Saturday, May 2, 2026
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‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर सरकार का यू-टर्न? पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच पर सौरभ भारद्वाज का हमला— “शहादत का अपमान क्यों?”

नई दिल्ली: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच खेलने के सरकारी फैसले ने सियासी गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने इस फैसले को देश की शहादत का अपमान करार देते हुए तीखे सवाल उठाए हैं। भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए दावा किया कि सरकार ने अंतरराष्ट्रीय दबाव (विशेषकर अमेरिका के हस्तक्षेप) के आगे झुककर न केवल सैन्य अभियान को बीच में रोका, बल्कि अब उसी दुश्मन देश के साथ खेल का माहौल बनाकर शहीदों के बलिदान की अनदेखी कर रही है।

सौरभ भारद्वाज ने अपने ट्वीट में उस पुरानी याद का जिक्र किया, जब सरकार की ओर से पाकिस्तान को कड़ा संदेश देने की बातें की गई थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब हमारे सशस्त्र बल PoK (पाक अधिकृत कश्मीर) तक पहुँचने की स्थिति में थे और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए एक निर्णायक जीत की ओर बढ़ रहे थे, तब अचानक युद्धविराम (Ceasefire) का ऐलान कर दिया गया। भारद्वाज का कहना है कि विपक्ष और देश की जनता का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी ने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में आकर इस अभियान को ‘पॉज’ (रोक) दिया, जिससे भारत के पास PoK को पुनः प्राप्त करने का एक ऐतिहासिक मौका हाथ से निकल गया।

आप नेता ने इसे दोहरा मापदंड करार दिया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस सरकार ने कभी यह दावा किया था कि “उनकी रगों में गर्म सिंदूर दौड़ रहा है,” आज उसी सरकार के कार्यकाल में पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच खेला जा रहा है। भारद्वाज ने इसे ‘शर्मनाक’ बताते हुए सवाल किया कि क्या क्रिकेट मैच में मिलने वाली व्यावसायिक कमाई और सट्टेबाजी का खेल, हमारे शहीदों के बलिदान से बड़ा हो गया है? उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं से भी सवाल किया कि जो लोग पहले पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच का कड़ा विरोध करते थे, वे अब इस फैसले पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं?

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सौरभ भारद्वाज का यह हमला सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि यह राष्ट्रवाद के मुद्दे को सीधे पाकिस्तान और क्रिकेट से जोड़ता है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद उपजी यह स्थिति अब देश में एक बड़ा विवाद बन चुकी है। आम आदमी पार्टी की मांग है कि सरकार स्पष्ट करे कि आखिर किस दबाव में आकर देश के सैन्य हितों को दरकिनार किया गया और PoK को मुक्त कराने का सपना अधूरा छोड़ दिया गया।

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ऑनलाइन शॉपिंग का महा-घोटाला: 50 iPhone का ऑर्डर दिया, घर पहुँचा ‘जीरो’; 35 लाख की चपत लगाने वाले डिलीवरी एजेंट समेत 2 गिरफ्तार

नई दिल्ली: दिल्ली में ऑनलाइन शॉपिंग का एक ऐसा महा-स्कैम सामने आया है जिसे जानकर आपके होश उड़ जाएंगे। एक ग्राहक ने विश्वास में आकर 50 iPhone ऑर्डर किए, पैसे भी दिए, लेकिन जब पार्सल घर पहुँचने का समय आया तो ऐप पर तो ‘डिलीवरी’ दिख गई, मगर हाथ में एक भी फोन नहीं लगा। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और भारत नगर थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए इस 35 लाख रुपये की धोखाधड़ी का भंडाफोड़ किया है।

क्या है पूरा मामला?

मामला शास्त्री नगर निवासी सुमित अग्रवाल से जुड़ा है। उन्होंने 12 से 16 अप्रैल के बीच ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म ‘अमेजॉन’ (Amazon) से आईफोन 16 के कुल 50 मोबाइल फोन ऑर्डर किए थे। सुमित को लगा कि फोन सुरक्षित उनके पास पहुँच जाएंगे, लेकिन ऐप पर ऑर्डर तो ‘डिलीवर्ड’ (Delivered) दिखने लगे, पर हकीकत में उन्हें एक भी फोन नहीं मिला।

पुलिस जांच में खुला ‘डिलीवरी एजेंट’ का राज

जब सुमित अग्रवाल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, तो पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की। पुलिस टीम ने GT करनाल रोड स्थित शॉपिंग कंपनी के ऑफिस जाकर डिलीवरी लॉग्स चेक किए। जांच में पता चला कि ज्यादातर पार्सल एक ही डिलीवरी एजेंट जसप्रीत को दिए गए थे।

  • सख्ती से पूछताछ: पुलिस ने जसप्रीत को हिरासत में लिया, जिसके बाद उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया।
  • साथी की गिरफ्तारी: जसप्रीत की निशानदेही पर उसके साथी हिमांशु को भी पुलिस ने धर दबोचा।
  • बरामदगी: पुलिस ने दोनों आरोपियों से अब तक 14 सील-पैक आईफोन बरामद कर लिए हैं, जिनकी कीमत करीब 10 लाख रुपये है। बाकी फोन्स की तलाश जारी है।

क्यों किया अपराध?

पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे ‘जल्दी अमीर बनने’ के लालच में इस अपराध में शामिल हुए थे। ये दोनों किशनगंज इलाके के रहने वाले हैं और पहली बार किसी गंभीर अपराध में पकड़े गए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इन्होंने पहले भी इस तरह की वारदात को अंजाम दिया है या नहीं।

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दिल्ली में ‘जहर’ की फैक्ट्री: ईनो (ENO) और नेस्कैफे के नाम पर बिक रहा था नकली माल; क्राइम ब्रांच ने किया बड़ा भंडाफोड़

नई दिल्ली: दिल्ली के मधु विहार इलाके में क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो आम लोगों की सेहत के साथ जानलेवा खिलवाड़ कर रहा था। पुलिस ने छापेमारी कर नकली ईनो (ENO) और नेस्कैफे (Nescafé) कॉफी बनाने वाली अवैध फैक्ट्रियों को पकड़ा है। यह गिरोह पिछले दो महीनों से किराये के फ्लैट्स में यह अवैध कारोबार चला रहा था। पुलिस ने करीब ₹20 लाख का नकली माल जब्त किया है।

क्या मिला छापे में?

क्राइम ब्रांच की टीम को सूचना मिली थी कि मधु विहार इलाके में कुछ लोग नामी कंपनियों के फर्जी उत्पाद बनाकर बाजार में सप्लाई कर रहे हैं। पुलिस ने जब छापेमारी की, तो नजारा चौंकाने वाला था। वहां दो अवैध यूनिट्स चल रही थीं, जिनमें मशीनें धड़ाधड़ नकली पैकेट तैयार कर रही थीं। बरामदगी का विवरण इस प्रकार है:

  • मशीनें: 3 हाई-टेक पैकिंग मशीनें।
  • तैयार माल: करीब 1 लाख नकली ENO सैशे और 50 हजार नकली कॉफी सैशे।
  • कच्चा माल: 500 किलो संदिग्ध कॉफी पाउडर और एसिड से भरे ड्रम।
  • अन्य: पैकिंग रोल, कंपनी के नाम वाले नकली स्टिकर और कार्टन।

सेहत के लिए ‘मौत’ का सामान

पुलिस के मुताबिक, ईनो का इस्तेमाल लोग गैस और एसिडिटी के इलाज के लिए करते हैं। ऐसे में बिना किसी लाइसेंस या मानक के तैयार किया गया यह ‘नकली ईनो’ किसी की जान भी ले सकता था। कंपनियों के प्रतिनिधियों ने जांच के बाद पुष्टि की है कि यह माल पूरी तरह फर्जी है और इसे न तो कंपनी ने बनाया है और न ही आरोपियों को कोई अधिकृत लाइसेंस दिया गया था।

चार आरोपी गिरफ्तार, देहरादून से पकड़ा गया मुख्य आरोपी

पुलिस ने इस मामले में उत्तम दास, पपाई दास उर्फ पंकज, नितिन भारद्वाज और संजय बंसल को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह धंधा पिछले दो महीने से चल रहा था। पुलिस को चकमा देने के लिए आरोपी नितिन भारद्वाज देहरादून भाग गया था, लेकिन पुलिस ने तकनीकी निगरानी (Technical Surveillance) का उपयोग करते हुए उसे सहस्त्रधारा इलाके से धर दबोचा। बाद में कश्मीरी गेट से संजय बंसल को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

सावधान रहें, पहचानें असली-नकली का फर्क

पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी प्रोडक्ट को खरीदने से पहले उसकी पैकेजिंग और सील की अच्छी तरह जांच करें। थोक और रिटेल बाजारों में खपाए जा रहे इस नकली माल को लेकर अब पुलिस आगे की कड़ी कार्रवाई कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह माल और किन-किन दुकानों तक पहुँचाया गया है।

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दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर AAP की प्रेस कॉन्फ्रेंस: केजरीवाल की याचिका खारिज होने पर सौरभ भारद्वाज का भाजपा पर तीखा हमला

– दिल्ली दर्पण ब्यूरो

दिल्ली आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल को बड़ा कानूनी झटका देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी ‘रिक्यूजल’ याचिका को खारिज कर दिया है, जिसके बाद आम आदमी पार्टी ने मोर्चा खोलते हुए एक विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस की। पार्टी के वरिष्ठ नेता और मंत्री सौरभ भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि यह केवल कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं, बल्कि न्यायिक निष्पक्षता पर एक गंभीर प्रश्न है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने अदालत के समक्ष अपनी जो ‘रीज़नेबल अप्रहेंशन’ (न्यायिक संदेह) रखी थी, वह तथ्यों पर आधारित थी, जिसे भाजपा द्वारा गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारद्वाज ने ‘हितों के टकराव’ (Conflict of Interest) का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के बच्चे केंद्र सरकार के पैनल पर हैं और उन मामलों का आवंटन सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता करते हैं, जो खुद इस केस में सरकार (CBI/ED) का पक्ष रख रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जज का ‘अधिवक्ता परिषद’ (जो आरएसएस का अनुषांगिक संगठन माना जाता है) के कार्यक्रमों में जाना भी निष्पक्षता पर सवाल उठाता है। भारद्वाज के अनुसार, यह वे तथ्य हैं जिन्हें नकारा नहीं जा सकता और इसीलिए पार्टी को न्याय की प्रक्रिया पर संदेह हुआ।

इस दौरान सौरभ भारद्वाज ने भाजपा नेता बंसुरी स्वराज पर तीखा प्रहार करते हुए उन्हें “नेपोटिज्म का जीता-जागता सबूत” करार दिया और भाजपा को “इंडियन ड्रामा कंपनी” कहा। उन्होंने कहा कि भाजपा परिवारवाद के खिलाफ बड़े-बड़े भाषण देती है, लेकिन उनके अपने नेता दूसरी पीढ़ी से आते हैं जिन्हें बिना किसी संघर्ष के टिकट मिल जाता है। भारद्वाज ने भाजपा की कार्यशैली को ड्रामा करार दिया और दावा किया कि पार्टी जनता को गुमराह कर रही है।

दिल्ली की कानून-व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताते हुए भारद्वाज ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर सतीश गुलचर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि थानों में SHO की पोस्टिंग के लिए करोड़ों रुपयों का खेल चल रहा है, जिससे दिल्ली में अपराध बढ़ रहा है। अंत में, उन्होंने उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री की टीम पर तंज कसते हुए कहा कि प्रशासन का ध्यान जनसेवा के बजाय रील बनाने पर है, जिससे दिल्ली अब ‘नेशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ रील्स’ बन गई है।

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दिल्ली सीलिंग संकट: कैट ने मास्टर प्लान 2041 के तहत एमनेस्टी स्कीम लागू करने की रखी मांग

– दिल्ली दर्पण ब्यूरो

दिल्ली में पिछले दो दशकों से व्यापारियों के लिए मुसीबत बने सीलिंग और ध्वस्तीकरण के संकट का स्थायी समाधान खोजने के लिए कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने केंद्र सरकार से गुहार लगाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस” और “ईज़ ऑफ लिविंग” के विज़न को आधार बनाते हुए कैट ने केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर को एक पत्र लिखा है। इस पत्र की प्रति दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता को भी भेजी गई है। कैट ने मांग की है कि दिल्ली के मास्टर प्लान 2041 को व्यापारियों के लिए राहतकारी बनाया जाए और इसमें सीलिंग जैसी कठोर कार्रवाई से बचने के लिए उचित प्रावधान किए जाएं।

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री और सांसद श्री प्रवीण खंडेलवाल ने इस गंभीर मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि दिल्ली के व्यापारी लंबे समय से भय के साये में जी रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि इतने वर्षों की कार्रवाई के बावजूद सीलिंग से कोई भी सार्थक शहरी नियोजन लक्ष्य हासिल नहीं हुआ है, बल्कि इसका खामियाजा केवल ईमानदार व्यापारियों को भुगतना पड़ा है। खंडेलवाल ने पूर्व के मास्टर प्लानों (1961, 1981, और 2007) की विफलता का उल्लेख करते हुए बताया कि ये योजनाएं शहर की बढ़ती जनसंख्या के अनुसार व्यावसायिक अवसंरचना विकसित करने में पूरी तरह नाकाम रहीं। उन्होंने 2008 के सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल एक हलफनामे का हवाला देते हुए कहा कि सरकारी एजेंसियां चार दशकों में महज 16 प्रतिशत व्यावसायिक जगह ही विकसित कर पाईं, जिसकी भरपाई व्यापारियों ने अपनी आजीविका के माध्यम से की, लेकिन आज उन्हें ही दंडित किया जा रहा है।

कैट ने मास्टर प्लान 2041 में कई महत्वपूर्ण संशोधनों और प्रावधानों का सुझाव दिया है। संगठन ने मांग की है कि एक निश्चित कट-ऑफ तिथि के साथ “जैसा है, जहां है” के आधार पर एकमुश्त एमनेस्टी स्कीम (आम माफी योजना) लागू की जाए, ताकि व्यापारियों को स्थायी राहत मिल सके। इसके साथ ही, एमसीडी अधिनियम, 1957 के तहत समायोजन (कम्पाउंडिंग) का प्रावधान करने और 351 अधिसूचित सड़कों को व्यावसायिक एवं मिश्रित भूमि उपयोग में शामिल करने की भी पुरजोर मांग की गई है। कैट का मानना है कि भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए व्यावसायिक बुनियादी ढांचे को बेहतर करना और नीति निर्माण में शामिल एजेंसियों की जवाबदेही तय करना अनिवार्य है।

अपनी बात को दोहराते हुए श्री खंडेलवाल ने स्पष्ट किया कि दिल्ली के व्यापारी कोई रियायत नहीं, बल्कि न्याय और सम्मान की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिना मूल कारणों को सुलझाए सीलिंग की कार्रवाई जारी रखना आर्थिक संकट और जन असंतोष को और अधिक बढ़ाएगा। कैट ने सरकार से अपील की है कि वह सभी हितधारकों को साथ लेकर एक व्यावहारिक और विकासोन्मुख समाधान निकाले, जिससे दिल्ली को एक व्यापार-अनुकूल और आर्थिक रूप से सशक्त राजधानी के रूप में विकसित किया जा सके।

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