Tuesday, May 19, 2026
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दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों नें क्यों किया वैक्सीन लगवानें से इंकार

अविशा मिश्रा, संवाददाता

नई दिल्ली।। जहां एक तरफ दिल्ली में कोरोना के आंकड़े लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर किसानों ने वैक्सीन लगवाने जाने से इंकार कर दिया है।

कोरोना के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए किसान नेताओं का कहना है कि अगर सरकार चाहे तो आंदोलन में शामिल बुजुर्गों का वैक्सीनेशन करा सकती है। इसके लिए सरकार को धरना स्थल पर आकर वैक्सीनेशन प्रोग्राम शुरू करना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि बुजुर्ग किसान किसी सेंटर में नहीं जाएंगे।

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिकका कहना है कि ये एक नया रोग जरूर है, लेकिन इतना भयावह नहीं जितना सरकार लंबे समय से प्रचार कर रही है। वहीं किसानों का ये भी कहना है कि वे अपनी और भावी पीढ़ी के लिए आंदोलन कर रहें हैं इसीलिए पीछे हटने का तो सवाल ही नहीं उठता।

नेशनल फिल्म अवॉर्ड में छिछोरे को मिला बेस्ट हिंदी फिल्म का खिताब

जूही तोमर, संवाददाता

नई दिल्ली।। 67वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड की घोषणा कर दी गई है जिसमें सुशांत सिंह राजपूत और श्रद्धा कपूर की बेहतरीन फिल्म छिछोरे को बेस्ट हिंदी फिल्म के लिए चुना गया है. ये फिल्म 2019 में रिलीज़ हुई थी जिसे खूब पसंद किया गया था। बता दे की ये फिल्म होस्टल लाइफ पर बेस्ड थी लेकिन इस फिल्म ने आज के युवाओं को काफी स्ट्रॉन्ग मैसेज दिया था. यही कारण था कि फिल्म सीधे यूथ को छू गई और खूब पसंद की गई।

श्रद्धा और सुशांत के अलावा फिल्म में वरुण शर्मा, प्रतीक बब्बर के अलावा और भी कई एक्टर थे जिन्होंने बेहतरीन अभिनय किया था। वहीं भले ही इस साल छिछोरे फिल्म को बेस्ट हिंदी फिल्म का नेशनल अवॉर्ड मिला हो लेकिन ये दुखद है कि फिल्म के लीड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत हमारे बिच नहीं है। उनके सुसाइड के कई कारण मीडिया में सामने आए जिसमें एक कारण था उनकी फिल्मों को प्रोत्साहन न मिलना। क्योकि बीते साल छिछोरे फिल्म को कोई भी अवॉर्ड नहीं दिया गया था। जब कि गली ब्वॉय के मुताबिक सुशांत की फिल्म का काफ़ी अच्छा प्रर्दशन रहा था।

वहीं जहां बेस्ट फिल्म छिछोरे चुनी गई तो वहीं बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मनोज वाजपेयी को भोंसले फिल्म के लिए दिया गया। इस फिल्म के लिए मनोज वाजपेयी को काफी सराहा गया था. वहीं एक बार फिर बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड कंगना रनौत की झोली में गया है, उन्हें मणिकर्णिका और पंगा के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री चुना गया है।

दिल्ली में फिर दिखी कोरोना की लहर

अविशा मिश्रा, संवाददाता

नई दिल्ली।। देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना की ताजा लहर का असर देखने को मिल रहा है यही कारण है कि कोरोना के आंकड़े दिन प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहे हैं। कोरोना के बढ़ते हुए आंकड़े डराने वाले हैं। लगातार दूसरे दिन दिल्‍ली में पॉजिटिविटी रेट 1% से ज्‍यादा दर्ज किया गया। नए मामलों में गिरावट देखने के बाद, पिछले 15 दिनों के अंदर दिल्‍ली में कोविड ने फिर जोर पकड़ा है।

15 मार्च से 21 मार्च के बीच, कुल 4,288 मामले सामने आए और 15 मरीजों की मौत हुई। दिल्‍ली में लोगों की लापरवाही देखकर लगता ही नहीं कि उन्‍हें कोरोना का कोई डर है। यही कारण है कि बाजारों में खूब भीड़ उमड़ रही है और लोग मास्‍क और सोशल डिस्‍टेंसिंग जैसी बेसिक बातों को भी नजरअंदाज कर रहे हैं।

दिल्‍ली में मास्‍क न पहनने पर चालान होता है मगर जब लोग ऐसी लापरवाही करेंगे तो कैसे चलेगा। कोरोना को रोकने के लिए मास्‍क और सोशल डिस्‍टेंसिंग बहुत बेसिक सावधानियां हैं मगर लोग हैं कि उनपर असर ही नहीं दिख रहा।

क्या आपको भी आइसक्रीम पसंद है तो हो जाएं सावधान…..

तेजस्विनी पटेल, संवाददाता

नई दिल्ली।। बच्चे हो या बड़े आइसक्रीम सभी को पसंद होती है। खासकर गर्मियों के मौसम में, आइसक्रीम के बहुत सारे फ्लेवर आपके गले को राहत देते हैं और आपके टेस्ट बड्स को शांत करते हैं। यही कारण है कि गर्मियां आते ही आइसक्रीम का लालच बढ़ जाता है, और ऐसे में लोग अक्सर भूल जाते हैं कि बहुत ज्यादा आइसक्रीम खाने से सेहत को नुकसान हो सकता है।

जानते है, अधिक आइसक्रीम खाने के नुकसान क्या हैं-

  • हर डेयरी उत्पाद की तरह, आइसक्रीम में भी वसा होती है। आधा कप आइसक्रीम में कम से कम 9 ग्राम वसा होती है। वैसे, शरीर को कुछ मात्रा में वसा की आवश्यकता होती है। लेकिन, यह आवश्यकता से अधिक हानिकारक है।
  • आइसक्रीम में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा भी अधिक होती है। एक कप आइसक्रीम में 25mg कोलेस्ट्रॉल होता है। इसलिए ध्यान रखें कि आइसक्रीम की मात्रा इससे अधिक नहीं होनी चाहिए।
  • आइसक्रीम में वसा के साथ-साथ चीनी भी बहुत ज्यादा होती है।अधिक मात्रा में चीनी के सेवन से रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है, जिससे मधुमेह का खतरा बढ़ सकता है।
  • बहुत अधिक आइसक्रीम खाना हानिकारक है। लेकिन, अगर आप सही मात्रा में आइसक्रीम लेते हैं, तो यह आपके लिए बहुत फायदेमंद भी हो सकता है। जैसे – से शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की थकान दूर होती है, शरीर में ऊर्जा देने का भी काम करती है।

दिल्ली में खुला एक अनोखा स्कूल।

जूही तोमर, संवाददाता

नई दिल्ली।। राइट टू एजुकेशन का अधिकार हर व्यक्ति को है और हर कोई चाहता है अपने बच्चों को पढ़ा लिखा कर एक शिक्षित इंसान बनाए, अपको बता दे कि दिल्ली के मयूर विहार के पास बने फ्लाईओवर के नीचे एक ऐसा ही स्कूल चल रहा है, जहां आसपास झुग्गियों में रहने वाले बच्चों को शिक्षा का अधिकार देने के लिए कुछ दोस्त मिलकर काम कर रहे हैं।

इस स्कूल में न तो कोई ऑनलाइन पढ़ाई कराई जाती है और न ही यह कोई हाईटेक स्कूल है. फ्लाईओवर के नीचे फर्श पर बैठे बच्चों का जज्बा ठीक उसी तरीके से है जैसे बड़े- बड़े स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों का होता है। लॉकडाउन के कारण लंबे समय से स्कूल बंद पड़े हुए हैं और झुग्गियों में रहने वाले बच्चों को शिक्षित करने के लिए कुछ दोस्तों ने मिलकर फ्लाईओवर के नीचे एक क्लास लगाई और बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। नोएडा के स्कूल में पढ़ाने वाले टीचर पीएस रघुवंशी ने अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर इस स्कूल की शुरुआत की है।

पीएस रघुवंशी ने बताया कि जब उन्होंने देखा कि झुग्गियों में रहने वाले लोगों के बच्चे पढ़ना तो चाहते हैं लेकिन कोई जरिया नहीं है। तब उन्होंने इस स्कूल की शुरुआत की। शुरुआत में चार पांच बच्चे थे और अब धीरे-धीरे बढ़कर स्कूल में पढ़ने आने वाले बच्चों की संख्या 45 से 50 हो गई है। उन्होंने बताया कि शिक्षा का अधिकार हर किसी को है और इसीलिए हम मिलकर बच्चों को पढ़ाने का काम करते हैं। इसके साथ ही बच्चों को फिट रहने का मूल मंत्र भी सिखाया जाता है. योगा एक्सरसाइज एक्टिविटी भी इन बच्चों को कराई जाती है, ताकि यह बच्चे हर क्षेत्र में होने वाली चीजों को समझ सके।

स्कूल में पढ़ने आने वाले बच्चों ने कहा कि उन्हें यहां आकर बहुत मजा आता है और उनके सर उन्हें बहुत सारी चीजें सिखाते हैं. फ्लाईओवर के नीचे बने छोटे से क्लास रूम में पढ़ाने वाले टीचर ने बताया कि वह खुद भी पढ़ रहे हैं और उन्होंने देखा कि जब उनके सर बच्चों को पढ़ाने का यह काम कर रहे हैं तो धीरे-धीरे उनके चार पांच दोस्त उनके सर के साथ जोड़कर बच्चों को पढ़ाने लगे. अभी बच्चों को बेसिक शिक्षा दी जा रही है और कई सारे बच्चे एमसीडी के स्कूलों में भी पढ़ते हैं. लेकिन फिलहाल स्कूल बंद है इसीलिए वह उनके क्लास रूम में आते है