Wednesday, May 6, 2026
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सुसाइड या साज़िश? पीरागढ़ी फ्लाईओवर पर मिली 3 लाशें, पुलिस जांच में चौंकाने वाले खुलासे

नई दिल्ली।
दिल्ली के व्यस्ततम इलाकों में शामिल पीरागढ़ी चौक रविवार शाम उस वक्त दहशत में आ गया, जब फ्लाईओवर पर खड़ी एक लावारिस कार के अंदर से एक साथ तीन शव बरामद किए गए। कार में दो पुरुष और एक महिला मृत अवस्था में मिले, जिसके बाद इलाके में हड़कंप मच गया। यह ट्रिपल डेथ मिस्ट्री पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, रविवार दोपहर करीब 3:51 बजे फायर विभाग को सूचना मिली कि पीरागढ़ी फ्लाईओवर पर एक टाटा टिगोर कार (DL 7 CU 6492) संदिग्ध हालत में खड़ी है। सूचना मिलते ही पुलिस और फायर विभाग की टीम मौके पर पहुंची। जब कार का दरवाजा खोला गया, तो अंदर का नजारा देखकर अधिकारियों के भी होश उड़ गए। कार के भीतर तीन लोग बेसुध पड़े थे, जिनकी मौके पर ही मौत हो चुकी थी।

मृतकों की पहचान रणधीर सिंह (76 वर्ष), निवासी बापरौला, दिल्ली, शिव नरेश सिंह (47 वर्ष) और लक्ष्मी देवी (40 वर्ष) के रूप में हुई है। शुरुआती जांच में मामला सामूहिक आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन परिस्थितियां कई सवाल खड़े कर रही हैं।

क्या था तीनों का आपसी कनेक्शन?

पुलिस जांच में सामने आया है कि मृतक महिला लक्ष्मी देवी, शिव नरेश की जानकार थी और दोनों के बीच करीबी संबंध थे। वहीं शिव नरेश और रणधीर सिंह पिछले करीब छह सालों से प्रॉपर्टी के कारोबार से जुड़े हुए थे। तीनों का एक साथ कार में होना और फ्लाईओवर पर संदिग्ध हालत में पाया जाना मामले को और उलझा रहा है।

गाड़ी के अंदर मिले ये सामान

पुलिस को कार की तलाशी के दौरान सॉफ्ट ड्रिंक की बोतलें, एक हेलमेट, गमछा और ट्रैक सूट बरामद हुआ है। खास बात यह है कि कार की पिछली सीट पर शिव नरेश का हेलमेट और ट्रैक सूट मिला है, लेकिन उनकी बाइक का अब तक कोई सुराग नहीं लग पाया है। यह पहलू जांच एजेंसियों को शक के दायरे में डाल रहा है।

परिजनों ने जताई हत्या की आशंका

हालांकि पुलिस का शुरुआती आकलन आत्महत्या की ओर इशारा कर रहा है, लेकिन मृतकों के परिजनों ने इसे साजिशन हत्या बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि तीनों के एक साथ आत्महत्या करने की बात हजम नहीं होती।

पुलिस की जांच जारी

फिलहाल पुलिस ने दो लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है और मामले की जांच कई एंगल से की जा रही है। कॉल डिटेल्स, सीसीटीवी फुटेज और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह मामला आत्महत्या है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश छिपी है।

पीरागढ़ी फ्लाईओवर की यह घटना फिलहाल एक रहस्य बनी हुई है, जिसका सच आने वाले दिनों में पुलिस जांच के बाद ही सामने आ पाएगा।

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50 करोड़ की नशीली दवाओं के साथ 7 तस्कर गिरफ्तार, ANTF की बड़ी कार्रवाई।

एहसान अंसारी

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा में फैले अंतर्राज्यीय ड्रग कार्टेल का पर्दाफाश किया है। इस संयुक्त ऑपरेशन में पुलिस ने 7 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 48 किलोग्राम से अधिक प्रतिबंधित नशीली दवाएं बरामद की हैं।

पुलिस के अनुसार, बरामद नशीले पदार्थों में भारी मात्रा में ट्रामाडोल और अल्प्राजोलाम शामिल है, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत 50 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। यह ड्रग नेटवर्क स्थानीय स्तर के तस्करों से लेकर अंतर्राज्यीय सप्लायर्स तक फैला हुआ था, जिसे इस कार्रवाई के बाद पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया है।

यह सफल ऑपरेशन निरीक्षक नितेश कुमार के नेतृत्व में अंजाम दिया गया, जिसे एसीपी सतेंद्र मोहन का मार्गदर्शन एवं डीसीपी श्री संजीव कुमार यादव का समग्र पर्यवेक्षण प्राप्त रहा। पुलिस टीम ने तकनीकी निगरानी और गुप्त सूचनाओं के आधार पर एक के बाद एक कार्रवाई कर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ते हुए आरोपियों को दबोचा।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई से न केवल नशीली दवाओं की तस्करी पर बड़ा प्रहार हुआ है, बल्कि युवाओं को नशे की गिरफ्त में धकेलने वाले गिरोहों को भी करारा संदेश दिया गया है। मामले में आगे की जांच जारी है और अन्य संदिग्धों की तलाश की जा रही है।

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कैम्ब्रिज स्कूल श्रीनिवासपुरी ने जीता इंटर-स्कूल फुटबॉल खिताब

  • दिल्ली दर्पण ब्यूरो 
    नई दिल्ली, 7 फरवरी:
    कैम्ब्रिज स्कूल, श्रीनिवासपुरी के खेल मैदान पर बीते 6 फरवरी, 2026 को आयोजित हुई अंडर-14 इंटर-स्कूल फुटबॉल चैंपियनशिप के फाइनल में मेजबान टीम ने खिताबी जीत दर्ज की। बेहद रोमांचक मुकाबले में कैम्ब्रिज स्कूल ने मॉडर्न स्कूल, वसंत विहार को 2-1 के अंतर से पराजित किया। इस ऐतिहासिक जीत के सूत्रधार टीम के कप्तान यूसुफ़ अज़ीम सैफुद्दीन रहे, जिन्होंने न केवल मैदान पर शानदार नेतृत्व किया, बल्कि अपने बेहतरीन खेल कौशल और सटीक रणनीति से पूरी टीम में जोश भर दिया। यूसुफ़ के बेहतरीन फील्ड डिस्ट्रीब्यूशन के चलते मॉडर्न स्कूल की रक्षापंक्ति अंत तक दबाव में नजर आई।

इस टूर्नामेंट में दिल्ली-एनसीआर के 12 प्रतिष्ठित स्कूलों ने हिस्सा लिया था, जिनमें डीपीएस आरके पुरम, डीपीएस मथुरा रोड, वसंत वैली और संस्कृति स्कूल जैसे नाम शामिल थे। कोच श्री गौरव पात्रा के मार्गदर्शन में कप्तान यूसुफ़ और उनकी टीम ने पूरे टूर्नामेंट में अजेय रहते हुए फाइनल में जगह बनाई थी। फाइनल मैच के दौरान यूसुफ़ के नेतृत्व में टीम का तालमेल देखते ही बनता था, जिसकी सराहना वहां मौजूद फुटबॉल दिग्गजों ने भी की।

पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि और पूर्व अंतरराष्ट्रीय फुटबॉलर श्री अनादि बरुआ ने विजेता टीम को ट्रॉफी सौंपी। उन्होंने विशेष रूप से कप्तान यूसुफ़ अज़ीम के खेल की प्रशंसा करते हुए उन्हें भविष्य का उभरता हुआ सितारा बताया। इस मौके पर प्रिंसिपल सुश्री माधवी गोस्वामी और खेल कार्यकारी श्री कुशांक रुस्तगी ने ब्रिजन गुरुंग, जुहैब अहमद, तीर्थ बनिक और बाकी खिलाड़ियों का भी उत्साहवर्धन किया। मुख्य अतिथि ने कहा कि सही नेतृत्व और कड़ी मेहनत से ही इस तरह के बड़े खिताब जीते जा सकते हैं।
 Cambridge School Srinivaspuri defeats Modern School Vasant Vihar 2-1 to lift Football Trophy  

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BJP सरकार की चूक से गई जान, जनकपुरी पहुंचे सौरभ भारद्वाज ने उठाए तीखे सवाल

नई दिल्ली:
जनकपुरी में 15 फीट गहरे गड्ढे में गिरकर युवक कमल की मौत के मामले में अब सवाल सिर्फ हादसे का नहीं, बल्कि पुलिस और प्रशासन की भूमिका का बन गया है। मौके पर निरीक्षण कर लौटे रमेश वर्मा ने भले ही कमेटी गठन और जेई को सस्पेंड करने की बात कही हो, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग तस्वीर पेश कर रही है।

स्थानीय लोगों और परिजनों का कहना है कि कमेटी बनना कोई नई बात नहीं, इससे पहले भी नोएडा जैसे मामलों में हफ्तों “कमेटी-कमेटी” हुआ, लेकिन नतीजा शून्य रहा। सवाल यह है कि क्या इस बार भी वही लीपापोती दोहराई जा रही है?

बैरिकेडिंग सुबह लगी, रात में कहां थी?

जिस गड्ढे में कमल, उसकी बाइक और उसकी लाश मिली, उस जगह पर सुबह-सुबह बैरिकेडिंग दिखाई दी। आरोप है कि रात के समय वहां कोई बैरिकेडिंग नहीं थी। अगर सुरक्षा इंतज़ाम पहले से मौजूद थे, तो फिर बाइक वहां कैसे पहुंची? क्या वह “हवा में उड़कर” गड्ढे में गिर गई?

यह सवाल तब और गंभीर हो जाता है जब मंत्री खुद मौके पर पहुंचकर यह बयान देते हैं कि “सब कुछ मौजूद था।” स्थानीय लोगों का आरोप है कि मंत्री स्तर से ही लीपापोती की शुरुआत हो गई, ऐसे में विभागीय कार्रवाई से इंसाफ की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

CCTV कैमरे मौजूद, फिर फुटेज में देरी क्यों?

घटनास्थल पर स्पष्ट रूप से CCTV कैमरे लगे हुए हैं। B1C3A, जनकपुरी क्षेत्र में कैमरा मौजूद होने के बावजूद सवाल उठता है कि पुलिस को CCTV फुटेज लेने में इतनी देरी क्यों हुई?
सबसे अहम सवाल यह है कि:

  • रात की फुटेज अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
  • सुबह बैरिकेडिंग किसने और क्यों लगाई?
  • पूरे क्राइम सीन को किसके आदेश पर “ड्रेस अप” किया गया?

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर CCTV फुटेज सामने आ जाए, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

फोन ऑन था, फिर भी रात में तलाश क्यों नहीं?

कमल का फोन घटना के बाद भी ऑन था। परिजनों का आरोप है कि पुलिस के पास लोकेशन मौजूद थी, फिर भी:

  • रात में लोकेशन शेयर क्यों नहीं की गई?
  • बाद में लोकेशन डिलीट क्यों कर दी गई?
  • छह थानों के चक्कर लगाने के बावजूद गुमशुदगी की रिपोर्ट क्यों दर्ज नहीं की गई?

परिजनों का दावा है कि पुलिस ने साफ़ तौर पर कहा, “सुबह आइए, रात में तलाश संभव नहीं है।” यही देरी कमल की जान पर भारी पड़ गई।

गैर-इरादतन हत्या का मामला, लेकिन किस पर?

जब सवाल उठाया गया कि क्या यह गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) का मामला बनता है, तो अधिकारियों ने “हां” तो कहा, लेकिन यह बताने में असमर्थ रहे कि मामला किसके खिलाफ बनता है। यही चुप्पी पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करती है।

पुलिस पर डर का माहौल बनाने के आरोप

आरोप है कि दिल्ली पुलिस का रवैया केवल इस केस में ही नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर सवालों के घेरे में है। कहा जा रहा है कि:

  • गुमशुदगी की बात करने पर FIR की धमकी दी जाती है
  • गवाहों पर दबाव बनाकर बयान बदलवाए जाते हैं
  • नोएडा जैसे मामलों में मदद करने वाले चश्मदीदों को पीछे हटने पर मजबूर किया गया

यह सब एक डर का माहौल तैयार करने की ओर इशारा करता है।

15 दिन में 800 से ज्यादा लापता, जवाब कौन देगा?

पुलिस के ही आंकड़ों के मुताबिक जनवरी के पहले 15 दिनों में 800 से ज्यादा लोग लापता हुए। इनमें बड़ी संख्या नाबालिग लड़कियों की भी है। सवाल यह है कि:

  • ये लोग कहां जा रहे हैं?
  • उन्हें ढूंढने में पुलिस की रुचि क्यों नहीं दिख रही?
  • क्या इसके पीछे कोई संगठित मिलीभगत है?

मुआवज़ा नहीं, इंसाफ चाहिए

पीड़ित परिवार का कहना है कि मुआवज़ा कोई समाधान नहीं। पहले इंसाफ चाहिए। सवाल उठाया गया कि पिछले एक साल में दिल्ली में:

  • कहीं डूबकर
  • कहीं जलकर
  • कहीं करंट लगने से
  • कहीं दीवार गिरने से

100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। कितनों को मुआवज़ा मिला? आरोप है कि मुआवज़ा और नौकरियां सिर्फ पार्टी कार्यकर्ताओं तक सीमित रखी गईं।

अगर टैक्सपेयर्स के पैसे से मुआवज़ा देना है, तो सभी पीड़ितों को समान अधिकार क्यों नहीं?

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दिल्ली पुलिस का बड़ा साइबर एक्शन: ‘ऑपरेशन साइहॉक’ में 1,000 से ज्यादा गिरफ्तार

नई दिल्ली: दिल्ली में साइबर अपराध के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए ‘ऑपरेशन साइहॉक’ (CyHawk) के तहत 1,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। यह अभियान दिल्ली समेत आसपास के राज्यों में फैले संगठित साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क को ध्वस्त करने के उद्देश्य से चलाया गया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस ऑपरेशन के जरिए फर्जी बैंक खातों, डिजिटल फ्रॉड, मनी लॉन्ड्रिंग और अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध से जुड़े गिरोहों पर करारा प्रहार किया गया है।

ऑपरेशन साइहॉक 3.0 में 500 से ज्यादा गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे इस अभियान के तीसरे चरण ऑपरेशन साइहॉक 3.0 के तहत अकेले 500 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने बताया कि यह चरण खासतौर पर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क को निशाना बनाकर चलाया गया।

इस कार्रवाई में उन्नत तकनीकी जांच, रियल-टाइम इंटेलिजेंस, वित्तीय लेनदेन की ट्रैकिंग और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वित अभियान को शामिल किया गया, जिससे साइबर अपराध गिरोहों की पहचान कर उन्हें ध्वस्त किया जा सका।

साइबर अपराधियों पर कसी नकेल

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, ऑपरेशन साइहॉक का मुख्य उद्देश्य साइबर अपराधियों पर नकेल कसना, नागरिकों को ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाना और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते दुरुपयोग पर रोक लगाना है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान आने वाले दिनों में भी जारी रहेगा और साइबर अपराध के खिलाफ सख्त निगरानी व कार्रवाई की जाएगी।

अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा

पिछले महीने की शुरुआत में दिल्ली पुलिस के पूर्वी जिले ने ऑपरेशन साइहॉक के तहत दिल्ली से मुरादाबाद और उत्तर प्रदेश के बरेली तक फैले एक साइबर अपराध गिरोह का भंडाफोड़ किया था। इस मामले में मोहम्मद वसीम समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। आरोपियों पर फर्जी बैंक खाते चलाने और साइबर अपराध से अर्जित धन की मनी लॉन्ड्रिंग करने का आरोप है।

इस कार्रवाई के दौरान एक हाई-टेक नेटवर्क का भी खुलासा हुआ, जो भारतीय धन को अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट्स में ट्रांसफर कर रहा था।

क्या-क्या हुआ जब्त

दिल्ली पुलिस ने इस अभियान के दौरान
₹4.7 लाख नकद,
7 बैंक डेबिट कार्ड,
14 मोबाइल फोन,
20 सिम कार्ड जब्त किए हैं।

इसके अलावा, 600 से अधिक एनआरसीपी (NRCP) शिकायतों से जुड़े 85 अवैध बैंक खातों की भी पहचान की गई है।

दूसरे चरण में भी बड़ी सफलता का दावा

दिसंबर 2025 में ऑपरेशन साइहॉक के दूसरे चरण के दौरान दिल्ली पुलिस ने 284 लोगों को गिरफ्तार किया था और करीब 2,900 व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई थी। पुलिस अधिकारियों ने मीडिया ब्रीफिंग में दावा किया कि इस चरण में 200 प्रतिशत सफलता दर हासिल हुई।

संयुक्त पुलिस आयुक्त (IFSO) रजनीश गुप्ता ने बताया कि दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोलचा के नेतृत्व में चलाए गए ऑपरेशन साइहॉक के पहले चरण के बाद साइबर फ्रॉड से जुड़ी कॉलों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने कहा कि जहां पहले प्रतिदिन औसतन 3,600 कॉलें आती थीं, वहीं अब यह संख्या घटकर लगभग 2,400 रह गई है।

पुलिस के अनुसार, पहले चरण की सफलता के बाद ही अभियान के दूसरे और तीसरे चरण को योजनाबद्ध तरीके से लागू किया गया।

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