नोएडा: यूनिटेक के भूखंडों से तुरंत हटाएं अवैध कब्जे, सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन को सख्त निर्देश
शीर्ष अदालत ने गौतमबुद्ध नगर प्रशासन और पुलिस को सेक्टर 96, 97 और 98 में यूनिटेक की जमीन खाली कराकर 17 नवंबर तक रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।

उच्चतम न्यायालय ने नोएडा के सेक्टर 96, 97 और 98 में यूनिटेक समूह को आवंटित जमीनों से सभी प्रकार के अवैध कब्जे तुरंत हटाने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने गौतमबुद्ध नगर के जिला प्रशासन, पुलिस आयुक्त और नोएडा प्राधिकरण को इस बाबत संयुक्त रूप से कार्रवाई करने का आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इन कब्जों की वजह से फ्लैटों का निर्माण कार्य रुका हुआ है और हजारों घर खरीदारों को राहत मिलने में देरी हो रही है।
अदालत ने 14 अक्टूबर को पारित अपने आदेश में कहा कि कंपनी के कई खुले भूखंडों पर अवैध बस्तियां बस चुकी हैं, जो बेहद गंभीर मामला है। पीठ ने चेतावनी दी कि यदि इन कब्जों को समय रहते नहीं हटाया गया, तो आने वाले दिनों में इन्हें खाली कराना और अधिक कठिन हो जाएगा। अदालत ने पुलिस और स्थानीय प्रशासन को निर्देश देते हुए कहा कि निर्माण कार्य फिर से शुरू करने में अतिक्रमण किसी भी तरह की बाधा नहीं बनना चाहिए।
यूनिटेक की देखरेख के लिए केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त बोर्ड की ओर से पेश वकील अनुभा अग्रवाल ने अदालत को बताया कि जमीन पर 'माया नगर' नाम का पूरा गांव बस चुका है। इसके चलते बोर्ड के लिए निर्माण कार्य को आगे बढ़ाना संभव नहीं हो पा रहा है। शीर्ष अदालत ने बोर्ड को अवैध कब्जे वाली संपत्तियों की पूरी सूची नोएडा प्राधिकरण के सीईओ और पुलिस आयुक्त को सौंपने को कहा है, साथ ही अधिकारियों को 17 नवंबर की अगली सुनवाई तक अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।
यह आदेश यूनिटेक के उन घर खरीदारों की याचिकाओं पर आया है, जो एक दशक से अधिक समय से अपने आशियाने के लिए इंतजार कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2020 में केंद्रीय कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने यूनिटेक का प्रबंधन अपने हाथ में लेते हुए एक नया बोर्ड गठित किया था। इस बोर्ड को 12,000 से अधिक प्रभावित घर खरीदारों के अटके प्रोजेक्ट्स को पूरा कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
नोएडा के सेक्टर 96, 97 और 98 में स्थित अंबर, बरगंडी और विलोज जैसी परियोजनाएं करीब 164 एकड़ जमीन पर फैली हैं, जिनसे 5,586 खरीदार जुड़े हुए हैं। अंबर और बरगंडी परियोजनाओं के तहत 14 टावरों में प्रस्तावित सैकड़ों फ्लैट्स का निर्माण वर्षों से अधूरा है, जबकि विलोज प्रोजेक्ट में 397 बंगलो प्लॉट शामिल हैं। नोएडा प्राधिकरण ने वर्ष 2024 में इन परियोजनाओं के संशोधित नक्शों को भी मंजूरी दे दी थी।
यूनिटेक के पूर्व प्रमोटर संजय चंद्रा और अजय चंद्रा घर खरीदारों से धोखाधड़ी और विदेशों में धन की हेराफेरी के आरोपों का सामना कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज मामलों में प्रमोटरों पर 7,000 करोड़ रुपये से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। वर्ष 2017 से जेल में बंद प्रमोटरों से जुड़ी संपत्तियों को कुर्क कर निर्माण कार्य के लिए संसाधन जुटाने की प्रक्रिया भी अदालत की निगरानी में जारी है।
लेखक



टिप्पणियाँ
0