोष्ठ में ही नहीं, बल्कि उनके इलाके में भी जमकर हो रही है। चुनाव से पहले जो वादे किए थे, जो सपने मंदिर प्रकोष्ठ से जुड़े पुजारियों को दिखाए थे, स्थानीय जनता को दिखाए थे; यह एक साल बीत जाने के बाद भी उनका जिक्र तक नहीं कर रहे हैं। सत्ता हासिल करने के लिए जो हथकंडे उन्होंने अपनाए, संघ, सनातन और पुजारियों का जिस तरह से इस्तेमाल किया, वह दिल्ली बीजेपी मंदिर प्रकोष्ठ के विधायक करनैल सिंह चर्चा के केंद्र में हैं।

पुजारियों के वेतन का वादा… और अब चुप्पी – राजनीति में वादों का बाजार हमेशा गर्म रहता है, लेकिन जब आस्था और पुजारियों के मान-सम्मान को सीढ़ी बनाकर सत्ता हासिल की जाए और फिर उन्हीं को भुला दिया जाए, तो सवाल उठना लाजिमी है। कभी अरविंद केजरीवाल सरकार के खिलाफ हज़ारों पुजारियों को लेकर सड़कों पर उतरने वाले करनैल सिंह ने एक ही सपना दिखाया था — “दिल्ली में सनातन सरकार लाओ और पुजारियों का वेतन पाओ।” उस वक्त ब्राह्मण समाज और खाकसार पुजारियों ने उन पर भरोसा किया। आज दिल्ली में भाजपा की सरकार बने एक साल बीत चुका है और करनैल सिंह खुद विधायक की कुर्सी पर काबिज हैं, लेकिन पुजारियों के वेतन का मुद्दा ठंडे बस्ते में है।

NRI चोला और करोड़ों का साम्राज्य करनैल सिंह खुद को एक सफल NRI बताते हैं और अमेरिका में हज़ारों करोड़ के कारोबार का दावा करते हैं। चुनावी हलफनामे के मुताबिक वे दिल्ली के सबसे अमीर उम्मीदवारों में शुमार रहे हैं (करीब 259 करोड़ की संपत्ति)। लेकिन विडंबना देखिए, एक तरफ करोड़ों का मालिक होने का दावा और दूसरी तरफ उन पर छोटी-छोटी रकम की जालसाजी के आरोप लगते रहे हैं। हाल ही में उन पर मानहानि के मुकदमे और ‘बढ़-चढ़ाकर’ दावे करने के आरोप भी कोर्ट तक पहुँच चुके हैं।

काम के नाम पर ‘जय श्रीराम’ का जुमला शकूरबस्ती के स्थानीय लोगों के बीच अब एक नया जुमला मशहूर हो गया है— काम के नाम पर “जय श्रीराम”। लोगों का कहना है कि विधायक जी विकास कार्यों, टूटी सड़कों या सीवर की समस्याओं पर बात करने के बजाय हर वक्त धार्मिक आडम्बर में डूबे रहते हैं। भगवा चोला पहनकर वे खुद को ‘दिल्ली का योगी’ सिद्ध करने की कोशिश में रहते हैं, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि वे जनता की बुनियादी समस्याओं से दूर हो चुके हैं।

मुख्यमंत्री बनने की प्रबल इच्छा और ‘झूठे’ सपने सूत्रों की मानें तो 10वीं पास करनैल सिंह का अगला लक्ष्य दिल्ली के मुख्यमंत्री की गद्दी है। वे अपने करीबी घेरे में यह दावा करते फिरते हैं कि उन्हें सीधे मोदी और योगी ने दिल्ली भेजा है और एक साल बाद वे ही सूबे की कमान संभालेंगे। लेकिन सच तो यह है कि उनकी ‘कारगुजारियों’ की पोल खुलने के बाद पार्टी आलाकमान ने उन्हें मंत्री पद तक के लायक नहीं समझा। अब जब इन्हें आभास हो चुका है, तो ये मुख्यमंत्री की तारीफ़ में कसीदे पढ़ने लगे हैं और अपने फेसबुक पर उनकी पोस्ट को शेयर करने लगे हैं। सत्ता की इस भूख को शांत करने के लिए वे नए सपने बेच रहे हैं— किसी को सांसद बनाने का वादा, तो किसी को निगम चुनाव में पार्षद की टिकट का दिलासा। वे खुद को संघ प्रमुख सहित कई बड़े संतों का करीबी बताते हैं और बड़े-बड़े उद्योगपतियों को भी सब्जबाग दिखाते हैं।

नाराज संत और ब्राह्मण समाज-  जिस समाज के दम पर उन्होंने चुनावी वैतरणी पार की, वही ब्राह्मण और संत समाज आज ठगा हुआ महसूस कर रहा है। उनकी ‘नई सोच’ केवल नाम बदलने (जैसे शकूरबस्ती का नाम बदलने की मांग) तक सीमित रह गई है, जबकि पुजारियों के हितों की बात अब उनके एजेंडे से गायब है। सवाल यह है कि क्या आडम्बर और नारों के सहारे दिल्ली की जनता को लंबे समय तक छला जा सकता है? या फिर ‘सपनों के ये सौदागर’ अपनी ही बुनी हुई जाल में फंस जाएंगे ?

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दिल्ली सरकार की नाकामियों पर AAP का बड़ा हमला: सौरभ भारद्वाज ने CM रेखा से किए तीखे सवाल

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष Saurabh Bharadwaj ने शनिवार को बीजेपी सरकार के एक साल के कार्यकाल को “विफलताओं से भरा” बताते हुए मुख्यमंत्री Rekha Gupta से दर्जन भर तीखे सवाल पूछे। उन्होंने जनकपुरी हादसे से लेकर नकली यमुना, AQI में कथित हेरफेर, निजी स्कूल फीस, बस मार्शलों की बहाली और सरकारी अस्पतालों के निजीकरण जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब देने की मांग की।

जनकपुरी हादसे पर घेरा

सौरभ भारद्वाज ने जनकपुरी में सड़क पर खोदे गए गड्ढे में गिरकर बाइक सवार युवक की मौत को सरकार की लापरवाही करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्रियों ने पहले सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने का दावा किया, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और थी।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्राइम सीन के साथ कथित छेड़छाड़ क्यों की गई? मुख्य ठेकेदार पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई, जबकि एक गरीब मजदूर को गिरफ्तार कर लिया गया? साथ ही जिन छह थानों ने पीड़ित परिवार की शिकायत दर्ज नहीं की, उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

‘नकली यमुना’ और पानी की मेनलाइन पर सवाल

AAP नेता ने आरोप लगाया कि सरकार ने “नकली यमुना” बनाई। उन्होंने पूछा कि फिल्टर्ड पानी की मेनलाइन को नकली यमुना में पानी लाने के लिए क्यों खोला गया और इसका आधिकारिक आदेश किसने दिया?

AQI मॉनिटरिंग पर हेरफेर का आरोप

सौरभ भारद्वाज ने दिवाली की रात AQI मॉनिटरिंग स्टेशनों को बंद करने और वॉटर स्प्रिंकलर के जरिए असली AQI आंकड़ों में कथित हेरफेर करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने पूछा कि प्रदूषण के आंकड़ों को छिपाने की जरूरत क्यों पड़ी?

निजी स्कूल फीस और ऑडिट रिपोर्ट

उन्होंने सवाल उठाया कि कितने निजी स्कूलों ने बढ़ी हुई फीस अभिभावकों को वापस की है? कोर्ट के आदेश और सरकारी वादे के बावजूद प्राइवेट स्कूलों की ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?
साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री और भरत अरोड़ा के बीच कथित सांठ-गांठ का मुद्दा उठाते हुए पारदर्शिता की मांग की।

बस मार्शलों और अस्पतालों पर सवाल

AAP प्रदेश अध्यक्ष ने पूछा कि बीजेपी के वादे के बावजूद 10 हजार बस मार्शलों की नौकरी अब तक बहाल क्यों नहीं की गई?
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हजारों करोड़ रुपये की लागत से बने सरकारी अस्पतालों का निजीकरण किया जा रहा है।

कृत्रिम बारिश पर खर्च पर सवाल

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जब केंद्र सरकार के विशेषज्ञों ने दिल्ली में कृत्रिम बारिश को असंभव बताया था, तो इस पर पैसा क्यों खर्च किया गया?

“जनता जवाब चाहती है”

AAP नेता ने कहा कि दिल्ली की जनता इन सभी मुद्दों पर स्पष्ट और विस्तृत जवाब चाहती है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि वह हर सवाल का सार्वजनिक रूप से जवाब दें और कथित वादाखिलाफी तथा लीपापोती पर सफाई दें।

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सर्किल रेट बढ़ाओ या आंदोलन झेलो! मदनपुर डबास महापंचायत में फूटा दिल्ली के किसानों का गुस्सा, ₹10 करोड़ प्रति एकड़ मुआवजे की मांग

– दिल्ली दर्पण ब्यूरो 

नई दिल्ली: बाहरी दिल्ली के मदनपुर डबास में आज ‘दिल्ली देहात मोर्चा’ की विशाल महापंचायत आयोजित की गई, जिसमें दिल्ली के हज़ारों किसानों ने हिस्सा लिया। महापंचायत का मुख्य एजेंडा दिल्ली में पिछले 17 सालों से नहीं बढ़े सर्किल रेट और DDA की लैंड पूलिंग पॉलिसी के नाम पर हो रहे कथित ‘महाघोटाले’ को बेनकाब करना रहा। किसानों ने साफ कर दिया है कि अब वे अपनी बेशकीमती जमीनों को कौड़ियों के दाम पर नहीं लुटने देंगे। गावं के दादा महेश्वर मंदिर परिसर में हुयी इस महापंचायत को दिल्ली देहात मोर्चा के अध्यक्ष राजीव यादव , पूर्व पार्षद जयेन्द्र डबास , सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र डबास , रानी खेड़ा से राजा राम , कंझावला से पार्सद संदीप डबास , सहित कई गावं से आये लोगो ने सम्बोधियत किया। वक्ताओं ने कहा कि सरकार वर्तमान में मात्र ₹2 करोड़ 12 लाख के आसपास मुआवजा दे रही है, जबकि बाज़ार में जमीनों की कीमतें आसमान छू रही हैं। यह सीधे तौर पर किसानों की जेब पर डाका है।

17 साल से धोखा: ₹10 करोड़ प्रति एकड़ मुआवजे की हुंकार

महापंचायत में किसानों ने सरकार को सीधी चेतावनी दी कि दिल्ली की कृषि भूमि के सर्किल रेट पिछले 17 वर्षों से नहीं बढ़ाए गए हैं, जो किसानों के साथ घोर अन्याय है। वक्तों ने कहा की आज जो मुआवजा सरकार दे रही है उससे एक रहने लायक घर तक नहीं खरीद सकते। उनके जमीन लेकर खेती बड़ी ख़त्म कर दी , दिल्ली देहात के युवा बेरोजगार हो रहे है।  सभी ने एक स्वर से मांग की है की वे तब तक लड़ते रहे जब तक की सरकार उन्हें 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा ना दे दे। दिल्ली देहात मोर्चा के बैनर से सीधे सीधे जंग छेड़ने का ऐलान करते हुए कहा कि वे इस आंदोलन को दिल्ली के हर गावं तक लेकर जाएंगे।

DDA की लैंड पूलिंग: ‘आज़ाद भारत का सबसे बड़ा जमीन घोटाला’

दिल्ली देहात मोर्चा ने DDA की लैंड पूलिंग पॉलिसी को एक सोची-समझी साजिश करार दिया।

  • बिल्डर लॉबी को फायदा: किसानों का आरोप है कि DDA एक्ट 1957 में संशोधन कर इस पॉलिसी को कानून बनाना केवल बिल्डर लॉबी और बड़े पूंजीपतियों के फायदे के लिए है।
  • जबरन बेदखली का डर: किसानों ने दावा किया कि लैंड पूलिंग के नाम पर उनसे उनकी जमीन छीनकर उन्हें बिल्डरों का ‘गुलाम’ बनाने की तैयारी है। ₹20 करोड़ प्रति एकड़ का विकास शुल्क और 5 एकड़ जमीन की अनिवार्य शर्त को इस ‘घोटाले’ का हिस्सा बताया गया।

सरकार को आखिरी अल्टीमेटम: अब होगा आर-पार

महापंचायत के अंत में दिल्ली देहात मोर्चा ने सरकार को अल्टीमेटम देते हुए आगामी रणनीति का ऐलान किया:

  1. यदि सर्किल रेट में तुरंत भारी बढ़ोतरी नहीं हुई, तो दिल्ली के गांव-गांव में जन-जागरण अभियान चलाकर चक्का जाम किया जाएगा।
  2. ग्राम सभा की जमीनों पर DDA के कब्जे का ईंट से ईंट बजाकर विरोध होगा।
  3. सरकार को चेताया गया है कि किसान अब अपनी जमीन की रक्षा के लिए ‘आर-पार’ की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।

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दिल्ली पुलिस का तेज एक्शन: कुछ ही घंटों में हत्या की गुत्थी सुलझी, NGO साथी ने ही घोंपा चाकू

पश्चिमी दिल्ली के हरि नगर इलाके में 46 वर्षीय हरीश कंडवाल की हत्या के मामले को पुलिस ने कुछ ही घंटों में सुलझा लिया। इस सनसनीखेज वारदात में पुलिस ने आरोपी आशिम अली को गिरफ्तार कर लिया है, जो एक एनजीओ का डायरेक्टर बताया जा रहा है।

अस्पताल से मिली सूचना

घटना 14 फरवरी 2026 की रात की है। आधी रात के करीब Deen Dayal Upadhyay Hospital से पुलिस को सूचना मिली कि एक व्यक्ति को गर्दन पर चाकू के गंभीर वार के साथ लाया गया है। हालांकि डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलते ही हरि नगर थाने की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी।

मृतक की पहचान हरीश कंडवाल (46) के रूप में हुई, जो उत्तम नगर इलाके के रहने वाले थे।

NGO से जुड़ा था विवाद

जांच में सामने आया कि आरोपी आशिम अली (46) फर्श बाजार का निवासी है और “साई साधना सोशल वेलफेयर फाउंडेशन” नामक एनजीओ का डायरेक्टर है। यह एनजीओ उसके घर से ही संचालित हो रही थी। हरीश कंडवाल भी इसी संस्था से जुड़े हुए थे।

पुलिस के अनुसार, दोनों के बीच पैसों या किसी बिजनेस संबंधी मुद्दे को लेकर विवाद चल रहा था। वारदात वाले दिन दोनों पूरे दिन साथ थे। देर शाम हरि नगर के सीडी ब्लॉक इलाके में किसी बात पर झगड़ा हुआ, जो इतना बढ़ गया कि आशिम अली ने कथित तौर पर हरीश की गर्दन पर चाकू से हमला कर दिया।

कुछ ही घंटों में गिरफ्तारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की और तकनीकी व स्थानीय इनपुट के आधार पर कुछ ही घंटों में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल उससे पूछताछ जारी है।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि विवाद की असली वजह क्या थी और आर्थिक लेन-देन का मामला कितना बड़ा था। अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है ताकि सच्चाई पूरी तरह सामने लाई जा सके।

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