“नेटवर्क चला गया… कॉल कट गई… वीडियो फ्रीज हो गया!”
दिल्ली मेट्रो में सफर करने वाले यात्रियों की यह आम समस्या अब सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि बड़े नेटवर्क गैप का नतीजा है।
TRAI की बड़ी जांच
TRAI ने दिल्ली-एनसीआर मेट्रो और RRTS नेटवर्क पर 490 किलोमीटर लंबा टेस्ट किया। नतीजे चौंकाने वाले निकले।
ब्लैकस्पॉट की सच्चाई
कई मेट्रो लाइनों में ऐसे इलाके मिले जहां मोबाइल सिग्नल कमजोर या पूरी तरह गायब है। इन्हीं जगहों को “कॉल ड्रॉप जोन” कहा जा रहा है।
किन रूट्स पर जांच हुई?
ब्लू लाइन, येलो लाइन, रेड लाइन से लेकर पिंक, मैजेंटा, एयरपोर्ट एक्सप्रेस और नमो भारत कॉरिडोर तक सभी प्रमुख रूट शामिल थे।
यात्रियों की असली परेशानी
लाखों लोग रोज मेट्रो में डिजिटल काम करते हैं—रील, ऑनलाइन पेमेंट, मीटिंग और कॉल। लेकिन जैसे ही ट्रेन टनल या कमजोर सिग्नल वाले हिस्से में पहुंचती है, नेटवर्क गायब हो जाता है।
अब क्या होगा?
रिपोर्ट के बाद उम्मीद है कि टेलीकॉम कंपनियां और मेट्रो प्रशासन मिलकर इन ब्लैकस्पॉट्स को सुधारने पर काम करेंगे।
👉 फिलहाल यात्रियों के लिए मेट्रो में “नो नेटवर्क जोन” एक हकीकत बनी हुई है।
