Friday, May 15, 2026
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हाईकोर्ट का आदेश: जामा मस्जिद इलाके में कार्रवाई से पहले MCD को 2 महीने का वक्त

नई दिल्ली: दिल्ली की ऐतिहासिक शाही जामा मस्जिद के बाहर फैले अतिक्रमण को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने दिल्ली नगर निगम (MCD) को निर्देश दिया है कि वह दो महीने के भीतर पूरे इलाके का सर्वे कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करे। कोर्ट के आदेश के बाद माना जा रहा है कि तुर्कमान गेट के बाद अब जामा मस्जिद के बाहर भी बुलडोजर कार्रवाई हो सकती है।

बताया गया है कि जामा मस्जिद तक पहुंचने वाली सड़क और इसके आसपास के इलाके में बड़ी संख्या में दुकानदारों ने अवैध कब्जा कर रखा है। हालात ऐसे हैं कि मस्जिद की सीढ़ियों तक पर अतिक्रमण हो चुका है, जिससे न सिर्फ श्रद्धालुओं को परेशानी हो रही है, बल्कि ऐतिहासिक इमारत की सुंदरता भी प्रभावित हो रही है।

मौलाना आजाद की मजार के पास भी अतिक्रमण

अतिक्रमण की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की मजार के पास भी अवैध कब्जा किया गया है। जामा मस्जिद को जाने वाली सड़क के दोनों किनारों और बीच में पटरी दुकानदारों ने कब्जा जमा रखा है, जिससे रास्ता बेहद संकरा हो गया है। यहां से गुजरना लोगों के लिए मुश्किल भरा हो गया है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने MCD को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सर्वे पूरा होने के बाद अतिक्रमण को जल्द से जल्द हटाया जाए, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके और इलाके की ऐतिहासिक पहचान बनी रहे।

तुर्कमान गेट हिंसा का भी जिक्र

गौरतलब है कि बुधवार तड़के तुर्कमान गेट इलाके में स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद और कब्रिस्तान के पास अवैध कब्जा हटाने के दौरान हिंसा भड़क गई थी। इस कार्रवाई के दौरान कुछ स्थानीय और बाहरी लोगों ने कथित तौर पर पुलिस और MCD कर्मचारियों पर पथराव किया था।

इस हिंसा में पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए थे, जिसके बाद हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। घटना के बाद पुलिस ने अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि 30 लोगों की पहचान कर ली गई है। पुलिस के पास इस मामले से जुड़े करीब 400 वीडियो हैं, जिनकी गहनता से जांच की जा रही है।

हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जामा मस्जिद के बाहर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कब और किस तरह शुरू होती है।

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फीस रेगुलेशन एक्ट 2025: हाई कोर्ट का रोक लगाने से इनकार, स्कूलों को कमिटी गठन के लिए मिला 10 दिन का अतिरिक्त समय

  • दिल्ली दर्पण ब्यूरो
    नई दिल्ली: दिल्ली के निजी स्कूलों के लिए बने ‘नया फीस रेगुलेशन एक्ट 2025’ की कानूनी वैधता को लेकर चल रही खींचतान के बीच हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस अधिनियम या इसके नियमों पर अंतरिम रोक (Stay) लगाने से साफ इनकार कर दिया है।
    इन प्रमुख संस्थाओं की याचिकाओं पर हुई सुनवाई:
    अदालत में आज कई महत्वपूर्ण याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई, जिनमें DPS सोसाइटी, रोहिणी एजुकेशन सोसाइटी, जस्टिस फॉर ऑल, कैथोलिक सोसाइटी, फोरम ऑफ माइनॉरिटी और रेयान ग्रुप ऑफ स्कूल्स शामिल थे। निजी स्कूलों का तर्क था कि अधिनियम के कुछ प्रावधान उनकी स्वायत्तता को प्रभावित करते हैं।
  • 20 जनवरी तक बढ़ी समय सीमा:
    सुनवाई के दौरान शिक्षा निदेशालय (DOE) के वकील ने अदालत को सूचित किया कि स्कूल स्तर पर ‘फीस रेगुलेशन कमिटी’ गठित करने की अंतिम तिथि को 10 दिनों के लिए बढ़ाया जा रहा है। कोर्ट ने इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए निर्देश दिया कि अब सभी संबंधित स्कूल 20 जनवरी तक अपनी कमिटी का गठन कर लें।
    कानूनी वैधता पर होगी अगली बहस:
    पीठ ने स्पष्ट किया कि वह ‘नया फीस रेगुलेशन एक्ट 2025’ की संवैधानिक वैधता की जांच तभी करेगी जब सरकार (Respondents) इस मामले में अपना विस्तृत जवाब दाखिल कर देगी। तब तक स्कूलों को मौजूदा आदेशों का पालन करना होगा।

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पीतमपुरा में राहगीर का गला दबोचकर लूटने वाले दो बदमाश गिरफ्तार, -‘पिलपिला’ चढ़ा पुलिस के हत्थे

दिल्ली दर्पण ब्यूरो
नई दिल्ली:
उत्तर-पश्चिम जिले के थाना सुभाष प्लेस की पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए लूट की एक वारदात का चंद घंटों में खुलासा कर दिया है। पुलिस ने दो शातिर लुटेरों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने एक युवक का गला दबाकर उसका मोबाइल और पर्स लूट लिया था। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अमन उर्फ पिलपिला (23) और अयान (21) के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके पास से लूटा गया मोबाइल फोन और पावर बैंक भी बरामद कर लिया है।
क्या थी घटना?
पुलिस के अनुसार, 6 जनवरी की रात करीब 9:40 बजे आयुष गर्ग नाम का युवक नेताजी सुभाष प्लेस मेट्रो स्टेशन से पैदल अपने घर एसडी ब्लॉक, पीतमपुरा लौट रहा था। जब वह डीडीए स्पोर्ट्स क्लब के पास पहुँचा, तो पीछे से दो लड़कों ने उस पर हमला कर दिया। एक आरोपी ने आयुष का गला दबोच लिया, जबकि दूसरे ने उसका रेडमी मोबाइल, पावर बैंक और पर्स (जिसमें क्रेडिट कार्ड व अन्य दस्तावेज थे) छीन लिया। वारदात के बाद आरोपी उसे धक्का देकर दिल्ली हाट की ओर भाग निकले।
सीसीटीवी और लोकल इंटेलिजेंस से मिली कामयाबी


मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीपी सृष्टि भट्ट और एसएचओ तेजपाल सिंह के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया गया, जिसमें एसआई नीरज कुमार, हेड कांस्टेबल मनोज और अन्य शामिल थे। टीम ने घटनास्थल के आसपास के दर्जनों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और स्थानीय मुखबिरों को सक्रिय किया। सटीक जानकारी के आधार पर पुलिस ने शकूरपुर की जेजे कॉलोनी में छापेमारी कर दोनों आरोपियों को धर दबोचा।
आसान कमाई के लिए बने अपराधी
पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि उन्होंने कम समय में ‘आसान पैसा’ कमाने के लिए लूटपाट शुरू की थी। आरोपी अमन उर्फ पिलपिला पहले भी वाहन चोरी के मामले में शामिल रहा है, जबकि अयान ने पहली बार किसी वारदात को अंजाम दिया। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन्होंने हाल के दिनों में और कितनी वारदातों को अंजाम दिया है।
पुलिस टीम की सराहना
उत्तर-पश्चिम जिले के अपर पुलिस आयुक्त भीष्म सिंह (IPS) ने बताया कि पुलिस टीम ने तकनीकी जांच और त्वरित कार्रवाई के जरिए आरोपियों को पकड़ने में सफलता हासिल की है। आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।

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दिल्ली के सरकारी स्कूलों में RTE मानकों की होगी पड़ताल; हाई कोर्ट ने सचिव और MCD कमिश्नर को दिया 4 सप्ताह में सर्वे का आदेश

  • दिल्ली दर्पण ब्यूरो
    नई दिल्ली:
    दिल्ली हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में शिक्षा के अधिकार (RTE) के प्रभावी कार्यान्वयन को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। माननीय मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने ‘जस्टिस फॉर ऑल’ संस्था द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली सरकार और स्थानीय निकायों को कटघरे में खड़ा किया।
    कोर्ट की सख्त टिप्पणी और निर्देश:
    अदालत ने शिक्षा सचिव (दिल्ली सरकार), एमसीडी (MCD) कमिश्नर और एनडीएमसी (NDMC) के अध्यक्ष को आदेश दिया है कि वे संयुक्त रूप से अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी स्कूलों का भौतिक सर्वेक्षण (Physical Survey) करें। कोर्ट ने प्रशासन को 4 सप्ताह का समय देते हुए एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा है। इस रिपोर्ट में यह बताना अनिवार्य होगा कि कितने स्कूल RTE अधिनियम की धारा 19 और उसकी अनुसूची के तहत निर्धारित मानदंडों (जैसे क्लासरूम, टॉयलेट, पीने का पानी, और खेल का मैदान) का पालन कर रहे हैं।
    याचिकाकर्ता की दलील:
    संस्था की ओर से पेश हुए अधिवक्ता खगेश बी. झा और अधिवक्ता शिखा शर्मा बग्गा ने कोर्ट को अवगत कराया कि कई सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचा कानून के अनुरूप नहीं है, जिससे छात्रों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। अब इस मामले की अगली सुनवाई रिपोर्ट पेश होने के बाद होगी।

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भलस्वा डेयरी पुलिस की जांच पर कोर्ट के तीखे सवाल: मुख्य हमलावर फरार, छात्र को फंसाने की कोशिश नाकाम

-दिल्ली दर्पण ब्यूरो| नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने भलस्वा डेयरी थाना पुलिस की कार्यप्रणाली और जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मारपीट के एक मामले में पुलिस द्वारा एक युवा छात्र, पुष्कर, को आरोपी बनाए जाने के बाद अदालत ने उसे अग्रिम जमानत दे दी है। इस आदेश से पुलिस की ‘काबिलियत’ और जांच की ‘नियत’ पर उंगलियां उठ रही हैं क्योंकि एफआईआर में नाम न होने के बावजूद पुलिस छात्र की गिरफ्तारी पर आमादा थी। 
एडवोकेट श्वेता एस. कुमार की दलीलों ने पुलिस को किया निरुत्तर
अदालत में आरोपी छात्र का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता श्वेता एस. कुमार ने अपनी कानूनी काबिलियत का लोहा मनवाया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उनका मुवक्किल एक होनहार छात्र है और पुलिस की गलत कार्रवाई उसके पूरे करियर को तबाह कर सकती है। 
श्वेता एस. कुमार ने सफलतापूर्वक यह साबित किया कि:

  • एफआईआर के मूल विवरण में पुष्कर हमलावरों में शामिल ही नहीं था। 
  • पुलिस ने बिना किसी पिछले आपराधिक रिकॉर्ड के एक छात्र को सलाखों के पीछे भेजने की कोशिश की। 
  • शिकायतकर्ता पक्ष द्वारा लगाए गए ‘उकसाने’ के आरोप मनगढ़ंत हैं क्योंकि पुलिस रिकॉर्ड (FIR) में इनका कोई जिक्र नहीं है。 
    पुलिस की नाकामी: असली गुनहगार अब भी आजाद
    सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की पेशेवर कार्यक्षमता तब कटघरे में आ गई जब जांच अधिकारी (IO) ने कोर्ट में स्वीकार किया कि मुख्य हमलावर—हर्ष, साहिल और तरुण—अभी भी फरार हैं। यह हैरान करने वाला है कि पुलिस ने उन हमलावरों को पकड़ने के बजाय एक ऐसे युवक पर ध्यान केंद्रित किया जिसके खिलाफ मारपीट का कोई साक्ष्य नहीं था ।

न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए स्पष्ट किया कि आरोपी की आजादी को छीनने का कोई ठोस आधार नहीं है。 कोर्ट ने निर्देश दिया कि गिरफ्तारी की स्थिति में पुष्कर को ₹10,000 के निजी मुचलके पर रिहा किया जाए। 
यह फैसला पुलिस प्रशासन के लिए एक सबक है कि वे केवल अपनी फाइलों को भरने के लिए निर्दोष छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न करें।

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