राजधानी दिल्ली में वजीरपुर के पास अशोक विहार इलाके में आज अतिक्रमण की शिकायत पर डिप्टी कमिश्नर का दौरा रहा, लेकिन किसी बड़े व्यपारी के अतिक्रमण बजाये, उनका मुख्य फोकस छोटे दुकानदारों और रेडी पटरी पर काम करने वालो की शिकायतों पर दिखाई दिया। एक बार फिर सवाल वही खड़ा होता दिखाई दिया — जब भी किसी बड़े अधिकारी, नेता या प्रशासन का दौरा होता है, तो अतिक्रमण के नाम पर सबसे पहले निशाना छोटे दुकानदारों और पटरी व्यापारियों को ही क्यों बनाया जाता है?
जो लोग सालों से सड़क किनारे छोटे-छोटे स्टॉल लगाकर अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं, कार्रवाई की सबसे बड़ी मार उन्हीं पर क्यों पड़ती है? क्या प्रशासन को सिर्फ वही लोग दिखाई देते हैं जिनका गुजर-बसर ठेले, रेहड़ी और छोटी दुकानों से चलता है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़कों पर खड़ी बड़ी-बड़ी गाड़ियां, मॉल्स और बड़े कॉम्प्लेक्स के बाहर फैला कब्जा कभी प्रशासन की कार्रवाई का हिस्सा क्यों नहीं बनता? जिनकी वजह से घंटों जाम लगता है, उन पर सवाल कम उठते हैं, लेकिन गरीब दुकानदारों को अतिक्रमण के नाम पर तुरंत हटाने की बात शुरू हो जाती है।
चुकी डिप्टी कमिश्नर जी ने अशोक विहार की दीप मार्किट से अपना दौरा शुरू किया। वहां से वह वजीरपुर गांव और अशोक विहार की गलियों, चौराहों और पीछे की सड़कों तक पहुंचे।
कई जगह पार्किंग स्पेस न मिलने पर और भीड़ के कारण, लोगों ने अतिक्रमण की शिकायत की। सड़क किनारे लगी छोटी दुकानों, स्टॉल्स और पटरी पर हो रहे कब्जों को लेकर लोगों ने नाराजगी जताई। डिप्टी कमिश्नर ने उन दुकानों को हटाने की बात कही। दीप मार्किट और आसपास के इलाकों में वर्षों से छोटे-छोटे स्टॉल लगाकर लोग अपना गुजर-बसर कर रहे थे, लेकिन अब उन पर कार्रवाई की बात कही जा रही है।
इसके अलावा बंद पड़े नाले, कूड़े के ढेर, पानी से भरी सड़कें और गंदगी की शिकायतें भी सामने आईं। कई लोगों ने कहा कि लंबे समय से नालों की सफाई नहीं हुई, जिससे इलाके में बदबू और परेशानी बढ़ रही है और बारिश का पानी सड़को पर इक्कठा हो जाता है! जब डिप्टी कमिश्नर मुख्य सड़कों पर पहुंचे तो कई स्थानीय लोगों ने अतिक्रमण इलाके में बढ़ती स्नैचिंग और चोरी जैसी घटनाओं की शिकायत भी की। लोगों का कहना था कि क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है।
दौरे के दौरान एक बंद पड़े सार्वजनिक शौचालय को भी देखा गया, जिसे जल्द खुलवाने के निर्देश दिए गए ताकि स्थानीय लोगों को सुविधा मिल सके। इस दौरान निगम पार्षद विना असीजा भी डिप्टी कमिश्नर के साथ मौजूद रहीं और उन्होंने इलाके की हर छोटी-बड़ी शिकायत को अधिकारियों तक विस्तार से पहुंचाया।
लेकिन जिन बड़ी समस्याओ को डिप्टी कमिश्नर को सुनना या देखना चाहिए था! वहा डिप्टी कमिश्नर जल्दी में रहे! जमीनी स्तर से सुनने और बराबरी से समाधान देने के बजाये डिप्टी कमिश्नर अतिक्रमण के नाम पर, बस सब हटाने का आदेश देकर निकल गए!
देखा जाये तो इस पूरे मामले के बीच एक बड़ा सवाल लगातार बना हुआ है। जिन छोटे दुकानदारों और पटरी व्यापारियों को अतिक्रमण के नाम पर हटाने की बात कही जा रही है, वे कई सालों से वहीं काम कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। किसी को कार पार्किंग से दिक्कत है, किसी को भीड़ से परेशानी, लेकिन उन गरीब मजदूरों का क्या होगा जो इन्हीं छोटी दुकानों और स्टॉल्स से अपना घर चला रहे हैं?
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर व्यवस्था सुधारनी है तो गरीब मजदूरों और छोटे व्यापारियों के लिए भी कोई ठोस व्यवस्था होनी चाहिए। क्योंकि अगर उन्हें हटाया जाता है, तो उनके सामने रोज़गार और परिवार चलाने का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
अशोक विहार में डिप्टी कमिश्नर का तूफानी दौरा,अतिक्रमण हटाओ अभियान या गरीबों पर मार?
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