Tuesday, May 19, 2026
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होली के जानिए, क्या है फायदे-

संवाददाता, दिल्ली दर्पण टीवी

नई दिल्ली।। पूरे देश में रंगों के त्योहार होली को हर्षोल्लास और आनंद के रूप में मनाया जाता है। अक्सर होली में प्रयोग होने वाले रंगों और इस त्योहार के उत्सव में खान-पान से होने वाले सेहत के नुकसान के बारे में पढ़ा और सुना जाता है। पर होली के त्योहार से सेहत को होने वाले फायदे भी है।

जानिए, क्या है फायदे-

होलिका दहन

होली की शुरुआत होलिका दहन के साथ होती है। यह त्योहार ऐसे मौसम में होता है जब पर्यावरण में कई तरह के बैक्टीरिया तेजी से बढ़ रहे होते हैं। होली के एक दिन पहले होने वाले होलिका दहन में इसके आसपास चलने की परंपरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा करने और जगह-जगह होलिका जलाने से वातावरण के साथ शरीर पर मौजूद बैक्टीरिया मर जाते हैं। यह हमें कई तरह के रोगों से सुरक्षा देती है। 

रंगों का मस्तिष्क पर प्रभाव

रंगों को हमारे मनोविज्ञान से जोड़कर देखा जाता है। होली के जीवंत रंगों में डूबा हुआ हमारा मन और शरीर इससे असंख्य प्रकार के लाभ का अनुभव करता है। विशेषज्ञों के मुताबिक लाल और चमकीले रंग दिल की धड़कन और श्वास को उत्तेजित करते हैं। वहीं पीले और नीले रंग न सिर्फ हमें खुशी का अनुभव कराते हैं साथ ही यह हमारी इंद्रियों को भी शांत करने में सहायक हैं।

होली के खान-पान

होली को इसके ठंडे और शीतल पेय पदार्थों के रूप में जाना जाता है। ठंडाई और कांजी जैसे प्रसिद्ध होली पेय न केवल शरीर और दिमाग को शीतलता देते हैं साथ ही इन्हें एंटी-ऑक्सीडेंट का एक उत्कृष्ट स्रोत भी माना जाता है। स्वादिष्ट ठंडाई में बादाम, दूध तरबूज के बीज, सौंफ के बीज और गुलाब की पंखुड़ियों को प्रयोग में लाया जाता है। ये सभी पदार्थ पोषक तत्वों और फाइबर से समृद्ध होते हैं। 

किसान मनाएंगे इस बार अलग अंदाज में होली

संवाददाता, दिल्ली दर्पण टीवी

नई दिल्ली।। नए कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन को शनिवार को 123 दिन पूरे हो गए। अपनी मांग को लेकर किसान दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं। इस बीच किसानों ने होलिका दहन को लेकर भी तैयारियां पूरी हो गई हैं। आपको बता दें कि रविवार को किसान गाजीपुर, टीकरी और सिंघु बॉर्डर पर तीनों कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराएंगे।

गाजीपुर बॉर्डर पर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रेस प्रभारी शमशेर राणा ने बताया कि बॉर्डर के प्रमुख चौराहे पर होलिका दहन किया जाएगा। इसमें बड़ी संख्या में किसान शामिल होंगे। बुलंदशहर के भटोना गांव के सदस्यों की टोली द्वारा सदियों से चली आ रही पारंपरिक होली के गीत, ढोल-नगाड़ों के साथ होलिका दहन की जाएगी।

इस दौरान तीनों नए कृषि कानूनों की प्रतियों को भी जलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि 29 मार्च को होली मनाने के दौरान रंग-गुलाल का प्रयोग नहीं किया जाएगा, बल्कि मिट्टी से तिलक किए जाएंगे। क्योंकि, इस आंदोलन में करीब 300 किसान जान गंवा चुके हैं। उनके परिवार इस बार होली नहीं खेलेंगे। इन परिस्थितियों में यहां भी किसान उनके दुख-दर्द में साथ रहेंगे।

लॉकडाउन की अफवाहों पर लगा बेक्र, दिल्ली में नहीं लगेगा लॉकडाउन

नई दिल्ली।। कोरोना महामारी दिल्ली में फिर से विकराल रूप धारण करती नजर आ रही है। दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे संक्रमितों के आंकड़े रोज नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। इसे देखते हुए लोगों को फिर से लॉकडाउन का डर सताने लगा है लेकिन इस पर स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन का कहना है कि लॉकडाउन लगाना ही कोरोना का समाधान नही।

देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच लॉकडाउन की अफवाह पर ब्रेक लग गया है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन ने लॉकडाउन नहीं करने के संकेत दिए है। मंत्री का मानना है कि कोरोना रोकने के लिए लॉकडाउन समाधान नहीं है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन ने कहा कि ‘लॉकडाउन की कोई संभावना नहीं है. लॉकडाउन करके देखा गया था, उसके पीछे एक लॉजिक था। उस समय किसी को नहीं पता था कि वायरस कैसे फैलता है। तब कहा गया था कि संक्रमित होने से लेकर ख़त्म होने तक 14 दिन का सायकिल है. तब एक्सपर्ट का कहना था कि अगर 21 दिनों के लिए एक्टिविटी को लॉक कर दें तो वायरस फैलना बन्द हो जाएगा। फिर भी लॉकडाउन बढ़ता गया, लेकिन इसके बावजूद कोरोना ख़त्म नहीं हुआ। मुझे लगता है कि लॉक डाउन समाधान नही है।

दिल्ली में लॉकडाउन लगाने की चर्चा पर सत्येंद्र जैन ने कहा कि फिलहाल सप्ताह भर तक कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर हमें ट्रेंड को देखना पड़ेगा। इसके बाद ही कोई भी निश्चित ट्रेंड आने में 3-4 हफ्ते का समय लग जाता है। कई बार लोगों में ढिलाई  वाली भावना भी आ जाती है, जैसा कि इन दिनों हो रहा है।

क्रिकेट के देवता को भी हुआ कोरोना

अविशा मिश्रा, संवाददाता

नई दिल्ली।। जहां एक तरफ कोरोना का कहर लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है वहीं दूसरी ओर अब खेल जगत भी इससे अछूता नहीं रहा। पूर्व भारतीय क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर हाल ही में कोरोना पाज़िटिव पाए गए हैं। इस बात की जानकारी सचिन ने शनिवार को खुद अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए दी।

उन्होंने बताया कि उनके परिवार में बाकी सभी लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। साथ ही सचिन ने बताया कि मैं लगातार टेस्ट करा रहा था और कोरोना से बचने के लिए सभी कदम भी उठा रहा था। हालांकि, हल्के लक्षण के बाद आज मैं कोरोना पॉजिटिव पाया गया हूं। आपको बता दें कि सचिन ने खुद को होम क्वारंटीन कर लिया है।

गौरतलब है कि सचिन ने 7 से 21 मार्च के बीच रायपुर में हुई रोड सेफ्टी वर्ल्ड सीरीज में हिस्सा लिया था। उन्होंने टूर्नामेंट में इंडिया लीजेंड्स की कप्तानी की थी। उनकी कप्तानी में इंडिया लीजेंड्स चैम्पियन भी बनी।

अशोक विहार -सौदे -समझौते और साजिश के सवालों के साथ अग्रवाल वेलफेयर सोसाइटी चुनाव सर्व सम्मति से सम्पन्न

-दिल्ली दर्पण ब्यूरो

अशोक विहार। आगामी 4 अप्रील को होने वाले अग्रवाल वेलफेयर सोसाइटी के चुनाव दोनों संभावित पैनलों में हुए समझौतों के बाद सर्वसम्मति से सम्पन्न तो हो गए लेकिन सोसाइटी के कई सदस्यों के बीच नाराजगी और सवाल अभी भी जारी है। लाखों रुपये सोसाइटी का खर्च कर कोर्ट के ऑब्जर्वर की मांग की गयी थी लेकिन चुनावों की नौबत ही नहीं आयी और बहुत ही नाटकीय ढंग से हुयी आम सहमति रूपी समझौते ने सर्व सम्मति बना दी। इस सर्व सम्मति में अनिल गुप्ता (घी ) वाले प्रधान चुने गए है बाकी के आठ सदस्य विरोधी पैनल डॉ एच सी गुप्ता और नंदकिशोर गर्ग के लिए गए है। हालांकि डॉ एचसी गुप्ता ने इसे एक साजिश बताया है। नाराजगी यानी है की वरिष्ठ उपप्रधान डॉ राजेश सिंघल के इस्तीफे देने की चर्चाएं है। राजेश सिंघल डॉ एचसी गुप्ता के भतीजे है। इनके इस्तीफे दिए  जाने की चर्चाओं की पुष्टि खुद डॉ एचसी गुप्ता ने अपनी पत्रिका से की है। 

गौरतलब है की सोसाइटी में चुनाव सही समय पर कराये जाने की मांग को लेकर अनिल गुप्ता कोर्ट चले गए थे। कोर्ट की कुछ प्रक्रियाओं के बाद चुनाव कोर्ट की नागरानी में 4 अपील को होने निश्चित हो गए। पूर्व प्रधान पवन गुप्ता के आकस्मिक निधन के बाद सोसायटी के बदल सियासी माहौल में जो दो संभावित पैनल बने उनमें एक अनिल गुप्ता का और दूसरा नंदकिशोर अग्रवाल का पक्का मना जा रहा था। नंदकिशोर अग्रवाल के चुनाव की कमान डॉ एचसी गुप्ता संभाल रहे थे। चुनाव में नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख से ठीक एक दिन पहले नंदकिशोर गर्ग के आवास पर मीटिंग हुयी जिसमें तय हुआ की किसी कारणों से वे चुनाव नहीं लड़ेंगे और उनकी जगह डॉ एचसी गुप्ता पधान पद का चुनाव लड़ेंगे। पूरा पैनल भी तैयार हो गया। अनिल गुप्ता घी वाले भी अपना पैनल लगभग बना चुके थे। इस बीच समाज के कुछ वरिष्ठ लोगों के सुझाव पर सर्वसम्मति की चर्चाएं भी शुरू हो गए। इसमें अनिल गुप्ता घी वाले ग्रुप से प्रस्ताव आया। इस प्रस्ताव में अनिल गुप्ता घी वाले को प्रधान और बाकी के सभी पदों पर डॉ एचसी गुप्ता पैनल को देने पर सहमति हुयी। यानी इस प्रस्ताव में डॉ एचसी गुप्ता चुनाव लड़ने से पहले ही प्रधान पद की दावेदारी से बहार हो रहे थे। माहौल कुछ ऐसा बना की डॉ एचसी गुप्ता पैनल की तमाम प्रत्याशी अनिल गुप्ता के पक्ष में हो गए। सामाजिक सौहार्द और मान अपमान हवाला देकर हवा कुछ ऐसे बनाई की न चाहते हुए भी  डॉ एचसी गुप्ता को अपना नाम वापस लेना पड़ा। अनिल गुप्ता ग्रुप ने डॉ एचसी गुप्ता को खुश करने के लिए उनके भतीजे राजेश सिंघल को वरिष्ठ उपप्रधान बना दिया। डॉ एचसी गुप्ता इससे खुश नहीं है और अब फिर से पत्र वार कर इसे बड़ी साजिश बता रहे है।

 सोसाइटी में हुए इस आम सहमति ने सभी को चौंका  दिया है। सोसाइटी की सियासत में इसे अनिल गुप्ता घी वाले का बड़ा दाव मना जा रहा है। अनिल गुप्ता ने विरोधी पैनल के सभी संभावित प्रत्याशियों को निर्विरोध चुने जाने का वादा कर डॉ एचसी गुप्ता को अकेला कर दिया। उनके पैनल के लोग भी उन पर दबाव बनाने लगे और उन्हें उनकी बात माननी पड़ी। अनिल गुप्ता ने डॉ एचसी गुप्ता के भतीजे को बेशक वरिष्ठ उपप्रधान बनाया लेकिन यह पद केवल सजावटी माना जाता है। उनके पास समर्थन और सहयोग देने के अलावा कोई काम नहीं है।  डॉ गुप्ता के नाराजगी की भी यही वजह है। डॉ गुप्ता का कहना है कि यह चुनाव नहीं चालाकी है। वे चुनाव आयुक्त की भूमिका पर भी सवाल उठा रहे है। उनका कहना है की नामांकन वापसी का समय सांय 7 बजे था लेकिन विड्रॉवल रात साढ़े दस बजे क्यों लिए गए। हालांकि डॉ एचसी गुप्ता का भी विड्रॉवल साढ़े दस बजे ही हुआ। अनिल गुप्ता का कहना है कि समाज  में चुनाव टालने और आपसी भाईचारा बनाने के लिए हमारे ग्रुप ने त्याग किया। अनिल गुप्ता ग्रुप के सदस्य दीपक जिंदल का कहना है की डॉ एचसी गुप्ता खुद जोड़ तोड़ की राजनीति कर रहे थे। लेकिन हमने आम सहमति बनाने के लिए त्यागी किया तो उन्हें तकलीफ हो रहे है और वे समाज में पत्र निकाल कर सवाल उठे रहे है। बहरहाल सोसाइटी के आम चुनावों में बेशक आम सहमति बन गयी हो लेकिन संग्राम अभी थमा नहीं है। हलाकि लगता नहीं कि डॉ एचसी गुप्ता की नाराजगी की कोई परवाह और असर नव नियुक्त कार्यकारणी पर होने वाला है।