दिल्ली में चार श्रेणियों में कचरा अलग करना होगा अनिवार्य, एमसीडी ने इंदौर मॉडल पर तैयार की योजना
दिल्ली नगर निगम की विशेष सदन बैठक में ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के तहत चार प्रकार के कचरा पृथक्करण पर जोर दिया गया।

राजधानी में ठोस कचरा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए दिल्ली नगर निगम ने स्रोत पर ही कचरा अलग करने की व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। उप-महापौर डॉ. मोनिका पंत की अध्यक्षता में बुलाई गई विशेष सदन बैठक में ठोस कचरा प्रबंधन नियम 2026 और कचरे के पृथक्करण पर विस्तार से चर्चा की गई। इस व्यवस्था को जमीनी स्तर पर सफल बनाने के लिए पार्षदों से सहयोग मांगा गया है।
सदन में मुख्य अभियंता अजय अग्रवाल ने नियमों के विभिन्न प्रावधानों को लेकर एक प्रस्तुति दी। उन्होंने जानकारी दी कि घरों, बाजारों और संस्थानों से निकलने वाले कचरे को गीला, सूखा, सेनेटरी और ई-कचरा जैसी चार श्रेणियों में अलग-अलग रखना अनिवार्य किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इंदौर मॉडल की तर्ज पर अगले तीन महीनों में राजधानी की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने की कार्ययोजना तैयार की गई है, जिससे कचरा संग्रहण और रिसाइक्लिंग की पूरी व्यवस्था बेहतर हो सकेगी।
उप-महापौर डॉ. मोनिका पंत ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि नियमों के सफल क्रियान्वयन के लिए नागरिकों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने पार्षदों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने वार्डों में आरडब्ल्यूए, बाजार संगठनों और विभिन्न संस्थाओं के साथ मिलकर जागरूकता अभियान और संवाद कार्यक्रम चलाएं। उन्होंने कहा कि स्वच्छता एक सामूहिक जिम्मेदारी है और महात्मा गांधी के स्वच्छता संदेश को दैनिक जीवन में उतारना होगा।
चर्चा के दौरान कई पार्षदों ने निगम की मौजूदा कार्यशैली पर चिंता जताई। पार्षदों का कहना था कि कई इलाकों में लोग गीला और सूखा कचरा अलग तो करते हैं, लेकिन निजी वेस्ट पिकर कलेक्शन के दौरान उसे एक साथ मिला देते हैं। पार्षदों ने कचरा उठाने वाले वाहनों में चारों प्रकार के कचरे के लिए अलग-अलग डिब्बे सुनिश्चित करने की मांग रखी। वहीं, पार्षद रामकिशोर शर्मा ने आरोप लगाया कि स्वच्छता के निरीक्षण के दौरान जिम्मेदार अधिकारी अनुपस्थित रहते हैं।
सदन में नियमों के अनुपालन को लेकर कड़े कदम उठाने की भी बात कही गई। भाजपा पार्षद धर्मवीर शर्मा ने व्यवस्था को सख्ती से लागू कराने और गंदगी फैलाने वालों पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाने की मांग रखी।
इस बीच, आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने विशेष सदन बैठक का बहिष्कार किया। निगम में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने आरोप लगाया कि जब पार्टी जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे को लेकर प्रदर्शन कर रही थी, तभी अचानक यह बैठक बुलाई गई ताकि पार्षद आवाज न उठा सकें। उन्होंने शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर भी सत्ता पक्ष पर निशाना साधा।
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