नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण और मौसम संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए एक बार फिर कृत्रिम बारिश (क्लाउड-सीडिंग) की योजना पर काम शुरू हो गया है। पिछली बार तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो सका था, लेकिन इस बार की सरकार पहले से ही सभी जरूरी तैयारियां पूरी करने में जुटी हुई है।
सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित अभियान के लिए उड़ानों की अनुमति, विमान और पायलटों की उपलब्धता तथा विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय सुनिश्चित करने की प्रक्रिया और भी तेज कर दी गई है। सरकार का अब लक्ष्य यह है कि मौसम अनुकूल होते ही बिना किसी देरी के क्लाउड-सीडिंग मिशन को अंजाम दिया जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि पिछले प्रयास के दौरान सबसे बड़ी चुनौती सीमित समय में आवश्यक मंजूरियां प्राप्त करना और उड़ानों का संचालन तय करना था। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार प्रशासनिक और परिचालन तैयारियों को पहले ही पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है।
तकनीकी सहयोग के लिए आईआईटी कानपुर की विशेषज्ञ टीम भी अब इस परियोजना से जुड़ी हुई है। संस्थान क्लाउड-सीडिंग से संबंधित वैज्ञानिक पहलुओं और मौसमीय परिस्थितियों के अध्ययन में सरकार की मदद कर रहा है।
क्लाउड-सीडिंग एक वैज्ञानिक तकनीक है, जिसके माध्यम से बादलों में सिल्वर आयोडाइड जैसे विशेष रसायनों का छिड़काव किया जाता है। इसका उद्देश्य बादलों में नमी को संघनित कर वर्षा की संभावना को बढ़ाना होता है। इस तकनीक का उपयोग दुनिया के कई देशों में भी वर्षा बढ़ाने और प्रदूषण नियंत्रण के लिए किया जाता रहा है।
फिलहाल सरकार अभी भी अनुकूल मौसम परिस्थितियों का इंतजार कर रही है। यदि सभी मंजूरियां और तैयारियां समय पर पूरी हो जाती हैं, तो दिल्ली में जल्द ही कृत्रिम बारिश का एक और प्रयोग देखने को मिल सकता है।
