दिल्ली में ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए एआई आधारित आईटीएमएस को मंजूरी, 1790 करोड़ होंगे खर्च
राजधानी के 42 प्रमुख कॉरिडोर को स्मार्ट बनाने के लिए केंद्र सरकार ने दी हरी झंडी, 24 महीनों में तीन चरणों में पूरा होगा काम।

राजधानी दिल्ली की सड़कों पर लगने वाले लंबे जाम और ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी योजना को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) परियोजना पर मुहर लगाई गई। इस हाईटेक प्रणाली को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और रियल-टाइम डेटा के सहारे संचालित किया जाएगा, जिससे शहर के 42 प्रमुख यातायात कॉरिडोर को स्मार्ट बनाया जाएगा।
केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 1,789.52 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। पूरी योजना को 24 महीने के भीतर तीन चरणों में धरातल पर उतारा जाएगा। इसके निर्माण के बाद अगले पांच वर्षों तक इसी परियोजना के तहत इसके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी संभाली जाएगी।
आईटीएमएस परियोजना के दायरे में कुल 1,092 एडैप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम (एटीसीएस) और 1,029 ऑटोमेटेड एनफोर्समेंट स्थान शामिल किए गए हैं। पहले चरण में 5 कॉरिडोर, 250 सिग्नल जंक्शन और 271 प्रवर्तन बिंदु तैयार होंगे। वहीं दूसरे चरण में 7 कॉरिडोर और 222 जंक्शन जोड़े जाएंगे, जबकि अंतिम व तीसरे चरण में 30 कॉरिडोर, 620 जंक्शन और 522 प्रवर्तन स्थानों को तकनीक से लैस किया जाएगा।
सड़कों पर वाहनों के दबाव को नियंत्रित करने के लिए एटीसीएस तकनीक वास्तविक समय में ट्रैफिक घनत्व का आकलन करेगी। इसके आधार पर रेड लाइट और ग्रीन लाइट का समय अपने आप तय होगा, जिससे चौराहों पर जाम की स्थिति से बचा जा सकेगा। साथ ही इस सिस्टम में ऐसा सॉफ्टवेयर जोड़ा जाएगा जो एंबुलेंस और दमकल जैसी आपातकालीन गाड़ियों के लिए स्वतः 'ग्रीन कॉरिडोर' बना देगा ताकि वे बिना रुके निकल सकें।
दिल्ली में सर्दियों के दौरान कोहरे के कारण सामान्य कैमरों से निगरानी में आने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिए इसमें विशेष थर्मल कैमरे लगाए जाएंगे। ये थर्मल कैमरे घने कोहरे में भी वाहनों की आवाजाही को साफ रिकॉर्ड कर सकेंगे, जिससे हादसों पर रोक लगेगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों की आसानी से पहचान हो सकेगी। ट्रैफिक पुलिस इस डेटा के जरिए सर्दियों में पहले से बेहतर ट्रैफिक डायवर्जन प्लान भी तैयार कर पाएगी।
यह प्रणाली हाई रेजोल्यूशन ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरों और स्पीड रडार से लैस होगी, जिसे वाहन पोर्टल और पुलिस रिकॉर्ड से सीधे जोड़ा जाएगा। इससे चोरी की गाड़ियों, ब्लैकलिस्टेड वाहनों और हिट-एंड-रन के मामलों को कुछ ही सेकंड में ट्रैक किया जा सकेगा। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक देश में पहले से बेंगलुरु में चल रहे ऐसे मॉडल के अध्ययन को भी इस परियोजना के प्रस्ताव में शामिल किया गया था।
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