Saturday, May 2, 2026
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नवनियुक्त DCP की जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक: संवाद या सियासी मेल-मिलाप?

  • राजेंद्र स्वामी , दिल्ली दर्पण
    नई दिल्ली:
    उत्तर-पश्चिमी दिल्ली की नवनियुक्त डीसीपी आकांक्षा यादव ने कार्यभार संभालते ही क्षेत्र की कानून-व्यवस्था, अतिक्रमण और अन्य स्थानीय समस्याओं को लेकर जनप्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। हालांकि, इस बैठक के स्वरूप और इसमें शामिल चेहरों को लेकर अब सवाल उठने शुरू हो गए हैं। चर्चा है कि जनसमस्याओं के समाधान के नाम पर बुलाई गई यह बैठक कहीं महज एक राजनीतिक परिचय सत्र बनकर तो नहीं रह गई?

बैठक में सांसद, विधायक और निगम पार्षदों के साथ-साथ भाजपा के जिला स्तर के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। हैरान करने वाली बात यह रही कि आम आदमी पार्टी (AAP) के जनप्रतिनिधियों को इस चर्चा से पूरी तरह दूर रखा गया। सवाल यह उठ रहा है कि यदि बैठक केवल ‘जनप्रतिनिधियों’ के साथ क्षेत्र की समस्याओं पर चर्चा के लिए ही थी, तो इसमें एक विशेष राजनीतिक दल के जिला पदाधिकारियों का क्या काम था? और क्या दिल्ली की प्रमुख विपक्षी पार्टी के पार्षदों को शामिल न करना महज एक संयोग था या सोची-समझी रणनीति? नार्थ वेस्ट जिले में आम आदमी पार्टी के तीन निगम पार्षद है , ये सब ऐसे इलाकों के है जहाँ पुलिस को विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए , लेकिन ध्यान देना तो दूर उन्हें पूरी तरह नजर अंदाज ही किया जा रहा है .

इस बैठक के बाद गलियारों में यह चर्चा तेज है कि दिल्ली पुलिस किसके प्रभाव में काम कर रही है। हालांकि संभव है कि पुलिस इस बैठक को राजनीतिक अखाड़ा बनने से बचाना चाहती हो, लेकिन एकतरफा भागीदारी ने इस धारणा को बल दिया है कि यह बैठक समस्याओं के समाधान से ज्यादा ‘सियासी जान-पहचान’ बढ़ाने का जरिया थी।
एक पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि थानों में अक्सर राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर दबाव बनाया जाता है। याद रहे कि यह वही जिला है जहाँ कुछ समय पहले एक इंस्पेक्टर का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें राजनीतिक दबाव और अपराधियों की सिफारिशों का जिक्र था। ऐसे में इस तरह की चुनिंदा भागीदारी वाली बैठकें पुलिस की निष्पक्ष कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।

जनता की उम्मीदें और सुझाव :-
डीसीपी आकांक्षा यादव की काबिलियत और उनके पेशेवर अंदाज की जनता में सराहना हो रही है। लोगों को उनसे काफी उम्मीदें हैं, लेकिन जानकारों का मानना है कि ‘दिल की पुलिस’ बनने के लिए कुछ ठोस कदम उठाने होंगे:

  • सर्वदलीय संवाद: केवल एक पक्ष नहीं, बल्कि सभी दलों के जनप्रतिनिधियों के सुझाव लिए जाएं।
  • कम्युनिटी पुलिसिंग: पुलिस को क्षेत्र के सोशल वर्कर्स, RWA और स्थानीय गंभीर पत्रकारों के साथ मिलकर काम करना चाहिए।
  • शिकायतों का निपटारा: जो लोग थानों से निराश होकर लौटते हैं, उनकी शिकायतों पर सीधे डीसीपी स्तर से ध्यान दिया जाना चाहिए।
    नवनियुक्त डीसीपी को यह सुनिश्चित करना होगा कि पुलिस ‘लिहाज और लालच’ के बजाय केवल ‘लॉ’ (कानून) के अनुसार काम करे। तभी जनता के बीच सुरक्षा का वास्तविक भाव पैदा होगा और पुलिस की छवि एक निष्पक्ष रक्षक के रूप में निखरेगी।

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दिल्ली में ‘मानव तस्करी’ का खौफनाक अंत: बिहार की 17 साल की लड़की का होना था सौदा, पुलिस को देख किया इशारा और सलाखों के पीछे पहुँचा ‘सौदागर’

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के कमला मार्केट इलाके से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात सामने आई है। बिहार के दरभंगा से घर छोड़कर दिल्ली आई एक 17 साल की नाबालिग लड़की को न केवल हवस का शिकार बनाया गया, बल्कि उसे बेचने की भी पूरी तैयारी कर ली गई थी। लेकिन किस्मत और दिल्ली पुलिस की सतर्कता ने ‘मौत के सौदे’ को नाकाम कर दिया। एक छोटे से इशारे ने नाबालिग की जिंदगी बचा ली और आरोपी को जेल की सलाखों के पीछे पहुँचा दिया।

घर की कलह से शुरू हुआ ‘नरक’ का सफर

पुलिस जांच के अनुसार, पीड़ित नाबालिग (बदला हुआ नाम: मोनिका) दरभंगा, बिहार की रहने वाली है। 14 मार्च 2026 को घर में हुए एक विवाद के बाद उसने घर छोड़ दिया। एक परिचित की सलाह पर वह बेहतर भविष्य की तलाश में दिल्ली आ गई। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर उसे 52 वर्षीय शिवजी दास ने रिसीव किया, जो उसके किसी दोस्त का जानकार था।

मदद के नाम पर दरिंदगी और कैद

आरोपी शिवजी दास लड़की को अपने घर (नेहरू विहार, दयालपुर) ले गया। वहां उसे ‘घरेलू काम’ दिलाने का झांसा देकर 2 अप्रैल तक बंधक बनाकर रखा गया। इस दौरान जब आरोपी की पत्नी घर से बाहर गई, तो उसने नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया और बदनामी का डर दिखाकर उसे चुप रहने की धमकी दी।

पार्किंग में होना था ‘किस्मत का सौदा’

2 अप्रैल 2026 को आरोपी लड़की को एसएन मार्ग इलाके की एक पार्किंग में ले आया। उसने लड़की को वहां इंतजार करने को कहा और खुद ग्राहक से ‘सौदेबाजी’ करने चला गया। डरी-सहमी लड़की को आरोपी की बातों से शक हो गया था कि उसे बेचा जा रहा है।

एसआई किरण सेठी की मुस्तैदी ने पलटी बाजी

उसी समय कमला मार्केट थाने की एसआई किरण सेठी अपनी टीम के साथ वहां से पेट्रोलिंग कर रही थीं। पुलिस की गाड़ी देखते ही नाबालिग ने हिम्मत जुटाई और हाथ हिलाकर मदद का इशारा किया। महिला पुलिसकर्मी तुरंत उसके पास पहुँचीं, जहाँ पीड़िता ने रोते हुए अपनी पूरी आपबीती सुनाई। पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी शिवजी दास को मौके से ही दबोच लिया।

आरोपी पर POCSO के तहत कार्रवाई

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो (POCSO) एक्ट समेत मानव तस्करी की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है। पीड़िता का मेडिकल कराने के बाद उसे बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया, जहाँ से उसे सुरक्षित शेल्टर होम भेज दिया गया है।

दिल्ली पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई और महिला एसआई की सतर्कता की हर तरफ सराहना हो रही है, जिसने एक मासूम को उम्रभर के अंधकार में जाने से बचा लिया।

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दिल्ली विधानसभा ‘कांड’ में बड़ा खुलासा: लापता भांजे के लिए सरबजीत ने बैरियर में मारी थी टक्कर; लॉकअप में रातभर मचाया उत्पात, बोला— ‘मेरे पास महाराजा की तलवार है’

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा की सुरक्षा भेदने वाले शख्स सरबजीत को लेकर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। दिल्ली पुलिस की पूछताछ में पता चला है कि सरबजीत किसी आतंकी साजिश के तहत नहीं, बल्कि पुलिस का ध्यान खींचने के लिए अपनी नई टाटा सियारा कार लेकर विधानसभा में घुसा था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ ‘हत्या के प्रयास’ (Attempt to Murder) का मुकदमा दर्ज कर लिया है।

क्यों चुनी विधानसभा? भांजे की तलाश में था आरोपी

पूछताछ में सरबजीत ने दावा किया कि उसका भांजा 1 अप्रैल 2026 से लापता है। इस संबंध में उसने हरी नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन उसे लगा कि पुलिस उसके मामले में ढिलाई बरत रही है। सरबजीत का मानना था कि अगर वह विधानसभा जैसी हाई-प्रोफाइल जगह पर हंगामा करेगा, तो कोई बड़ा अधिकारी उसकी बात सुनेगा और उसके भांजे को ढूंढने में मदद करेगा।

2000 रुपये देकर ऑटो वालों को बनाया ‘गाइड’

हैरान करने वाली बात यह है कि सरबजीत को दिल्ली के रास्ते ठीक से पता नहीं थे। विधानसभा पहुँचने के लिए उसने दो टैक्सी/ऑटो वालों को 2000 रुपये दिए और उन्हें रास्ता बताने के लिए अपनी कार में बिठा लिया। उसने उनसे ‘पार्लियामेंट’ जाने का रास्ता पूछा था। पुलिस ने उन दोनों व्यक्तियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की है, लेकिन फिलहाल इस साजिश में उनका कोई सक्रिय रोल सामने नहीं आया है।

हिंसक व्यवहार और ‘महाराजा की तलवार’ का दावा

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सरबजीत का व्यवहार बेहद हिंसक और असामान्य है।

  • लॉकअप में हंगामा: गिरफ्तारी के बाद वह पूरी रात लॉकअप की ग्रिल पकड़कर हिलाता रहा और ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाता रहा।
  • अजीबोगरीब बातें: वह पुलिसकर्मियों से कह रहा था कि उसके पास ‘महाराजा की तलवार’ है।
  • इलाज का दावा: सरबजीत की पत्नी ने शाहजहाँपुर का एक मेडिकल पर्चा पुलिस को सौंपा है, जिसमें दावा किया गया है कि उसका मानसिक इलाज चल रहा है। दिल्ली पुलिस अब इस दावे की सत्यता की जांच कर रही है।

हथियार नहीं, गाड़ी को ही बनाया ‘हथियार’

तलाशी के दौरान सरबजीत या उसकी कार से कोई असलहा बरामद नहीं हुआ है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि उसने अपनी भारी-भरकम गाड़ी को ही हथियार की तरह इस्तेमाल किया। जिस रफ्तार से उसने बैरियर तोड़ा, वह किसी की जान लेने के लिए काफी था।

अगली कार्रवाई

आरोपी का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और उसे तीस हजारी कोर्ट में पेश किया जाएगा। पुलिस उसके कॉल रिकॉर्ड्स (CDR) खंगाल रही है ताकि यह पता चल सके कि वह पिछले कुछ दिनों में किन लोगों के संपर्क में था।

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शर्मनाक: दिल्ली के अमन विहार में 8 साल की मासूम से दरिंदगी; स्पीकर ठीक करने के बहाने घर बुलाकर किया यौन शोषण, आरोपी सदरुद्दीन गिरफ्तार

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के अमन विहार इलाके से मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक घटना सामने आई है। यहाँ एक 32 वर्षीय व्यक्ति ने पड़ोसी और परिचित होने का फायदा उठाते हुए 8 साल की मासूम बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाने की कोशिश की। आरोपी ने स्पीकर ठीक करने के बहाने बच्ची को फुसलाकर अपने घर बुलाया और इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। दिल्ली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

पिता का परिचित निकला ‘हैवान’

पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी की पहचान सदरुद्दीन (32 वर्ष) के रूप में हुई है, जो अमन विहार का ही रहने वाला है। चौंकाने वाली बात यह है कि सदरुद्दीन पीड़ित बच्ची के पिता का परिचित था। भरोसे का फायदा उठाकर उसने मासूम को अपने जाल में फंसाया। घटना के बाद इलाके में भारी तनाव और आक्रोश देखा गया, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।

POCSO एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए रोहिणी जिला पुलिस ने पीड़ित बच्ची का बयान उसके माता-पिता की मौजूदगी में दर्ज किया। बच्ची की आपबीती सुनने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ FIR नंबर 169/26 दर्ज की है। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के साथ-साथ पोक्सो (POCSO) एक्ट की धारा 8 लगाई गई है। आरोपी सदरुद्दीन को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

DCP शशांक जायसवाल का बयान

दिल्ली दर्पण टीवी (Delhi Darpan TV) से खास बातचीत में रोहिणी जिले के DCP शशांक जायसवाल ने कहा:

हम पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं। यह घटना बच्चों की सुरक्षा में माता-पिता की निगरानी और सामुदायिक सतर्कता के महत्व को रेखांकित करती है। नाबालिगों का शोषण करने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सामुदायिक सतर्कता की अपील

इस घटना ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों के प्रति सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें। फिलहाल, रोहिणी जिला पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है ताकि आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके।

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कुशीनगर से ISIS का ‘स्लीपर सेल’ गिरफ्तार: नाबालिगों का ब्रेनवॉश कर धमाकों की रच रहा था साजिश; बम बनाने का सामान बरामद

नई दिल्ली/कुशीनगर: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल (काउंटर इंटेलिजेंस यूनिट) ने उत्तर प्रदेश के कुशीनगर से एक खतरनाक आतंकी साजिश का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने रिजवान अहमद नाम के एक संदिग्ध आतंकी को गिरफ्तार किया है, जो सीरिया में बैठे अपने हैंडलर्स के इशारे पर भारत में बड़े हमले की फिराक में था। रिजवान न केवल विस्फोटक इकट्ठा कर रहा था, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए मासूम नाबालिगों का ब्रेनवॉश कर उन्हें ‘मानव बम’ बनाने की कोशिश में जुटा था।

बम बनाने की ‘किट’ और टाइमर बरामद

सुरक्षा एजेंसियों को रिजवान के पास से विस्फोटक सामग्री का जखीरा मिला है। सूत्रों के अनुसार, उसके पास से 500 ग्राम से अधिक संदिग्ध केमिकल, एक मॉडिफाइड टेबल घड़ी (जो टाइमर के रूप में इस्तेमाल होनी थी), बॉल वायरिंग और सर्किट बनाने का अन्य सामान बरामद हुआ है। इसके अलावा, उसके मोबाइल से भारी मात्रा में कट्टरपंथी और आपत्तिजनक डिजिटल कंटेंट भी मिला है, जिसका इस्तेमाल वह युवाओं को उकसाने के लिए करता था।

4-5 नाबालिगों को बना रहा था ‘आतंकी’

जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि रिजवान का निशाना स्कूल जाने वाले बच्चे और कम उम्र के लड़के थे। वह 4 से 5 नाबालिगों के सीधे संपर्क में था। वह एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए सीरिया में बैठे आईएसआईएस (ISIS) के हैंडलर्स से जुड़ा था और उन्हीं के निर्देश पर स्थानीय लड़कों को कट्टरपंथ की ओर धकेल रहा था। उसका प्लान इन युवाओं से भीड़भाड़ वाले इलाकों में बम धमाके करवाने का था।

2023 में जेल से छूटा, फिर शुरू की आतंकी गतिविधियां

रिजवान अहमद का आपराधिक इतिहास काफी पुराना है। पुलिस के अनुसार:

  • वह साल 2015 में भी आतंकी गतिविधियों के आरोप में गिरफ्तार हुआ था।
  • करीब 8 साल जेल की सलाखें काटने के बाद वह 2023 में बाहर आया।
  • बाहर आते ही वह फिर से सक्रिय हो गया और पुराने नेटवर्क को पुनर्जीवित करने लगा।

स्पेशल सेल की रिमांड में खुलेगा पूरा नेटवर्क

सोमवार को पुलिस रिमांड खत्म होने पर रिजवान को कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे दोबारा एक दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल अब उससे यह उगलवाने की कोशिश कर रही है कि उसके नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है और क्या उसने उत्तर प्रदेश या दिल्ली में कहीं विस्फोटक पहले से ही प्लांट तो नहीं कर दिए थे।

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