नई दिल्ली: ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई वेब सीरीज ‘राख’ ने देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में से एक रंगा-बिल्ला हत्याकांड को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। करीब 48 साल पहले हुई इस घटना ने न सिर्फ दिल्ली, बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।
जब घर से निकले और फिर कभी लौटकर नहीं आए
26 अगस्त 1978 की शाम नौसेना अधिकारी कैप्टन मदन मोहन चोपड़ा के दो बच्चे—16 वर्षीय गीता और 14 वर्षीय संजय—आकाशवाणी के एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए घर से निकले थे। तेज बारिश के बीच दोनों ने रास्ते में एक कार से लिफ्ट ली, लेकिन यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित हुआ।
रंगा और बिल्ला ने रची थी खौफनाक साजिश
कार में सवार कुख्यात अपराधी कुलजीत सिंह उर्फ रंगा और जसबीर सिंह उर्फ बिल्ला ने दोनों भाई-बहन का अपहरण कर लिया। जांच के अनुसार, पहले उनका मकसद फिरौती वसूलना था, लेकिन बाद में उन्होंने दोनों की बेरहमी से हत्या कर दी। दो दिन बाद रिज क्षेत्र से दोनों के शव बरामद हुए, जिससे पूरे देश में सनसनी फैल गई।
देशभर में उठे थे सुरक्षा पर सवाल
यह घटना उस दौर की सबसे भयावह वारदातों में गिनी गई। इसने बच्चों की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण को लेकर कई बड़े सवाल खड़े किए। अखबारों से लेकर संसद तक इस मामले की गूंज सुनाई दी थी।
‘राख’ ने फिर दिलाई उस दर्दनाक घटना की याद
वेब सीरीज ‘राख’ के आने के बाद एक बार फिर लोग रंगा-बिल्ला केस के बारे में जानने और उस दौर की घटनाओं को समझने की कोशिश कर रहे हैं। यह मामला आज भी भारतीय आपराधिक इतिहास के सबसे चर्चित मामलों में शामिल है।
