Saturday, May 2, 2026
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निगम चुनाव में बीजेपी से अपनी भागीदारी की मांग करता अग्रवाल समाज

दिल्ली की वैश्य और अग्रवाल समाज की लगभग सभी संस्थाओं ने संयुक्त रूप से सम्मलेन कर बीजेपी से अपनी जनसंख्या और काबिलियत के हिसाब  से 60 से 70 निगम सीटों की मांग की है –हरियाण के उद्योग मंत्री विपुल गोयल की अगुवाई में करीब 2500 लोगों की मौजूदगी में प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने भी भरोसा दिया की आने वाली 26 तारीख को जब प्रत्याशियों की सूची जारी होगी तो अग्रवाल समाज को निराश नहीं होना पड़ेगा। 

दिल्ली का अग्रवाल वैश्य समाज बीजेपी के साथ रहा है।  ‘वैश्य अग्रवाल समाज और भाजपा’  नाम से हो रहा यह विशाल सम्मलेन बीजेपी को यही समझने की कोशिश है। इस समाज की शिकायत है की नोटबंदी के बाद हुयी तकलीफ के बावजूद भी वो बीजेपी के साथ खड़ा रहा। वह न संख्या में कम है और ना ही सेवाभाव में। लेकिन उसे उसकी संख्या के हिसाब से सत्ता में सांझेदारी नहीं मिल रही है। हरियाणा के उद्योग मंत्री विपुल गोयल की अगुवाई और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी की मौजूदगी में हुए इस सम्मलेन में अग्रवाल समाज ने मांग की है की उसे दिल्ली में उसकी संख्या और योग्यता के हिसाब से 60 से 70 सीटें चाहिए। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने भी उन्हें भरोसा दिया की आने वाले 26 तारीख को प्रत्याशियों की सूची जारी होगी तो अग्रवाल समाज को शिकायत नहीं होगी।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी को भरोसा दिलाया गया की अगवाल समाज केवल कारोबार में ही आगे नहीं रहता बल्कि दिल्ली के विकास में भी आगे रहता है। देशभर में 25 करोड़ आबादी वैश्य समाज की है। बीजेपी ने जहाँ जहाँ से उन्हें टिकट दी वे कामयाब रहे है। फिर भी उन्हें सत्ता में सम्मानजनक साथ नहीं मिला। इस सम्मलेन के जरिये अगवाल समाज ने अपनी शक्ति भी दिखाई और अपनी शिकायत को भी सामने रखा। लेकिन मनोज तिवारी ने भी उन्हें गोलमोल जवाब ही दिया। ऐसे में बीजेपी उनकी मांगो को पूरा करेगी इसे लेकर समाज ज्यादा सकारात्माक और उत्साहित नहीं है।
दिल्ली की राजनीती में वैश्य समाज का दबदबा रहा है। नोटबंदी और मनोज तिवारी को बीजेपी अध्यक्ष बनाये जाने के बाद कहीं वैश्य समाज बीजेपी से खिसक न जाये बीजेपी को यह भी डर है। वैश्य समाज इसी डर का फायदा उठाकर बीजेपी से अपनी संख्या और शक्ति के हिसाब से दिल्ली नगर निगम में टिकटों की मांग कर रहा है। अब बीजेपी इनकी मांगों को किस हद तक पूरा करती है यह 26 तारीख को साफ़ हो जाएगा। 

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क्या है सोशल ट्रेड और अनुभव मित्तल पर 37 अरब घोटाले के आरोप का सच ?

 

यूपी सरकार  और कुछ मीडिया हाउस सोशल ट्रेड और उसके मालिक अनुभव मित्तल पर  37 करोड़ का आरोप लगाकर उसे नटवर लाल बता रही है यह हज़ारों की भीड़ उसी का जवाब है। आज़ाद भारत में शायद ऐसा पहली बार हुआ होगा की किसी कंपनी के पक्ष में निवेशक सड़कों पर उतर आये हों, लेकिन पीड़ित यानी ठगी के कथित शिकार कही नजर न आ रहे हो। ऐसे में सवाल उठाना लाज़मी है की आखिर ठगी हुयी किसके साथ है ? जिन 6.5 लाख निवेशकों के साथ ठगी का दावा पुलिस, एसटीएफ और चंद  मीडिया मिलकर कर रहे हैं वे कहाँ है ?

दिल्ली के जंतर मंतर पर जमा ये हज़ारो लोग दावा कर रहे है की सोशल ट्रेड ने उनके साथ ही नहीं बल्कि किसी के साथ भी ठगी नहीं की।  जिन नियमों, शर्तों एवं वायदों के आधार पर कंपनी से वे जुडे़ थे, कंपनी ने हमेशा उनका पालन किया। अनुभव मित्तल की गिरफ्तारी  यूपी पुलिस और उत्तर प्रदेश के कुछ राजनेताओं और गुंडों की साजिश है  जिनके आगे झुकने से कंपनी ने झुकाने से इनकार कर दिया था।

नयी दिल्ली में इन हज़ारो लोगों की तादाद, तेवर और तर्क  देखकर लगता है सोशल ट्रेड पर करवाई कही सपा सरकार के ये सियासी मुसीबत न बन जाये। ये जो सवाल उठा रहे है वह सपा सरकार की नींद उड़ा सकते है।

क्या कंपनी ने निवेशकों से ठगी की ? यदि हां वे कहाँ  है वे लाखों ठगी के शिकार निवेशक ? क्यों सामने आकर शिकायत नहीं दे रहे है ? जो दावा और वादा कंपनी ने निवेशकों से किया वो निभाया फिर उनके साथ ठगी कैसे हो गयी ?

क्या कंपनी फ़र्ज़ी है ?

कंपनी सरकार से पूरी तरह से रजिस्टर्ड है ,  देश की सुरक्षा, संप्रभुता अथवा सम्मान के विरूद्ध को काम नहीं कर रही है , सभी तरह भुगतान ऑनलाइन  कर रही है जिसमें पैन कार्ड की जरूर होती है , सब कुछ सरकार की जानकारी में हो रहा था तो कंपनी  तो फ़र्ज़ी कैसे हो गयी ?

क्या सरकार के साथ ठगी हुयी ?

कंपनी सभी तरह के टेक्स दे रही है , टीडीएस, सर्विस टेक्स , दे रही है तो फिर सरकार के साथ ठगी कैसे कैसे हुयी ?

सोशल ट्रेड पर आरोप है की वह  पेज लाइक कराने के नाम पर ठगी कर रही थी। जबकि सोशल ट्रेड निवेशकों का कहना है कि अधिकतर निवेशक अपनी वेबसाईट, ब्लॉग अथवा अपने प्रोडेक्ट को लाइक करवाते थे न कि अपने फेसबुक खातों को। इन निवेशकों का कहना है की यदि कंपनी एक क्लिक के बदले 5 रुपये निवेशकों को दे रही थी , लाखों लोगों को रोजगार दे रही थी तो थी तो  सपा सरकार के पेट में दर्ज क्यों हुआ। यदि कहीं कुछ गलत लग भी  रहा था तो गिरफ्तारी से पहले पूरी जाँच होनी चाहिए थी जो नहीं हुयी।  यूपी पुलिस ने अपने ही विभाग के एक कर्मचारी को शिकायतकर्ता बनाकर करवाई कर डाली और कंपनी के खिलाफ साजिश रची।

एक तरफ सरकार  डिजिटल कर देने का ढोल पीट रही है तो वहीँ डिजिटल माध्यम से सेवाओं अथवा उत्पाद का प्रचार करने वाले कारोबार करने वालों को हतोत्साहित कर रही है। इन हज़ारों निवेशक  प्रदर्शन कारियों ने इस मामले में ईमानदारी से जांच करने की मांग करते हुए चेतावनी दी है की यदि सोशल ट्रेड के साथ न्याय  नहीं किया तो ये जेल भरो आंदोलन करेंगे , देशभर में रक्तदान करेंगे। कंपनी से जुड़े कुछ लोगों का आरोप है की कंपनी से पैसे की मांग की गयी थी लेकिन कंपनी ने यह कहते हुए इनकार कर दिया की वह कोइ गलत काम नहीं  रही है तो पैसे क्यों दे। लेकिन यूपी सरकार ने कंपनी को फ़र्ज़ी बताते हुए न केवल मुकदमा दर्ज किया बल्कि जाँच को पूरी करने से ज्यादा दिलचस्पी कंपनी और उसके अधिकारियों पर करवाई करने में दिखाई। हैरत की बात है की देश भर में कितनी ही बड़ी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां खुले आम अवैध काम कर रही है लेकिन उस पर कोइ करवाई नही हो रही है। ऐसे  इन लोगों के इन आरोपों और चर्चों में भी दम है की अनुभव मित्तल को केवल पैसे की डिमांड पूरी न करने की ही सजा नही मिली बल्कि बीजेपी के बड़े नेताओं से नजदीकियों की की भी सजा मिली है।

ऊपर देखें विडियो रिपोर्ट

 

क्या दिल्ली के बुराड़ी में लौट आया है तेंदुआ ?

 
 दिल्ली के बुराड़ी में यमुना किनारे  फिर एक तेंदुए आने की आशंका से लोग डरे हुए है। पिछले दिनों यहां एक तेंदुआ आया था जिसे करीब पन्द्रह दिन बाद पिंजरा लगाकर पकड़ लिया था और इस दौरान इस  तेंदुए ने कोई नुकशान यहां के लोगो को नही पहुंचाया था। अब यमुना किनारे खेतो में लोगो ने एक जानवर के पंजो के निशाँन कई दिन से मिल रहे है। साथ में कई जगह नीलगाय आदि का खून पड़ा हुआ मिलता है तो लोगो में डर है की कोई शिकारी जानवर अभी भी यहां है। लोगो को अपने बच्चो और पशुओ की काफी चिंता हो गई है। खेतो में छोटे बच्चो को लोग अकेले नही छोड़ रहे है। स्थानीय लोगो ने बताया की रात में उनको नीलगाय के भागने की आवाज सूनाइ दी और बाहर आकर देखा की नीलगाय के पीछे कोई दौड़ रहा था देखने पर बिल्ली जैसा था और सुबह उठकर देखा की वहां खून था और बिल्ली जैसे पंजे के निशाँन थे। लोगो ने कहा कि एक सप्ताह से यहां नीलगाय और कुत्ते भी गायब हो गए।यहां खेतो में करीब पन्द्रह परिवार रहते है सब डरे हुए है। खेत में  तेंदुए जैसी आवाज आती है।  तेंदुए को देखा तो नही पर पंजो के निशाँन और कुछ नीलगाय और कुत्ते गायब होने से लोगो को  तेंदुए की आशंका है। लोगो का कहना है वे डरे हुए है और अकेले बाहर भी नही निकल सकते। जिस दिन से लोगो को पंजो के निशाँन  मिले है तभी से खून भी जगह जगह मिलता है पहले नही मिलता था।
लोगो ने अभी तक  तेंदुए को देखा तो नही पर पंजो के निशाँन  देखकर डरे है। लोगो का कहना है पुलिस को कहा तो पुलिसकर्मी  कहते है हमे पहले आप तेंदुआ दिखाओ। लोगो का कहना है यदि देख पाते तो वे खुद ही तेंदुए को पकड़ लेते। महिलाओ ने कहा की चारो तरफ खुले खेत है और हमारे बच्चे डरे है। पिछले एक सप्ताह से लोगो को ये संकेत लगातार मिल रहे है।
ये निशाँन जीव वैज्ञानिक और यमुना बायो डायवर्सिटी पार्क इंचार्ज डॉ  फैयाज खुदसर ने देखे और बताया की ये पंजे के निशाँन बिल्ली  जाति के नही है बल्कि कुत्ता जाति के है पर  ये कुत्ता नहीं इसलिए लोग स्वयम रखे नजर।
अब वैज्ञानिक पुष्टि के बाद कह सकते है कि यहां तेंदुआ तो नही है पर लोगो में पिछले महीने आये तेंदुए का डर अभी तक है  जिस तेंदुए को दिल्ली वन विभाग की टीम ने पकड़ लिया था। फिलहाल लोगो को अभी भी  तेंदुए का डर बना हुआ है।
ऊपर देखें विडियो रिपोर्ट। 

सिंघोला गाँव की मुख्य सड़क का नाम ईशानन्द सरस्वती मार्ग किया गया

नरेला विधानसभा के सिंघोला गाँव की मुख्य सड़क का नाम स्वामी ईशानंद सरस्वती मार्ग रखा गया है। उत्तरी दिल्ली नगर निगम में ये प्रस्ताव पास कर इस सड़क का नामकरण कियागया है। इस तरह के कई नामकरण उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने किये है और अधिकतर नामकरण शाहिदों और स्वत्नत्रता सेनानियो के नाम पर किये जा रहे है।  स्वामी ईशानंद सरस्वती का जन्म इसी सिंघौला गाँव में हुआ था और देश की आजादी के लिए ये कई बार जेल गए। 1939 में आर्य समाज द्वारा चलाये गए हैदराबाद सत्याग्रह और अंग्रेजो भारत छोडो आंदोलन में ये देश के लिए जेल गए। 1957 में हिंदी आंदोलन और 1967 में गौरक्षा आंदोलन में भी ये जेल गए। बड़ी संख्या में स्कूलों का निर्माण इनके प्रयासों और आंदोलनों से हुआ था। इनके जीवन से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिले इसलिए इनके नाम पर इस सड़क का नामकरण दिल्ली नगर निगम ने किया है । लोगों की मांग पर  स्थानीय निगम पार्षद केशरानी खत्री  के प्रयासों से ये नामकरण किया गया। इस मौके पर नरेला से पूर्व विधायक नीलदमन खत्री , बाकानेर वार्ड से निगम पार्षद मोहन भारद्वाज , उत्तरी दिल्ली नगर निगम स्टेडिंग कमेटी चेयरमैन प्रवेश वाही , उत्तरी दिल्ली नगर निगम के नेता सदन विजय प्रकाश पांडेय ने नारियल तोड़कर ये नामकरण किया। 
 ऐसे नामो से कही न कही नई पीढ़ी को स्वतंत्रता सेनानियो का एक परिचय मिलता है  क्योकि सड़क का नाम सुनकर उन नाम की जानकारी भी हर कोई लेना चाहेगा जो उन स्वतंत्रता सेनानियो को एक श्रधांजलि होगी।