Wednesday, May 6, 2026
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दिल्ली के वसंत कुंज में 22 वर्षीय युवक की चाकू मारकर हत्या, आरोपी ने आत्मरक्षा का किया दावा

दिल्ली के वसंत कुंज स्थित जेजे बंधु कैंप में आधी रात हुई एक हिंसक घटना से इलाके में सनसनी फैल गई। यहां 22 साल के एक युवक की चाकू लगने से मौत हो गई। इस मामले में दो अलग-अलग दावे सामने आए हैं, जिससे पुलिस जांच उलझ गई है और अब हर पहलू से मामले की पड़ताल की जा रही है।

घटना 27 जनवरी 2026 की रात करीब 11 से 12 बजे के बीच की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, करण नाम का युवक किसी काम से जेजे बंधु कैंप स्थित काली मंदिर के सामने पहुंचा था। इसी दौरान वहां मौजूद कुछ युवकों से उसका विवाद हो गया। आरोप है कि झगड़े के दौरान करण की गर्दन पर चाकू से वार किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

गंभीर हालत में करण खून से लथपथ अपनी बहन के घर तक पहुंचा। परिजन उसे तुरंत पास के फोर्टिस अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

हालांकि, इस घटना को लेकर दूसरा पक्ष बिल्कुल अलग कहानी पेश कर रहा है। आरोपी बताए जा रहे युवक आकाश की बहन का दावा है कि करण कुछ अन्य युवकों के साथ मंदिर के पास आया था और आकाश से सिगरेट जलाने को कहा। मना करने पर करण ने कथित तौर पर चाकू से हमला कर दिया। आरोप है कि इसके बाद आकाश ने खुद को बचाने के लिए हाथापाई की, इसी दौरान चाकू करण के गले में लग गया। आकाश की बहन इसे पूरी तरह आत्मरक्षा का मामला बता रही है।

बताया जा रहा है कि मृतक करण कपड़े बेचने का काम करता था। घटना के बाद से उसके परिवार में मातम पसरा हुआ है। परिजन इसे सरेआम हत्या बता रहे हैं, जबकि आत्मरक्षा के दावे ने पुलिस जांच को और जटिल बना दिया है।

फिलहाल दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। आरोपियों से पूछताछ जारी है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह घटना हत्या थी या आत्मरक्षा में हुई दुखद मौत।

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दिल्ली के सीलमपुर में बिरयानी खाते युवक की गोली मारकर हत्या, पुलिस जांच में जुटी

दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाके सीलमपुर से सनसनीखेज हत्या का मामला सामने आया है। यहां बिरयानी खा रहे एक युवक को बदमाशों ने सरेआम गोली मार दी। गंभीर रूप से घायल युवक को तुरंत जीटीबी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक की पहचान तारिक हसन के रूप में हुई है।

यह वारदात मंगलवार शाम करीब 5:30 बजे सीलमपुर के के-ब्लॉक इलाके में हुई। जानकारी के मुताबिक, तारिक अपने कुछ दोस्तों के साथ के-ब्लॉक स्थित एक दुकान पर बिरयानी खा रहा था। इसी दौरान अचानक उसे गोली लग गई। गोली लगने के बाद तारिक ने अपने साथी को बताया कि उसे गोली मारी गई है।

घटना के बाद उसके दोस्त उसे ऑटो रिक्शा से तुरंत जीटीबी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद तारिक को मृत घोषित कर दिया। अस्पताल से सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की गई।

क्या है पूरा मामला?

पुलिस के अनुसार, सीलमपुर थाना क्षेत्र के के-ब्लॉक में तीन से चार युवक बिरयानी खाने आए थे। इसी दौरान गोली चलने की घटना हुई, जिसमें एक युवक की जान चली गई। मौके पर एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) की टीम को भी बुलाया गया और सबूत जुटाए गए।

पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि गोली किसी बदमाश ने मारी या किसी अन्य परिस्थिति में लगी। फिलहाल हर एंगल से मामले की पड़ताल की जा रही है।

पुलिस का बयान

पुलिस ने बताया,
27 जनवरी 2026 को शाम करीब 5:29 बजे जीटीबी अस्पताल से सूचना मिली कि तारिक हसन नाम के व्यक्ति को गोली लगी है, जिसकी बाद में मौत हो गई। अस्पताल पहुंचने पर मृतक के एक साथी ने बताया कि वे एक दुकान पर बिरयानी खा रहे थे, तभी तारिक ने कहा कि उसे गोली लग गई है। उसे तुरंत अस्पताल लाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।”

कैसे हुई वारदात?

पुलिस जांच में सामने आया है कि तारिक दोपहर करीब 1:15 बजे अपने दोस्त के पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने सीलमपुर आया था। दाह संस्कार के बाद वह अपने दोस्त के साथ के-ब्लॉक स्थित जावेद बिरयानी की दुकान पर गया।
बिरयानी खाने के बाद दोस्त दुकान के अंदर हाथ धोने गया, जबकि तारिक पीछे खड़ा था। जब दोस्त ने पलटकर देखा तो तारिक बैठा हुआ था और उसने बताया कि उसे गोली मार दी गई है। इसके बाद उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया।

जांच जारी

पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। इलाके में दहशत का माहौल है और पुलिस जल्द से जल्द आरोपियों तक पहुंचने का दावा कर रही है।

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दिल्ली: भजनपुरा इलाके में 6 साल की मासूम का गैंगरेप, 10-14 साल के 3 नाबालिगों पर आरोप 2 गिरफ्तार

नई दिल्ली: भजनपुरा इलाके से एक रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है। यहाँ एक 6 साल की मासूम बच्ची के साथ (गैंगरेप) की घटना को अंजाम दिया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस घिनौने अपराध के सभी आरोपी नाबालिग हैं, जिनकी उम्र महज 10 से 14 साल के बीच बताई जा रही है।

बहला-फुसलाकर मासूम के साथ की दरिंदगी

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, यह खौफनाक घटना 18 जनवरी (मंगलवार) की है। आरोप है कि तीन नाबालिग लड़कों ने बच्ची को बहला-फुसलाकर एकांत में ले गए और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। घटना के बाद जब परिजनों को इसकी जानकारी हुई, तो उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस की कार्रवाई: 2 आरोपी हिरासत में, 1 फरार

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है। पुलिस अधिकारी के मुताबिक:

  • आरोपियों की पहचान: घटना में शामिल तीनों आरोपियों की पहचान हो चुकी है। उनकी उम्र 10, 13 और 14 साल है।
  • गिरफ्तारी: पुलिस ने दो आरोपियों को पकड़ लिया है और उन्हें किशोर न्याय बोर्ड (Juvenile Justice Board) के समक्ष पेश किया गया है।
  • फरार आरोपी: तीसरा आरोपी फिलहाल फरार है और उसका परिवार भी लापता बताया जा रहा है। फरार आरोपी की तलाश के लिए पुलिस ने विशेष टीमें गठित की हैं और इलाके के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

पीड़ित बच्ची की स्थिति

वारदात के बाद बच्ची को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल भेजा गया। पुलिस का कहना है कि बच्ची को उचित डॉक्टरी देखभाल और परामर्श (Counseling) उपलब्ध कराया जा रहा है। मजिस्ट्रेट के सामने बच्ची का बयान दर्ज कर लिया गया है और मामले में कानूनी प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ रही है।

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दिल्ली में वारदात :Safdarjung Enclave में कांस्टेबल को बनाया निशाना, लूटी गई पिस्टल बरामद, 2 आरोपी अरेस्ट

नई दिल्ली:
दिल्ली के सफदरजंग एन्क्लेव इलाके में ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी पर जानलेवा हमला कर उसकी सरकारी पिस्टल लूटने वाले दो बदमाशों को दिल्ली पुलिस ने एक एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार कर लिया है। मुख्य आरोपी को उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले से पकड़ा गया, जबकि उसके साथी को दिल्ली से दबोचा गया।

इस ऑपरेशन को दिल्ली पुलिस के साउथ-वेस्ट डिस्ट्रिक्ट और यूपी पुलिस के टुंडला थाना की संयुक्त टीम ने अंजाम दिया।

कांस्टेबल पर हमला कर छीनी गई सरकारी पिस्टल

पुलिस के मुताबिक, 22 जनवरी 2026 को दोपहर करीब 2:15 बजे सफदरजंग एन्क्लेव में बीट ड्यूटी पर तैनात हेड कांस्टेबल राजकुमार को एक राहगीर ने पार्क के पास दो संदिग्ध लोगों के मौजूद होने की सूचना दी।
जब पुलिसकर्मी ने मौके पर पहुंचकर दोनों युवकों से पूछताछ की, तो उन्होंने अचानक हमला कर दिया।

एक आरोपी ने कांस्टेबल को काबू में लिया, जबकि दूसरे ने उसकी 9 एमएम की सरकारी पिस्टल छीन ली। इसके बाद बदमाश ने पिस्टल तानकर धमकी दी और हवा में फायरिंग करते हुए मौके से फरार हो गया। गनीमत रही कि पुलिसकर्मी को कोई गंभीर चोट नहीं आई।

बाइक सवार को रोककर भागे आरोपी, 500 CCTV फुटेज खंगाले

वारदात के बाद पुलिस ने आरोपियों का पीछा किया, लेकिन वे एक बाइक सवार को जबरन रोककर उस पर बैठकर फरार हो गए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कई टीमें गठित कीं और सफदरजंग एन्क्लेव, हौज खास, मालवीय नगर और महरौली समेत आसपास के इलाकों के करीब 500 CCTV फुटेज खंगाले।

फिरोजाबाद में एनकाउंटर, पुलिस पर भी की फायरिंग

तकनीकी सर्विलांस और लोकल इंटेलिजेंस के जरिए मुख्य आरोपी की पहचान अविनाश उर्फ जानू के रूप में हुई, जो पहले भी दिल्ली में लूट और स्नैचिंग के कई मामलों में शामिल रह चुका है।
जांच में पता चला कि वह दिल्ली से फरार होकर उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के टुंडला इलाके में छिपा हुआ है।

23 जनवरी 2026 को दिल्ली पुलिस और टुंडला पुलिस की संयुक्त टीम ने दबिश दी। दोपहर करीब 2:15 बजे आरोपी को स्कूटर पर जाते हुए देखा गया। पुलिस के रुकने के इशारे पर वह तेज रफ्तार में भागने लगा, लेकिन संतुलन बिगड़ने से गिर पड़ा।

खुद को घिरा देख आरोपी ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। गोलियां पुलिस की बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगीं। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली आरोपी के घुटनों में लगी, जिसके बाद उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।

लूटी गई पिस्टल समेत कई सामान बरामद

गिरफ्तार आरोपी अविनाश उर्फ जानू के पास से पुलिस ने—

  • लूटी गई 9 एमएम सरकारी पिस्टल
  • तीन खोखे
  • एक स्कूटर
  • मोबाइल फोन
    बरामद किए हैं।

पूछताछ में आरोपी ने सफदरजंग एन्क्लेव की घटना में अपनी भूमिका कबूल करते हुए अपने साथी वसीम का नाम भी बताया।

साथी वसीम भी गिरफ्तार

आरोपी की निशानदेही और तकनीकी सर्विलांस के आधार पर पुलिस ने 23 जनवरी की रात करीब 11:42 बजे मालवीय नगर के स्वामी नगर इलाके में कब्रिस्तान के पास से उसके साथी वसीम को भी गिरफ्तार कर लिया।

10 से ज्यादा वारदातों में शामिल रहा मुख्य आरोपी

पुलिस के अनुसार, करीब 30 वर्षीय अविनाश उर्फ जानू दिल्ली में लूट और स्नैचिंग के 10 से अधिक मामलों में पहले भी शामिल रह चुका है। फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस उनके आपराधिक नेटवर्क की जांच कर रही है।

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UGC Rules Explained: कॉलेज–यूनिवर्सिटी में जातिगत भेदभाव पर 4 बड़े सवाल, सवर्ण और SC/ST-OBC के बीच टकराव क्यों?

नई दिल्ली:
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने यूनिवर्सिटी और कॉलेज परिसरों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए 13 जनवरी 2026 को नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों का मकसद अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों को समान और सुरक्षित शैक्षणिक माहौल देना है।

हालांकि, नियम लागू होते ही सोशल मीडिया पर #RollbackUGC ट्रेंड करने लगा। विरोध करने वालों ने इसे “यूजीसी का काला कानून” करार देते हुए आरोप लगाया कि नए प्रावधानों से सामान्य वर्ग के छात्रों को संभावित अपराधी की तरह देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश, दिल्ली समेत कई राज्यों में इन नियमों के खिलाफ प्रदर्शन भी हुए हैं।

तो आखिर ये नियम क्या हैं, विरोध क्यों हो रहा है और सरकार का रुख क्या है—आइए पूरे विवाद को विस्तार से समझते हैं।

यूजीसी के नए नियमों पर 4 बड़े सवाल

1.यूजीसी ने जातिगत भेदभाव को लेकर नए नियम क्यों बनाए?

यूजीसी से मान्यता प्राप्त उच्च शिक्षण संस्थानों में 17 दिसंबर 2012 से ही जातिगत भेदभाव रोकने को लेकर सलाहकारी दिशानिर्देश लागू थे। इनका उद्देश्य कैंपस में समानता को बढ़ावा देना था, लेकिन इनमें किसी तरह की सजा या सख्त कार्रवाई का प्रावधान नहीं था

2. अब नए नियम लाने की जरूरत क्यों पड़ी?

जनवरी 2016 में रोहित वेमुला और मई 2019 में डॉ. पायल ताडवी की आत्महत्याओं के बाद इस मुद्दे ने देशव्यापी बहस छेड़ दी। पीड़ित परिवारों ने 29 अगस्त 2019 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सख्त नियमों की मांग की।

इसके बाद, जनवरी 2025 में जस्टिस सूर्यकांत मिश्रा की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने यूजीसी को निर्देश दिया कि वह जातिगत भेदभाव से जुड़ी शिकायतों पर डेटा इकट्ठा करे और नए नियम बनाए।
फरवरी 2025 में ड्राफ्ट जारी हुआ और संशोधनों के बाद 13 जनवरी 2026 को अंतिम नियम अधिसूचित किए गए।

3. ओबीसी को लेकर क्या था विवाद?

अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग छात्र संघ का आरोप था कि शुरुआती ड्राफ्ट में—

  • OBC छात्रों को जातिगत भेदभाव की परिभाषा से बाहर रखा गया
  • समानता समितियों में उनका प्रतिनिधित्व नहीं था
  • झूठी शिकायतों पर सजा का प्रावधान था, जिससे शिकायत दर्ज कराने से छात्र डर सकते थे

इसी को लेकर सबसे ज्यादा आपत्ति जताई गई और बदलाव की मांग हुई।

4. संसदीय समिति ने क्या सिफारिशें दीं?

शिक्षा, महिला और युवा मामलों की संसदीय समिति ने 8 दिसंबर 2025 को ड्राफ्ट की समीक्षा की। कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली इस समिति ने—

  • जातिगत भेदभाव की स्पष्ट परिभाषा
  • समानता समितियों में OBC सदस्यों को शामिल करने
    की सिफारिश की।

यूजीसी ने इन सुझावों को मानते हुए नियमों में संशोधन किया और 15 जनवरी 2026 से सभी मान्यता प्राप्त कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में इन्हें लागू कर दिया गया।

UGC के नए नियमों में क्या-क्या बड़े बदलाव हुए?

1. जातिगत भेदभाव की स्पष्ट परिभाषा

अब जाति, धर्म, नस्ल, लिंग, जन्मस्थान या दिव्यांगता के आधार पर किया गया कोई भी भेदभाव, जो शिक्षा में समानता को प्रभावित करे या मानवीय गरिमा को ठेस पहुंचाए—उसे जातिगत भेदभाव माना जाएगा।

2. OBC छात्रों को शामिल किया गया

पहली बार SC-ST के साथ-साथ OBC छात्रों को भी इन नियमों के दायरे में लाया गया है।

3. झूठी शिकायतों पर सजा का प्रावधान हटाया गया

ड्राफ्ट में झूठी शिकायतों पर जुर्माना या निलंबन था, लेकिन अंतिम नियमों में इसे हटा दिया गया है।

शिकायतों का निपटारा कैसे होगा?

1. समान अवसर केंद्र (EOC)

हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में समान अवसर केंद्र बनेगा, जो छात्रों को मार्गदर्शन देगा और भेदभाव की शिकायतों पर काम करेगा।

2. समानता समिति

कॉलेज प्रमुख की अध्यक्षता में समिति बनेगी, जिसमें SC-ST, OBC, महिला और दिव्यांग सदस्य शामिल होंगे। कार्यकाल दो साल का होगा।

3. समानता समूह

छोटी टीमें कैंपस में निगरानी करेंगी और भेदभाव रोकने के लिए सक्रिय रहेंगी।

4. शिकायत की प्रक्रिया

  • 24 घंटे में प्राथमिक कार्रवाई
  • 15 दिनों में रिपोर्ट
  • 7 दिनों में आगे की कार्रवाई शुरू करना अनिवार्य

क्या सरकार नियम वापस ले सकती है?

इन नियमों को वापस लेने या संशोधित करने की मांग को लेकर ईमेल अभियान चलाया जा रहा है।
हालांकि, यूजीसी अध्यक्ष विनीत जोशी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा है कि नियमों का उद्देश्य किसी के साथ भेदभाव करना नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नियमों के दुरुपयोग को रोकना जरूरी है और सरकार के पास इन्हें संशोधित या वापस लेने का संवैधानिक अधिकार है।

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