गाजियाबाद: क्लीनिक पर गलत इलाज से गर्भवती महिला की मौत का आरोप, पुलिस जांच में जुटी
गाजियाबाद के मसूरी क्षेत्र में पेट की सफाई के दौरान नस कटने का आरोप, दिल्ली के अस्पताल में इलाज के दौरान महिला ने तोड़ा दम।

गाजियाबाद के मसूरी थाना क्षेत्र स्थित डासना की रहने वाली एक गर्भवती महिला की दिल्ली के अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। मृतका के पति ने मसूरी स्थित एक क्लीनिक की महिला डॉक्टर पर उपचार में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की पड़ताल शुरू कर दी है।
डासना निवासी निजामुद्दीन के अनुसार उनकी 34 वर्षीय पत्नी सन्नो डेढ़ माह की गर्भवती थीं और उनके छह बच्चे हैं। करीब एक माह पूर्व अचानक तबीयत खराब होने पर वह पत्नी को लेकर मसूरी स्थित शमा क्लीनिक पहुंचे थे। पति का आरोप है कि वहां मौजूद डॉक्टर निशात चौधरी ने अधिक रक्तस्राव का हवाला देते हुए पेट की सफाई करने की सलाह दी थी।
शिकायतकर्ता का दावा है कि क्लीनिक में पेट की सफाई के दौरान डॉक्टर द्वारा गलत नस काट दी गई, जिससे महिला की शारीरिक स्थिति तेजी से बिगड़ने लगी। हालत नाजुक होने पर परिजन सन्नो को तत्काल क्लीनिक से लेकर सर्वोदय अस्पताल पहुंचे और वहां भर्ती कराया।
सर्वोदय अस्पताल में कई दिनों तक चले उपचार के बाद भी जब स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ, तो डॉक्टरों ने महिला को अन्यत्र रेफर कर दिया। इसके बाद परिजन उन्हें दिल्ली के एक अस्पताल ले गए, जहां शनिवार को उपचार के दौरान महिला ने दम तोड़ दिया। पति का दावा है कि सर्वोदय अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें नस कटने की वजह से हालत गंभीर होने की जानकारी दी थी।
पीड़ित पति ने शमा क्लीनिक में कराए गए इलाज से संबंधित पर्चे, दस्तावेज और भुगतान के साक्ष्यों के साथ मसूरी थाने में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
दूसरी तरफ, शमा क्लीनिक की डॉक्टर निशात चौधरी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि महिला करीब एक महीने पहले सिर्फ पेट दर्द की शिकायत लेकर आई थी, जिसे दवा देकर घर भेज दिया गया था। डॉक्टर का दावा है कि महिला को न तो क्लीनिक में भर्ती किया गया और न ही कहीं रेफर किया गया था।
मसूरी के एसीपी सुनील कुमार ने बताया कि क्लीनिक की डॉक्टर के खिलाफ लापरवाही की शिकायत प्राप्त हुई है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को भेजेगी। एसीपी के अनुसार सीएमओ की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही नियमानुसार आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
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