यमुना किनारे 99 करोड़ की दीवार सहित दिल्ली सरकार ने 622 करोड़ रुपये की बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं को दी मंजूरी
दिल्ली में बाढ़ नियंत्रण और जल निकासी मजबूत करने के लिए 4.7 किलोमीटर लंबी आरसीसी दीवार और तीन बायोमाइनिंग प्रोजेक्ट्स को मिली मंजूरी।

दिल्ली में बाढ़ नियंत्रण और जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सरकार ने 622 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं को मंजूरी दी है। दिल्ली सचिवालय में सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बाढ़ नियंत्रण बोर्ड की 40वीं बैठक में यह फैसला लिया गया। इन योजनाओं में यमुना के संवेदनशील हिस्से में आरसीसी दीवार का निर्माण और नालों से निकलने वाली गाद के वैज्ञानिक निस्तारण की परियोजनाएं शामिल हैं।
स्वीकृत परियोजनाओं के तहत यमुना किनारे मैगजीन रोड ड्रेन से लेकर पुराने रेलवे पुल तक 4.7 किलोमीटर लंबी कंक्रीट की दीवार बनाई जाएगी। इस दीवार के निर्माण पर करीब 99 करोड़ रुपये की लागत आएगी। अधिकारियों के अनुसार, इसका मुख्य उद्देश्य यमुना के जलस्तर में भारी वृद्धि के दौरान आसपास के निचले और संवेदनशील इलाकों को पानी भरने से बचाना है।
बोर्ड ने नालों से निकाली गई गाद के वैज्ञानिक प्रबंधन और निस्तारण के लिए 260 करोड़ रुपये की तीन बायोमाइनिंग परियोजनाओं को भी सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इससे नजफगढ़ ड्रेन सहित भारी गाद वाले प्रमुख नालों को राहत मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में गाद किनारों पर ही रह जाती है, जिससे बारिश का पानी उसे वापस नालों में बहा ले जाता है और सफाई का असर खत्म हो जाता है।
सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश सिंह ने अधिकारियों को तय समयसीमा का कड़ाई से पालन करने और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि निकाली गई गाद दोबारा नालों में चली जाती है, तो गाद निकालने का कोई औचित्य नहीं रह जाता है। इसके अलावा बैठक में बारापुला नाले की तर्ज पर अन्य नालों के किनारों को वॉकवे, हरित पट्टी, पौधारोपण और लाइट लगाकर सुंदर व सुरक्षित सार्वजनिक स्थल बनाने पर भी चर्चा हुई।
दूसरी ओर, यमुना किनारे बनने वाली इस दीवार को लेकर पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने सवाल खड़े किए हैं। 'साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपल' (SANDRP) से जुड़े कार्यकर्ता भीम सिंह रावत ने इसे अधूरा उपाय बताते हुए कहा कि यह दीवार नदी के प्राकृतिक बहाव को बाधित कर सकती है। उन्होंने नदी के चल रहे स्थलाकृतिक और बाथिमेट्रिक सर्वेक्षण के पूरा होने तक इस निर्माण को रोकने की मांग की है।
पर्यावरणविदों के अनुसार, हाल के वर्षों में यमुना में बाढ़ के पैटर्न में बदलाव देखा गया है और नदी क्षेत्र में निर्माण तथा अतिक्रमण से इसकी जल वहन क्षमता घटी है। 'यमुना सत्याग्रह' के संयोजक दीवान सिंह ने भी आपत्ति जताते हुए कहा कि नदी को दीवारों और बैराजों के जरिए बांधने की कोशिश उसे नहर में तब्दील कर देगी। उनका मानना है कि नदी के प्राकृतिक प्रवाह को रोकने के बजाय गाद प्रबंधन की टिकाऊ नीति पर काम किया जाना चाहिए।
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