Saturday, May 2, 2026
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द्वारका एक्सप्रेसवे पर ‘कैब ड्राइवर’ की दबंगई: रॉन्ग साइड गाड़ी चलाकर दी धमकी; वायरल वीडियो देख दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के द्वारका एक्सप्रेसवे पर सड़क सुरक्षा के नियमों की धज्जियां उड़ाने और दूसरे वाहन चालकों के साथ बदसलूकी करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यशोभूमि राउंडअबाउट के पास एक कैब ड्राइवर द्वारा गलत साइड (Wrong Side) गाड़ी चलाने और विरोध करने पर दूसरे चालक को धमकाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। दिल्ली पुलिस ने इस पर त्वरित संज्ञान लेते हुए आरोपी ड्राइवर के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की है।

BNS की धारा 281 के तहत मामला दर्ज

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के कुछ ही घंटों के भीतर दिल्ली पुलिस ने वाहन और उसके चालक की पहचान कर ली। पुलिस के मुताबिक, आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 281 (लापरवाही और खतरनाक तरीके से वाहन चलाना) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने साफ कर दिया है कि सड़कों पर गुंडागर्दी और नियमों से खिलवाड़ करने वालों के लिए दिल्ली में कोई जगह नहीं है।

क्या है पूरा मामला?

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि द्वारका एक्सप्रेसवे जैसे हाई-स्पीड कॉरिडोर पर एक कैब ड्राइवर अपनी गाड़ी को गलत दिशा से लेकर आ रहा था। जब सामने से आ रहे वाहन चालक ने उसे टोकने की कोशिश की, तो कैब ड्राइवर ने सुधरने के बजाय गाली-गलौज और बदसलूकी शुरू कर दी। घटना यशोभूमि (IICC) राउंडअबाउट के पास की बताई जा रही है, जहाँ भारी ट्रैफिक रहता है।

“सड़क सुरक्षा से समझौता नहीं”: दिल्ली पुलिस

दिल्ली पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि वे राजधानी की सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि रोंग साइड ड्राइविंग न केवल यातायात का उल्लंघन है, बल्कि दूसरों की जान के लिए भी बड़ा खतरा है। पुलिस ने आम जनता से भी अपील की है कि यदि वे ऐसी कोई घटना देखें, तो उसका वीडियो बनाकर या शिकायत दर्ज कर पुलिस की मदद करें ताकि दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जा सके।

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संसद के ‘मकर द्वार’ पर विपक्ष का हल्लाबोल: FCRA संशोधन विधेयक को बताया ‘काला कानून’; वापसी की मांग को लेकर भारी विरोध

नई दिल्ली: बजट सत्र के दौरान बुधवार (1 अप्रैल 2026) को संसद परिसर में भारी हंगामा देखने को मिला। विपक्षी सांसदों ने एकजुट होकर संसद के मकर द्वार (Makar Dwar) पर केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। विपक्षी दल विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (FCRA Amendment Bill, 2026) को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। सांसदों का आरोप है कि यह विधेयक अल्पसंख्यकों और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को निशाना बनाने के लिए लाया गया है।

“अल्पसंख्यकों और NGOs के लिए दमनकारी”: विपक्ष के आरोप

विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी की। प्रदर्शन में शामिल प्रमुख नेताओं ने विधेयक पर कड़े प्रहार किए:

  • हिबी ईडन (कांग्रेस सांसद): उन्होंने इसे एक ‘दमनकारी कानून’ (Draconian Law) करार दिया। ईडन ने कहा कि यह न केवल अल्पसंख्यकों बल्कि भारत में काम कर रहे कई सेवाभावी NGOs के हितों को भी नुकसान पहुँचाएगा।
  • एन.के. प्रेमचंद्रन (RSP सांसद): उन्होंने आरोप लगाया कि यह किसी एक समुदाय का मुद्दा नहीं है, बल्कि भाजपा का एक सुनियोजित एजेंडा है ताकि अल्पसंख्यकों के अधिकारों और विशेषाधिकारों को छीना जा सके।
  • धर्मवीर गांधी (कांग्रेस सांसद): उन्होंने कहा कि कानून निष्पक्ष होना चाहिए और समाज के सभी वर्गों के लिए फायदेमंद होना चाहिए, लेकिन यह विधेयक ‘चयनात्मक’ (Selective) प्रतीत होता है।

क्या है FCRA संशोधन विधेयक, 2026?

यह विधेयक 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। सरकार का तर्क है कि इसका उद्देश्य विदेशी चंदे के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाना है।

  • नई अथॉरिटी का गठन: विधेयक में एक ‘नामित प्राधिकरण’ (Designated Authority) बनाने का प्रस्ताव है, जो उन संगठनों की संपत्ति को जब्त और प्रबंधित कर सकेगा जिनका लाइसेंस रद्द हो जाता है।
  • सख्त निगरानी: सरकार का कहना है कि यह संशोधन राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों के खिलाफ विदेशी धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए जरूरी है।

सरकार का रुख: “धर्म परिवर्तन करने वालों के लिए खतरनाक”

विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि यह कानून उन लोगों के लिए ‘खतरनाक’ है जो विदेशी धन का उपयोग जबरन धर्म परिवर्तन या राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए करते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया कि किसी भी धार्मिक संस्था को बिना वजह निशाना नहीं बनाया जा रहा है।

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चेहरे पर लौटी मुस्कान: दिल्ली क्राइम ब्रांच ने बरामद किए 16 लाख के 75 चोरी हुए मोबाइल; मालिकों को सौंपे

दिल्ली दर्पण ब्यूरो

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बार फिर आम जनता के चेहरे पर खुशी लौटाने का काम किया है। ‘ऑपरेशन मिलाप’ और तकनीकी ट्रेसिंग के जरिए क्राइम ब्रांच की टीम ने दिल्ली-एनसीआर से चोरी या गुम हुए 75 मोबाइल फोन बरामद कर उनके असली मालिकों को वापस सौंप दिए हैं। बरामद किए गए इन मोबाइलों की कुल कीमत करीब 16 लाख रुपये बताई जा रही है।

तकनीकी ट्रेसिंग से मिली बड़ी कामयाबी

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (@CrimeBranchDP) ने गुम हुए मोबाइलों को ढूंढने के लिए एक विशेष अभियान चलाया था। इसमें मिडिल रेंज (Middle Range) और AEKC टीम ने तकनीकी सर्विलांस और आईएमईआई (IMEI) नंबरों की मदद से इन फोन को ट्रैक किया।

  • मध्य रेंज: इस टीम ने सबसे अधिक 65 मोबाइल बरामद किए।
  • AEKC टीम: इस विशेष टीम ने 10 मोबाइल ढूंढ निकालने में सफलता हासिल की।

मालिकों ने जताया दिल्ली पुलिस का आभार

क्राइम ब्रांच के कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जब मालिकों को उनके खोए हुए फोन वापस मिले, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। कई लोगों का कहना था कि उन्होंने फोन मिलने की उम्मीद छोड़ दी थी, क्योंकि उनमें उनका जरूरी डेटा और यादें सुरक्षित थीं। मालिकों ने दिल्ली पुलिस की मुस्तैदी और तकनीकी दक्षता की जमकर तारीफ की।

पुलिस की अपील: पोर्टल का करें इस्तेमाल

दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का मोबाइल चोरी या गुम हो जाता है, तो उसे तुरंत CEIR पोर्टल पर ब्लॉक करना चाहिए और पुलिस में शिकायत दर्ज करानी चाहिए। क्राइम ब्रांच की यह कार्रवाई दर्शाती है कि दिल्ली पुलिस न केवल बड़े अपराधों को सुलझाने में जुटी है, बल्कि आम नागरिकों की छोटी-छोटी परेशानियों को दूर करने के लिए भी प्रतिबद्ध है।

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दिलशाद गार्डन में ‘प्रशासनिक हत्या’: PWD नाले की सफाई के दौरान युवा कर्मचारी की मौत; मां का रो-रोकर बुरा हाल, AAP ने सरकार को घेरा

दिल्ली दर्पण ब्यूरो

नई दिल्ली: पूर्वी दिल्ली के दिलशाद गार्डन इलाके से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ PWD (लोक निर्माण विभाग) के एक गहरे नाले की सफाई के दौरान सुरक्षा उपकरणों के अभाव में एक युवा सफाईकर्मी की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर दिल्ली में ‘मैनुअल स्कैवेंजिंग’ (हाथ से सफाई) की पाबंदी और सुरक्षा मानकों के दावों की पोल खोल दी है। आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायकों ने इसे भाजपा प्रशासन की लापरवाही बताते हुए ‘हत्या’ करार दिया है।

बिना सेफ्टी गियर के नाले में उतारा: क्या यह हत्या है?

आम आदमी पार्टी के विधायक कुलदीप कुमार (@KuldeepKumarAAP) और वीर सिंह धींगान (@dhingan_e) ने आज पीड़ित परिवार से मुलाकात की और उनका दुख साझा किया। कुलदीप कुमार ने आरोप लगाया कि PWD के अधिकारियों और ठेकेदार ने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए युवा कर्मचारी को बिना किसी ऑक्सीजन मास्क या सुरक्षा सूट के नाले में उतार दिया। जहरीली गैस के कारण दम घुटने से युवक की मौत हो गई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मशीनों से सफाई का प्रावधान है, तो एक इंसान की जान जोखिम में क्यों डाली गई?

बूढ़ी मां का इकलौता सहारा छीना

घटनास्थल पर और पीड़ित के घर पर मातम पसरा हुआ है। मृतक अपनी बूढ़ी मां का इकलौता सहारा था। वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे बेबस मां अपने बेटे को याद कर बेसुध हो रही है। विधायक वीर सिंह धींगान ने कहा, “भाजपा की रेखा गुप्ता सरकार गरीबों और दलितों की जान की कोई कीमत नहीं समझती। एक गरीब परिवार का चिराग बुझ गया और प्रशासन अब भी चुप्पी साधे बैठा है।”

मुआवजे और FIR की मांग: AAP का अल्टीमेटम

‘आप’ नेताओं ने भाजपा सरकार और PWD विभाग से निम्नलिखित माँगें की हैं:

  • 1 करोड़ रुपये का मुआवजा: पीड़ित परिवार को तुरंत आर्थिक सहायता दी जाए।
  • दोषी अधिकारियों पर FIR: लापरवाही बरतने वाले PWD अधिकारियों और ठेकेदार पर हत्या का मुकदमा दर्ज हो।
  • नौकरी की गारंटी: परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।

भाजपा प्रशासन पर ‘दलित विरोधी’ होने का आरोप

कुलदीप कुमार ने कड़े शब्दों में कहा कि दिल्ली की भाजपा सरकार में सफाईकर्मियों की सुरक्षा पूरी तरह भगवान भरोसे है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही पीड़ित परिवार को इंसाफ नहीं मिला और दोषियों को जेल नहीं भेजा गया, तो ‘आप’ कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे।

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“चूहे खा गए 2332 किलो ड्रग्स?”: CAG रिपोर्ट पर प्रियंका कक्कड़ का भाजपा सरकार पर बड़ा हमला; पूछा— “ये चूहे हैं या सफेद हाथी?”

दिल्ली दर्पण ब्यूरो

नई दिल्ली: दिल्ली में भ्रष्टाचार और सरकारी लापरवाही को लेकर छिड़ी जंग में अब ‘CAG रिपोर्ट’ ने नया मोड़ ला दिया है। आम आदमी पार्टी (AAP) की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने एक विशेष प्रेस वार्ता कर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस के नियंत्रण वाली एजेंसियों पर तीखा प्रहार किया। कक्कड़ ने CAG (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सनसनीखेज दावा किया कि जब्त की गई भारी मात्रा में नशीली दवाओं (Drugs) के गायब होने के पीछे ‘चूहों’ का अजीबोगरीब बहाना बनाया जा रहा है।

2332 किलो ड्रग्स का रहस्य: कहाँ गई करोड़ों की खेप?

प्रियंका कक्कड़ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि CAG की ताज़ा रिपोर्ट में दिल्ली पुलिस और संबंधित एजेंसियों के मालखानों में रखी ड्रग्स के ऑडिट पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 2332 किलोग्राम नशीले पदार्थ रिकॉर्ड से गायब या कम पाए गए हैं। कक्कड़ ने तंज कसते हुए कहा, “जब एजेंसियों से इस भारी कमी के बारे में पूछा गया, तो जवाब मिला कि चूहे ड्रग्स खा गए। क्या ये चूहे हैं या भाजपा सरकार के पाले हुए सफेद हाथी, जो करोड़ों की ड्रग्स डकार गए?”

“भाजपा के राज में चूहे भी ‘नशेड़ी’ हो गए?”

प्रेस वार्ता के दौरान प्रियंका कक्कड़ ने भाजपा की रेखा गुप्ता सरकार और उपराज्यपाल (LG) पर सीधा निशाना साधा:

  • सुरक्षा पर सवाल: उन्होंने पूछा कि अगर मालखानों में इतनी असुरक्षा है कि चूहे 2332 किलो ड्रग्स खा सकते हैं, तो हथियारों और अन्य संवेदनशील सबूतों की क्या स्थिति होगी?
  • भ्रष्टाचार का आरोप: ‘आप’ ने आरोप लगाया कि “चूहों” का नाम लेकर वास्तव में इन ड्रग्स को दोबारा बाजार में तस्करों के जरिए बेचा गया है। यह एक बहुत बड़ा संगठित अपराध और भ्रष्टाचार है।
  • LG से जवाब माँगा: कक्कड़ ने कहा कि चूंकि दिल्ली पुलिस सीधे तौर पर एलजी और गृह मंत्रालय के अधीन है, इसलिए इसकी जवाबदेही भी उन्हीं की बनती है।

CAG रिपोर्ट में अन्य खुलासे

प्रियंका कक्कड़ ने आगे कहा कि यह पहली बार नहीं है जब ऐसा बहाना बनाया गया हो, लेकिन 2332 किलो की मात्रा अविश्वसनीय है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच होनी चाहिए और उन अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज होनी चाहिए जिनकी निगरानी में यह ‘चमत्कार’ हुआ है।

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