ग्रेटर नोएडा में तेजी से बिगड़ी हवा की गुणवत्ता, पिछले साल के मुकाबले बढ़ा अक्टूबर का प्रदूषण स्तर
ग्रेटर नोएडा में अक्टूबर के दौरान वायु गुणवत्ता सूचकांक लगातार खराब श्रेणी में बना हुआ है, जिससे स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ गई है।

ग्रेटर नोएडा में वायु प्रदूषण का स्तर इस वर्ष पिछले साल की तुलना में तेजी से बढ़ा है। अक्टूबर के शुरुआती 20 दिनों में ही वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गया है। हवा की गुणवत्ता लगातार बिगड़ने से स्थानीय निवासियों को सांस लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
आंकड़ों के अनुसार, 18 अक्टूबर को शहर का एक्यूआई सबसे अधिक 274 दर्ज किया गया था, जो कि खराब श्रेणी में आता है। उस दिन हवा में मुख्य प्रदूषक तत्व पीएम 10 रहा। पिछले वर्ष इसी तारीख को एक्यूआई 248 रिकॉर्ड हुआ था, यानी इस बार उसी दिन प्रदूषण में 26 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
हालांकि 20 अक्टूबर को सूचकांक 229 पर आया, जिससे थोड़ी राहत दिखी लेकिन वायु गुणवत्ता अब भी खराब श्रेणी में ही बनी हुई है। इस महीने के 20 दिनों के भीतर हवा तीन दिन संतोषजनक, दस दिन मध्यम और सात दिन खराब श्रेणी में दर्ज की गई है। पिछले साल अक्टूबर में हवा केवल एक दिन संतोषजनक रही थी, जबकि नौ दिन मध्यम, 19 दिन खराब और दो दिन बेहद खराब श्रेणी में दर्ज हुई थी।
शहर में वायु गुणवत्ता के इस स्तर तक गिरने के पीछे निर्माण स्थलों और सड़कों से उड़ने वाली धूल को मुख्य कारण माना जा रहा है। इसके साथ ही कई इलाकों में पानी का समुचित छिड़काव न होना भी हवा में धूल के कणों को बढ़ा रहा है। मौजूदा गति को देखते हुए महीने के अंत तक स्थिति और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।
प्रदूषण की स्थिति से निपटने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने रोकथाम के उपाय शुरू किए हैं। प्राधिकरण के जीएम (प्रोजेक्ट) एके सिंह के अनुसार, मुख्य सड़कों पर दिन में दो से तीन बार पानी का छिड़काव किया जा रहा है और 20 से अधिक निर्माण स्थलों पर एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनों से सफाई की जा रही है और कचरा जलाने पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा रहा है, जबकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी निगरानी टीमें गठित की हैं।
एक्यूआई 200 से ऊपर जाने पर आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में बुजुर्गों, बच्चों और दिल के मरीजों को सुबह-शाम की सैर से बचने और घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। लोगों से अपील की गई है कि बहुत जरूरी होने पर ही बाहर निकलें और बाहर जाते समय मास्क का प्रयोग करें।
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