Wednesday, May 6, 2026
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दिल्ली पुलिस का बड़ा साइबर एक्शन: ‘ऑपरेशन साइहॉक’ में 1,000 से ज्यादा गिरफ्तार

नई दिल्ली: दिल्ली में साइबर अपराध के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए ‘ऑपरेशन साइहॉक’ (CyHawk) के तहत 1,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। यह अभियान दिल्ली समेत आसपास के राज्यों में फैले संगठित साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क को ध्वस्त करने के उद्देश्य से चलाया गया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस ऑपरेशन के जरिए फर्जी बैंक खातों, डिजिटल फ्रॉड, मनी लॉन्ड्रिंग और अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध से जुड़े गिरोहों पर करारा प्रहार किया गया है।

ऑपरेशन साइहॉक 3.0 में 500 से ज्यादा गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे इस अभियान के तीसरे चरण ऑपरेशन साइहॉक 3.0 के तहत अकेले 500 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने बताया कि यह चरण खासतौर पर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क को निशाना बनाकर चलाया गया।

इस कार्रवाई में उन्नत तकनीकी जांच, रियल-टाइम इंटेलिजेंस, वित्तीय लेनदेन की ट्रैकिंग और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वित अभियान को शामिल किया गया, जिससे साइबर अपराध गिरोहों की पहचान कर उन्हें ध्वस्त किया जा सका।

साइबर अपराधियों पर कसी नकेल

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, ऑपरेशन साइहॉक का मुख्य उद्देश्य साइबर अपराधियों पर नकेल कसना, नागरिकों को ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाना और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते दुरुपयोग पर रोक लगाना है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान आने वाले दिनों में भी जारी रहेगा और साइबर अपराध के खिलाफ सख्त निगरानी व कार्रवाई की जाएगी।

अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा

पिछले महीने की शुरुआत में दिल्ली पुलिस के पूर्वी जिले ने ऑपरेशन साइहॉक के तहत दिल्ली से मुरादाबाद और उत्तर प्रदेश के बरेली तक फैले एक साइबर अपराध गिरोह का भंडाफोड़ किया था। इस मामले में मोहम्मद वसीम समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। आरोपियों पर फर्जी बैंक खाते चलाने और साइबर अपराध से अर्जित धन की मनी लॉन्ड्रिंग करने का आरोप है।

इस कार्रवाई के दौरान एक हाई-टेक नेटवर्क का भी खुलासा हुआ, जो भारतीय धन को अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट्स में ट्रांसफर कर रहा था।

क्या-क्या हुआ जब्त

दिल्ली पुलिस ने इस अभियान के दौरान
₹4.7 लाख नकद,
7 बैंक डेबिट कार्ड,
14 मोबाइल फोन,
20 सिम कार्ड जब्त किए हैं।

इसके अलावा, 600 से अधिक एनआरसीपी (NRCP) शिकायतों से जुड़े 85 अवैध बैंक खातों की भी पहचान की गई है।

दूसरे चरण में भी बड़ी सफलता का दावा

दिसंबर 2025 में ऑपरेशन साइहॉक के दूसरे चरण के दौरान दिल्ली पुलिस ने 284 लोगों को गिरफ्तार किया था और करीब 2,900 व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई थी। पुलिस अधिकारियों ने मीडिया ब्रीफिंग में दावा किया कि इस चरण में 200 प्रतिशत सफलता दर हासिल हुई।

संयुक्त पुलिस आयुक्त (IFSO) रजनीश गुप्ता ने बताया कि दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोलचा के नेतृत्व में चलाए गए ऑपरेशन साइहॉक के पहले चरण के बाद साइबर फ्रॉड से जुड़ी कॉलों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने कहा कि जहां पहले प्रतिदिन औसतन 3,600 कॉलें आती थीं, वहीं अब यह संख्या घटकर लगभग 2,400 रह गई है।

पुलिस के अनुसार, पहले चरण की सफलता के बाद ही अभियान के दूसरे और तीसरे चरण को योजनाबद्ध तरीके से लागू किया गया।

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दिल्ली में हैरान करने वाली लापरवाही: पुलिस को कॉल के बावजूद 15 फीट गड्ढे में रात भर तड़पता रहा युवक

नई दिल्ली: दिल्ली के जनकपुरी इलाके में दिल्ली जल बोर्ड द्वारा खोदे गए करीब 15 फीट गहरे गड्ढे में गिरने से 25 वर्षीय मोटरसाइकिल सवार की दर्दनाक मौत के मामले में पुलिस ने ठेकेदार और दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। इस घटना के बाद मृतक के परिजनों ने पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

मृतक की पहचान कमल के रूप में हुई है। परिजनों का आरोप है कि अगर समय रहते पुलिस ने मदद की होती तो शायद कमल की जान बचाई जा सकती थी। कमल के भाई करण का कहना है कि परिवार रात भर अलग-अलग थानों के चक्कर काटता रहा और लगातार फोन करता रहा, लेकिन पुलिस की ओर से यही जवाब मिला कि रात में तलाश संभव नहीं है और शिकायत सुबह दर्ज की जाएगी।

परिवार का दावा है कि घटना के समय कमल का मोबाइल फोन चालू था और उसकी लोकेशन के जरिए घटनास्थल तक पहुंचा जा सकता था। उनका कहना है कि जिस रास्ते पर गड्ढा था, वहां तुरंत तलाशी अभियान चलाया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

ठेकेदार और जल बोर्ड अधिकारियों के खिलाफ केस

जनकपुरी में हुई इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 के तहत ठेकेदार और दिल्ली जल बोर्ड के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। शिकायत में बताया गया है कि एक महिला कॉलर ने पुलिस को सूचना दी थी कि एक बाइक सवार 15 फीट गहरे गड्ढे में गिर गया है।

पुलिस के अनुसार, मौके पर पहुंचने पर देखा गया कि बाइक नंबर DL9SCJ9478 (अपाचे) के साथ एक अज्ञात व्यक्ति सड़क के बीचों-बीच खोदे गए करीब 20 फीट लंबे, 13 फीट चौड़े और 14 फीट गहरे गड्ढे में गिरा हुआ था। घायल को फायर ब्रिगेड की मदद से बाहर निकालकर PCR वाहन से दीन दयाल उपाध्याय (DDU) अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटनास्थल पर कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं मिला।

FIR में क्या-क्या आरोप

FIR में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि मुख्य सड़क पर बनाए गए गड्ढे को न तो ढका गया था और न ही खुदाई के दौरान कोई सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। वहां चेतावनी बोर्ड, रिफ्लेक्टर या संकेतक नहीं लगाए गए थे और न ही पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था थी, जिसके चलते यह हादसा हुआ।

FIR में यह भी उल्लेख किया गया है कि दिल्ली जल बोर्ड और उसके ठेकेदार को इस बात की पूरी जानकारी थी कि बिना सुरक्षा इंतजाम के सड़क पर गड्ढा छोड़ना जानलेवा साबित हो सकता है। इसके बावजूद न तो सुरक्षा के उपाय किए गए और न ही कोई सिक्योरिटी गार्ड तैनात किया गया।

पुलिस का कहना है कि तमाम प्रयासों के बावजूद अब तक इस घटना का कोई चश्मदीद गवाह सामने नहीं आ पाया है। मामले की जांच जारी है।

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IPS अधिकारी शंकर चौधरी के खिलाफ दिल्ली पुलिस विजिलेंस ने दर्ज की FIR; अवैध छापेमारी और वसूली के गंभीर आरोप

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस के विजिलेंस विभाग ने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी शंकर चौधरी के खिलाफ पद के दुरुपयोग, अवैध हिरासत और भ्रष्टाचार की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। विजिलेंस पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR संख्या 0002/2026 के अनुसार, उन पर आईपीसी की धारा 166 (लोक सेवक द्वारा कानून की अवज्ञा), 341/342 (गलत तरीके से रोकना और बंधक बनाना) और 409 (लोक सेवक द्वारा अमानत में ख्यानत) के तहत आरोप लगाए गए हैं।


क्या है पूरा मामला?
यह मामला नवंबर 2023 का है, जब मिजोरम पुलिस और दिल्ली पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स सेल (ANC) ने द्वारका इलाके में एक कथित ड्रग्स रैकेट के खिलाफ संयुक्त छापेमारी की थी। जांच में सामने आया कि तत्कालीन DCP शंकर चौधरी ने बिना किसी आधिकारिक आदेश या क्षेत्राधिकार के, इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व किया था।


अवैध हिरासत और वसूली के आरोप
FIR के मुताबिक, एक नाइजीरियाई महिला ने शिकायत की थी कि उसके भाई ‘हैरिसन’ को पुलिस ने अवैध रूप से हिरासत में लिया है और उसे छोड़ने के बदले भारी रकम की मांग की जा रही है। जांच अधिकारी (IO) ने पाया कि हैरिसन को 21 नवंबर से 29 नवंबर 2023 तक मिजोरम हाउस और अन्य स्थानों पर बिना किसी कानूनी आधार के कैद करके रखा गया था।


CCTV फुटेज से खुले राज
विजिलेंस विभाग की जांच में सीसीटीवी फुटेज एक अहम सबूत बना है। फुटेज में शंकर चौधरी को अन्य पुलिस कर्मियों के साथ हैरिसन के घर में घुसते और वहां से एक डिजिटल लॉकर और दो संदिग्ध बैग लेकर निकलते हुए देखा गया है। विभागीय जांच में यह भी पाया गया कि छापेमारी के दौरान न तो कोई स्थानीय पुलिस को सूचित किया गया और न ही बरामदगी की कोई आधिकारिक एंट्री की गई।


विभागीय कार्रवाई और जांच
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए संयुक्त पुलिस आयुक्त (Southern Range) एस.के. जैन की शिकायत पर यह FIR दर्ज की गई है। रिपोर्ट में दिल्ली पुलिस के ही 13 गवाहों के बयान दर्ज हैं, जिन्होंने इस छापेमारी में शंकर चौधरी की सक्रिय भूमिका की पुष्टि की है। वर्तमान में इस मामले की आगे की जांच एसीपी विनय कुमार मलिक को सौंपी गई है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले ने दिल्ली पुलिस के भीतर हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि इसमें एक वरिष्ठ अधिकारी पर सीधे तौर पर कानून तोड़ने और आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगे हैं।

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दिल्ली: स्कूल फीस के नए नियमों पर अभिभावकों ने उठाए सवाल; 15% की शर्त को बताया ‘अव्यावहारिक’

दिल्ली दर्पण ब्यूरो
नई दिल्ली:
दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025 के नियमों को लेकर अभिभावकों के बीच भारी असमंजस और चिंता का माहौल है। फोरम फॉर इंडियन पेरेंट्स (FIP) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सरकार द्वारा 9 दिसंबर 2025 को अधिसूचित किए गए इन नियमों में कई गंभीर कमियां गिनाई हैं। 
अभिभावकों की मुख्य आपत्तियाँ

  • स्वतंत्र ऑडिट का अभाव: जिला या राज्य स्तर की समितियाँ केवल स्कूलों द्वारा नियुक्त सीए (CA) की रिपोर्ट की जांच करेंगी। किसी भी स्तर पर विभाग द्वारा स्वतंत्र ऑडिट का कोई प्रावधान नहीं रखा गया है। 
  • अपील के लिए 15% की शर्त: नियमों के अनुसार, किसी भी अपील के लिए एक ही कक्षा या स्कूल के कम से कम 15% अभिभावकों का समूह होना अनिवार्य है। FIP का मानना है कि यह शर्त अपील की प्रक्रिया को लगभग अप्रभावी बना देगी। 
  • अभिभावकों पर बढ़ा बोझ: खातों की जांच करने और भ्रष्टाचार की शिकायत करने की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की जगह आम अभिभावकों पर डाल दी गई है। 
  • EWS दाखिले और पारदर्शिता: ड्रा ऑफ लॉट्स को केंद्रीकृत तो किया गया है, लेकिन स्कूलों में निर्वाचित PTA बॉडी की अनुपस्थिति में इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए हैं। 
    सत्र 2026-27 को लेकर बना भ्रम
    FIP के अध्यक्ष एडवोकेट खगेश बी. झा ने बताया कि नियमों में देरी की वजह से आगामी शैक्षणिक सत्र (2026-27) की फीस संरचना को लेकर भारी असमंजस है। साथ ही, तीन साल के ‘फीस ब्लॉक’ को लेकर भी स्पष्टता नहीं है कि इन वर्षों के दौरान फीस समान रहेगी या उसमें बदलाव होगा। 
    अभिभावकों ने मांग की है कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए ताकि निजी स्कूलों में शिक्षा के व्यवसायीकरण और बच्चों के साथ होने वाले भेदभाव को रोका जा सके। 

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HDFC बैंक के असिस्टेंट मैनेजर कमल की दर्दनाक मौत, घर से 10 मिनट पहले गड्ढे में गिरे

दिल्ली के जनकपुरी इलाके में सड़क पर बने एक गहरे गड्ढे ने एक युवा प्रोफेशनल की जान ले ली। अंडर-कंस्ट्रक्शन सड़क पर मोटरसाइकिल सवार युवक गड्ढे में गिर गया, जिससे उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की पहचान कमल के रूप में हुई है, जो HDFC बैंक में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर थे। हादसे की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं और प्रशासन की लापरवाही पर सवाल खड़े कर रही हैं।

जानकारी के मुताबिक, कमल अपाचे RTR 200 बाइक चला रहे थे और उन्होंने हेलमेट भी पहन रखा था। इसके बावजूद गहरे और खुले गड्ढे में गिरने से उनकी जान नहीं बच सकी। वह गड्ढे के नीचे अपनी बाइक के पास पड़े मिले। बताया जा रहा है कि हादसा उस जगह हुआ, जहां दिल्ली जल बोर्ड की ओर से सड़क खुदाई का काम चल रहा था।

ऑफिस से लौटते वक्त हुआ हादसा
कमल रात को रोहिणी स्थित अपने दफ्तर से घर लौट रहे थे। वह जनकपुरी के कैलाशपुरी इलाके में रहते थे और घर पहुंचने में उन्हें महज 10 मिनट का समय लगना था। परिजनों के मुताबिक, रास्ते में उनकी लगातार घरवालों से बात हो रही थी, लेकिन देर रात तक जब वह घर नहीं पहुंचे तो परिवार वालों को चिंता हुई। परिजन खुद उन्हें तलाशने निकले, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।

सुबह करीब 7:30 बजे पुलिस का फोन आया, जिसके बाद इस हादसे की जानकारी मिली। मौके पर पहुंचने पर कमल अपनी बाइक समेत गड्ढे में गिरे हुए पाए गए। परिजनों का आरोप है कि जब वे रात में थाने पहुंचे तो उन्हें कोई मदद नहीं मिली।

परिजनों ने जताया साजिश का शक
कमल के भाई ने बताया कि आखिरी बार कमल ने अपने जुड़वां भाई से बात की थी। उन्होंने कहा कि कमल को रास्ते की पूरी जानकारी थी, फिर भी इस तरह की मौत कई सवाल खड़े करती है। परिजनों ने मामले में साजिश की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और रोष
हादसा कैबिनेट मंत्री आशीष सूद की विधानसभा क्षेत्र में हुआ है। घटना के बाद आम आदमी पार्टी ने सरकार पर निशाना साधा। दिल्ली यूनिट संयोजक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि सड़क पर गहरे गड्ढे में गिरकर एक युवक रात भर फंसा रहा और उसकी मौत हो गई, यह बेहद दुखद है। उन्होंने नोएडा में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने उससे कोई सबक नहीं लिया।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। परिजन दोषी विभागों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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