Tuesday, May 19, 2026
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Delhi में क्या फिर लगने वाला है ‘जनता कफ्यू’ ?

जूही तोमर, संवाददाता

नई दिल्ली।। ‘जान भी और जहां भी’ की भावना के साथ आज से ठीक एक साल पहले देशभर में 22 मार्च के दिन जनता कर्फ्यू लगाया गया था। प्रधानमंत्री के आह्वान पर कोरोना से लोहा लेने की इस पहली मुहिम को लोगों ने भी सफल बनाया था। पूरे दिन लोग अपने घरों में रहे और शाम को पांच बजे ताली और थाली बजाकर कोरोना से जंग लड़ने वाले फ्रंट लाइन वर्करों को सम्मान दिया गया था। यह पहला ऐसा कर्फ्यू था जिसमें कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी और आसाम से लेकर गुजरात तक एक भी आदमी सड़क पर नहीं दिखाई दे रहा था।लेकिन अब एक साल बाद वही हालात फिर से बनने की आशंका हर दिन बढ़ती जा रही है

आज के ही दिन गलियों में भी सन्नाटा पसरा हुआ था क्योंकि ऐसा अनुभव लोगों के लिए भी उस वक्त नया था जब सड़कों से लेकर गली कूचे तक हो गए थे चुप और हर ओर थी खामोशी ही खामोशी। जनता के लिए, जनता के द्वारा लागू इस कर्फ्यू का मकसद कोरोना वायरस को समुदायों के बीच फैलने से रोकना था। तब लोगों ने अपने घरों में रहकर संक्रमण के प्रसार को रोकने में अहम भूमिका अदा की थी। दिसंबर से लेकर फरवरी के बीच संक्रमण खत्म होता नजर आ रहा था, लेकिन अब एक साल बाद वही हालात फिर से बनने की आशंका हर दिन बढ़ती जा रही है। रोजाना कोरोना के रिकॉर्ड मामले चिंता बढ़ा रहे हैं। एक साल पहले कोरोना बचाव के लिए जनता कर्फ्यू लगाया गया। इसमें जनता ने पूरा सहयोग दिया। कोविड-19 के बढ़ते मामलों के कारण पूरे देश में लॉकडाउन लगा। इस दौरान लोगों ने एक ऐसा दौर जिया जिसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की। एक दूसरे को देखना मुश्किल हो गया। एक दूसरे को छूने तक में लोग भयभीत थे। हर शख्स कोरोना पीड़ित संदिग्ध दिखाई दे रहा था।

लोगों की चाह थी कि जिंदगी बच जाए तो बेहतर कल के साथ हर नियम और सबक याद रखेंगे। हालांकि एक साल बाद ही उस बुरे दौर की यादें धुंधली पड़ गईं हैं। पर अब वही तरीख है और वही समय चल रहा है, फिर लोगों के अंदर डर पैदा हो रहा है क्योंकि कही ना कही लॉकडाउन ने सभी को प्रभावित किया है।

दिल्ली में बीते साल 02 मार्च को संक्रमण का पहला मामला आया था। पहले 1 हजार मामले आने में 41 दिन का समय लगा था। इसका कारण था कि लोग कोविड से बचाव के नियमों का सख्ती से पालन कर रहे थे, लेकिन अब तस्वीर बदल रही हैं। प्रतिदिन 600 से ज्यादा केस आ रहे हैं। तब के मुकाबले कई गुना रफ्तार से संक्रमण बढ़ रहा है। इसका प्रमुख कारण लोगों की लापरवाही है।बाजारों व सार्वजनिक स्थलों के अलावा परिवहन के साधनों में भी कोविड से बचाव के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। लोग बिना मास्क के घुम रहे हैं। कहीं भी शारीरिक दूरी का पालन भी नहीं किया जा रहा है। बुखार या खांसी, जुकाम होने पर खुद ही दवाई ले रहे हैं। लोगों की लापरवाही को देखते हुए प्रशासन ने अब सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। हालांकि, यह उस तरह लागू नहीं हो पा रही, जैसी पिछले साल थी। हालांकि दिल्ली के लोगों को एक दिन का जनता कर्फ्यू याद है। दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए सख्ती की जा रही है। बाजारों व सार्वजनिक स्थानों पर कोविड प्रोटोकॉल का पालन न करने वालों के चालान काटे जा रहे हैं। साथ ही अलग-अलग स्थानों पर कैंप लगातर लोगों की जांच की जा रही है।

प्रतिदिन 75 हजार से ज्यादा टेस्ट हो रहे है। इनमे 60 फीसदी से ज्यादा आरटी-पीसीआर प्रणाली से किए जा रहे हैं। संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों की पहचान भी तेज कर दी गई है। जो व्यक्ति भी संक्रमित मिल रहा है। उसे संपर्क में आए कम से कम 25 लोगों की पहचान कर उनकी कोरोना जांच की जा रही है। इसमें संक्रमित मिलने वालों को आईसोलेट किया जा रहा ।

फरीदाबाद में शुरु हुई एक अनोखी पहल।

मनोज सूर्यवंशी, संवाददाता

दिल्ली एनसीआर।। फरीदाबाद में स्टेट क्राइम में ASI के पद पर तैनात अमर सिंह ने फरीदाबाद में एक अनोखी पहल शुरू की है। इस मौके पर ASI अमर सिंह ने बताया कि उनका मकसद बच्चों को शिक्षा देना है ,उनके बेसिक स्तर को सुधारना उनके रहन सहन में बदलाव लाना है। अमर सिंह ने बताया कि उन्होंने इसकी शुरुआत सन् 2019 में की थी लेकिन लॉकडाउन लगने के बाद से बच्चों को पढ़ाने का कार्य बंद हो गया था। लेकिन अब जैसे-जैसे कोरोना के मामलों में कमी आ रही है लोगों का जन जीवन भी पटरी पर आने लगा है और स्कूल में खुले लगे हैं इसी को देखते हुए उन्होंने भी अब इन बच्चों को दुबारा पढ़ाने का कार्य शुरू किया है। इस मौके पर हरियाणा पुलिस के पूर्व डीजीपी बीएन राय की पत्नी नीना राय जो कि खुद पेशे से टीचर रही है उन्होंने आकर इसकी आज से शुरुआत की है।

तस्वीरें फरीदाबाद के सेक्टर 25 इलाके की है जहां पर आज फिर दोबारा से स्टेट क्राइम में तैनात एएसआई और उनकी टीम के द्वारा स्लम बस्ती में रहने वाले बच्चों को  पढ़ाने का काम शुरू किया जा रहा है। जहां पर आज इसकी शुरुआत करने पहुंची मुख्य अतिथि के तौर पर हरियाणा पुलिस के पूर्व डीजीपी बीएन राय की पत्नी ने रिबन काटकर कर शुरुआत की इस मौके पर ASI अमर सिंह ने बताया कि उन्होंने इसकी शुरुआत अपने साथी पवन के साथ मिलकर सन् 2019 में की थी ताकि बच्चों को अच्छी शिक्षा दी जा सके और उसका भविष्य उज्जवल हो। 

अमर सिंह ने बताया कि हालांकि आज यहां पर थोड़ी साफ सफाई ठीक नहीं है लेकिन आज उनका पहला दिन है जैसे-जैसे यहां क्लास लगेगी वैसे-वैसे रोज यहां पर साफ सफाई करा दी जाएगी। वही अमर सिंह ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि जो बच्चे भीख मांगते हैं उन्हें लोगों को भीख नहीं देनी चाहिए बल्कि उनकी सूचना स्टेट क्राइम और चाईल्ड हेल्पलाइन की टीम को देनी चाहिए ताकि ऐसे बच्चों को पकड़ कर पढ़ाई के माध्यम से मुख्य धारा से जोड़ा जा सके।

आखिर क्यों होली के पहले के आठ दिन होते है अशुभ…

अविशा मिश्रा, संवाददाता

नई दिल्ली।।धार्मिक ग्रंथों और लोक मान्यताओं के अनुसार होली के पहले के 8 दिनों को होलाष्टक के नाम से जाना जाता है, साथ ही इन दिनों कोई भी बड़ा कार्य करना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि इन आठ दिनों में ग्रहों की चाल और मौसम में काफी बदलाव देखने मिलता है जो कि मनुष्यों पर मानसिक अथवा शारीरिक तौर पर गलत असर डाल सकता है।

होलाष्टक पर किसी भी मांगलिक कार्यक्रम और 16 संस्कार की मनाही होती है। साथ ही अगर इन दिनों में अंतिम संस्कार करना पड़े तो उसके पहले विशेष पूजा-पाठ और शांति कर्म भी किए जाते हैं। होलाष्टक के दौरान 16 संस्कारों पर रोक होने के कारण ही इस अवधि को शुभ नहीं माना जाता है। इस कारण ही इन दिनों में शुभ और मांगलिक काम करने की मनाही है।

साथ ही स्वास्थ्य को लेकर जानकारों का कहना है कि होलाष्टक के दौरान वातावरण में हानिकारक बैक्‍टीरिया और वायरस ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं। सर्दी से गर्मी की ओर जाते हुए इस मौसम में शरीर पर सूर्य की पराबैंगनी किरणें विप‍रीत असर डालती हैं। इन दिनों साइट्रिक एसिड वाले फलों का इस्तेमाल ज्यादा और गर्म पदार्थों का सेवन कम करने की सलाह दी जाती है।

दिल्ली में टिकाकरण लगवाने के लिए नहीं होगी कोई पांबदी

संवाददाता, दिल्ली दर्पण टीवी

नई दिल्ली।। आज से लोग सुबह 9 से रात 9 बजे तक कोराना का टीका लगवा सकेंगे। इसके लिए सभी अस्पतालों में तैयारी पूरी हो गई है। बता दे कि कोरोना को बढ़ते देख दिल्ली सरकार ने टीकाकरण को बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, सभी सरकारी अस्पतालों में टीकाकरण केंद्र बढ़ाए जा रहे हैं। केंद्रों की संख्या को बढ़ाकर एक हजार तक किया जाएगा। 

सभी अस्पताल को कम से कम छह केंद्रों पर टीकाकरण करने को कहा गया है। सोमवार से रात 9 बजे तक वैक्सीन लगाई जाएगी। दोपहर 3 बजे तक ऑनलाइन पंजीकरण वालों को टीका लगेगा। इसके बाद वैक्सीनेशन सेंटर पर आकर पंजीकरण कराने वालों का टीकाकरण होगा। 

कोविड नियमों पर सरकार सख्त

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा है कि दिल्ली में कोविड से बचाव के नियमों का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ सख्ती बरती जा रही है। पुलिस व प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि लापरवाही करने वालों के चालान करें और कोविड प्रोटोकॉल का पालन कराना भी सुनिश्चित कराया जाए। जैन ने कहा कि संक्रमितों की पहचान के लिए रिकॉर्ड स्तर पर जांच की जा रही है। कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग को भी काफी बढ़ाया गया है। 

दिल्ली मे एक और निर्भया का परिवार कर रहा है इंसाफ का इंतजार

अविशा मिश्रा, संवाददाता

नई दिल्ली।। 20 मार्च यानी वो तारीख जब पिछले साल निर्भया के दोषियों को फांसी हुई थी और सात साल बाद ही सही पर निर्भया को इंसाफ मिला था।लेकिन अभी भी ऐसी कई निर्भया के माता-पिता हैं जो अपनी बेटियों को इंसाफ दिलाने के लिए सिसकियां भर रहे हैं। दिल्ली के द्वारका इलाके में भी एक दंपती रहते हैं जिनकी 19 साल की बेटी के साथ निर्भया जैसी ही दरिंदगी हुई और ये मामला कानून की चौखट पर कहीं अटका पड़ा है।

छावला गैंगरेप नाम से खबरों में दर्ज यह मामला 9 फरवरी 2012 का है। इसमें भी अपराध की भयावहता लगभग वैसी ही है, जो निर्भया केस के रूप में हर शख्स की आंख में दर्द और आक्रोश भर गई। लेकिन, अधूरे इंसाफ से आज भी उसके मां-बाप कष्ट में हैं। आपको बता दें कि आर्थिक तंगी ने दर्द को और बढ़ा दिया है। क्योंकि इस परेशानी को जो दूर करती, वो तो खुद इनसे दूर जा चुकी है। उनकी 19 साल की बेटी को भी वही दरिंदगी हमेशा के लिए खामोश कर गई, जिसने निर्भया केस के रूप में पूरे देश को दहला कर रख दिया था। घटना भी उसी साल की और निर्भया गैंगरेप केस से महज 10 महीने पहले दिल्ली की है।

पिछले नौ साल से यह दंपती अपनी बेटी के दरिंदों को फांसी पर चढ़ता देखने के लिए तड़प रहा है। दोषियों के लिए मौत की सजा हाई कोर्ट से करीब छह साल पहले पक्की भी हो चुकी है। अब न्याय अटका है तो सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर, जहां इस केस की सुनवाई लंबित है। अब देखना ये है कि आखिर कब इस ‘निर्भया’ को इंसाफ मिलता है।