Saturday, May 2, 2026
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दिल्ली में पूरे साल रेप का शिकार होती रहीं महिलाएं – सफर 2017

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आंकड़े : घर हो या सड़क दिल्ली में महिलाएं इस साल भी लगातार हैवानियत का शिकार होती रहीं। भले ही इस साल जघन्य वारदातों में कमी आई हो, लेकिन महिलाओं के साथ दुष्कर्म व छेडख़ानी के मामलों में कोई कमी नहीं है। 2016 की तुलना में इस साल रेप के मामले में सिर्फ 0.84 प्रतिशत की कमी आई है, जो दिल्ली पुलिस के दावों की पोल खोल कर रख दी है।वर्ष 2017 में रेप के 1894 मामले दर्ज हुए,जबकि वर्ष 2016 में 1910 मामले दर्ज हुए थे। दिल्ली पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2016 की तुलना में दिल्ली में जघन्य वारदातों में कमी आई है। डकैती, लूटपाट, फिरौती के लिए अपहरण, दंगे जैसे वारदात में 20 फीसदी से लेकर 40 फीसदी तक कमी दर्ज की गई। जबकि हत्या, हत्या की कोशिश जैसे मामलो में मामूली कमी   दर्ज  की गई है। हत्या के मामलों में सिर्फ 5.29 फीसदी और हत्या की कोशिश के मामले में महज 2.25 प्रतिशत की कमी आई है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक वर्ष 2016 की तुलना में वर्ष 2017 में करीब 24.04 प्रतिशत जघन्य मामले कम दर्ज हुए हैं। दिल्ली पुलिस के मुताबिक ही आम अपराध में बढ़ोतरी दर्ज हुई है। खासकर वाहन चोरी की घटनाएं सबसे अधिक हुई है। पिछले वर्ष की तुलना में वर्ष 2017 में कुल आम अपराध के मामले में 12.76 प्रतिशत अधिक दर्ज हुए। दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस ने यह भी दावा किया है कि  वर्ष 2016 की तुलना में 2017 में अधिक मामले सुलझाएं गए हैं।इस साल पुलिस ने डकैती और फिरौती के लिए अपहरण जैसे मामले को 100 फीसदी तक सुलझाया गया है। वर्ष 2016 में जघन्य अपराध के सिर्फ 68.98 मामले ही सुलझे थे,जबकि इस वर्ष 85.49 मामले सुलझे हैं। वर्ष 2016 में आम अपराध के सिर्फ 24.57 फीसदी ही मामले सुलझे थे,जबकि इस वर्ष 32.65 फीसदी मामले सुलझे हैं।

दिल्ली की सड़कों पर हुई कम मौतें

दिल्ली पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली की सड़कों पर लगातार सड़क हादसे में मौत होने की घटना कम हुई है। इसके साथ ही सड़क हादसे की घटनाओं में भी कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2016 तुलना में इस वर्ष सड़क हादसे में करीब साढ़े पांच फीसदी मौते कम हुई है। जबकि करीब 11.06 फीसदी कम दुर्घटनाएं हुई। वर्ष 2016 में सड़क हादसे में 1373 लोगों ने जान गंवाया था। जबकि इस वर्ष यह आंकड़ा घटकर 1299 हो गया। यही हाल सड़क दुर्घटना की है,इस वर्ष 4575 सड़क हादसे हुए। वही 2016 में 5144 दुर्घटनाएं हुई थी।

सलमान खान और शिल्पा शेट्टी को नहीं छोडेगा वाल्मीकी समाज ?

जयप्रकाश भाटी, फरीदाबाद 

बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान और शिल्पा शेट्टी के विवादित ब्यान के खिलाफ बाल्मीकि समाज के लोगों का प्रदर्शन लगातार जारी है। बाल्मीकि समाज द्वारा देश के सभी राज्यों में सलमान और शिल्पा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है, कही इन दोनों के पुतले फूंके जा रहे है तो कहीं इन दोनों के खिलाफ नारेबाजी की जा रही है। फरीदाबाद में भी बुधवार को सैक्टर 12 लघु सचिवालय पर बाल्मीकि समाज के लोग एकत्रित हुए और सलमान खान एवं शिल्पा शेट्टी की गिरफ्तारी की मांग की। दरअसल सलमान खान ने एक निजी कार्रक्रम के दौरान बाल्मीकि समाज के लिए जातिसूचक शब्द का प्रयोग किया था, और कुछ ऐसा ही शिल्पा शेट्टी द्वारा भई किया गया था जिसके बाद से बाल्मीकि समाज ने सड़कों पर आकर अपना रोष प्रकट किया और सलमान – शिल्पा से माफी मांगने तक की बात कह डाली ।

बाल्मीकि समाज का कहना है कि ऐसे लोगों को किसी का अपमान नहीं करना चाहिए। समाज में रहने वाले सभी लोग एक समान होते हैं। सलमान खान और शिल्पा शेट्टी ने वाल्मीकि समाज का अपमान किया है, जिसका विरोध पूरा वाल्मीकि समाज करेगा।

 

हाईटेक हुआ गाजियाबाद का प्रधान डाकघर

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 गाजियाबाद— हाईटेक हुआ डाकघर का प्रधान डाकघर जी हां अब तक जहां स्टाम्प भी हाथों से लगाई जाती थी और यह देखने को मिलता था कि डाक विभाग पूरी तरह से अप टू डेट नहीं है वही ऐसे में डाक विभाग ने माय स्टांप जो ऐप निकाला है इस से ना सिर्फ गाजियाबाद डाकघर की लोकप्रियता बढ़ी साथी लोग बाग इस ऐप का लुफ्त उठा रहे हैं मसलन अब तक आपको सिर्फ महापुरुषों या ऐतिहासिक धरोहरों के ही स्टाम्प मिला करते थे लेकिन अब इसके जरिए आप अपना खुद का या किसी यादगार क्षण का या अपने किसी प्रियजन का फोटो स्टांप पर छपवा सकते हैं इसके लिए आपको महज ₹300 खर्च करने होंगे अपनी एक ID आप को देनी होगी और फोटो देना होगा इसके बाद डाकघर एक या 2 दिन के अंदर आपको आपकी फोटो की डाक टिकट बना कर दे देगा 300 रुपये में12 डाक टिकट जारी किए जाएंगे प्रत्येक डाक टिकट की कीमत ₹5 होगी और इसको आप अन्य टिकटों की तरह प्रयोग भी कर सकते हैं 2016 में औपचारिक रूप से यह चालू कर दिया गया था और अब तक तकरीबन डेढ़ सौ के करीब लोगों ने इसका फायदा उठाया है और लगातार जैसे जैसे लोगों को इसके बारे में पता चल रहा है लोग बाग बढ़-चढ़कर अपना टिकट बनवाने के लिए डाकघर में आवेदन कर रहे है।

दिव्यांद नसीबा बनी लोगों के आकर्षण का केंद्र

दिव्यांग जिसे समाज अपाहिज और पागल समझता हैं असल में वो लोग पागल और अपाहिज नहीं बल्कि दिव्य अंगों के साथ जन्म लेते हैं जो हमारे थोडे से स्नेह के साथ अपने अंगों का भली भांति स्तेमाल कर सकते है इसी बात को समझाने के लिए दिल्ली के सुन्दर लाल जैन अस्पताल में नोटरी कल्ब ऑफ दिल्ली अपटॉउन द्वारा दिव्यांग दा ट्रुली स्पेशल पिपल प्रोग्राम का आयोजन किया गया जिसमें दिव्यांग बच्चों के लिए काम करने वाले एनजीओ, डॉक्टरों , और समाज सेवीओं ने शिरकत की और बताया केसे दिव्यांग बच्चे किसी से भी किसी भी तरह कम नहीं है इस मौके पर एक दिव्यांग बच्ची नसीबा भी मौजुद थी जिसके हाथ और पैर पुरी तरह से विकसित नहीं होने के कारण उसके परिवार और समाज ने उसे ठुकरा दिया लेकिन नसीबा का नसीब भी अपने नाम की ही तरहा तेज़ निकला नसीबा ने कडे परिश्रम से दिखा दिया की वो भी किसी से किसी भी तरह कम नहीं है नसीबा  हरियाणा की स्टेट लेवल व्हील चेयर रनर है और नसीबा पढ लिख कर एक टिचर बनना चाहती है नसीबा सभी दिव्यांगो के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत हैं इस प्रोग्राम में  मंच पर उपस्थित सभी गणमाननिय लोंगों ने बताया की कैसे हम दिव्यांग बच्चों का सहारा बन सकते हैं इस कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोग दिव्यांगों के होंसले को देख कर काफि खुश दिख रहे थे लेकिन इस प्रोग्राम से लोग कितना समझ पाते है ये तो वक्त ही बता पाएगा  लेकिन दिव्यांग हमारे समाज का एक अभिंन अंग है ये बात  हम सबको समझना जरुरी है

न्यू उस्मानपुर-स्कूली छात्रों ने 9 वीं के एक छात्र की चाकू से गोदकर हत्या कर दी

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न्यू उस्मानपुर-राकेश चावला
राजधानी दिल्ली में छोटी छोटी बातों पर लोगो की जान लेना जैसे आम बात हो गई है यही नही किशोरावस्था के छात्र भी जरा जरा सी बात पर जान लेने पर उतारू है। ताजा मामला न्यू उस्मानपुर इलाके में हुआ देर शाम गौतमपुरी के एक स्कूल के बाहर मौत का तांडव खेल गया। चश्मदीद के मुताबिक देर शाम स्कूल के नजदीक कुछ छात्रों का झगड़ा हो रहा था 9th क्लास का स्टूडेंट सुल्तान भी वही खड़ा था अचानक ही उसे एक छात्र ने पकड़ लिया हालांकि सुल्तान ने खूब मिन्नते की लेकिन उस पर चाकू से कई वार कर दिए जिसके बाद मौके पर अफरी-तफरी फैल गई आनन फानन में सुल्तान को स्कूल के ही कुछ बच्चो ने नजदीक के अस्पताल पहुंचाया जहाँ डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। हालांकि इस मामले में स्कूल प्रशासन की पोल खोल कर रख दी है कि स्कूल में पढने वाले बच्चों के पास चाकू कैसे और कहा से आया अपने आप एक सवाल बना हुआ है अगर स्कूल प्रशासन बच्चो की समय समय पर जाँच करते रहे तो शायद ऐसे मामले होने से बच जाये। फ़िलहाल पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है लेकिन सुल्तान के परिवार का रो-रो कर बुरा हाल है।