Saturday, May 9, 2026
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10 मिनट डिलीवरी पर रोक! ब्लिंकइट, स्विगी, जोमैटो, जेप्टो पर लगा ब्रेक, राघव चड्ढा बोले – हम जीत गए

दिल्ली दर्पण ब्यूरो|नई दिल्ली:- क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकइट, स्विगी, जोमैटो और जेप्टो की ‘10 मिनट डिलीवरी’ ब्रांडिंग हटाए जाने के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) सांसद राघव चड्ढा ने इसे जनता और गिग वर्कर्स की बड़ी जीत बताया है। उन्होंने कहा, “सत्यमेव जयते। साथ मिलकर हमने यह लड़ाई जीती है।”

राघव चड्ढा ने केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह एक समय पर लिया गया, निर्णायक और मानवीय कदम है। उन्होंने कहा कि जब डिलीवरी राइडर्स की जैकेट, टी-शर्ट और बैग पर ‘10 मिनट’ लिखा होता है और ग्राहक की स्क्रीन पर टाइमर चलता है, तो इसका दबाव वास्तविक, लगातार और बेहद खतरनाक होता है।

उन्होंने कहा कि यह फैसला डिलीवरी राइडर्स के साथ-साथ सड़क पर चलने वाले हर व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करेगा।

गिग वर्कर्स पर था असहनीय दबाव

राघव चड्ढा ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में उन्होंने सैकड़ों डिलीवरी पार्टनर्स से बातचीत की है। कई राइडर्स ने बताया कि वे ज्यादा काम करते हैं, कम पैसे पाते हैं और एक अवास्तविक वादे को पूरा करने के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं।

उन्होंने कहा,
“अगर एक मिनट भी देर हो जाए, तो उन्हें ऐप से लॉग आउट कर दिया जाता है, इंसेंटिव कट जाता है और ग्राहकों की गालियां सुननी पड़ती हैं। यह सिस्टम अमानवीय है।”

गिग वर्कर्स की हालत दिहाड़ी मजदूरों से भी बदतर

एक इंटरव्यू में राघव चड्ढा ने कहा कि स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकइट, जेप्टो, ओला और उबर जैसे प्लेटफॉर्म्स जिन लोगों के दम पर यूनिकॉर्न बने हैं, वही गिग वर्कर्स सबसे ज्यादा शोषित हैं।

उन्होंने कहा,
“ये लोग रोज़ 14 से 16 घंटे काम करते हैं। न कोई फिक्स वेतन, न पीएफ, न जॉब सिक्योरिटी, न पेड लीव। इनकी हालत दिहाड़ी मजदूरों से भी बदतर है।”

खतरनाक ड्राइविंग और मानसिक तनाव

राघव चड्ढा ने कहा कि 10 मिनट में डिलीवरी करने के दबाव में राइडर्स तेज और खतरनाक ड्राइविंग करते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही वे लगातार मानसिक तनाव, एंग्जायटी और दिल की धड़कन की समस्याओं से जूझते हैं।

उन्होंने कहा कि गिग वर्कर्स के लिए

  • न्यूनतम वेतन
  • अधिकतम काम के घंटे
  • सामाजिक सुरक्षा
    जैसी बुनियादी सुविधाएं तय की जानी चाहिए।

जनता और गिग वर्कर्स को धन्यवाद

राघव चड्ढा ने उन सभी नागरिकों का धन्यवाद किया जो इस मुद्दे पर उनके साथ खड़े रहे। उन्होंने कहा,
“आपने इंसानी जान, सुरक्षा और गरिमा के पक्ष में मजबूती से आवाज उठाई।”

गिग वर्कर्स को संदेश देते हुए उन्होंने कहा,
“आप अकेले नहीं हैं, हम सब आपके साथ हैं।”

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वसंत पंचमी पर जीवंत होगा महाराजा अग्रसेन और माता माधवी का दिव्य विवाह प्रसंग : नंदकिशोर अग्रवाल

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– दिल्ली दर्पण ब्यूरो 

ऐतिहासिक पहल और महत्व दिल्ली अग्रोहा विकास ट्रस्ट द्वारा भारतीय संस्कृति और वैश्य समाज की गौरवशाली परंपराओं को पुनर्जीवित करने के लिए एक अद्वितीय आयोजन किया जा रहा है । ट्रस्ट के चेयरमैन श्री नंदकिशोर अग्रवाल और अध्यक्ष श्री बी.पी. गर्ग ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार महाराजा अग्रसेन का विवाह नागवंश की राजकुमारी माता माधवी से वसंत पंचमी के पावन दिन संपन्न हुआ था । यह आयोजन इतिहास में पहली बार इतने भव्य और सांस्कृतिक रूप में समाज के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है । ट्रस्ट का मानना है कि यह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि सांस्कृतिक स्मृति का पुनर्जागरण है । 

नागलोक से गहरा नाता ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार, माता माधवी सम्राट महाराजा महीधर की सुपुत्री थीं, जिनका ‘नागलोक’ राज्य तत्कालीन समय में वर्तमान के मणिपुर, त्रिपुरा और नागालैंड तक विस्तृत था । यही कारण है कि आज भी वैश्य समाज नागलोक को अपनी ननिहाल के रूप में श्रद्धा के साथ याद करता है । इस दिव्य विवाह के मंचन के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को उनके समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है । महामंत्री डॉ. जयकिशन गर्ग ने इसे एक अद्वितीय और ऐतिहासिक अवसर बताया है

सांस्कृतिक कार्यक्रम और आकर्षणयह भव्य आयोजन 22 जनवरी 2026 को सायं 4:30 बजे से शाह ऑडिटोरियम, सिविल लाइंस में होगा । महिला अध्यक्षा श्रीमती गीता गुप्ता ने बताया कि मंचन में माता माधवी द्वारा मां पार्वती की आराधना और गणगौर पूजा के प्रारंभ की कथा भी दिखाई जाएगी । इसके साथ ही युवाओं के लिए प्रेरणादायी प्रस्तुतियाँ और महिलाओं के लिए रचनात्मक प्रतियोगिताएं भी इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण होंगी । ट्रस्ट ने संपूर्ण वैश्य समाज से इस ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनने हेतु अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने का आह्वान किया है ।​

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दिल्ली दहली: पश्चिम विहार में रोहित खत्री की जिम पर फायरिंग, लॉरेंस बिश्नोई गैंग का दावा

दिल्ली दर्पण ब्यूरो|नई दिल्ली:- दिल्ली के पश्चिम विहार इलाके में स्थित एक जिम पर फायरिंग की घटना को लेकर बड़ा दावा सामने आया है। लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े रणदीप मलिक ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इस वारदात की जिम्मेदारी ली है। पोस्ट में जिम मालिक रोहित खत्री को सीधे तौर पर धमकी दी गई है।

रणदीप मलिक ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि पश्चिम विहार स्थित आरके फिटनेस जिम पर हुई फायरिंग उसी और उसके साथी अनिल पंडित (यूएसए) के कहने पर करवाई गई है। उसने दावा किया कि उसने पहले रोहित खत्री को फोन किया था, लेकिन कॉल इग्नोर किए जाने के बाद यह कदम उठाया गया।

पोस्ट में चेतावनी देते हुए लिखा गया है कि अगर अगली बार कॉल रिसीव नहीं की गई तो अंजाम और गंभीर होगा। धमकी भरे अंदाज में कहा गया, “अगर अगली बार कॉल नहीं उठाई, तो तुझे धरती से उठा दूंगा।”

रणदीप ने आगे लिखा कि वह सिर्फ बातें करने में नहीं बल्कि करके दिखाने में विश्वास रखता है। पोस्ट में लॉरेंस बिश्नोई का नाम लेते हुए कहा गया कि जो भी उनके दुश्मन हैं, वे जीवनभर दुश्मन ही रहेंगे।

पुलिस जांच में जुटी

इस मामले के सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस अलर्ट मोड पर है। पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है और सोशल मीडिया पोस्ट की सत्यता की पड़ताल की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि फायरिंग की घटना वास्तव में कब और कैसे हुई तथा इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं।

अमेरिका में गैंगवार का असर?

गौरतलब है कि हाल ही में अमेरिका में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े दो गैंगस्टरों की मौत की खबर सामने आई थी। बताया जा रहा है कि यह मुठभेड़ भारतीय मूल के दो गैंगों के बीच हुई थी। इस गैंगवार में दो लोगों के मारे जाने का दावा किया गया है।

इस घटना की जिम्मेदारी विरोधी गैंग बलजोत और जस्सा ने ली है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए आगे और हमलों की धमकी भी दी है। माना जा रहा है कि अमेरिका में हुई इस गैंगवार के बाद गैंगों के बीच टकराव और तेज हो गया है, जिसका असर अब भारत में भी दिखने लगा है।

फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।

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राष्ट्रीय युवा दिवस पर शिक्षा मंत्री आशीष सूद का संदेश: “युथ पावर ही नेशन पावर”

-दिल्ली दर्पण ब्यूरो|नई दिल्ली। आज 12 जनवरी, राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में नॉर्थ जोन की नेशनल स्कूल बैंड प्रतियोगिता आयोजित की गई। इस मौके पर दिल्ली के शिक्षा मंत्री श्री आशीष सूद ने प्रतिभागियों और शिक्षकगणों को संबोधित करते हुए अपने प्रेरक विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि यह दिन स्वामी विवेकानंद जी के जीवन और उनके आदर्शों को याद करने का है, जिन्होंने हमें यह सिखाया कि “युथ पावर ही नेशन पावर है।”

श्री सूद ने बैंड प्रतियोगिता को केवल संगीत और मार्च पास्ट तक सीमित नहीं माना। उनके अनुसार, बैंड में कदम और हाथ, धुन और ताल का सामंजस्य केवल दृश्यात्मक सुंदरता या धुन की उत्कृष्टता ही नहीं दिखाता, बल्कि यह प्रतिभागियों में आत्म-अनुशासन, टीम भावना और समर्पण का विकास भी करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक पल की लापरवाही या अनुशासनहीनता पूरे बैंड की मेहनत और रिदम को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि बैंड प्रतियोगिता युवाओं को जीवन के महत्वपूर्ण गुण सिखाने का एक आदर्श माध्यम है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि बैंड में शामिल होना केवल संगीत का अभ्यास नहीं है, बल्कि यह एक साथ काम करने, सामूहिक जिम्मेदारी निभाने और समय का महत्व समझने की कला भी है। उन्होंने प्रतिभागियों को फोकस, धैर्य और नियंत्रण बनाए रखने की सलाह दी, क्योंकि यही गुण जीवन में सफलता दिलाने में भी सहायक होते हैं।

इस अवसर पर श्री सूद ने न केवल प्रतिभागियों की मेहनत की सराहना की, बल्कि उनके राज्य के शिक्षकगणों को भी बधाई दी, जिन्होंने उन्हें प्रतियोगिता के लिए तैयार किया। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी पूरी क्षमता के साथ प्रदर्शन करें और सफलता को केवल मेडल तक सीमित न समझें। उनका कहना था कि असली सफलता टीम स्पिरिट, अनुशासन और व्यक्तिगत विकास में है।

श्री सूद ने अंत में सभी से आग्रह किया कि इस राष्ट्रीय युवा दिवस और आगामी गणतंत्र दिवस के अवसर पर हम सभी मिलकर अपने देश में सकारात्मक माहौल बनाने में योगदान दें। उन्होंने कहा कि जैसे बैंड में सामंजस्य और अनुशासन जरूरी है, वैसे ही समाज में भी सहयोग, एकजुटता और जिम्मेदारी निभाना अत्यंत आवश्यक है।

इस प्रकार नेशनल स्कूल बैंड प्रतियोगिता न केवल संगीत और प्रदर्शन का मंच है, बल्कि यह युवाओं के जीवन में अनुशासन, समर्पण, टीम भावना और नेतृत्व जैसी विशेषताओं को विकसित करने का अवसर भी प्रदान करती है। शिक्षा मंत्री के प्रेरक संदेश ने इस कार्यक्रम को और भी अर्थपूर्ण और उत्साहवर्धक बना दिया।

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ईस्ट दिल्ली पार्क विवाद: कैमरे, निगरानी और नागरिकों की निजता

East Delhi News: पूर्वी दिल्ली के एक पार्क से सामने आया एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी बहस का कारण बना हुआ है। वीडियो में कोहली वार्ड की बीजेपी पार्षद मुनेष डेढ़ा अपने समर्थकों के साथ देर रात पार्क में मौजूद युवाओं से पूछताछ करती नजर आ रही हैं। इस घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीति, सार्वजनिक नैतिकता और नागरिक स्वतंत्रता के बीच टकराव को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

वायरल वीडियो में पुलिस की मौजूदगी नहीं दिखती। पार्षद खुद पार्क में बैठे युवक-युवतियों से उनके रहने की जगह, पहचान और वहां मौजूद होने के कारणों पर सवाल करती दिखाई देती हैं। एक बेंच पर बैठे कपल से पहचान पत्र दिखाने को कहा जाता है और यह जानने के बाद कि दोनों अशोक नगर के निवासी हैं, उनसे देर रात पार्क में मौजूद रहने पर सवाल उठाए जाते हैं।

चेतावनी और उम्र पर टिप्पणी

वीडियो में पार्षद यह कहते हुए भी सुनाई देती हैं कि यदि पार्क में कोई आपत्तिजनक गतिविधि पाई गई तो मौके पर ही कार्रवाई की जाएगी। जब युवक-युवती खुद को 18 वर्ष का बताते हैं, तो इस पर भी सख्त टिप्पणी की जाती है। इसके बाद अन्य जोड़ों से भी इसी तरह पूछताछ होती दिखाई देती है।

पार्षद का पक्ष

विवाद बढ़ने पर मुनेष डेढ़ा ने अपने कदम का बचाव करते हुए कहा कि वे किसी प्रकार की नैतिक पहरेदारी के इरादे से नहीं, बल्कि निरीक्षण के लिए पार्क गई थीं। उनका कहना है कि स्थानीय निवासियों ने पार्क में नशाखोरी और देर रात तक भीड़ जुटने की शिकायत की थी। साथ ही, रोशनी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही थी।

देर रात घर से बाहर रहने पर सवाल

पार्षद ने यह भी दावा किया कि पार्क में मौजूद कुछ लड़कियां काफी देर से घर से बाहर थीं। उन्होंने एक अभिभावक का हवाला देते हुए कहा कि उनकी बेटी कई दिनों से लापता थी। पार्षद के अनुसार, किसी के साथ बैठने पर उन्हें आपत्ति नहीं है, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर मर्यादा बनाए रखना जरूरी है।

पहले भी उठ चुके हैं सवाल

यह पहली बार नहीं है जब पूर्वी दिल्ली में जनप्रतिनिधियों की ऐसी भूमिका पर सवाल उठे हों। इससे पहले पटपड़गंज इलाके में बीजेपी की एक अन्य पार्षद का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने एक अफ्रीकी मूल के फुटबॉल कोच को भाषा को लेकर चेतावनी दी थी। इन घटनाओं ने नगर निगम स्तर पर जनप्रतिनिधियों की सीमाओं और जिम्मेदारियों को लेकर नई बहस को जन्म दिया है।

निजता बनाम सार्वजनिक नैतिकता

यह पूरा मामला एक बुनियादी सवाल खड़ा करता है—क्या निर्वाचित प्रतिनिधियों को सार्वजनिक स्थानों पर नागरिकों की निजी स्वतंत्रता में दखल देने का अधिकार है? एक ओर सुरक्षा और स्थानीय शिकायतों का तर्क दिया जा रहा है, तो दूसरी ओर इस वीडियो को नैतिक पुलिसिंग और युवाओं की निजता के अधिकार का उल्लंघन बताया जा रहा है।

फिलहाल यह मुद्दा सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां कुछ लोग पार्षद की कार्रवाई को सुरक्षा के नजरिए से सही ठहरा रहे हैं, वहीं कई इसे नागरिक स्वतंत्रता में अनुचित हस्तक्षेप मानते हुए कड़ी आलोचना कर रहे हैं।

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