हम अंदर से मर चुके हैं’… दिल्ली के सेप्टिक टैंक हादसे ने फिर खोली मैनुअल स्कैवेंजिंग की कड़वी सच्चाई

सेप्टिक टैंक हादसे के बाद राहत एवं बचाव अभियान को दर्शाती सांकेतिक तस्वीर।

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में एक बार फिर सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान हुई मौतों ने मैनुअल स्कैवेंजिंग पर रोक लगाने वाले कानून की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुंडका इलाके की एक फैक्ट्री में जहरीली गैस की चपेट में आने से तीन मजदूरों की मौत हो गई। इस हादसे के बाद तीन परिवारों का सहारा हमेशा के लिए छिन गया और अब उनके घरों में मातम पसरा है।

क्या है पूरा मामला?

26 जून 2026 को मुंडका स्थित एक निजी फैक्ट्री में सेप्टिक टैंक की सफाई का काम चल रहा था। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, सबसे पहले चांद टैंक में उतरे। कुछ ही देर बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें बचाने के लिए अरुण और फिर संदीप भी टैंक में उतरे, लेकिन जहरीली गैस की चपेट में आने से तीनों मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई।

घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस और राहत टीम मौके पर पहुंची और शवों को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

पुलिस की कार्रवाई

दिल्ली पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए फैक्ट्री मालिक सूरज मारवाह और ठेकेदार जयंतनीरज को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के खिलाफ मैनुअल स्कैवेंजिंग एक्ट और एससी/एसटी एक्ट सहित अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस अब यह जांच कर रही है कि मजदूरों को बिना सुरक्षा उपकरणों के टैंक में क्यों उतारा गया और क्या सुरक्षा मानकों का जानबूझकर उल्लंघन किया गया।

मेयर ने क्या कहा?

दिल्ली के मेयर प्रवेश वाही ने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि यह हादसा एक निजी परिसर में हुआ, जहां सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया गया।

उन्होंने कहा,

“कानून बनाना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन उनका पालन करना केवल सरकार की ही नहीं, बल्कि नागरिकों और संस्थानों की भी जिम्मेदारी है। किसी भी कर्मचारी को बिना सुरक्षा उपकरणों के सेप्टिक टैंक में नहीं उतारा जाना चाहिए।”

उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए प्रशासन आवश्यक कदम उठाएगा।

परिवारों का दर्द

मृतक चांद की मां किरण का कहना है कि उनके बेटे को जबरन टैंक में उतारा गया। रोते हुए उन्होंने कहा कि उनका बेटा पूरे परिवार का सहारा था और उसकी मौत ने परिवार की दुनिया उजाड़ दी।

परिजनों का आरोप है कि अगर सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाते और नियमों का पालन किया जाता, तो तीनों मजदूरों की जान बच सकती थी।

मैनुअल स्कैवेंजिंग पर फिर बहस

देश में मैनुअल स्कैवेंजिंग पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानून मौजूद है। इसके बावजूद समय-समय पर सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान मजदूरों की मौत की घटनाएं सामने आती रहती हैं। सामाजिक संगठनों का कहना है कि कानून होने के बावजूद कई जगह सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती है और मशीनों की जगह अब भी लोगों से जोखिम भरे काम कराए जाते हैं।

जांच जारी

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि हादसा लापरवाही का परिणाम था या सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब मैनुअल स्कैवेंजिंग पर रोक लगाने के लिए कानून मौजूद है, तब भी ऐसी दर्दनाक घटनाएं आखिर क्यों नहीं रुक पा रही हैं।

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