दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण फैलाने वालों पर सीएक्यूएम की सख्ती, 197 औचक निरीक्षणों में मिले 85 उल्लंघन
हवा की गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में गिरने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने एनसीआर में नियमों का उल्लंघन करने वाली औद्योगिक इकाइयों और निर्माण स्थलों पर कार्रवाई की समीक्षा की।

सर्दियों की शुरुआत से पहले दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता गिरकर 'मध्यम' स्तर पर पहुंच गई है। प्रदूषण के संभावित खतरे को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने समूचे क्षेत्र में नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ प्रवर्तन और निगरानी अभियान तेज कर दिया है।
सीएक्यूएम की प्रवर्तन टास्क फोर्स ने गुरुवार को आयोजित बैठक में 8 सितंबर से 24 सितंबर के बीच किए गए निरीक्षणों की प्रगति की समीक्षा की। आधिकारिक बयान के अनुसार, एनसीआर के विभिन्न हिस्सों में प्रदूषण नियंत्रण टीमों ने कुल 197 जगहों पर जांच अभियान चलाया।
जांच अभियानों के तहत 111 औद्योगिक इकाइयों, 76 डीजल जनरेटर (डीजी) सेटों और निर्माण एवं विध्वंस (सीएंडडी) से जुड़ी 10 साइटों का निरीक्षण किया गया। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों में 22 विशेष निरीक्षण अभियान भी संचालित किए गए थे।
अधिकारियों के मुताबिक, इन निरीक्षणों के दौरान 85 मामलों में पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन पाया गया। इसके बाद प्राधिकारियों ने चार निर्माण परियोजनाओं और एक औद्योगिक इकाई को बंद करने की सिफारिश की, जबकि 28 डीजी सेटों को सील करने और 17 मामलों में आवश्यक अनुपालन निर्देश जारी करने का प्रस्ताव रखा गया।
उल्लंघन के 10 मामलों में पर्यावरण मुआवजा लगाने का भी प्रस्ताव दिया गया है। इसके साथ ही कई मामलों में दोबारा निरीक्षण करने और संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को मामले सौंपने जैसी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है।
बैठक में उत्तर प्रदेश के हापुड़ में 15 सितंबर को चलाए गए विशेष अभियान का ब्योरा भी साझा किया गया। वहां जांच के दौरान पांच परिसर नियमों के अनुरूप मिले, जबकि एक इकाई पहले से ही सील पाई गई। वहीं अन्य कई इकाइयों और डीजी सेटों के खिलाफ सीलिंग और बंदी की कार्रवाई प्रस्तावित की गई।
इसी तरह 29 सितंबर को गाजियाबाद के लोनी में 21 औद्योगिक इकाइयों की जांच की गई, जहां सभी इकाइयां नियमों का उल्लंघन करती पाई गईं। इन इकाइयों में बिना उचित चिमनी और वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों के भट्ठियां चलाने, वैध एनओसी न होने, कोयले जैसे प्रतिबंधित ईंधन के उपयोग और अपशिष्ट प्रबंधन में गंभीर खामियां मिलीं, जिस पर सख्त कार्रवाई की गई।
आयोग ने आने वाले महीनों को देखते हुए संबंधित एजेंसियों को प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए लगातार निरीक्षण करने, समयबद्ध सत्यापन सुनिश्चित करने और आपसी समन्वय को और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।
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