दिल्ली।। राजधानी दिल्ली में 28 फरवरी को हुए उपचुनाव में चार सीटों के साथ आम आदमी पार्टी ने बाज़ी मार ली है तो वहीं कांग्रेस ने भी एक सीट के साथ अपना खाता खोला है। लेकिन इसी बीच 2022 निगम चुनाव का सेमीफाइनल माने जाने वाले इन उपचुनाव में भाजपा को करारी हार मिली है।
बता दें कि भाजपा एक भी सीट जीतनें में नाकाम रही है। जिसपर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा है कि वह अभी सिर्फ उपचुनाव हारे है हिम्मत अभी भी वैसे ही बरकरार है।
उनका कहना है कि उपचुनाव में पहले से ही पांच सीटो पर आप की सरकार थी एक सीट का नुकसान भाजपा को जरूर हुआ है और इसपर स्टडी कर इसका कारण जानने की कोशिश भी की जाएगी। लेकिन एक उपचुनाव हार जाने से 2022 के चुनाव की जीत और हर का फैसला नहीं किया जा सकता। इस बार नतीजा भले ही भजपा के पक्ष में ना रहा हो लेकिन अगले साल में होने वाले चुनाव में वह पूर्ण बहूमत से सत्ता में आकर वह अपनी जीत का परचम लहराएंगे।
दिल्ली।। जैसा कि हम जानते ही है कि भारत में कोरोना वैक्सीन के दूसरे चरण की शुरुआत हो गई है। जिसमें 60 साल से अधिक उम्र के लोग और 45 साल से अधिक उम्र के लोग जिन्हें कोई गंभीर बीमारी है वह वैक्सीन लगवा सकते है। जिसमें देश के प्रधानमंत्री मोदी से लेकर डॉ हर्षवर्धन और कई बड़े नेता वैक्सीन लगवा चुके है। इसी बीच 4 मार्च को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी LNJP अस्पताल में कोरोना वैक्सीन लगवाई है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपने माता पिता के साथ वैक्सीन की पहली डोज़ लेने के दिल्ली के लोकनायक जय प्रकाश अस्पताल पहुँचे। जहां उन्हें और उनके माता पिता को भारत में बनी कोविशील्ड वैक्सीन लगाई गई है। वैसे तो मुख्यमंत्री केजरीवाल 52 साल है लोकिन काफी समय से वह डायबिटीज़ से बीमार चल रहे थे इसलिए उन्हें भी वैक्सीन दी गई है।
वैक्सीन की पहली डोज़ लेने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बताया कि पहली डोज़ लेने के बाद उन्हें किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं हो रही तो किसी को भी अफवाहों पर ध्यान देने की कोई जरूरत नहीं है। जो वैक्सीन लेने के योग्य है वह वैक्सीन जरुर लगवाए यह कोरोना की लड़ाई में काफी असरदार साबित होगी। आपको बता दें कि वैक्सीनेशन अभियान की गति अपने चरम पर है वैक्सीनेशन के दूसरे चरण में अब तक करीब 5 लाख लोगों को कोरोना की वैकसीन भी लग चुकी है।
बाहरी दिल्ली -घरों, दुकानों से निकलने वाले कूड़े को उत्तरी दिल्ली नगर निगम के ऑटो टिप्पर में ही डाले और कूड़े को खुले में न फैंके। उत्तरी दिल्ली नगर निगम के पूर्व नेता सदन व नरेला जोन के चेयरमैन जयेंद्र डबास ने बुधवार को अपने वार्ड के अंतर्गत आने वाले रानीखेड़ा गांव के नाले व गलियों की सफाई का निरीक्षण करने के दौरान उक्त बातें कहीं।चेयरमैन डबास ने क्षेत्र के सभी नागरिकों से निवेदन भी किया कि क्षेत्र को स्वच्छ रखने से ही सभी की सेहत दुरूस्त रह सकती है। चेयरमैन जयेंद्र डबास ने अपने वार्ड में सुबह 7:00 बजे स्वयं कर्मचारियों के साथ जाकर सफाई अभियान की शुरुआत की।
जयेंद्र डबास ने बताया कि इस नाले से कई क्विंटल प्लास्टिक की बोतल और पन्नी निकाली गई है क्योंकि लोग पन्नी और प्लास्टिक बोतलों को सीधा नाले के अंदर डाल देते हैं जिसके कारण नाले जाम हो जाते हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से निवेदन किया है कि वह कूड़ा ऑटो टिप्पर में ही डालें, ना स्वयं कहीं खुले में या नाली में ना डालें और ना ही किसी को कूड़ा डालने दें क्योंकि हम सब मिलकर ही दिल्ली को स्वच्छ बना सकते हैं। उन्होंने निगम कर्मचारियों को सख्त आदेश दिए कि कहीं भी गंदगी नहीं मिलनी चाहिए। नियमित रूप से सफाई होनी चाहिए। इस दौरान उनके साथ एसआई जितेंद्र राठी, देवेंद्र, मनोज, विक्रांत, हवा सिंह, रणवीर सिंह, सुरेश खर्ब, रणधीर डबास, संजय आदि लोग उपस्थित थे।
दिल्ली एनसीआर।। फरीदाबाद के एनआईटी क्षेत्र से सास बहु के रिश्ते को शर्मशार कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां एक इकलोती बहु ने प्राॅपर्टी के लिये अपनी सास को घर में बंद किया हुआ था और उसे लगातार प्रताड़ित कर रही थी, जिसकी गुप्त सूचना पर महिला आयोग की सदस्य रैनू भटिया पुलिस के साथ उस घर में गई जहां उन्होंने बुजुर्ग महिला को बेहद ही गंभीर हालत में बेसुध पाया, पीडित बुजुर्ग महिला को आनन फानन में सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया गया है जहां कई डाक्टरों की टीमें उनका उपचार कर रही हैं।
सास बहु में नोंक-झोंक की खबरें जरूर सुनने को मिलती है मगर ये नोंक-झोंक भरी तकरार ऐसा रूप भी ले सकती है ऐसा पहली बार देखा गया है, मामला फरीदाबाद के एनआईटी क्षेत्र का हैं जहां एक लालची बहु ने प्राॅपर्टी के लालच में अपनी सास को इस कदर प्रताड़ित किया है कि बुजुर्ग महिला बेसुध ही हो गई है। सिविल अस्पताल में नजर आ रही है ये वो ही अभागी बुजुर्ग महिला है जिसका इकलोता बेटा करीब एक साल पहले इसे छोडकर इस दुनिया से चला गया, जिसके गम के बादल अभी छटे नहीं थे कि बहु गमों का पहाड लेकर टूट पडी और सिर्फ प्राॅपर्टी के लिये इस बुजुर्ग महिला को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।
महिला आयोग की सदस्य रैनू भटिया के मुताबिक उन्हें गुप्त जानकारी मिली कि एक बुजुर्ग महिला को उनकी बहु हद पार करके प्रताड़ित कर रही है जिसकी वजह से उनकी हालत गंभीर है। जिस सूचना पर पहले रैनू भाटिया ने 2 दिनों तक रैकी की और पूरे मामले की असलीयत जानी और फिर पुलिस कर्मियों के साथ घर में घुस गईं, जहां बुजुर्ग महिला की हालत देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई, बेसुध पडी हुई बुजुर्ग महिला की देखभाल के लिये घर में एक छोटे पोते के सिवा कोई नहीं था, आनन फानन में पीडित महिला को सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां महिला से बात करने की कोशिश भी गई मगर पिछले कई दिनों से प्रताड़ित हो रही महिला कुछ भी बोलने की हालत में नहीं दिखी।
महिला आयोग की सदस्य रैनू भटिया ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि पीडित महिला की बहु प्राॅपर्टी के लिये अपनी सास को धीरे – धीरे मौत के मुंह में धकेल रही थी, इतना ही नहीं इस पीडित महिला की 3 बेटियां भी है मगर बहु ने उनका घर पर आना जाना बंद किया हुआ है अगर कोई बेटी घर आती है तो उनके पति के उपर गंभीर घिनौने आरोप लगा दिये जाते हैं। इतना ही नहीं बहु ने अपनी ही 9 साल की बेटी के साथ नंनदोई द्वारा छेडखानी करने का आरोप भी लगाया हुआ है। इन सभी मामलों की अब गहनता से जांच और करवाई की जायेगी और साथ ही बुजुर्ग महिला के बयानों के बाद आरोपी बहु के खिलाफ भी कार्यवाही की जायेगी।
दिल्ली एनसीआर। हरियाणा सरकार प्राइवेट नौकरी में हरियाणा के निवासियों को 75% तक आरक्षण देने जा रही है। कानून पर प्रतिक्रिया लेने पर पता चला कि कानून बनाए जाने के बाद उद्योगपतियों और छात्रों की मिली मिलीजुली प्रतिक्रिया।
आईएमटी इंडस्ट्रीज़ असोसिएशन के अध्यक्ष वीरभान शर्मा का कहना है कि वह हमेशा से ही स्किल को प्राथमिकता देते आए हैं। हम कभी किसी से यह नहीं पूछते कि कौन सा केंडिडेट कहां से है और कहां का रहने वाला है।
तो वहीं डीएलएफ इंडस्ट्रीज़ असोसिएशन के अध्यक्ष जेपी मल्होत्रा का कहना था कि इस कानून पर वह अभी कोई प्रतिक्रिया नही दे सकते अभी इस कानून की सिर्फ शुरुआत है इस कानून का फायदा या नुकसान आने वाले वक्त में पता चलेगा।
तो वहीं कुछ लोगं का मानना यह भी था कि इस कानून से न्हें जॉब मिलने में दिक्कत होने वाली है। अगर स्किल्स के हिसाब से लोगों को जॉब मिले तो यह सभी के लिए अचछा होगा।